विरेन्द्र मिश्रा प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी भोजपुर जिला कांग्रेस कमिटी शहीद भवन आरा मोदी और BJP की चारों तरफ से लंका लगी है। कुछ भी करो, अब गलत ही होता दिख रहा है। भारतीय राजनीति हर दिन, हर घंटे बदलती रहती है। लेकिन इन दिनों भारतीय जनता पार्टी का हाल देखकर ऐसा लगता है, जैसे उन्होंने कसम खा ली हो कि जितना संभव हो, उतना खुद को ही राजनीतिक नुकसान पहुँचाना है। एक के बाद एक ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जो न सिर्फ राजनीतिक रूप से, बल्कि सामाजिक रूप से भी उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। कैसे? इन तथ्यों को समझिए। पहला झटका — सवर्ण वोट यह माना जाता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी सवर्णों और व्यापारियों के बीच मजबूत आधार रखती है। यही उसका एक महत्वपूर्ण समर्थन आधार रहा है। लेकिन UGC के एक नए नियम को लेकर जिस तरह नाराजगी सामने आई, उसने इसी आधार पर सवाल खड़े कर दिए। उस नियम के विरोध में उठी आवाजों की गूंज अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। “आरक्षण हटाओ आंदोलन” भी उसी नाराजगी की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में BJP सरकारों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए और बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप से उन पर रोक लगी। इस पूरे घटनाक्रम में जिन सामाजिक समूहों को BJP के साथ माना जाता था, उनके बीच भी असंतोष दिखाई दिया। OBC का एक वर्ग भी इससे प्रभावित हुआ और मूल समर्थक वर्ग में भी नाराजगी की चर्चा शुरू हुई। दूसरा झटका — युवा और नए वोटर युवा वोटर के बीच मुद्दे और रोजगार, शिक्षा तथा भविष्य जैसे सवाल महत्वपूर्ण होते हैं। इसके बाद छात्र आंदोलन ने भी सरकार के सामने चुनौती खड़ी की। एक नई पीढ़ी, जो राजनीति में सक्रिय होने वाली थी और नए मतदाता के रूप में सामने आ रही थी, उसके बीच भी सवाल उठे। आंदोलनकारी छात्रों के साथ पुलिस की कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर जिस तरह बहस हुई, उससे युवाओं के एक हिस्से में नाराजगी देखने को मिली। बाद में मांगों पर सहमति बनी, लेकिन तब तक विवाद काफी आगे बढ़ चुका था। पढ़ाई और शिक्षा का मुद्दा ही वह मुद्दा है, जो अलग-अलग वर्गों को एक साथ ला सकता है। तीसरा झटका — व्यापारी वर्ग GST को लेकर पहले भी व्यापारियों के बीच कई तरह की नाराजगी और समस्याएं सामने आती रही हैं। अब UPI और उससे जुड़े नए बदलावों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यानी एक तरफ सवर्ण वर्ग में नाराजगी की चर्चा, दूसरी तरफ युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे और अब व्यापारी वर्ग से जुड़े सवाल। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से गंभीर चुनौती बन सकती है। क्या यह राजनीतिक आत्मघाती रणनीति है या बदलते समय के साथ नीतिगत फैसलों का असर—इस पर बहस हो सकती है। आने वाले चुनावों में इसका क्या असर होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
