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Crime Bihar 22 News
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- Post by Crime Bihar 22 News1
- पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने किया गुमानी हॉस्पिटल का उद्घाटन साहिबगंज। बरहरवा प्रखंड के श्रीकुंड बाजार स्थित गुमानी हॉस्पिटल का उद्घाटन शनिवार देर शाम को सूबे के पूर्व मंत्री एवं पाकुड़ के पूर्व विधायक आलमगीर आलम ने फीता काटकर किया। इस मौके पर अस्पताल प्रबंधन एवं स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, गुमानी हॉस्पिटल में क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सेवा, मरीजों के भर्ती की सुविधा, महिला रोग एवं प्रसूति उपचार, 24 घंटे नॉर्मल एवं सीजेरियन डिलीवरी, जनरल सर्जरी, बाल रोग विशेषज्ञ की सुविधा, आईसीयू एवं एनआईसीयू जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा अस्पताल में यूएसजी, एक्स रे, ईसीजी, पैथोलॉजी लैब, मेडिकल स्टोर, डेंटल ओपीडी, ईटीई ओपीडी, ओटी एवं माइनर ओटी की सुविधा भी दी गई है। अस्पताल की ओर से 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध होने की भी जानकारी दी गई है। उद्घाटन के दौरान पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने अस्पताल प्रबंधन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गुमानी हॉस्पिटल आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित होगा। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि गुमानी हॉस्पिटल में जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।1
- कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge ji जब मैं पहली बार MLA बना था, तब अमित शाह बच्चे थे और आज हमें देशभक्ति सिखा रहे हैं। BJP और इनके पुरखों ने कभी आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी, इसलिए ये लोग कांग्रेस के लोगों को देशभक्ति न सिखाएं। असल में- 'Anti-India' और 'Anti-religion' तो BJP है, क्योंकि जब मैंने उत्तराखंड में भाषण दिया तो BJP के लोगों ने भाषण मंच का शुद्धिकरण कर दिया। क्या BJP को उनके गुरुओं ने यही सिखाया है?1
- #बिहार में प्रेमी प्रेमिका मिल रहे थे चोरी चुपके रात के अंधेरे में उसी दरमियान ग्रामीणों ने दबोचा और फिर क्या हुआ #viral #post1
- पुलिस में उठाया नेता का गमछा फिर उसमें मांगने लगे चंदा मुआवजे की मांग पर हंगामा पुलिस ने गमछा में ही मांगना शुरू किया चंदा प्रतापगढ़ में एक व्यक्ति की मौत के बाद सहायता राशि की मांग को लेकर लोग सड़क पर जुट गए इस दौरान सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर वीरेंद्र विश्वकर्मा और पुलिस के बीच लोग भी इसी बीच इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार सिंह ने वीरेंद्र विश्वकर्मा का गमछा उठाकर उसे फैलाया और उसमें पैसे मांगने लगे घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए1
- बरनडी नदी में दर्दनाक हादसा: स्नान करने गए पांच बच्चे डूबे, तीन की मौत बरनडी नदी में दर्दनाक हादसा: स्नान करने गए पांच बच्चे डूबे, तीन की मौत फलका थाना क्षेत्र में सुबह-सुबह हुआ दर्दनाक हादसा, तीन मासूमों की मौत से मोरसंडा गांव में पसरा मातम; ग्रामीणों ने नदी में बैरिकेडिंग और पुल निर्माण की उठाई मांग कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र के मोरसंडा पंचायत अंतर्गत मोरसंडा गांव के समीप सोमवार की सुबह बरनडी नदी में एक दर्दनाक हादसा हो गया। करीब छह बजे नदी में स्नान करने गए पांच बच्चे अचानक गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय गोताखोरों की मदद से पांचों बच्चों को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी थी। हादसे की खबर फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मोरसंडा गांव मातम में डूब गया। मृतकों की पहचान सत्यम कुमार (11 वर्ष), पिता चिरंजीव कुमार साह, दिव्यांशु कुमार (10 वर्ष), पिता विजय कुमार तथा अमन कुमार (11 वर्ष), पिता मनोज साह के रूप में हुई है। बताया गया कि सत्यम दो भाइयों में छोटा था। अपने मासूम बेटे की मौत की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर तरफ करुण क्रंदन का माहौल बना हुआ है। वहीं नदी में डूबने के बाद सुजीत कुमार (14 वर्ष), पिता मनोज साह और आशीष कुमार (16 वर्ष), पिता अमरेश साह को स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दोनों बच्चों के सुरक्षित बचने से जहां लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं तीन बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे