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आगरा के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय वीर जैन ने समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला मुकदमा लड़कर न्याय दिलाया आगरा संवाददाता बहादुर सिंह ✍️ आगरा के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय वीर जैन ने -समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला मुकदमा लड़कर न्याय दिलाया भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 19 दोषियों को उम्रकैद *--प्रख्यात अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन ने की सक्रिय पैराकारी* अपराध करने वाले योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम देकर बच जाने समाज को घोर निराशा होती है,लेकिन कुछ मामलों में निचली अदालतों के फैसले बदलते है और दोषियों को अंतत:अपने कृत्य की सजा भुगतनी पड़ती है।समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला एक ऐसा ही अपने समय का चर्चित वाद भग्गू कुचबंदिया उर्फ भागचंद पहलवान हत्याकांड का है,जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए निचली अदालत के द्वारा दिये गये फैसले को बरकरार रखा। 11 जुलाई 2003 को घटी हत्या की घटना में अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।मार्च 2026 अदालत ने 24 आरोपियों में जीवित बचे 19 दोषियों को सजा सुनायी। भागचंद पहलवान, अपने समय के विख्यात थे,उनकी उपलब्धियों के लिये म प्र शासन ने 'मध्य प्रदेश केसरी' का खिताब विभूषित किया था। यह हत्या उस समय हुई थी जबकि पहलवान नर्मदा नदी में स्नान करके लौट रहे थे।वाद की पैरवी प्रख्यात अजय वीर सिंह एडवोकेट ने की है। मूल रूप से आगरा निवासी श्री सिंह कहा कि निश्चित रूप से यह मामला कई पेचीदगियों से भरा हुआ था साथ ही बीस साल से अधिक पुरानी घटना का है।उन्होंने कहा कि सवाल भागचंद पहलवान की हत्या करने वालों को सजा दिलवाने भर का नहीं न्याय व्यवस्था के प्रति समाज का विश्वास और मजबूत करने का है। उल्लेखनीय है कि म प्र के बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सभी 19 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा बरकरार रखी । इस मामले में पीड़ित भागचंद के भाई सीताराम कुचबेदिया द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की प्रधान पीठ के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। वादकारी पक्ष के अधिवक्ता अजय वीर सिंह ने बताया कि जुलाई 2003 में भगचंद पहलवान की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 148, 149, 323, 325 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने सभी 19 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से पलटते हुए आरोपियों की सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह अपील सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पुनः बहाल कर दिया और सभी 19 आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने सभी दोषियों को 8 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश भी दिया है। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। अजय वीर सिंह आगरा के मूल निवासी हैं तथा में सैंट पीटर्स कॉलेज और सेंट जॉन्स कॉलेज से पढ़ाई कर चुके है । अजय वीर सिंह जैन अधिवक्ता- सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया

2 hrs ago
user_Bahadur Singh
Bahadur Singh
Farmer आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

आगरा के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय वीर जैन ने समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला मुकदमा लड़कर न्याय दिलाया आगरा संवाददाता बहादुर सिंह ✍️ आगरा के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय वीर जैन ने -समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला मुकदमा लड़कर न्याय दिलाया भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 19 दोषियों को उम्रकैद *--प्रख्यात अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन ने की सक्रिय पैराकारी* अपराध करने वाले योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम देकर बच जाने समाज को घोर निराशा होती है,लेकिन कुछ मामलों में निचली अदालतों के फैसले बदलते है और दोषियों को अंतत:अपने कृत्य की सजा भुगतनी पड़ती है।समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला एक ऐसा ही अपने समय का चर्चित वाद भग्गू कुचबंदिया उर्फ भागचंद पहलवान हत्याकांड का है,जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए निचली अदालत के द्वारा दिये गये फैसले को बरकरार रखा। 11 जुलाई 2003 को घटी हत्या की घटना में अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।मार्च 2026 अदालत ने 24 आरोपियों में जीवित बचे 19 दोषियों को सजा सुनायी। भागचंद पहलवान, अपने समय के विख्यात थे,उनकी उपलब्धियों के लिये म प्र शासन ने 'मध्य प्रदेश केसरी' का खिताब विभूषित किया था। यह हत्या उस समय हुई थी जबकि पहलवान नर्मदा नदी में स्नान करके लौट रहे थे।