इन्सानियत का पैग़ाम सारी दुनिया में फैलाने वाले तीन दिन के भूखे प्यासे खानदाने रिसालत की करबला के मैदान में शहादत यानी आशूरा के मौक़े पर हर तरफ ग़म की चादर छाई रही। नम आंखों और आंसू लिए अक़ीदतमन्दों ने इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र नंगे पैर तय किया और इमामबाड़ों में रखे ताज़िये, अलम, ताबूत, झूला व ज़ुलजनाह पर चढ़े फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। इसी कड़ी में, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से लगभग 1928 में लड्डन मरहूम द्वारा स्थापित तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। इस दौरान मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला तक ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुंचा। यहाँ इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को इमामबाड़े से बाहर निकालकर डॉ चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला पर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकला, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ जुलूस को अपने परम्परागत मार्गों से चकिया करबला तक पहुंचाया। यहां इमामबाड़ों में दस दिन तक रखे गए तबर्रूक़ात पर चढ़े फूलों और ताज़िये को नम आंखों से करबला में बने बड़े गड्ढे (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ़न किया गया। उधर, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुंचे, जहां अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में करबला में सैकड़ों लोगों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा किया और नमाज़ अदा की, जो छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन के दर्दनाक क्षणों को याद दिलाता है। शाम होते ही, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगाने और लूटपाट के दर्दअंगेज़ मंज़र की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहां सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बंद कर 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं के साथ जुलूस आगे बढ़ा। 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब। घबराएगी ज़ैनब' जैसे पुरदर्द नौहों को सुनकर हर तरफ से आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढली ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास' और 'अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलंद करती हुई जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में जुटे अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल और संजीदा हो गया। अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा।
इन्सानियत का पैग़ाम सारी दुनिया में फैलाने वाले तीन दिन के भूखे प्यासे खानदाने रिसालत की करबला के मैदान में शहादत यानी आशूरा के मौक़े पर हर तरफ ग़म की चादर छाई रही। नम आंखों और आंसू लिए अक़ीदतमन्दों ने इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र नंगे पैर तय किया और इमामबाड़ों में रखे ताज़िये, अलम, ताबूत, झूला व ज़ुलजनाह पर चढ़े फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। इसी कड़ी में, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से लगभग 1928 में लड्डन मरहूम द्वारा स्थापित तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। इस दौरान मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला तक ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुंचा। यहाँ इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को इमामबाड़े से बाहर निकालकर डॉ चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला पर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकला, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ जुलूस को अपने परम्परागत मार्गों से चकिया करबला तक पहुंचाया। यहां इमामबाड़ों में दस दिन तक रखे गए तबर्रूक़ात पर चढ़े फूलों और ताज़िये को नम आंखों से करबला में बने बड़े गड्ढे (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ़न किया गया। उधर, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुंचे, जहां अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में करबला में सैकड़ों लोगों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा किया और नमाज़ अदा की, जो छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन के दर्दनाक क्षणों को याद दिलाता है। शाम होते ही, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगाने और लूटपाट के दर्दअंगेज़ मंज़र की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहां सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बंद कर 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं के साथ जुलूस आगे बढ़ा। 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब। घबराएगी ज़ैनब' जैसे पुरदर्द नौहों को सुनकर हर तरफ से आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढली ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास' और 'अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलंद करती हुई जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में जुटे अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल और संजीदा हो गया। अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा।
- इन्सानियत का पैग़ाम सारी दुनिया में फैलाने वाले तीन दिन के भूखे प्यासे खानदाने रिसालत की करबला के मैदान में शहादत यानी आशूरा के मौक़े पर हर तरफ ग़म की चादर छाई रही। नम आंखों और आंसू लिए अक़ीदतमन्दों ने इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र नंगे पैर तय किया और इमामबाड़ों में रखे ताज़िये, अलम, ताबूत, झूला व ज़ुलजनाह पर चढ़े फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। इसी कड़ी में, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से लगभग 1928 में लड्डन मरहूम द्वारा स्थापित तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। इस दौरान मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला तक ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुंचा। यहाँ इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को इमामबाड़े से बाहर निकालकर डॉ चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला पर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकला, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ जुलूस को अपने परम्परागत मार्गों से चकिया करबला तक पहुंचाया। यहां इमामबाड़ों में दस दिन तक रखे गए तबर्रूक़ात पर चढ़े फूलों और ताज़िये को नम आंखों से करबला में बने बड़े गड्ढे (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ़न किया गया। उधर, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुंचे, जहां अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में करबला में सैकड़ों लोगों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा किया और नमाज़ अदा की, जो छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन के दर्दनाक क्षणों को याद दिलाता है। शाम होते ही, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगाने और लूटपाट के दर्दअंगेज़ मंज़र की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहां सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बंद कर 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं के साथ जुलूस आगे बढ़ा। 