आम आदमी पार्टी की पूर्व विपक्ष नेता पायल साकरिया ने सूरत महानगरपालिका के कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल मानसून के दौरान सूरत में जलभराव की स्थिति पैदा होती है, जिससे नागरिकों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण लोग अपने बच्चों और परिजनों को खो देते हैं, जबकि व्यापारियों का लाखों-करोड़ों रुपये का सामान खराब हो जाता है। साकरिया ने दावा किया कि मानसून से पहले किए जाने वाले प्री-मानसून कार्य केवल कागजों पर सिमट कर रह जाते हैं। उन्होंने पूछा कि जब हर साल समीक्षा बैठकें और डिजास्टर मैनेजमेंट की मीटिंग होती हैं, तो मेयर, कॉर्पोरेटर और अधिकारी आखिर क्या करते हैं? उन्होंने भाजपा विधायकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि वे प्रशासन से काम नहीं करवा सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भाजपा नेताओं पर समीक्षा बैठकों में केवल फोटो खिंचवाने और नाश्ता करने का आरोप लगाया। साकरिया ने हिंदुत्व और राजधर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की रक्षा करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज और प्री-मानसून कार्यों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये के हिसाब की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासकों में थोड़ी भी शर्म बाकी है, तो वे इन कार्यों के आंकड़े और ठेकेदारों को दी गई राशि सार्वजनिक करें। अंत में, उन्होंने सूरत की जनता से अपील की कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना उनका कर्तव्य है।
आम आदमी पार्टी की पूर्व विपक्ष नेता पायल साकरिया ने सूरत महानगरपालिका के कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल मानसून के दौरान सूरत में जलभराव की स्थिति पैदा होती है, जिससे नागरिकों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण लोग अपने बच्चों और परिजनों को खो देते हैं, जबकि व्यापारियों का लाखों-करोड़ों रुपये का सामान खराब हो जाता है। साकरिया ने दावा किया कि मानसून से पहले किए जाने वाले प्री-मानसून कार्य केवल कागजों पर सिमट कर रह जाते हैं। उन्होंने पूछा कि जब हर साल समीक्षा बैठकें और डिजास्टर मैनेजमेंट की मीटिंग होती हैं, तो मेयर, कॉर्पोरेटर और अधिकारी आखिर क्या करते हैं? उन्होंने भाजपा विधायकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि वे प्रशासन से काम नहीं करवा सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भाजपा नेताओं पर समीक्षा बैठकों में केवल फोटो खिंचवाने और नाश्ता करने का आरोप लगाया। साकरिया ने हिंदुत्व और राजधर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की रक्षा करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज और प्री-मानसून कार्यों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये के हिसाब की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासकों में थोड़ी भी शर्म बाकी है, तो वे इन कार्यों के आंकड़े और ठेकेदारों को दी गई राशि सार्वजनिक करें। अंत में, उन्होंने सूरत की जनता से अपील की कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना उनका कर्तव्य है।
- प्रयागराज के धूमनगंज थाने पर समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और थाना अध्यक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। पार्टी पदाधिकारियों ने सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई, जिस पर थाना परिसर में दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कराना कितना चुनौतीपूर्ण कार्य है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, जहाँ पुलिस की कार्यप्रणाली और सत्ता के प्रभाव पर सवाल उठाए जा रहे हैं।1
- प्रयागराज जिले के हंडिया स्थित बलीपुर चौराहा, बलीपुर तिराहा और यासीनपुर रोड पर जलभराव, कीचड़ और जल निगम के अधूरे निर्माण कार्यों के कारण स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो गया है। सड़कों पर बने गहरे गड्ढों और जलभराव के चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे स्कूली छात्र-छात्राओं, महिलाओं, बुजुर्गों और व्यापारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जल निगम ने पाइपलाइन लीकेज के नाम पर सड़क खोदी थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क को मानकों के अनुरूप ठीक नहीं किया गया, जिससे सड़क धंस गई है और दोपहिया वाहन चालक लगातार गिरकर घायल हो रहे हैं। वहीं, यासीनपुर रोड पर जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्व प्रधान पारस नाथ यादव, क्षेत्र पंचायत सदस्य अमर बहादुर पटेल और पंच 'ज' चैरिटेबल फाउंडेशन के निदेशक डॉ. सुभाष चन्द्र पासी ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिकारियों से संयुक्त निरीक्षण कर तत्काल मरम्मत और स्थायी जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। डॉ. विनोद भारतीय, राजेन्द्र प्रसाद और राम सिंह सहित बड़ी संख्या में उपस्थित क्षेत्रवासियों ने एक स्वर में प्रशासन से जनहित में त्वरित समाधान की गुहार लगाई है। जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।1
