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मुजफ्फरपुर के 'एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' रोकेंगे सुपरबग्स की दस्तक; आईसीएमआर की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला। -विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के विरुद्ध बड़ी पहल। (रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर 07 अप्रैल 2026-क्या हमारा गाँव दवाओं के खतरनाक जाल से मुक्त हो सकता है? क्या हम एक ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जहाँ जीवनरक्षक दवाएं शरीर पर बेअसर न हों? इसी क्रांतिकारी सोच के साथ मुजफ्फरपुर जिला अब 'एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' की परिकल्पना को धरातल पर उतारने जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में सिविल सर्जन और आईसीएमआर (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) के विशेषज्ञों ने यह संकल्प लिया कि दवाओं के दुरुपयोग को रोकने की शुरुआत अब सीधे ग्रामीण स्तर से होगी।कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. रविकांत की चेतावनी: सुपरबग्स का बढ़ता खतरा।इस अवसर पर एसकेएमसीएच स्थित कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. रविकांत ने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग न केवल सामान्य संक्रमणों को जटिल बना रहा है, बल्कि यह शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को भी नष्ट कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि कैंसर जैसे गंभीर रोगों के उपचार के दौरान यदि शरीर में 'सुपरबग्स' विकसित हो जाते हैं, तो मरीज की जान बचाना और भी कठिन हो जाता है। उनके अनुसार, आईसीएमआर 2024 की रिपोर्ट एक खतरे की घंटी है, जो बताती है कि भारत में 83% लोगों में मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंस विकसित हो चुका है।सिविल सर्जन का आह्वान:स्वस्थ जीवनशैली ही असली एंटीबायोटिक:कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने मुजफ्फरपुर की जनता से सीधा संवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि दवाओं पर निर्भरता कम करने का एकमात्र रास्ता शारीरिक व्यायाम और संतुलित जीवनशैली है। उन्होंने आह्वान किया कि "आज के दिन हमारा सबसे बड़ा संकल्प यही होना चाहिए कि हम खुद से दवा खरीदने (सेल्फ-मेडिकेशन) की आदत छोड़ें और केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही एंटीबायोटिक का सेवन करें।" उनके नेतृत्व में जिले के प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारियों जैसे डॉ. सोयू, डॉ. सी.के. दास (सीडीओ), डॉ. राजेश कुमार (डीवीडीसीओ), रेहान अशरफ (डीपीएम) और डीसीएम ने भी इस मुहिम में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।क्या है 'एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' मॉडल?' एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' पहल के तहत मुजफ्फरपुर के प्रत्येक प्रखंड में सघन अभियान चलाया जाएगा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने जानकारी दी कि अगले महीने से शुरू होने वाले इस अभियान में ग्रामीणों को दवाओं की सही खुराक और उनके हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। यह मॉडल विशेष रूप से जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (वॉश) पर केंद्रित होगा, ताकि संक्रमण की दर को बुनियादी स्तर पर ही कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गाँव जागरूक होंगे, तो पशुपालन और कृषि में होने वाला एंटीबायोटिक का दुरुपयोग भी थमेगा, जो अंततः हमारी थाली तक पहुँचने वाले 'सुपरबग्स' को रोकेगा।वैज्ञानिक सुरक्षा कवच: सदर अस्पताल में आईसीएमआर बायोकेमिस्ट्री लैब,इस पूरी मुहिम को वैज्ञानिक आधार देने के लिए सदर अस्पताल में आईसीएमआर के सहयोग से अत्याधुनिक बायोकेमिस्ट्री लैब का संचालन शुरू किया गया है। यह लैब बैक्टीरियल एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस की पहचान कर एक स्थानीय 'एंटीबायोग्राम' तैयार करेगी। जैसा कि डॉ. सी.के. दास (सीडीओ) ने रेखांकित किया, यह लैब मुजफ्फरपुर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी, जिससे डॉक्टरों को यह सटीक जानकारी मिलेगी कि किस मरीज को कौन सी दवा देनी है। यह पहल भारत सरकार के नैप-एएमआर 2.0 (2025-29) के 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ इंसान और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) क्या है?एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस तब होती है जब रोगाणु दवाओं को निष्क्रिय करने, बाहर निकालने या उनके लक्ष्य को बदलने जैसे तंत्र विकसित कर लेते हैं। यह स्थिति संक्रमणों को ठीक करने वाली दवाओं को अप्रभावी बना देती है, जिससे मृत्यु दर बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एएमआर से हर साल लाखों मौतें हो रही हैं।मानव शरीर में एएमआर क्यों बढ़ रहा है?मानव शरीर में एएमआर का मुख्य कारण एंटीबायोटिक्स का अनुचित और अत्यधिक उपयोग है, जो रोगाणुओं पर विकसित दबाव पैदा करता है।पहला मूल कारण स्व-दवा और बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की ओवर-द-काउंटर उपलब्धता है, जिससे अधूरी खुराक लेने से प्रतिरोधी बैक्टीरिया विकसित होते हैं।दूसरा, पशुओं और कृषि में विकास प्रमोटर के रूप में एंटीबायोटिक्स का उपयोग, जो मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली दवाओं को प्रतिबंधित करता है।तीसरा, फार्मास्यूटिकल उद्योग के अपशिष्ट और अपर्याप्त स्वच्छता से पर्यावरणीय प्रदूषण, जो प्रतिरोधी जीनों का प्रसार करता है।बचाव के उपाय:एएमआर से बचने के लिए संक्रमण रोकथाम प्राथमिक है, जैसे हाथ धोना, पर्यावरण सफाई और आइसोलेशन।एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप जरूरी है, जिसमें डॉक्टर केवल जरूरत पर दवाएं दें, पूरी कोर्स लें और कल्चर टेस्ट करवाएं।एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' जैसे कार्यक्रम जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) पर जोर दें, साथ ही वैक्सीनेशन और जागरूकता अभियान चलाएं।भारत में एएमआर की स्थिति:भारत में एएमआर चिंताजनक है; 2021 में 2.67 लाख मौतें एएमआर से हुईं, और 83% लोगों में प्रतिरोधी बैक्टीरिया पाए गए।बिहार में एएमआर की स्थिति:बिहार, भारत का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के बावजूद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, जहां एएमआर निगरानी कमजोर है।2022-24 में पांच तृतीयक अस्पतालों (जैसे एनएमसीएच पटना, जेएलएनएमसीएच भागलपुर) के 48,000+ सैंपल्स में ई.कोली में नाइट्रोफुरान्टोइन संवेदनशीलता 86.5% (पटना) से 44.7% (भागलपुर) तक घटी, जबकि कलेबसीएला में सेफालोस्पोरिन <2%। एमआरएसए दर 65% तक, राष्ट्रीय औसत 47.8% से अधिक है।बीटा-लैक्टम, कार्बापेनेम और फ्लोरोक्विनोलोन प्रतिरोध बढ़ा है। डिजिटल सिस्टम से टेस्टिंग चार गुना बढ़ी। एएमआर रोकने के लिए विवेकपूर्ण उपयोग, स्ट्यूअर्डशिप और राज्य-स्तरीय डैशबोर्ड जरूरी हैं। बिहार जैसे राज्यों में स्थानीय एंटीबायोग्राम से इलाज बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, सामूहिक प्रयास से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

1 day ago
user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
1 day ago

मुजफ्फरपुर के 'एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' रोकेंगे सुपरबग्स की दस्तक; आईसीएमआर की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला। -विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के विरुद्ध बड़ी पहल। (रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर 07 अप्रैल 2026-क्या हमारा गाँव दवाओं के खतरनाक जाल से मुक्त हो सकता है? क्या हम एक ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जहाँ जीवनरक्षक दवाएं शरीर पर बेअसर न हों? इसी क्रांतिकारी सोच के साथ मुजफ्फरपुर जिला अब 'एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' की परिकल्पना को धरातल पर उतारने जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में सिविल सर्जन और आईसीएमआर (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) के विशेषज्ञों ने यह संकल्प लिया कि दवाओं के दुरुपयोग को रोकने की शुरुआत अब सीधे ग्रामीण स्तर से होगी।कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. रविकांत की चेतावनी: सुपरबग्स का बढ़ता खतरा।इस अवसर पर एसकेएमसीएच स्थित कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. रविकांत ने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग न केवल सामान्य संक्रमणों को जटिल बना रहा है, बल्कि यह शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को भी नष्ट कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि कैंसर जैसे गंभीर रोगों के उपचार के दौरान यदि शरीर में 'सुपरबग्स' विकसित हो जाते हैं, तो मरीज की जान बचाना और भी कठिन हो जाता है। उनके अनुसार, आईसीएमआर 2024 की रिपोर्ट एक खतरे की घंटी है, जो बताती है कि भारत में 83% लोगों में मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंस विकसित हो चुका है।सिविल सर्जन का आह्वान:स्वस्थ जीवनशैली ही असली एंटीबायोटिक:कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने मुजफ्फरपुर की जनता से सीधा संवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि दवाओं पर निर्भरता कम करने का एकमात्र रास्ता शारीरिक व्यायाम और संतुलित जीवनशैली है। उन्होंने आह्वान किया कि "आज के दिन हमारा सबसे बड़ा संकल्प यही होना चाहिए कि हम खुद से दवा खरीदने (सेल्फ-मेडिकेशन) की आदत