विरेन्द्र मिश्रा प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी भोजपुर जिला कांग्रेस कमिटी शहीद भवन आरा मोदी और BJP की चारों तरफ से लंका लगी है। कुछ भी करो, अब गलत ही होता दिख रहा है। भारतीय राजनीति हर दिन, हर घंटे बदलती रहती है। लेकिन इन दिनों भारतीय जनता पार्टी का हाल देखकर ऐसा लगता है, जैसे उन्होंने कसम खा ली हो कि जितना संभव हो, उतना खुद को ही राजनीतिक नुकसान पहुँचाना है। एक के बाद एक ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जो न सिर्फ राजनीतिक रूप से, बल्कि सामाजिक रूप से भी उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। कैसे? इन तथ्यों को समझिए। पहला झटका — सवर्ण वोट यह माना जाता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी सवर्णों और व्यापारियों के बीच मजबूत आधार रखती है। यही उसका एक महत्वपूर्ण समर्थन आधार रहा है। लेकिन UGC के एक नए नियम को लेकर जिस तरह नाराजगी सामने आई, उसने इसी आधार पर सवाल खड़े कर दिए। उस नियम के विरोध में उठी आवाजों की गूंज अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। “आरक्षण हटाओ आंदोलन” भी उसी नाराजगी की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में BJP सरकारों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए और बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप से उन पर रोक लगी। इस पूरे घटनाक्रम में जिन सामाजिक समूहों को BJP के साथ माना जाता था, उनके बीच भी असंतोष दिखाई दिया। OBC का एक वर्ग भी इससे प्रभावित हुआ और मूल समर्थक वर्ग में भी नाराजगी की चर्चा शुरू हुई। दूसरा झटका — युवा और नए वोटर युवा वोटर के बीच मुद्दे और रोजगार, शिक्षा तथा भविष्य जैसे सवाल महत्वपूर्ण होते हैं। इसके बाद छात्र आंदोलन ने भी सरकार के सामने चुनौती खड़ी की। एक नई पीढ़ी, जो राजनीति में सक्रिय होने वाली थी और नए मतदाता के रूप में सामने आ रही थी, उसके बीच भी सवाल उठे। आंदोलनकारी छात्रों के साथ पुलिस की कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर जिस तरह बहस हुई, उससे युवाओं के एक हिस्से में नाराजगी देखने को मिली। बाद में मांगों पर सहमति बनी, लेकिन तब तक विवाद काफी आगे बढ़ चुका था। पढ़ाई और शिक्षा का मुद्दा ही वह मुद्दा है, जो अलग-अलग वर्गों को एक साथ ला सकता है। तीसरा झटका — व्यापारी वर्ग GST को लेकर पहले भी व्यापारियों के बीच कई तरह की नाराजगी और समस्याएं सामने आती रही हैं। अब UPI और उससे जुड़े नए बदलावों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यानी एक तरफ सवर्ण वर्ग में नाराजगी की चर्चा, दूसरी तरफ युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे और अब व्यापारी वर्ग से जुड़े सवाल। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से गंभीर चुनौती बन सकती है। क्या यह राजनीतिक आत्मघाती रणनीति है या बदलते समय के साथ नीतिगत फैसलों का असर—इस पर बहस हो सकती है। आने वाले चुनावों में इसका क्या असर होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
- UPI रोल बैक मोदी जी नहीं तो आम जनता आपको रोल बैक करने में जायदा समय नहीं लोगा। जय राहुल गांधी1
- 🙏 गाजे-बाजे और जयघोष के बीच बप्पा को विदाई 📍 आरा | 16 सितंबर आरा के रमना मैदान से गणपति विसर्जन यात्रा निकली, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कोईलवर के सोन नदी पहुंची। डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा शहर “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष से गूंज उठा। शिवसेना (यूबीटी) भोजपुर इकाई द्वारा आयोजित 25वें गणेश महोत्सव के समापन पर शिवसैनिकों और श्रद्धालुओं ने नम आंखों से बप्पा को विदाई दी। प्रदेश प्रभारी विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि 25 वर्षों की यह परंपरा आस्था और प्रेम का प्रतीक है। 🙏 गणपति बप्पा मोरया! #गणपति_बप्पा_मोरया #गणपति_विसर्जन #आरा #भोजपुर #गणेश_महोत्सव1
