बहुजन समाज पार्टी नेता पातीराम बौद्ध से खास बातचीत रिपोर्ट – विशेष संवाददाता आज बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पातीराम बौद्ध जी से सामाजिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर एक विशेष चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृत्यु के बाद होने वाले मुंडन, तेहरवीं और मृत्यु भोज जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। बहुजन समाज पार्टी नेता पातीराम बौद्ध से खास बातचीत रिपोर्ट – विशेष संवाददाता आज बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पातीराम बौद्ध जी से सामाजिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर एक विशेष चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृत्यु के बाद होने वाले मुंडन, तेहरवीं और मृत्यु भोज जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। ❓ मृत्यु के बाद परिवारजन मुंडन क्यों कराते हैं? इस सवाल पर पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि कई समाजों में मुंडन शोक और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परंपरा सामाजिक मान्यता पर आधारित है, धार्मिक अनिवार्यता नहीं है। उनका कहना था कि समय के साथ समाज को तर्क और समझ के आधार पर परंपराओं का मूल्यांकन करना चाहिए। ❓ तेहरवीं और मृत्यु भोज पर क्या बोले? पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि “जन्म पर खुशी का भोज होना चाहिए, लेकिन मृत्यु पर भोज देना उचित नहीं है। मृत्यु के समय परिवार पहले से ही दुख और आर्थिक दबाव में होता है, ऐसे में मृत्यु भोज जैसी परंपराएं उन पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरवीं जैसे कार्यक्रम सामाजिक दबाव के कारण किए जाते हैं, जबकि इनका मूल उद्देश्य आत्मचिंतन और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना होना चाहिए, न कि दिखावा या खर्च। ✅ जन्म भोज पर जोर उन्होंने कहा कि समाज को सकारात्मक परंपराओं को बढ़ावा देना चाहिए। “जन्म उत्सव है, इसलिए जन्म पर भोजन और खुशी मनाना उचित है, लेकिन मृत्यु के बाद सादगी और श्रद्धा रखनी चाहिए।” 🎤 सामाजिक सुधार की अपील अंत में पातीराम बौद्ध जी ने समाज से अपील की कि अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार की शुरुआत जागरूकता से होती है। 📌 निष्कर्ष: इस खास चर्चा में पातीराम बौद्ध जी ने मृत्यु भोज और तेहरवीं जैसी परंपराओं पर पुनर्विचार की जरूरत बताई और जन्मोत्सव को सकारात्मक रूप से मनाने पर बल दिया।
बहुजन समाज पार्टी नेता पातीराम बौद्ध से खास बातचीत रिपोर्ट – विशेष संवाददाता आज बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पातीराम बौद्ध जी से सामाजिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर एक विशेष चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृत्यु के बाद होने वाले मुंडन, तेहरवीं और मृत्यु भोज जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। बहुजन समाज पार्टी नेता पातीराम बौद्ध से खास बातचीत रिपोर्ट – विशेष संवाददाता आज बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पातीराम बौद्ध जी से सामाजिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर एक विशेष चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृत्यु के बाद होने वाले मुंडन, तेहरवीं और मृत्यु भोज जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। ❓ मृत्यु के बाद परिवारजन मुंडन क्यों कराते हैं? इस सवाल पर पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि कई समाजों में मुंडन शोक और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परंपरा सामाजिक मान्यता पर आधारित है, धार्मिक अनिवार्यता नहीं है। उनका कहना था कि समय के साथ समाज को तर्क और समझ के आधार पर परंपराओं का मूल्यांकन करना चाहिए। ❓ तेहरवीं और मृत्यु भोज पर क्या बोले? पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि “जन्म पर खुशी का भोज होना चाहिए, लेकिन मृत्यु पर भोज देना उचित