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छोड़ें और केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही एंटीबायोटिक का सेवन करें।" उनके नेतृत्व में जिले के प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारियों जैसे डॉ. सोयू, डॉ. सी.के. दास (सीडीओ), डॉ. राजेश कुमार (डीवीडीसीओ), रेहान अशरफ (डीपीएम) और डीसीएम ने भी इस मुहिम में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।क्या है 'एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' मॉडल?' एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' पहल के तहत मुजफ्फरपुर के प्रत्येक प्रखंड में सघन अभियान चलाया जाएगा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने जानकारी दी कि अगले महीने से शुरू होने वाले इस अभियान में ग्रामीणों को दवाओं की सही खुराक और उनके हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। यह मॉडल विशेष रूप से जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (वॉश) पर केंद्रित होगा, ताकि संक्रमण की दर को बुनियादी स्तर पर ही कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गाँव जागरूक होंगे, तो पशुपालन और कृषि में होने वाला एंटीबायोटिक का दुरुपयोग भी थमेगा, जो अंततः हमारी थाली तक पहुँचने वाले 'सुपरबग्स' को रोकेगा।वैज्ञानिक सुरक्षा कवच: सदर अस्पताल में आईसीएमआर बायोकेमिस्ट्री लैब,इस पूरी मुहिम को वैज्ञानिक आधार देने के लिए सदर अस्पताल में आईसीएमआर के सहयोग से अत्याधुनिक बायोकेमिस्ट्री लैब का संचालन शुरू किया गया है। यह लैब बैक्टीरियल एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस की पहचान कर एक स्थानीय 'एंटीबायोग्राम' तैयार करेगी। जैसा कि डॉ. सी.के. दास (सीडीओ) ने रेखांकित किया, यह लैब मुजफ्फरपुर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी, जिससे डॉक्टरों को यह सटीक जानकारी मिलेगी कि किस मरीज को कौन सी दवा देनी है। यह पहल भारत सरकार के नैप-एएमआर 2.0 (2025-29) के 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ इंसान और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) क्या है?एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस तब होती है जब रोगाणु दवाओं को निष्क्रिय करने, बाहर निकालने या उनके लक्ष्य को बदलने जैसे तंत्र विकसित कर लेते हैं। यह स्थिति संक्रमणों को ठीक करने वाली दवाओं को अप्रभावी

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बना देती है, जिससे मृत्यु दर बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एएमआर से हर साल लाखों मौतें हो रही हैं।मानव शरीर में एएमआर क्यों बढ़ रहा है?मानव शरीर में एएमआर का मुख्य कारण एंटीबायोटिक्स का अनुचित और अत्यधिक उपयोग है, जो रोगाणुओं पर विकसित दबाव पैदा करता है।पहला मूल कारण स्व-दवा और बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की ओवर-द-काउंटर उपलब्धता है, जिससे अधूरी खुराक लेने से प्रतिरोधी बैक्टीरिया विकसित होते हैं।दूसरा, पशुओं और कृषि में विकास प्रमोटर के रूप में एंटीबायोटिक्स का उपयोग, जो मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली दवाओं को प्रतिबंधित करता है।तीसरा, फार्मास्यूटिकल उद्योग के अपशिष्ट और अपर्याप्त स्वच्छता से पर्यावरणीय प्रदूषण, जो प्रतिरोधी जीनों का प्रसार करता है।बचाव के उपाय:एएमआर से बचने के लिए संक्रमण रोकथाम प्राथमिक है, जैसे हाथ धोना, पर्यावरण सफाई और आइसोलेशन।एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप जरूरी है, जिसमें डॉक्टर केवल जरूरत पर दवाएं दें, पूरी कोर्स लें और कल्चर टेस्ट करवाएं।एंटीबायोटिक स्मार्ट विलेज' जैसे कार्यक्रम जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) पर जोर दें, साथ ही वैक्सीनेशन और जागरूकता अभियान चलाएं।भारत में एएमआर की स्थिति:भारत में एएमआर चिंताजनक है; 2021 में 2.67 लाख मौतें एएमआर से हुईं, और 83% लोगों में प्रतिरोधी बैक्टीरिया पाए गए।बिहार में एएमआर की स्थिति:बिहार, भारत का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के बावजूद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, जहां एएमआर निगरानी कमजोर है।2022-24 में पांच तृतीयक अस्पतालों (जैसे एनएमसीएच पटना, जेएलएनएमसीएच भागलपुर) के 48,000+ सैंपल्स में ई.