बरनडी नदी में स्नान करने के बाद नदी के समीप स्थित शिव मंदिर में जल चढ़ाकर पूजा करने जाने वाले थे। इसी दौरान यह दर्दनाक हादसा हो गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंदिर में पूजा करने की तैयारी कर रहे बच्चों के परिवारों को कुछ ही देर में ऐसी हृदयविदारक खबर सुननी पड़ेगी। घटना की सूचना मिलते ही फलका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे ने खड़े किए कई सवाल बरनडी नदी में आए दिन लोगों के स्नान और अन्य कार्यों के लिए पहुंचने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के खतरनाक और गहरे हिस्सों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि क्षेत्र में आवागमन और सुरक्षा की दृष्टि से बरनडी नदी पर पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से नदी पर पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। तीन मासूमों की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाओं के बाद सिर्फ संवेदना जताई जाती रहेगी और नदी की सुरक्षा व्यवस्था कब मजबूत होगी? मोरसंडा गांव में हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक आधारभूत संरचना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन हादसे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नदी में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने मासूम बच्चों को इस तरह न खोना पड़े।3
- लखीसराय हादसे में 7 मौतों पर मंत्री विजय सिन्हा का बड़ा बयान, बोले—जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई!1
- बरनडी नदी में दर्दनाक हादसा: स्नान करने गए पांच बच्चे डूबे, तीन की मौत फलका थाना क्षेत्र में सुबह-सुबह हुआ दर्दनाक हादसा, तीन मासूमों की मौत से मोरसंडा गांव में पसरा मातम; ग्रामीणों ने नदी में बैरिकेडिंग और पुल निर्माण की उठाई मांग कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र के मोरसंडा पंचायत अंतर्गत मोरसंडा गांव के समीप सोमवार की सुबह बरनडी नदी में एक दर्दनाक हादसा हो गया। करीब छह बजे नदी में स्नान करने गए पांच बच्चे अचानक गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय गोताखोरों की मदद से पांचों बच्चों को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी थी। हादसे की खबर फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मोरसंडा गांव मातम में डूब गया। मृतकों की पहचान सत्यम कुमार (11 वर्ष), पिता चिरंजीव कुमार साह, दिव्यांशु कुमार (10 वर्ष), पिता विजय कुमार तथा अमन कुमार (11 वर्ष), पिता मनोज साह के रूप में हुई है। बताया गया कि सत्यम दो भाइयों में छोटा था। अपने मासूम बेटे की मौत की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर तरफ करुण क्रंदन का माहौल बना हुआ है। वहीं नदी में डूबने के बाद सुजीत कुमार (14 वर्ष), पिता मनोज साह और आशीष कुमार (16 वर्ष), पिता अमरेश साह को स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दोनों बच्चों के सुरक्षित बचने से जहां लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं तीन बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे बरनडी नदी में स्नान करने के बाद नदी के समीप स्थित शिव मंदिर में जल चढ़ाकर पूजा करने जाने वाले थे। इसी दौरान यह दर्दनाक हादसा हो गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंदिर में पूजा करने की तैयारी कर रहे बच्चों के परिवारों को कुछ ही देर में ऐसी हृदयविदारक खबर सुननी पड़ेगी। घटना की सूचना मिलते ही फलका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे ने खड़े किए कई सवाल बरनडी नदी में आए दिन लोगों के स्नान और अन्य कार्यों के लिए पहुंचने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के खतरनाक और गहरे हिस्सों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि क्षेत्र में आवागमन और सुरक्षा की दृष्टि से बरनडी नदी पर पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से नदी पर पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। तीन मासूमों की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाओं के बाद सिर्फ संवेदना जताई जाती रहेगी और नदी की सुरक्षा व्यवस्था कब मजबूत होगी? मोरसंडा गांव में हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक आधारभूत संरचना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन हादसे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नदी में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने मासूम बच्चों को इस तरह न खोना पड़े।1