वाद की पैरवी प्रख्यात अजय वीर सिंह एडवोकेट ने की है। मूल रूप से आगरा निवासी श्री सिंह कहा कि निश्चित रूप से यह मामला कई पेचीदगियों से भरा हुआ था साथ ही बीस साल से अधिक पुरानी घटना का है।उन्होंने कहा कि सवाल भागचंद पहलवान की हत्या करने वालों को सजा दिलवाने भर का नहीं न्याय व्यवस्था के प्रति समाज का विश्वास और मजबूत करने का है। उल्लेखनीय है कि म प्र के बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सभी 19 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा बरकरार रखी । इस मामले में पीड़ित भागचंद के भाई सीताराम कुचबेदिया द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की प्रधान पीठ के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। वादकारी पक्ष के अधिवक्ता अजय वीर सिंह ने बताया कि जुलाई 2003 में भगचंद पहलवान की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 148, 149, 323, 325 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने सभी 19 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से पलटते हुए आरोपियों की सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह अपील सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पुनः बहाल कर दिया और सभी 19 आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने सभी दोषियों को 8 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश भी दिया है। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। अजय वीर सिंह आगरा के मूल निवासी हैं तथा में सैंट पीटर्स कॉलेज और सेंट जॉन्स कॉलेज से पढ़ाई कर चुके है । अजय वीर सिंह जैन अधिवक्ता- सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया

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  • Agra: गैस लेने आए या हमला करने? एजेंसी में मची अफरा-तफरी #AgraNews #GasAgencyChaos #BreakingNews #UPNews #CrimeNews
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    Agra: गैस लेने आए या हमला करने? एजेंसी में मची अफरा-तफरी
#AgraNews
#GasAgencyChaos
#BreakingNews
#UPNews
#CrimeNews
    user_Kantap tv
    Kantap tv
    Content Creator (YouTuber) आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    21 min ago
  • आगरा में राज्यसभा सांसद Naveen Jain के सामने बीजेपी महानगर मंत्री Anil Saraswat का दंडवत प्रणाम करना अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में महानगर मंत्री बने अनिल सारस्वत, सांसद नवीन जैन के पैरों में झुकते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह संगठन की परंपरा का हिस्सा है या फिर दिखावे की राजनीति? फिलहाल इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और लोग इस पर अपनी-अपनी राय रख रहे।
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    आगरा में राज्यसभा सांसद Naveen Jain के सामने बीजेपी महानगर मंत्री Anil Saraswat का दंडवत प्रणाम करना अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में महानगर मंत्री बने अनिल सारस्वत, सांसद नवीन जैन के पैरों में झुकते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह संगठन की परंपरा का हिस्सा है या फिर दिखावे की राजनीति?
फिलहाल इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और लोग इस पर अपनी-अपनी राय रख रहे।
    user_Braj kishor Sharma Reporter
    Braj kishor Sharma Reporter
    Content Creator (YouTuber) आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    31 min ago
  • Post by Mukesh Sharma
    1
    Post by Mukesh Sharma
    user_Mukesh Sharma
    Mukesh Sharma
    Voice of people आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    53 min ago
  • Post by Hari Singh Goutam
    1
    Post by Hari Singh Goutam
    user_Hari Singh Goutam
    Hari Singh Goutam
    Teacher आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • हमको थाना से इंसाफ चाहिए जगन्नाथ को हमारे घर पर भेजने की कृपया दिखाइए कोई कार्रवाई अभी तक थाने वाले नहीं किए हैं
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    हमको थाना से इंसाफ चाहिए जगन्नाथ को हमारे घर पर भेजने की कृपया दिखाइए कोई कार्रवाई अभी तक थाने वाले नहीं किए हैं
    user_शिव शंकर
    शिव शंकर
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • आगरा संवाददाता बहादुर सिंह ✍️ आगरा के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय वीर जैन ने -समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला मुकदमा लड़कर न्याय दिलाया भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 19 दोषियों को उम्रकैद *--प्रख्यात अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन ने की सक्रिय पैराकारी* अपराध करने वाले योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम देकर बच जाने समाज को घोर निराशा होती है,लेकिन कुछ मामलों में निचली अदालतों के फैसले बदलते है और दोषियों को अंतत:अपने कृत्य की सजा भुगतनी पड़ती है।समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला एक ऐसा ही अपने समय का चर्चित वाद भग्गू कुचबंदिया उर्फ भागचंद पहलवान हत्याकांड का है,जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए निचली अदालत के द्वारा दिये गये फैसले को बरकरार रखा। 11 जुलाई 2003 को घटी हत्या की घटना में अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।मार्च 2026 अदालत ने 24 आरोपियों में जीवित बचे 19 दोषियों को सजा सुनायी। भागचंद पहलवान, अपने समय के विख्यात थे,उनकी उपलब्धियों के लिये म प्र शासन ने 'मध्य प्रदेश केसरी' का खिताब विभूषित किया था। यह हत्या उस समय हुई थी जबकि पहलवान नर्मदा नदी में स्नान करके लौट रहे थे।वाद की पैरवी प्रख्यात अजय वीर सिंह एडवोकेट ने की है। मूल रूप से आगरा निवासी श्री सिंह कहा कि निश्चित रूप से यह मामला कई पेचीदगियों से भरा हुआ था साथ ही बीस साल से अधिक पुरानी घटना का है।उन्होंने कहा कि सवाल भागचंद पहलवान की हत्या करने वालों को सजा दिलवाने भर का नहीं न्याय व्यवस्था के प्रति समाज का विश्वास और मजबूत करने का है। उल्लेखनीय है कि म प्र के बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सभी 19 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा बरकरार रखी । इस मामले में पीड़ित भागचंद के भाई सीताराम कुचबेदिया द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की प्रधान पीठ के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। वादकारी पक्ष के अधिवक्ता अजय वीर सिंह ने बताया कि जुलाई 2003 में भगचंद पहलवान की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 148, 149, 323, 325 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने सभी 19 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से पलटते हुए आरोपियों की सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह अपील सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पुनः बहाल कर दिया और सभी 19 आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने सभी दोषियों को 8 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश भी दिया है। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। अजय वीर सिंह आगरा के मूल निवासी हैं तथा में सैंट पीटर्स कॉलेज और सेंट जॉन्स कॉलेज से पढ़ाई कर चुके है । अजय वीर सिंह जैन अधिवक्ता- सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया
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    आगरा संवाददाता बहादुर सिंह ✍️
आगरा के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अजय वीर जैन ने -समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला मुकदमा लड़कर न्याय दिलाया
भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 19 दोषियों को उम्रकैद *--प्रख्यात अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन  ने  की सक्रिय पैराकारी* अपराध करने वाले योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम देकर बच जाने समाज को घोर निराशा होती है,लेकिन कुछ मामलों में निचली अदालतों के फैसले बदलते है और दोषियों को अंतत:अपने कृत्य की सजा भुगतनी पड़ती है।समाज का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने वाला एक ऐसा ही अपने समय का चर्चित वाद भग्गू कुचबंदिया उर्फ भागचंद पहलवान हत्याकांड का है,जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए निचली अदालत के द्वारा दिये गये फैसले को बरकरार रखा। 11 जुलाई 2003 को घटी हत्या की घटना में अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।मार्च 2026 अदालत ने 24 आरोपियों में जीवित बचे 19 दोषियों को सजा सुनायी।
भागचंद पहलवान, अपने समय के विख्यात थे,उनकी उपलब्धियों के लिये म प्र शासन ने 'मध्य प्रदेश केसरी' का खिताब विभूषित किया था। यह हत्या उस समय हुई थी जबकि पहलवान नर्मदा नदी में स्नान करके लौट रहे थे।वाद की पैरवी प्रख्यात अजय वीर सिंह एडवोकेट ने की है। 
मूल रूप से आगरा निवासी श्री सिंह कहा कि निश्चित रूप से यह मामला कई पेचीदगियों से भरा हुआ था साथ ही बीस साल से अधिक पुरानी घटना का है।उन्होंने कहा कि सवाल भागचंद पहलवान की हत्या करने वालों को सजा दिलवाने भर का नहीं न्याय व्यवस्था के प्रति समाज का विश्वास और मजबूत करने का है। 
उल्लेखनीय है कि म प्र के बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सभी 19 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा बरकरार रखी । इस मामले में पीड़ित भागचंद के भाई सीताराम कुचबेदिया द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की प्रधान पीठ के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी।
वादकारी पक्ष के अधिवक्ता अजय वीर सिंह ने बताया कि जुलाई 2003 में भगचंद पहलवान की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 148, 149, 323, 325 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने सभी 19 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से पलटते हुए आरोपियों की सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह अपील सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पुनः बहाल कर दिया और सभी 19 आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने सभी दोषियों को 8 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश भी दिया है। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। अजय वीर सिंह आगरा के मूल निवासी हैं तथा में सैंट पीटर्स कॉलेज और सेंट जॉन्स कॉलेज से पढ़ाई कर चुके है ।
