उत्तर प्रदेश के हरदोई में इस समय 'जेल बनाम जनहित' का एक तीखा सियासी मुकाबला छिड़ा हुआ है, जिसने लखनऊ तक राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस पूरे ड्रामे के केंद्र में सांसद जयप्रकाश रावत हैं, जिन्होंने कथित तौर पर अपना चुनावी वादा याद दिलाने पर अपनी ही जनता को हवालात का रास्ता दिखा दिया। वहीं, सांडी के भाजपा विधायक प्रभाष कुमार ने सांसद की इस तानाशाही के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकते हुए आंदोलनकारी को सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में ले जाकर गले लगा लिया। विधायक के इस 'जनहित' वाले कदम ने हरदोई की पूरी राजनीति को हिलाकर रख दिया है। इस सियासी खींचतान की शुरुआत तब हुई जब 'सांडी रेल लाओ संघर्ष समिति' के अध्यक्ष डॉ. पंकज त्रिवेदी ने कुछ दिनों पहले रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चौराहों और यहाँ तक कि सांसद जयप्रकाश रावत के आवास पर उनके चुनावी वादे की याद दिलाने वाले पोस्टर चस्पा कर दिए। बताया गया है कि सांसद जी को यह बात बेहद नागवार गुज़री और उन्होंने अपनी नाकामी छुपाने के बजाय पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल किया। डॉ. पंकज त्रिवेदी जब पोस्टर लगाकर अपने कस्बा सांडी लौट रहे थे, तभी कोतवाली शहर पुलिस ने उन्हें रास्ते से ही गिरफ्तार कर हवालात में डाल दिया। डॉ. पंकज को पूरी रात सलाखों के पीछे गुज़ारनी पड़ी। जब उनके बुजुर्ग पिता बेटे की रिहाई के लिए गुहार लगाने पहुँचे, तो सांसद ने कथित तौर पर रहम करने के बजाय उन्हें धमकाते हुए कहा कि वे उन पर 'पट्टे चलवाएंगे'। अगले दिन शाम को डॉ. पंकज से जबरन माफीनामा लिखवाकर पुलिस ने उन्हें छोड़ा, जिसके बाद सांसद खेमा यह मान रहा था कि उन्होंने जनता की आवाज़ को हमेशा के लिए दबा दिया है। हालांकि, सांसद खेमे के इस कथित जुल्म के खिलाफ सांडी के विधायक प्रभाष कुमार ढाल बनकर सामने आए। उन्होंने न केवल इस दमनकारी नीति का विरोध किया, बल्कि पीड़ित आंदोलनकारी डॉ. पंकज त्रिवेदी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर ले गए। जहाँ एक ओर सांसद ने डॉ. पंकज के बुजुर्ग पिता को धमकी दी थी, वहीं विधायक प्रभाष कुमार ने आंदोलनकारी को न सिर्फ सीने से लगाया, बल्कि सांडी के हक की लड़ाई को सीधे मुख्यमंत्री की मेज पर मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात ने हरदोई के सियासी दिग्गजों के होश उड़ा दिए हैं। डॉ. पंकज त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री के समक्ष सांडी रेल लाइन, रोडवेज बस अड्डा, महिला डिग्री कॉलेज और सांडी का नाम 'शांतनुपुरी' करने जैसी प्रमुख मांगें रखीं। इन मांगों पर मुख्यमंत्री ने DPR और फाइनल लोकेशन सर्वे का हवाला देते हुए गंभीर आश्वासन दिया है। अब हरदोई की जनता खुलेआम विधायक प्रभाष कुमार की तारीफ कर रही है, जिन्होंने अपनी ही पार्टी के सांसद की कथित तानाशाही के सामने झुकने के बजाय जनता के हक के लिए मुख्यमंत्री तक पहुँच बनाई। यह सियासी ड्रामा यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि जनता को नज़रअंदाज करने वाले नेताओं के दिन अब लद चुके हैं।
उत्तर प्रदेश के हरदोई में इस समय 'जेल बनाम जनहित' का एक तीखा सियासी मुकाबला छिड़ा हुआ है, जिसने लखनऊ तक राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस पूरे ड्रामे के केंद्र में सांसद जयप्रकाश रावत हैं, जिन्होंने कथित तौर पर अपना चुनावी वादा याद दिलाने पर अपनी ही जनता को हवालात का रास्ता दिखा दिया। वहीं, सांडी के भाजपा विधायक प्रभाष कुमार ने सांसद की इस तानाशाही के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकते हुए आंदोलनकारी को सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में ले जाकर गले लगा लिया। विधायक के इस 'जनहित' वाले कदम ने हरदोई की पूरी राजनीति को हिलाकर रख दिया है। इस सियासी खींचतान की शुरुआत तब हुई जब 'सांडी रेल लाओ संघर्ष समिति' के अध्यक्ष डॉ. पंकज त्रिवेदी ने कुछ दिनों पहले रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चौराहों और यहाँ तक कि सांसद जयप्रकाश रावत के आवास पर उनके चुनावी वादे की याद दिलाने वाले पोस्टर चस्पा कर दिए। बताया गया है कि सांसद जी को यह बात बेहद नागवार गुज़री और उन्होंने अपनी नाकामी छुपाने के बजाय पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल किया। डॉ. पंकज त्रिवेदी जब पोस्टर लगाकर अपने कस्बा सांडी लौट रहे थे, तभी कोतवाली शहर पुलिस ने उन्हें रास्ते से ही गिरफ्तार कर हवालात में डाल दिया। डॉ. पंकज को पूरी रात सलाखों के पीछे गुज़ारनी पड़ी। जब उनके बुजुर्ग पिता बेटे की रिहाई के लिए गुहार लगाने पहुँचे, तो सांसद ने कथित तौर पर रहम करने के बजाय उन्हें धमकाते हुए कहा कि वे उन पर 'पट्टे चलवाएंगे'। अगले दिन शाम को डॉ. पंकज से जबरन माफीनामा लिखवाकर पुलिस ने उन्हें छोड़ा, जिसके बाद सांसद खेमा यह मान रहा था कि उन्होंने जनता की आवाज़ को हमेशा के लिए दबा दिया है। हालांकि, सांसद खेमे के इस कथित जुल्म के खिलाफ सांडी के विधायक प्रभाष कुमार ढाल बनकर सामने आए। उन्होंने न केवल इस दमनकारी नीति का विरोध किया, बल्कि पीड़ित आंदोलनकारी डॉ. पंकज त्रिवेदी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर ले गए। जहाँ एक ओर सांसद ने डॉ. पंकज के बुजुर्ग पिता को धमकी दी थी, वहीं विधायक प्रभाष कुमार ने आंदोलनकारी को न सिर्फ सीने से लगाया, बल्कि सांडी के हक की लड़ाई को सीधे मुख्यमंत्री की मेज पर मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात ने हरदोई के सियासी दिग्गजों के होश उड़ा दिए हैं। डॉ. पंकज त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री के समक्ष सांडी रेल लाइन, रोडवेज बस अड्डा, महिला डिग्री कॉलेज और सांडी का नाम 'शांतनुपुरी' करने जैसी प्रमुख मांगें रखीं। इन मांगों पर मुख्यमंत्री ने DPR और फाइनल लोकेशन सर्वे का हवाला देते हुए गंभीर आश्वासन दिया है। अब हरदोई की जनता खुलेआम विधायक प्रभाष कुमार की तारीफ कर रही है, जिन्होंने अपनी ही पार्टी के सांसद की कथित तानाशाही के सामने झुकने के बजाय जनता के हक के लिए मुख्यमंत्री तक पहुँच बनाई। यह सियासी ड्रामा यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि जनता को नज़रअंदाज करने वाले नेताओं के दिन अब लद चुके हैं।
- थाना सहादतगंज की अम्बरगंज चौकी के अंतर्गत यासीनगंज क्षेत्र की एक महिला ने स्थानीय निवासी शहादत अली पर दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप लगाया है। यह शिकायतकर्ता सैलानी का दावा है कि आरोपी ने उसके साथ गलत व्यवहार किया और मारपीट भी की है। शिकायतकर्ता सैलानी के अनुसार, शहादत अली यासीनगंज क्षेत्र में सट्टा खिलाने का काम करता है। वह स्वयं को एक प्रभावशाली व्यक्ति बताता है और यह दावा करता है कि पुलिस उसका कुछ भी नहीं कर सकती। महिला का आरोप है कि शहादत अली खुलेआम दबंगई दिखाकर लोगों को डराने का प्रयास करता है, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना रहता है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, और इस मामले में पुलिस के साथ-साथ आरोपी पक्ष का बयान भी अभी सामने आना बाकी है। ऐसी स्थिति में, मामले की निष्पक्ष जांच कर इसकी सच्चाई को सामने लाना और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी व्यक्ति के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करना आवश्यक है।1
- स्वामी अधिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गऊ को आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बताया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गऊ को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की आवश्यकता है।1
- लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित राम सागर मिश्र अस्पताल में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सफाई कर्मियों ने सीएमएस डॉ. वी.के. शर्मा पर अभद्र व्यवहार का गंभीर आरोप लगाते हुए अपना कामकाज पूरी तरह ठप कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों के अनुसार, यह घटना फार्मासिस्ट के विदाई समारोह के बाद हुई, जब उन पर टेंट की कुर्सियां उठाने का दबाव डाला गया। जब कर्मचारियों ने इस बात का विरोध किया, तो सुपरवाइजर समेत कुल 21 कर्मचारियों को अपमानित किया गया और उन्हें अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया। इस घटना से आक्रोशित सफाई कर्मी इमरजेंसी वार्ड के बाहर धरने पर बैठ गए हैं, जिसके कारण अस्पताल में सभी सफाई कार्य रुक गए हैं। उनकी मुख्य मांग सम्मानजनक व्यवहार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई है। सफाई व्यवस्था बाधित होने से अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल बनने लगा है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित बी ब्लॉक चौराहे पर खुलेआम गांजे की बिक्री की जा रही है, जहां कथित तौर पर राशिद सिद्दीकी नामक युवक स्मैक और गांजा बिकवा रहा है। यह ताजा मामला थाना गाजीपुर क्षेत्र के बी ब्लॉक चौराहे पर साईं मंदिर के सामने बस स्टॉप का बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई बार वीडियो वायरल होने के बावजूद भी गाजीपुर पुलिस इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं करती है। जब ट्विटर हैंडल के माध्यम से इसकी शिकायत की जाती है, तो गाजीपुर पुलिस पुराने वीडियो का हवाला देकर मामले को रफा-दफा कर देती है। बताया जा रहा है कि मात्र सौ रुपये में गांजे की पुड़िया बेचकर युवा पीढ़ी को नशे की आगोश में धकेला जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि लखनऊ का इंदिरा नगर क्षेत्र नशे की गिरफ्त में बुरी तरह फंसता जा रहा है।1
- जनपद सीतापुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के मुख्य प्रवेश द्वार से अवैध कब्जों को बुलडोज़र चलाकर हटा दिया गया है। इस कार्रवाई से गेट के आसपास लगे खोखे, ठेले और पटरी दुकानें हटा दी गईं, जिससे लंबे समय से व्याप्त अव्यवस्था समाप्त हो सकी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सीएचसी गेट के सामने किए गए अतिक्रमण के कारण एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के आवागमन में लगातार बाधा आ रही थी, साथ ही मरीजों और तीमारदारों को भी अस्पताल पहुंचने में काफी परेशानी होती थी। इन शिकायतों के बाद तहसील प्रशासन और नगर पालिका की एक संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण किया था। अतिक्रमणकारियों को दो दिन पहले ही स्वयं कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बुलडोज़र की मदद से इन अवैध निर्माणों और अस्थायी दुकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान राजस्व विभाग, नगर पालिका और पुलिस बल की टीमें मौके पर मौजूद रहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक मार्गों, सरकारी भूमि और अस्पताल परिसरों के आसपास किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि रास्ता साफ होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी और एम्बुलेंस सेवाओं का संचालन अब अधिक सुगमता से हो पाएगा। प्रशासन ने आम जनता से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण न करने और सार्वजनिक सुविधाओं को बाधित न करने की अपील भी की है।1
- जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जनसत्तादल सुप्रीमो महाराजा कुंवर रघुराज प्रताप सिंह "राजा भइया" जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संबंध में एक बयान दिया है, जिसकी प्रकृति को लेकर कौतूहल व्यक्त किया गया है। उन्हें उनके समर्थकों द्वारा "पावर स्टार", "वनमैन आर्मी", "शानदार व्यक्तित्व के धनी", "जन-जन के नायक", "आदर्श राजनेता", "अजेय योद्धा", और "संघर्ष, सेवा तथा स्वाभिमान के प्रतीक" जैसे विशेषणों से संबोधित किया गया है। उन्हें "विश्वास का नाम" भी बताया गया है।1
- हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली में एक पैराग्लाइडिंग पायलट की सूझबूझ और साहस के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना तब हुई जब डोभी से उड़ान भरने के बाद अचानक मौसम में बदलाव आया और हवाओं का रुख काफी तेज हो गया। तेज हवाओं और बिगड़ते मौसम के बावजूद, पायलट ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए एक पर्यटक को सुरक्षित रूप से सड़क पर उतार दिया। पायलट की इस त्वरित और साहसी कार्रवाई से एक संभावित गंभीर दुर्घटना टल गई और पर्यटक सही सलामत रहा।1
- लखनऊ के विकासनगर थाना क्षेत्र स्थित टेढ़ी पुलिया पर पुलिस और एक वांछित बदमाश सनी यादव के बीच मुठभेड़ हुई। गिरफ्तारी के दौरान वांछित अभियुक्त सनी यादव ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी को घायल कर दिया, जिसके दाहिने पैर में गोली लगी। घायल अभियुक्त को पुलिस हिरासत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। पुलिस द्वारा इस मामले में साक्ष्य संकलन और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।1