नहीं है। मृत्यु के समय परिवार पहले से ही दुख और आर्थिक दबाव में होता है, ऐसे में मृत्यु भोज जैसी परंपराएं उन पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरवीं जैसे कार्यक्रम सामाजिक दबाव के कारण किए जाते हैं, जबकि इनका मूल उद्देश्य आत्मचिंतन और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना होना चाहिए, न कि दिखावा या खर्च। ✅ जन्म भोज पर जोर उन्होंने कहा कि समाज को सकारात्मक परंपराओं को बढ़ावा देना चाहिए। “जन्म उत्सव है, इसलिए जन्म पर भोजन और खुशी मनाना उचित है, लेकिन मृत्यु के बाद सादगी और श्रद्धा रखनी चाहिए।” 🎤 सामाजिक सुधार की अपील अंत में पातीराम बौद्ध जी ने समाज से अपील की कि अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार की शुरुआत जागरूकता से होती है। 📌 निष्कर्ष: इस खास चर्चा में पातीराम बौद्ध जी ने मृत्यु भोज और तेहरवीं जैसी परंपराओं पर पुनर्विचार की जरूरत बताई और जन्मोत्सव को सकारात्मक रूप से मनाने पर बल दिया।
- पंचायत सहायक की लापरवाही, पंचायत घर नहीं खुलने से ग्रामीण परेशान जलालाबाद। विकासखंड जलालाबाद की ग्राम पंचायत कुमारवा में पंचायत सहायक की लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत सहायक निधि पाल द्वारा नियमित रूप से पंचायत घर नहीं खोला जाता, जबकि शासन के निर्देशानुसार पंचायत सहायक को प्रतिदिन पंचायत घर खोलना अनिवार्य होता है। गांव के निवासी सुखबीर ने बताया कि पंचायत सहायक निधि पाल प्राइवेट नौकरी भी करती हैं, जिसके कारण पंचायत का कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि जब भी गांव के लोगों को किसी प्रमाण पत्र या अन्य पंचायत संबंधी कार्य की आवश्यकता होती है, तो पंचायत घर बंद मिलता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार पंचायत सहायक की अनुपस्थिति में उनके पिता द्वारा ही कागजों पर मोहर लगा दी जाती है, जो नियमों के विरुद्ध है। इससे गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कर पंचायत सहायक के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा पंचायत घर को नियमित रूप से खुलवाया जाए, ताकि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।1
- जलालाबाद के गांव गुनारा कि कोटेदार वाली गली में भरा कीचड़ युक्त पानी नमाज पढ़ने वालों को हो रही दिक्कत वीडियो से की शिकायत शाहजहांपुर जनपद के जलालाबाद ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुनारा के गांव में कई गलियों कई कई महीनों नहीं पहुंचता सफाई कर्मी गांव गुनारा निवासी आधा दर्जन लोगों ने बताया इस समय रमजान का समय चल रहा है हम लोगों को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में जाना पड़ता है और यह कोटेदार वाली गली में आधा फिट पानी भरा हुआ है1
- शाहजहांपुर, जनपद के तहसील जलालाबाद में विधिक माप विज्ञान विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने ओवररेटिंग करने वाली दुकानों पर सख्ती दिखाई। सीनियर इंस्पेक्टर अरविंद मिश्रा, इंस्पेक्टर आलोक कुमार शर्मा और तहसीलदार अनुराग दुबे की टीम ने दो दुकानों पर छापेमारी कर चालान काट दिए। इस कार्रवाई से इलाके के दुकानदारों में अफरा-तफरी मच गई और कई दुकानें अचानक बंद हो गईं।टीम ने सबसे पहले गुणारा मोड़ स्थित प्रमोद किराना स्टोर पर दबिश दी। वहां कांटे का सत्यापन लाइसेंस न मिलने पर दुकानदार का चालान कर दिया गया1
- Uttar Pradesh Hardoi Shahabad ग्राम पीड़मा फतेहपुर भट्ट पर से रोड बरपुर के बीच में इस नाली की रोड की कोई करवाई है कि नहीं1
- जनपद हरदोई से संवाददाता आलोक सिंह की खास रिपोर्ट शाहाबाद कोतवाली गेट पर दर्जनों की संख्या में पहुंचे कोटेदार मुकदमा लिखवाने की कर रहे है मांग किसान नेता ने कोटेदार को धमकाया और की थी मारपीट मारपीट का वीडियो हुआ था सोशल मीडिया पर वायरल कोटेदार सीमा के साथ दो दिन पूर्व हुई थी घटना1