- विरेन्द्र मिश्रा प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी भोजपुर जिला कांग्रेस कमिटी शहीद भवन आरा मोदी और BJP की चारों तरफ से लंका लगी है। कुछ भी करो, अब गलत ही होता दिख रहा है। भारतीय राजनीति हर दिन, हर घंटे बदलती रहती है। लेकिन इन दिनों भारतीय जनता पार्टी का हाल देखकर ऐसा लगता है, जैसे उन्होंने कसम खा ली हो कि जितना संभव हो, उतना खुद को ही राजनीतिक नुकसान पहुँचाना है। एक के बाद एक ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जो न सिर्फ राजनीतिक रूप से, बल्कि सामाजिक रूप से भी उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। कैसे? इन तथ्यों को समझिए। पहला झटका — सवर्ण वोट यह माना जाता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी सवर्णों और व्यापारियों के बीच मजबूत आधार रखती है। यही उसका एक महत्वपूर्ण समर्थन आधार रहा है। लेकिन UGC के एक नए नियम को लेकर जिस तरह नाराजगी सामने आई, उसने इसी आधार पर सवाल खड़े कर दिए। उस नियम के विरोध में उठी आवाजों की गूंज अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। “आरक्षण हटाओ आंदोलन” भी उसी नाराजगी की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में BJP सरकारों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए और बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप से उन पर रोक लगी। इस पूरे घटनाक्रम में जिन सामाजिक समूहों को BJP के साथ माना जाता था, उनके बीच भी असंतोष दिखाई दिया। OBC का एक वर्ग भी इससे प्रभावित हुआ और मूल समर्थक वर्ग में भी नाराजगी की चर्चा शुरू हुई। दूसरा झटका — युवा और नए वोटर युवा वोटर के बीच मुद्दे और रोजगार, शिक्षा तथा भविष्य जैसे सवाल महत्वपूर्ण होते हैं। इसके बाद छात्र आंदोलन ने भी सरकार के सामने चुनौती खड़ी की। एक नई पीढ़ी, जो राजनीति में सक्रिय होने वाली थी और नए मतदाता के रूप में सामने आ रही थी, उसके बीच भी सवाल उठे। आंदोलनकारी छात्रों के साथ पुलिस की कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर जिस तरह बहस हुई, उससे युवाओं के एक हिस्से में नाराजगी देखने को मिली। बाद में मांगों पर सहमति बनी, लेकिन तब तक विवाद काफी आगे बढ़ चुका था। पढ़ाई और शिक्षा का मुद्दा ही वह मुद्दा है, जो अलग-अलग वर्गों को एक साथ ला सकता है। तीसरा झटका — व्यापारी वर्ग GST को लेकर पहले भी व्यापारियों के बीच कई तरह की नाराजगी और समस्याएं सामने आती रही हैं। अब UPI और उससे जुड़े नए बदलावों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यानी एक तरफ सवर्ण वर्ग में नाराजगी की चर्चा, दूसरी तरफ युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे और अब व्यापारी वर्ग से जुड़े सवाल। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से गंभीर चुनौती बन सकती है। क्या यह राजनीतिक आत्मघाती रणनीति है या बदलते समय के साथ नीतिगत फैसलों का असर—इस पर बहस हो सकती है। आने वाले चुनावों में इसका क्या असर होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।1