कोली में नाइट्रोफुरान्टोइन संवेदनशीलता 86.5% (पटना) से 44.7% (भागलपुर) तक घटी, जबकि कलेबसीएला में सेफालोस्पोरिन <2%। एमआरएसए दर 65% तक, राष्ट्रीय औसत 47.8% से अधिक है।बीटा-लैक्टम, कार्बापेनेम और फ्लोरोक्विनोलोन प्रतिरोध बढ़ा है। डिजिटल सिस्टम से टेस्टिंग चार गुना बढ़ी। एएमआर रोकने के लिए विवेकपूर्ण उपयोग, स्ट्यूअर्डशिप और राज्य-स्तरीय डैशबोर्ड जरूरी हैं। बिहार जैसे राज्यों में स्थानीय एंटीबायोग्राम से इलाज बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, सामूहिक प्रयास से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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  • व्यवसाय गरीब के बच्चे ने बना अनुमंडल टॉपर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले केपकड़ी दयाल शहर में इस वीडियो में लास्ट तक देखें बच्चों ने क्या बोल डाला पकड़ी दयाल शिक्षक की असलियत कैसे पढ़ाया जाता है कैसे सेल्फ स्टडी कराया जाता है और कहां से अच्छा टॉपर ला सकता है इसके बारे में अच्छा से जानकारी बच्चों ने दिया है इस खबर को आप ज्यादा से ज्यादा देखें और शेयर करें
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    user_PUBLIC NEWS OF CHAMPARAN BIHAR
    PUBLIC NEWS OF CHAMPARAN BIHAR
    Reporter पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    17 hrs ago
  • Post by RAJA KUMAR
    1
    Post by RAJA KUMAR
    user_RAJA KUMAR
    RAJA KUMAR
    पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    6 hrs ago
  • as like picu, for children),nicu icu and matri shisu jana bhawan .all reality available.
    4
    as like  picu, for children),nicu icu and matri shisu jana bhawan .all reality   available.
    user_Chandan kumar
    Chandan kumar
    तरियानी चौक, शिवहर, बिहार•
    9 hrs ago
  • शराब कारोबार पर नकेल कसते हुए सुगौली पुलिस ने एक कारोबारों को 60 लीटर देशी चुलाई शराब के साथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है।
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    शराब कारोबार पर नकेल कसते हुए सुगौली पुलिस ने एक कारोबारों को 60 लीटर देशी चुलाई शराब के साथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    10 hrs ago
  • Post by Expose sitamarhi
    1
    Post by Expose sitamarhi
    user_Expose sitamarhi
    Expose sitamarhi
    Local News Reporter डुमरा, सीतामढ़ी, बिहार•
    3 hrs ago
  • yah video chalchitra doston aur rishtedaron Ke liye Hai
    1
    yah video chalchitra doston aur rishtedaron Ke liye Hai
    user_Bihari_vlogs_2.0
    Bihari_vlogs_2.0
    Dacia dealer कांति, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    10 hrs ago
  • Post by RAJA KUMAR
    1
    Post by RAJA KUMAR
    user_RAJA KUMAR
    RAJA KUMAR
    पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    16 hrs ago
  • हुए हेरोइन 108.64 ग्राम नेपाली रुपया 194000, भारतीय नोट 213000 के साथ दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है पुलिस ने दौरान 27 एंड्रॉयड फोन कीपैड फोन की भी बरामद की है.
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    हुए हेरोइन 108.64 ग्राम नेपाली रुपया 194000, भारतीय नोट 213000 के साथ दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है पुलिस ने दौरान 27 एंड्रॉयड फोन कीपैड फोन की भी बरामद की है.
    user_Expose sitamarhi
    Expose sitamarhi
    Local News Reporter डुमरा, सीतामढ़ी, बिहार•
    5 hrs ago
  • bahut dino se logo ko intjar tha ki bocha se chiraut rout kab complete hoga complete to ho chuka but pupari me ek brij ke wajah se problem ho rhi thi but ab wo bhi khatam hone ke kagar par hai aap video ke madhyam se dekh sakte hai kuchh dino me log uss brij ke raste sahar ko chhorte hua jaam se dur apne mukam ki or nikal payenge
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    bahut dino se logo ko intjar tha ki bocha se chiraut rout kab complete hoga complete to ho chuka but pupari me ek brij ke wajah se problem ho rhi thi but ab wo bhi khatam hone ke kagar par hai aap video ke madhyam se dekh sakte hai kuchh dino me log uss brij ke raste sahar ko chhorte hua jaam se dur apne mukam ki or nikal payenge
    user_अभिनेश कुमार
    अभिनेश कुमार
    Insurance Agent रुन्नीसैदपुर, सीतामढ़ी, बिहार•
    13 hrs ago
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