अजय वीर सिंह जैन 
अधिवक्ता- सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया
    user_Bahadur Singh
    Bahadur Singh
    Farmer आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • पत्रकार ब्यूरो चीफ प्रैस रिपोर्टर राजीव सिकरवार वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल आगरा उत्तर प्रदेश अखबार समृद्ध भारत हिंदी दैनिक समाचार पत्र जबलपुर मध्य प्रदेश भारतसूत्र लाइव टीवी न्यूज चैनल आगरा उत्तर प्रदेश 🌹 🙏 🇮🇳 🚩🚩 दैनिक उजाला आज तक हिंदी पेपर आगरा उत्तर प्रदेश 🌹 🙏 🇮🇳 ✍️ 🚩 जिला झांसी से न्यूज ् प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही सतर्क हुए बालू माफिया, खिरिया घाट पर छापा बेअसर ् मोंठ (झांसी) ् तहसील क्षेत्र में अवैध बालू खनन का कारोबार लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नदी घाटों से बालू चोरी का सिलसिला बे-रोकटोक जारी है, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ ही पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। बुधवार रात करीब 9 बजे मोंठ के एसडीएम अवनीश तिवारी ने टीम के साथ खिरिया घाट पर छापेमार कार्रवाई की। प्रशासन को सूचना मिली थी कि घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। हालांकि, एसडीएम के मौके पर पहुंचने से पहले ही बालू माफिया सतर्क हो गए और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित फरार हो गए। छापे के दौरान घाट पर कोई वाहन नहीं मिला, जिससे यह साफ हुआ कि कार्रवाई की भनक पहले ही बालू चोरों तक पहुंच चुकी थी। इस घटना से प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर सूचना लीक कैसे हो रही है। एसडीएम अवनीश तिवारी ने बताया कि अवैध खनन की सूचना पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन पहले से जानकारी मिल जाने के कारण आरोपी भागने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बालू माफिया सक्रिय हैं और रात के समय धड़ल्ले से खनन किया जाता है। लोगों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाया जा सके।
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    पत्रकार ब्यूरो चीफ प्रैस रिपोर्टर राजीव सिकरवार वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल आगरा उत्तर प्रदेश अखबार समृद्ध भारत हिंदी दैनिक समाचार पत्र जबलपुर मध्य प्रदेश भारतसूत्र लाइव टीवी न्यूज चैनल आगरा उत्तर प्रदेश 🌹 🙏 🇮🇳 🚩🚩 दैनिक उजाला आज तक हिंदी पेपर आगरा उत्तर प्रदेश 🌹 🙏 🇮🇳 ✍️ 🚩 
जिला झांसी से न्यूज ्
प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही सतर्क हुए बालू माफिया, खिरिया घाट पर छापा बेअसर ्
मोंठ (झांसी) ्
तहसील क्षेत्र में अवैध बालू खनन का कारोबार लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नदी घाटों से बालू चोरी का सिलसिला बे-रोकटोक जारी है, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ ही पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
बुधवार रात करीब 9 बजे मोंठ के एसडीएम अवनीश तिवारी ने टीम के साथ खिरिया घाट पर छापेमार कार्रवाई की। प्रशासन को सूचना मिली थी कि घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। हालांकि, एसडीएम के मौके पर पहुंचने से पहले ही बालू माफिया सतर्क हो गए और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित फरार हो गए।
छापे के दौरान घाट पर कोई वाहन नहीं मिला, जिससे यह साफ हुआ कि कार्रवाई की भनक पहले ही बालू चोरों तक पहुंच चुकी थी। इस घटना से प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर सूचना लीक कैसे हो रही है।
एसडीएम अवनीश तिवारी ने बताया कि अवैध खनन की सूचना पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन पहले से जानकारी मिल जाने के कारण आरोपी भागने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बालू माफिया सक्रिय हैं और रात के समय धड़ल्ले से खनन किया जाता है। लोगों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाया जा सके।
    user_राजीव सिकरवार, पत्रकार (ब्यूरो चीफ) डिस्ट्रिक्ट हैंड प्रैस रिपोर्टर आगरा ( उ.प्र)
    राजीव सिकरवार, पत्रकार (ब्यूरो चीफ) डिस्ट्रिक्ट हैंड प्रैस रिपोर्टर आगरा ( उ.प्र)
    Chef आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Agra: आलू ने रुलाया! किसान बोले—अब कैसे चलेगा घर? #AgraNews #PotatoCrisis #FarmersCrisis #UPNews #Agriculture
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    Agra: आलू ने रुलाया! किसान बोले—अब कैसे चलेगा घर?
#AgraNews
#PotatoCrisis
#FarmersCrisis
#UPNews
#Agriculture
    user_Kantap tv
    Kantap tv
    Content Creator (YouTuber) आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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