- कस्बा अमृतपुर निवासी कुसुमलता (पत्नी अखिलेश दर्जी) की सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उपचार के दौरान शुक्रवार को मौत हो गई। घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और तीन छोटे बच्चे माता-पिता दोनों के साये से वंचित हो गए हैं। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पूर्व परमापुर के निकट सड़क हादसे में कुसुमलता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। बताया गया कि समझौते के आधार पर उनका फर्रुखाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। शुक्रवार को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना पर थाना अमृतपुर मे तैनात दरोगा राघवेंद्र भदौरिया द्वारा आवश्यक पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने बताया कि करीब आठ वर्ष पूर्व कुसुमलता के पति अखिलेश की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी थी। पति की मौत के बाद कुसुमलता ही बच्चों का सहारा थीं, लेकिन अब उनकी भी असमय मृत्यु से परिवार पूरी तरह टूट गया है। कुसुमलता के चार बच्चे हैं। लगभग डेढ़ वर्ष पहले उन्होंने अपनी बड़ी बेटी दिव्यांशी की शादी हजियापुर में कर दी थी, जबकि घर पर अब हिमांशी (लगभग 15 वर्ष), शिवांगी (लगभग 17 वर्ष) और बेटा अर्चित (लगभग 12 वर्ष) रह गए हैं। माता-पिता दोनों के निधन से तीनों बच्चों के सामने पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। मोहल्ले में घटना के बाद शोक का माहौल है। बच्चे अपनी मां के शव के घर पहुंचने का इंतजार करते रहे और पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधाती रहीं। स्थानीय महिला प्रवेश कुमारी ने बताया कि 21 फरवरी को वह कुसुमलता के साथ पैदल सड़क पार कर रही थीं, तभी पीछे से आए एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी, जिससे कुसुमलता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। इस दर्दनाक हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बिखेर दिया है और क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।3
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- बहुजन समाज पार्टी नेता पातीराम बौद्ध से खास बातचीत रिपोर्ट – विशेष संवाददाता आज बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पातीराम बौद्ध जी से सामाजिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर एक विशेष चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृत्यु के बाद होने वाले मुंडन, तेहरवीं और मृत्यु भोज जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए। ❓ मृत्यु के बाद परिवारजन मुंडन क्यों कराते हैं? इस सवाल पर पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि कई समाजों में मुंडन शोक और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परंपरा सामाजिक मान्यता पर आधारित है, धार्मिक अनिवार्यता नहीं है। उनका कहना था कि समय के साथ समाज को तर्क और समझ के आधार पर परंपराओं का मूल्यांकन करना चाहिए। ❓ तेहरवीं और मृत्यु भोज पर क्या बोले? पातीराम बौद्ध जी ने कहा कि “जन्म पर खुशी का भोज होना चाहिए, लेकिन मृत्यु पर भोज देना उचित नहीं है। मृत्यु के समय परिवार पहले से ही दुख और आर्थिक दबाव में होता है, ऐसे में मृत्यु भोज जैसी परंपराएं उन पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरवीं जैसे कार्यक्रम सामाजिक दबाव के कारण किए जाते हैं, जबकि इनका मूल उद्देश्य आत्मचिंतन और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना होना चाहिए, न कि दिखावा या खर्च। ✅ जन्म भोज पर जोर उन्होंने कहा कि समाज को सकारात्मक परंपराओं को बढ़ावा देना चाहिए। “जन्म उत्सव है, इसलिए जन्म पर भोजन और खुशी मनाना उचित है, लेकिन मृत्यु के बाद सादगी और श्रद्धा रखनी चाहिए।” 🎤 सामाजिक सुधार की अपील अंत में पातीराम बौद्ध जी ने समाज से अपील की कि अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार की शुरुआत जागरूकता से होती है। 📌 निष्कर्ष: इस खास चर्चा में पातीराम बौद्ध जी ने मृत्यु भोज और तेहरवीं जैसी परंपराओं पर पुनर्विचार की जरूरत बताई और जन्मोत्सव को सकारात्मक रूप से मनाने पर बल दिया।1