Shuru
Apke Nagar Ki App…
कौशाम्बी जिले के चायल तहसील क्षेत्र अंतर्गत जीवनगंज मजरा अशरफपुर में रेलवे अंडरब्रिज निर्माण को लेकर एक गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन द्वारा बिना किसी प्रकार का मुआवजा दिए ही गरीबों के खेत छीने जा रहे हैं। जब पीड़ित परिजनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, तो मौके पर पहुंचे चायल एसडीएम पर उनके साथ अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही, भाजपा नेता शिवमोहन मौर्य द्वारा भी पीड़ितों को जेल भेजने और जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात कही गई है।
Indian National News INN
कौशाम्बी जिले के चायल तहसील क्षेत्र अंतर्गत जीवनगंज मजरा अशरफपुर में रेलवे अंडरब्रिज निर्माण को लेकर एक गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन द्वारा बिना किसी प्रकार का मुआवजा दिए ही गरीबों के खेत छीने जा रहे हैं। जब पीड़ित परिजनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, तो मौके पर पहुंचे चायल एसडीएम पर उनके साथ अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही, भाजपा नेता शिवमोहन मौर्य द्वारा भी पीड़ितों को जेल भेजने और जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात कही गई है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- माहे मोहर्रम के आशूरा पर्व को गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान चारों ओर 'या हुसैन' की सदाएं गूंजती रहीं। बुढ्ढा ताजिया को उसकी मंज़िले मकसूद पर सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।1
- प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ में मुहर्रम का जुलूस अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में अक़ीदत के साथ निकाला गया। इस दौरान लोगों ने अपनी गहरी श्रद्धा और आपसी मेलजोल का प्रदर्शन किया।1
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के निर्देश पर, पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं सांसद अरुण भारती तथा प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासी के नेतृत्व में गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने मेजा थाना क्षेत्र की ग्राम सभा कुकुरकुटवा में एक शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा 16 जून 2026 को हुए उस नृशंस हत्याकांड के बाद था, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या कर दी गई थी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। नेताओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल में अरुण भारती, धीरेंद्र सिंह मुन्ना, राजीव पासी, कमला कुमारी, धनंजय दुबे, आशुतोष सिंह गहरवार, जितेंद्र पासी, प्रशांत श्रीवास्तव, अवनीश तिवारी, रामविलास पासी, विनय कुशवाहा, बिजेंद्र राय, विनीत सिंह, आशीष पटेल, संजीव पाण्डेय, शिवम मिश्रा, प्रीति उपाध्याय, देवेंद्र तिवारी, रामभवन गहलोत, हैदर अब्बास और संभाशंकर दुबे मुख्य रूप से उपस्थित रहे।1
- फूलपुर कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में दसवीं मोहर्रम, जिसे यौमे आशूरा के नाम से जाना जाता है, पूरी अकीदत और गम के साथ मनाया गया। यह दिन इस्लामी इतिहास में विशेष महत्व रखता है, जब सन 61 हिजरी में इराक की करबला धरती पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों ने सत्य, इंसाफ और मानवता के लिए शहादत दी थी। इस अवसर पर इमाम हुसैन के सब्र और कुर्बानी की मिसाल को याद करते हुए ताजिया, अलम के जुलूस निकाले गए और हर मोहल्ले में लंगर का आयोजन किया गया। नौवीं मोहर्रम की रात से ही मुल्लाना, कोहना, कैथाना आदि मोहल्लों से ताजिया निकाला गया था, जो भोर में हवेली पहुंचा, जहां अंगारा का मातम हुआ। इसके बाद सभी मोहल्लों के ताजिया अपने-अपने इमाम चौक पर रखे गए। दसवीं मोहर्रम को सुबह 9 बजे कैथाने मोहल्ले से ताजिया उठाई गई, जो हवेली पहुंची। दिन में 3 बजे हवेली में मौलाना हाशिर जैदी ने मजलिस पढ़ी और करबला के पैगाम को इंसानियत, सब्र, भाईचारे और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश बताया। मजलिस के बाद, सभी मोहल्लों की ताजिया अपने कदमी रास्ते से होती हुई कोहना, शुक्लाना, जाफरगंज, इस्माइलगंज, बानगी बाजार पहुंची। यहां अंजुमने अब्बासिया के ईशान जैदी, जमन फूलपुर और नवाज़ लखनवी ने नौहा पढ़ा, जिसके बाद बड़ों और छोटे बच्चों ने जंजीर का मातम किया। जुलूस दुनियागंज, जमीलाबाद, पूरा अच्छई सिकंदरा रोड होते हुए करबला पहुंचा, जहां फूलों को दफन किया गया और 72 शहीदों की शहादत व करबला के वाक्यात का बयान करने वाली एक और मजलिस हुई, जिससे सभी की आँखें नम हो गईं। जगह-जगह सबील लगाकर पानी और शरबत का भी इंतजाम किया गया था। इस पूरे आयोजन के दौरान, फूलपुर के कोतवाल शेषनाथ पाल ने अपने हमराहियों के साथ शांतिपूर्ण संपन्नता सुनिश्चित करने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था की थी। जुलूस का नेतृत्व कस्बा फूलपुर के मोतवल्ली ब्लॉगत हुसैन उर्फ बल्लन ने किया। इसमें जलालत हुसैन उर्फ शेखू, सैयद असकरी रजा जैदी, बदरुल हसन जैदी, मंसूर आलम, सैयद इखलाक अहमद, सैयद इलियास अहमद, कैथाने के मोतवल्ली मो असीम, कोहना मोतवल्ली नईम, नई बस्ती मोतवल्ली अख्तर, सभासद मो दानिश सहित कई अन्य लोग शामिल रहे, जिन्होंने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए अकीदत पेश की।1
