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फर्रुखाबाद अमृतपुर व्यूरो रिपोर्ट फर्रुखाबाद में अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर पलटवार किया ।
द कहर न्यूज़ एजेंसी
फर्रुखाबाद अमृतपुर व्यूरो रिपोर्ट फर्रुखाबाद में अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर पलटवार किया ।
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- फर्रुखाबाद–बदायूं मार्ग इन दिनों लगातार हो रहे सड़क हादसों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दुर्घटनाओं के पीछे केवल तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इस मार्ग पर पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई है। पहले की तुलना में अब इस सड़क पर यातायात कई गुना अधिक हो चुका है, जबकि सड़क की चौड़ाई आज भी पुरानी स्थिति में ही है। बताया गया कि सड़क संकरी होने के कारण जब दो बड़े वाहन एक-दूसरे को ओवरटेक करते हैं तो तीसरे वाहन के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती। सड़क किनारे बने फुटपाथ झाड़ियों, गड्ढों और अतिक्रमण में तब्दील हो चुके हैं, जिससे वाहन चालकों को मजबूरन सड़क के बीच से गुजरना पड़ता है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग के किनारे बने फुटपाथों के रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) की है, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का चौड़ीकरण और किनारों का समुचित निर्माण नहीं कराया गया तो हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। इसी क्रम में दिनांक 27 फरवरी 2026 को लगभग सुबह 11:30 बजे कस्बा अमृतपुर में बाबूजी फैमिली ढाबा के निकट दो बाइकों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के मुताबिक शिवा पुत्र गंगाबख्श उर्फ टीटू सोमवंशी निवासी ग्राम नगला हूसा, जनपद फर्रुखाबाद, अपने गांव से अमृतपुर की ओर जा रहे थे। उसी समय दूसरी ओर से आ रहे कमलेश सिंह पुत्र नेपाल सिंह (उम्र लगभग 35 वर्ष) निवासी ग्राम सेमर झाला मुंडेर, थाना पाली, जनपद हरदोई से उनकी बाइक की सीधी भिड़ंत हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। राहगीरों द्वारा एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी गई। गंभीर रूप से घायल शिवा को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजेपुर ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने पर उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति गंभीर बताते हुए आगे हायर सेंटर भेज दिया। वहीं कमलेश सिंह को अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ परिजनों के अनुसार कमलेश अपनी मामी के निधन पर अमृतपुर क्षेत्र के एक गांव आए हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मृतक की माता जमुना देवी और पत्नी प्रीति का रो-रोकर बुरा हाल है। कमलेश अपने पीछे तीन छोटे बच्चों—देव (13 वर्ष), हिमांशु (8 वर्ष) और साहिल (5 वर्ष)—को छोड़ गए हैं। चौड़ीकरण और सुरक्षा व्यवस्था की उठी मांग स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और राहगीरों का कहना है कि इस मार्ग पर बढ़ते यातायात को देखते हुए अब सड़क का चौड़ीकरण, समतलीकरण, मजबूत किनारे, साफ फुटपाथ और यातायात संकेतकों की तत्काल आवश्यकता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो इस मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाएं लगातार जानलेवा साबित होती रहेंगी।4
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- बहुजन समाज पार्टी नेता पातीराम बौद्ध से खास बातचीत रिपोर्ट – विशेष संवाददाता आज बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पातीराम बौद्ध जी से सामाजिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर एक विशेष चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृत्यु के बाद होने वाले मुंडन, तेहरवीं और मृत्यु भोज जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। ❓ मृत्यु के बाद परिवारजन मुंडन क्यों कराते हैं? इस सवाल पर पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि कई समाजों में मुंडन शोक और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परंपरा सामाजिक मान्यता पर आधारित है, धार्मिक अनिवार्यता नहीं है। उनका कहना था कि समय के साथ समाज को तर्क और समझ के आधार पर परंपराओं का मूल्यांकन करना चाहिए। ❓ तेहरवीं और मृत्यु भोज पर क्या बोले? पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि “जन्म पर खुशी का भोज होना चाहिए, लेकिन मृत्यु पर भोज देना उचित नहीं है। मृत्यु के समय परिवार पहले से ही दुख और आर्थिक दबाव में होता है, ऐसे में मृत्यु भोज जैसी परंपराएं उन पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरवीं जैसे कार्यक्रम सामाजिक दबाव के कारण किए जाते हैं, जबकि इनका मूल उद्देश्य आत्मचिंतन और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना होना चाहिए, न कि दिखावा या खर्च। ✅ जन्म भोज पर जोर उन्होंने कहा कि समाज को सकारात्मक परंपराओं को बढ़ावा देना चाहिए। “जन्म उत्सव है, इसलिए जन्म पर भोजन और खुशी मनाना उचित है, लेकिन मृत्यु के बाद सादगी और श्रद्धा रखनी चाहिए।” 🎤 सामाजिक सुधार की अपील अंत में पातीराम बौद्ध जी ने समाज से अपील की कि अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार की शुरुआत जागरूकता से होती है। 📌 निष्कर्ष: इस खास चर्चा में पातीराम बौद्ध जी ने मृत्यु भोज और तेहरवीं जैसी परंपराओं पर पुनर्विचार की जरूरत बताई और जन्मोत्सव को सकारात्मक रूप से मनाने पर बल दिया।1
- जलालाबाद के गांव गुनारा कि कोटेदार वाली गली में भरा कीचड़ युक्त पानी नमाज पढ़ने वालों को हो रही दिक्कत वीडियो से की शिकायत शाहजहांपुर जनपद के जलालाबाद ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुनारा के गांव में कई गलियों कई कई महीनों नहीं पहुंचता सफाई कर्मी गांव गुनारा निवासी आधा दर्जन लोगों ने बताया इस समय रमजान का समय चल रहा है हम लोगों को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में जाना पड़ता है और यह कोटेदार वाली गली में आधा फिट पानी भरा हुआ है1
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