- डिजिटल रुपया (e₹) के माध्यम से नकदी अब सीधे मोबाइल फोन में उपलब्ध हो सकती है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई डिजिटल मुद्रा है, जो भुगतान की प्रक्रिया को स्मार्ट और सरल बनाती है। इस डिजिटल करेंसी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें सही छुट्टे पैसे (exact change) की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही, यह यूपीआई (UPI) समेत सभी प्रकार के क्यूआर (QR) कोड पर प्रभावी ढंग से काम करता है। आरबीआई इसे 'कैश, लेकिन डिजिटल' के रूप में परिभाषित करता है, जो सेंट्रल बैंक के भरोसे के साथ डिजिटल भुगतान का एक नया विकल्प प्रदान करता है।1
- प्रयागराज के मेजा स्थित ग्राम सभा चौकी में अवैध शराब की बिक्री का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर चिंता जताई है और इसे बच्चों के भविष्य के लिए हानिकारक बताया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सख्त कार्रवाई की मांग की गई है ताकि गांव में बिक रही अवैध शराब के कारोबार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सके।1
- प्रयागराज के उरुवा स्थित कंपोजिट विद्यालय गुरुदत्त का पूरा (सिगटी) में उस समय हड़कंप मच गया, जब विद्यालय परिसर में स्थित एक पुराने जर्जर पीपल के पेड़ की भारी डाल अचानक टूटकर नीचे गिर गई। यह घटना शुक्रवार की सुबह करीब 10:30 बजे हुई, जब मध्यावकाश के दौरान बच्चे खाना खाने के बाद हैंडवॉश कर रहे थे। जिस स्थान पर डाल गिरी, वहां कुछ देर पहले तक ही बच्चे मौजूद थे, लेकिन गनीमत रही कि सभी बच्चे सुरक्षित बच गए। इस हादसे में विद्यालय के कार्यालय कक्ष की छत, हैंडवॉश यूनिट, सबमर्सिबल पंप और विद्युत पोल से जुड़े केबल क्षतिग्रस्त हो गए। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कार्यालय में कोई भी शिक्षक या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इंचार्ज प्रधानाचार्य शिवचरन ने इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी उरुवा और वन रेंज मेजा को लिखित शिकायत भेजकर सूचना दी है। उन्होंने जर्जर पेड़ को तत्काल कटवाकर हटवाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी किसी दुर्घटना को रोका जा सके। वहीं, अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी विद्यालय परिसर में मौजूद खतरनाक पेड़ों की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग उठाई है।1
- प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र स्थित बुंदावा गांव में जमीन के सौदे को लेकर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। किशोर सोनी नामक पीड़ित ने आरोप लगाया है कि रामबहादुर पटेल ने एक ही जमीन को कई लोगों को बेचकर उनसे भारी रकम हड़प ली है। किशोर सोनी के अनुसार, उन्होंने रामबहादुर पटेल से जमीन का सौदा तय किया और बाकायदा रजिस्ट्री भी कराई, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनसे पहले भी कोई और व्यक्ति उसी जमीन को खरीद चुका है। पीड़ित का आरोप है कि पैसे हड़पने के बाद रामबहादुर पटेल अब रकम लौटाने में आनाकानी कर रहे हैं। इस मामले में किशोर सोनी ने घूरपुर थाना और गौहनिया चौकी में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन उनका कहना है कि पुलिस विभाग द्वारा आरोपी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे माफियाओं पर समय रहते पुलिस ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आरोपी इसी तरह और भी कई लोगों को अपनी धोखाधड़ी का शिकार बनाएगा। न्याय की आस में किशोर सोनी ने अब सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। पूरे परिवार के सामने आए इस आर्थिक संकट के चलते पीड़ित न्याय के लिए शासन से उम्मीद लगाए बैठा है।1
- आम आदमी पार्टी की पूर्व विपक्ष नेता पायल साकरिया ने सूरत महानगरपालिका के कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल मानसून के दौरान सूरत में जलभराव की स्थिति पैदा होती है, जिससे नागरिकों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण लोग अपने बच्चों और परिजनों को खो देते हैं, जबकि व्यापारियों का लाखों-करोड़ों रुपये का सामान खराब हो जाता है। साकरिया ने दावा किया कि मानसून से पहले किए जाने वाले प्री-मानसून कार्य केवल कागजों पर सिमट कर रह जाते हैं। उन्होंने पूछा कि जब हर साल समीक्षा बैठकें और डिजास्टर मैनेजमेंट की मीटिंग होती हैं, तो मेयर, कॉर्पोरेटर और अधिकारी आखिर क्या करते हैं? उन्होंने भाजपा विधायकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि वे प्रशासन से काम नहीं करवा सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भाजपा नेताओं पर समीक्षा बैठकों में केवल फोटो खिंचवाने और नाश्ता करने का आरोप लगाया। साकरिया ने हिंदुत्व और राजधर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की रक्षा करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज और प्री-मानसून कार्यों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये के हिसाब की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासकों में थोड़ी भी शर्म बाकी है, तो वे इन कार्यों के आंकड़े और ठेकेदारों को दी गई राशि सार्वजनिक करें। अंत में, उन्होंने सूरत की जनता से अपील की कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना उनका कर्तव्य है।1