- इन्सानियत का पैग़ाम सारी दुनिया में फैलाने वाले तीन दिन के भूखे प्यासे खानदाने रिसालत की करबला के मैदान में शहादत यानी आशूरा के मौक़े पर हर तरफ ग़म की चादर छाई रही। नम आंखों और आंसू लिए अक़ीदतमन्दों ने इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र नंगे पैर तय किया और इमामबाड़ों में रखे ताज़िये, अलम, ताबूत, झूला व ज़ुलजनाह पर चढ़े फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। इसी कड़ी में, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से लगभग 1928 में लड्डन मरहूम द्वारा स्थापित तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। इस दौरान मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला तक ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुंचा। यहाँ इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को इमामबाड़े से बाहर निकालकर डॉ चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला पर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकला, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ जुलूस को अपने परम्परागत मार्गों से चकिया करबला तक पहुंचाया। यहां इमामबाड़ों में दस दिन तक रखे गए तबर्रूक़ात पर चढ़े फूलों और ताज़िये को नम आंखों से करबला में बने बड़े गड्ढे (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ़न किया गया। उधर, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुंचे, जहां अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में करबला में सैकड़ों लोगों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा किया और नमाज़ अदा की, जो छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन के दर्दनाक क्षणों को याद दिलाता है। शाम होते ही, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगाने और लूटपाट के दर्दअंगेज़ मंज़र की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहां सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बंद कर 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं के साथ जुलूस आगे बढ़ा। 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब। घबराएगी ज़ैनब' जैसे पुरदर्द नौहों को सुनकर हर तरफ से आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढली ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास' और 'अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलंद करती हुई जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में जुटे अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल और संजीदा हो गया। अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा।1
- कौशांबी जिले के सैयद सरांवा निवासी फखरुल उस्मानी ने अनुज सिंह (प्ररेा শহপণ किसान युनियन उत्तर प्रदेश) को एक शिकायत भेजी है, जिसमें पट्टे पर मिली भूमि को लेकर जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया गया है। उस्मानी ने बताया कि वह ग्राम व पोस्ट सैयद सरांवा, थाना चरखा, तहसील चायल, जनपद कौशांबी के निवासी हैं। उस्मानी को 2017 में ग्राम प्रधान द्वारा पट्टे पर भूमि दी गई थी, क्योंकि वह भूमिहीन होने के कारण इस योजना के योग्य थे। उन्हें खातो संख्या 1556, भारानी संव 263, भि०/०.०४० भा० ३२० भूमि आवंटित की गई थी। शिकायत के अनुसार, इम्तियाज और जब्बार नामक व्यक्ति उन्हें रोजाना धमकी दे रहे हैं कि उन्होंने पट्टा करवाया है और वे जमीन वापस चाहते हैं। ये लोग उस्मानी को तहसील जाने के लिए भी कह रहे हैं। उस्मानी ने आरोप लगाया है कि धमकी देने वाले चरखा थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस्मानी ने अधिकारियों से इस मामले में उचित जांच कराने की मांग की है। यह शिकायत 24 जून 2026 को दर्ज की गई है।1
- प्रयागराज के घूरपुर क्षेत्र के दांदूपुर गांव में मोहर्रम की दसवीं तारीख पर अकीदत का सिलसिला गुरुवार रात से शुरू होकर शुक्रवार को पूरे धार्मिक और गमगीन माहौल में संपन्न हुआ। इस दौरान 'या हुसैन' की सदाओं और नौहाख्वानी के बीच अकीदतमंदों ने नम आंखों से ताज़ियों को कंधा देकर करबला के लिए रवाना किया, जिससे पूरे क्षेत्र में गम और अकीदत का माहौल बना रहा। गुरुवार देर रात इमामबाड़ों से ताज़ियों को निकालकर इमाम चौक पर रखा गया, जहाँ पूरी रात अकीदतमंदों की भीड़ जुटी रही। लोगों ने ताज़ियों पर नजर-नियाज पेश की और इमाम हुसैन व करबला के शहीदों की याद में नौहाख्वानी और मजलिस का आयोजन किया। मोहर्रम की दसवीं तारीख की सुबह, सबसे पहले इमामबाड़ा अलीमिया से ताज़िया उठाया गया, जिसके बाद गांव के कुल 18 इमामबाड़ों से एक-एक कर ताज़िए निकाले गए। इन सभी ताज़ियों को पारंपरिक मार्गों से होते हुए करबला ले जाया गया, जहाँ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस पूरे रास्ते भर 'या हुसैन' और 'या अब्बास' की सदाएं गूंजती रहीं। ताज़िया जुलूस में बड़ी संख्या में युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने हिस्सा लिया। पुराना इमामबाड़ा और बारगाह-ए-मासूमीन से निकले ताज़िया जुलूस में अकीदतमंदों ने जंजीर का मातम भी किया। मातम के दौरान नौहाख्वानों ने करबला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए नौहे पढ़े, जिससे माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया, अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं और हर ओर इमाम हुसैन की याद में मातम का पुरसा पेश किया गया। इसी तरह घूरपुर बाजार, बोगी, सेमरा कल्वना और इरादतगंज जैसे गांवों के अकीदतमंदों ने भी मातमी जुलूस निकाले। इस पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे और जुलूस मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।4