राज्यसभा सांसद Swati Maliwal ने एक बार फिर GB रोड और यहां कि महिलाओं के शोषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने दिल्ली महिला आयोग (DCW) के अपने 9 वर्षों के कार्यकाल का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने वहां कि भयावह परिस्थितियों से कई नाबालिग लड़कियों और मानव तस्करी की शिकार महिलाओं को बचाया. हालांकि ये पहला मामला नहीं है जब ये मुद्दा उठा है, इसमें शामिल महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है. कुछ मानवाधिकार संगठनों और रिपोर्टों के हिसाब से देश में कुल सेक्स वर्क में शामिल लोगों की संख्या तीन मिलियन तक हो सकती है, जिसमें सरकारी आंकड़ों में दर्ज न आने वाले लोग भी शामिल हैं. लेकिन सरकारी मैपिंग के मुताबिक लगभग 10 लाख से अधिक महिला सेक्स वर्कर्स हैं, हालांकि असंख्य लोग रिकॉर्ड में नहीं होते और असली संख्या कहीं अधिक हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेक्स वर्कर्स के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए और उन्हें मूल नागरिक अधिकार मिलने चाहिए, जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी, यह उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में मदद करेगा.
राज्यसभा सांसद Swati Maliwal ने एक बार फिर GB रोड और यहां कि महिलाओं के शोषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने दिल्ली महिला आयोग (DCW) के अपने 9 वर्षों के कार्यकाल का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने वहां कि भयावह परिस्थितियों से कई नाबालिग लड़कियों और मानव तस्करी की शिकार महिलाओं को बचाया. हालांकि ये पहला मामला नहीं है जब ये मुद्दा उठा है, इसमें शामिल महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है. कुछ मानवाधिकार संगठनों और रिपोर्टों के हिसाब से देश में कुल सेक्स वर्क में शामिल लोगों की संख्या तीन मिलियन तक हो सकती है, जिसमें सरकारी आंकड़ों में दर्ज न आने वाले लोग भी शामिल हैं. लेकिन सरकारी मैपिंग के मुताबिक लगभग 10 लाख से अधिक महिला सेक्स वर्कर्स हैं, हालांकि असंख्य लोग रिकॉर्ड में नहीं होते और असली संख्या कहीं अधिक हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेक्स वर्कर्स के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए और उन्हें मूल नागरिक अधिकार मिलने चाहिए, जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी, यह उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में मदद करेगा.
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- अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी डाला के सीएसआर के तहत कुपोषित और अति कुपोषित बच्चो को बुधवार दोपहर 12 बजे त्रैमासिक पोषण किट का वितरण किया गया। यह वितरण डाला सेक्टर सी क्षेत्र में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र पर उड़ान सेवा समिति के सहयोग से किया गया। पोषण किट में मुरमुरा,गुड़,भुना चना अन्य पोषक सामग्री शामिल थी।यह पोषण किट कुपोषित और अति कुपोषित बच्चो को दिया गया। इस मौके पर दर्जनों बच्चे उनकी मातायें, उड़ान सेवा समिति एनजीओ की मीनू चौबे और मुख्य सेविका नेहा भी मौजूद थीं।3
- राबर्ट्सगंज विधानसभा के ग्राम पंचायत नरोखर के ग्रामीणों ने अपना दल एस के अल्पसंख्यक मंच जिलाध्यक्ष आसिफ अहमद और युवा मंच अध्यक्ष राबर्ट्सगंज लवकुश सिंह पटेल को खराब रोड के बारे में अवगत कराया। 1, अइलकर माइनर से नरोखर नहर टेल तक संपर्क मार्ग 2, जुलरहमान के घर से विरधी संपर्क मार्ग वाया बढ़उली संपर्क मार्ग 3, अइलकर माइनर से नरोखर तालाब तक1
- सोनभद्र.... चोपनसोनभद्र संपत्ति विवाद में परिवार के बीच खूनी संघर्ष बीच बाजार लाठी-डंडे और पत्थर चले, वीडियो वायरल चोपन थाना क्षेत्र के हॉस्पिटल रोड की घटना पारिवारिक कलह ने लिया उग्र रूप पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी को लेकर विवाद परिवार के सदस्यों में जमकर लाठी-डंडे और पत्थर चले बीच बाजार मारपीट से मचा हड़कंप राहगीर बाल-बाल बचे, स्थानीय लोग सहमे घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करीब आधा दर्जन लोगों के घायल होने की सूचना कुछ घायल खुद पहुंचे सीएचसी चोपन, अन्य को पुलिस ने कराया भर्ती डॉक्टर के अनुसार कोई गंभीर रूप से घायल नहीं, प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति सामान्य सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस, मामले की जांच जारी4
- Post by पत्रकार अमान खान1
- सोनभद्र। जनपद में अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती के लिए जिलाधिकारी सोनभद्र द्वारा कड़े आदेश-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आरोप है कि दिनदहाड़े ही नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में भी बिना उचित प्रकाश व्यवस्था के बड़ी-बड़ी जेसीबी, पोकलेन और लिफ्टिंग मशीनों के सहारे नदी की मुख्य धारा को मोड़कर खुलेआम रेत खनन किया जा रहा है। मामला जुगैल थाना क्षेत्र के भगवा इलाके का बताया जा रहा है, जहां कथित रूप से रुद्रा माइनिंग द्वारा प्रतिबंधित मशीनों से रेत निकासी का खेल जारी है। सूत्रों का दावा है कि नदी की प्राकृतिक धारा को कृत्रिम रूप से बदलकर बड़े पैमाने पर बालू निकाली जा रही है, जिससे पर्यावरण और जलीय जीवों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। पर्यावरण पर गहराता खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि नदी की मुख्य धारा को मोड़ना और भारी मशीनों से खनन करना न केवल जलस्तर को प्रभावित करता है, बल्कि इससे नदी की पारिस्थितिकी तंत्र भी असंतुलित हो जाता है। जलीय जीवों के आवास नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है और आसपास के गांवों में कटान व बाढ़ की आशंका भी प्रबल हो सकती है। ‘सफेदपोश संरक्षण’ के आरोप स्थानीय सूत्रों का यह भी कहना है कि कथित रेत व्यवसायियों को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से कतरा रहे हैं। दिन-रात चल रही मशीनों की आवाज और ट्रकों की आवाजाही से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जिम्मेदार विभाग मौन खनन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर प्रतिबंधित मशीनों से खनन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है? यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?1
- जनपद सोनभद्र के विभिन्न कॉलेजों व स्कूलों में यूपी बोर्ड की परीक्षा आज से शुरू परीक्षा को नकल विहीन करने के लिए प्रशासन प्रयासरत1
- Post by @PappuKumar-ky6qb you tube my channel1