- अगर, यह सब भी देख कर आप दीया जला रहे हैं, तो अपनी इंसानियत का बत्ती बना कर जला दीजिएगा। अगर, यह सब भी देख कर आप दीया जला रहे हैं, तो अपनी इंसानियत का बत्ती बना कर जला दीजिएगा।1
- 🚨 आरा में बजाज पल्सर के तीन नए मॉडल लॉन्च, नई टेक्नोलॉजी और दमदार फीचर्स से लैस बाइक ने खींचा ध्यान 🏍️🔥 आरा। मां मालती बजाज, चंदवा मोड़ आरा के शोरूम में बजाज पल्सर के तीन नए मॉडलों की लॉन्चिंग की गई। इस मौके पर पटना से पहुंचे कंपनी के ASM सुमित कुमार मौजूद रहे और उन्होंने नए मॉडलों की खासियतों और आधुनिक तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शोरूम के MD संजीव गुप्ता ने बताया कि पल्सर के नए मॉडल नए रंग-रूप, आधुनिक टेक्नोलॉजी, माइलेज, आराम और मजबूत निर्माण के साथ नई पीढ़ी के ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। नए मॉडल के प्रमुख फीचर्स में 160cc इंजन, 18.5 PS पावर, 114.5 km/h तक की टॉप स्पीड, Intelligent Throttle, 4 Ride Modes, Traction Control, Crawl Tech, 37mm USD फोर्क और 5-इंच TFT स्क्रीन जैसे फीचर्स शामिल हैं। कंपनी के अनुसार 0-60 km/h की रफ्तार करीब 4.5 सेकंड में हासिल करने का दावा किया गया है। लॉन्चिंग के दौरान संकेत गुप्ता और संदीप गुप्ता सहित गणमान्य अतिथि और ग्राहक मौजूद रहे। कार्यक्रम में नई पल्सर के फीचर्स और तकनीक को लेकर लोगों के बीच खासा उत्साह देखने को मिला। 🏍️ नई पल्सर—Fast & Intelligent! 📍 मां मालती बजाज, चंदवा मोड़, आरा आपको नई बजाज पल्सर का कौन-सा फीचर सबसे ज्यादा पसंद आया? कमेंट में जरूर बताएं। 👇 #BajajPulsar #Pulsar #Pulsar160 #Bajaj #Ara #AraNews #BhojpurNews #BikeLovers #Bikelovers #BikeLaunch #NewPulsar #ARNEWS241
- पल्सर बजाज के तीन मॉडल का हुआ लॉन्चिंग, बिक्री शुरू, विश्वकर्मा पूजा पर छूट आरा से संजय श्रीवास्तव पल्सर बजाज के तीन मॉडल का हुआ लॉन्चिंग एम डी संजीव गुप्ता मां मालती बजाज चंदवा मोड आरा के शोरूम में नई बजाज पल्सर बाइक के तीन मॉडलों का लांचिंग किया गया। इस अवसर पर पटना से पधारे कंपनी के एएस एम सुमित कुमार उपस्थित रहे है। इन्होंने नए मॉडल के महत्वपूर्ण खूबियों को विस्तार से रखा । एम डी संजीव गुप्ता ने बताया कि पल्सर में तीन मॉडल नए रंग रूप टेक्नोलॉजी माइलेज और नई जेनरेशन के लिए काफी महत्वपूर्ण भरोसेमंद और मजबूत गाड़ी है जो चलने में बेहद आराम देह और अन्य अनेक सुविधाओं से लैस है। इस अवसर पर संकेत गुप्ता तथा संदीप गुप्ता उपस्थित रहे और गणमान्य अतिथियों एवं ग्राहकों गाड़ियों की गाड़ी में नए सुविधाओं की चर्चा करते दिखे।1
- आगामी 23 सितंबर को वीर कुंवर सिंह किला परिसर का निरीक्षण करेंगे बिहार के सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री श्री भगवान सिंह कुशवाहा ने किला परिसर का किया निरीक्षण देखें व सुनें -1
- 🚨 चरपोखरी के इस्लामगंज में जफर हत्याकांड का अपडेट! 📍 भोजपुर | चरपोखरी चरपोखरी थाना क्षेत्र के इस्लामगंज में मो. जफर हत्याकांड के मामले में प्राथमिकी अभियुक्त ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। मामले को लेकर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पीरो ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि हत्याकांड में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही थी। 🎙️ सुनिए SDPO, पीरो का पूरा बयान... #चरपोखरी #इस्लामगंज #जफरहत्याकांड #आत्मसमर्पण #भोजपुर #आरा #पीरो #BhojpurPolice #AraNews #जनताकीआवाजआराज्यूज़1