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब। घबराएगी ज़ैनब' जैसे पुरदर्द नौहों को सुनकर हर तरफ से आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढली ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास' और 'अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलंद करती हुई जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में जुटे अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल और संजीदा हो गया। अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा।1
- कौशांबी जिले के सैयद सरांवा निवासी फखरुल उस्मानी ने अनुज सिंह (प्ररेा শহপণ किसान युनियन उत्तर प्रदेश) को एक शिकायत भेजी है, जिसमें पट्टे पर मिली भूमि को लेकर जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया गया है। उस्मानी ने बताया कि वह ग्राम व पोस्ट सैयद सरांवा, थाना चरखा, तहसील चायल, जनपद कौशांबी के निवासी हैं। उस्मानी को 2017 में ग्राम प्रधान द्वारा पट्टे पर भूमि दी गई थी, क्योंकि वह भूमिहीन होने के कारण इस योजना के योग्य थे। उन्हें खातो संख्या 1556, भारानी संव 263, भि०/०.०४० भा० ३२० भूमि आवंटित की गई थी। शिकायत के अनुसार, इम्तियाज और जब्बार नामक व्यक्ति उन्हें रोजाना धमकी दे रहे हैं कि उन्होंने पट्टा करवाया है और वे जमीन वापस चाहते हैं। ये लोग उस्मानी को तहसील जाने के लिए भी कह रहे हैं। उस्मानी ने आरोप लगाया है कि धमकी देने वाले चरखा थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस्मानी ने अधिकारियों से इस मामले में उचित जांच कराने की मांग की है। यह शिकायत 24 जून 2026 को दर्ज की गई है।1
- प्रयागराज में भाजपा काशी क्षेत्र द्वारा आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' संगोष्ठी में प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने कांग्रेस की जड़ उखाड़ने का काम किया है और राम मंदिर दान चोरी का मामला अक्षम्य अपराध है। शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में हुए इस कार्यक्रम में एके शर्मा ने लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए उनके योगदान को पीढ़ियों तक याद रखने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संविधान की हत्या की, आपातकाल के दौरान लोगों को रात में घरों से उठाकर जेलों में यातनाएं दीं और जबरदस्ती नसबंदी की। मंत्री ने 1947 से 1975 तक के कांग्रेस शासनकाल को देश की बर्बादी का दौर बताते हुए, जस्टिस जगमोहन सिन्हा की बहादुरी को सलाम किया जिन्होंने इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी, जिनके संविधान में पन्ने नहीं सिर्फ ऊपर-नीचे दफ्तियां होती हैं, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संविधान बचाने के सवाल पूछते हैं, जबकि वे खुद सबसे बड़े संविधान के हत्यारे हैं। एके शर्मा ने 1975 से 1980 के राजनैतिक संक्रमण काल का जिक्र किया और बताया कि कैसे 1980 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आगमन पर छात्रों ने जबरदस्त विरोध किया था। उन्होंने कहा कि देश ने उस समय एक मजबूत विपक्ष की आवश्यकता महसूस की, जिससे भारतीय जनता पार्टी की उत्पत्ति हुई। मंत्री ने दावा किया कि जहां भी भाजपा की सरकार रही है, वहां कभी संवैधानिक व्यवस्था से छेड़छाड़ नहीं हुई, और 46 साल की यात्रा में भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। उन्होंने कांग्रेस पर आजादी की लड़ाई का श्रेय लेने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया और 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस व सपा द्वारा आरक्षण तथा संविधान खत्म करने का झूठ फैलाने के खिलाफ सावधान रहने की अपील की। मीडिया से बातचीत के दौरान, कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने राम मंदिर दान चोरी मामले को अक्षम्य अपराध बताया। उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर हम सभी भारतीयों की आस्था से जुड़ा धाम है और यदि कोई इसका नुकसान करता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने बारिश में जल निकासी के लिए अधिकारियों को उचित निर्देश देने और महाकुंभ व माघमेला में हुए अच्छे कामों को बनाए रखने की बात भी कही। इस अवसर पर, कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने भाजपा काशी क्षेत्र के सात जिलों – प्रयागराज महानगर, गंगापार, यमुनापार, कौशांबी, सुल्तानपुर, अमेठी और प्रतापगढ़ – से आए 40 लोकतंत्र सेनानियों को अंग वस्त्र और स्मृति पत्र देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय, पूर्व विधायक तेजभान सिंह, सुशील शुक्ला, राम बाबू केसरवानी और दिनेश चंद्र शुक्ला जैसे नाम शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन भाजपा काशी क्षेत्र उपाध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता और अमरनाथ यादव ने किया, जबकि विपुल मित्तल कार्यक्रम संयोजक रहे। इस दौरान महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता, गंगापार अध्यक्ष निर्मला पासवान, यमुनापार अध्यक्ष राजेश शुक्ल, प्रतापगढ़ अध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव, कौशांबी अध्यक्ष धर्मराज मौर्य, महापौर गणेश केसरवानी, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी और विधायक गुरु प्रसाद मौर्य सहित अनेक भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।2
- आज, 26 जून 2026 को प्रयागराज में इस्लामिक कैलेंडर के मोहर्रम माह के दसवें दिन, 'बुड्ढा ताजिया' का जुलूस बड़ी अकीदत और शानो-शौकत के साथ निकाला गया। यह शोक पर्व इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाया गया, जिसमें हजारों अजादारों ने भाग लिया। जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कर्बला पहुँचा, जहाँ 'या हुसैन' के नारों के बीच ताजिए सुपुर्द-ए-खाक किए गए। इस दौरान जगह-जगह सबीलें लगाकर लोगों को शरबत और पानी भी पिलाया गया। जिला प्रशासन ने जुलूस के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसमें ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की गई। मोहर्रम का यह दिन कर्बला की जंग में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाता है। इस आयोजन में शिया समुदाय के साथ-साथ सभी धर्मों के लोगों ने एकजुट होकर भाईचारे की मिसाल पेश की। देर शाम मातमी मजलिसों के साथ यह शोक पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।1
- शुक्रवार को यौम-ए-आशूरा के अवसर पर प्रयागराज के घूरपुर कस्बे में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में शोक और श्रद्धा का माहौल छाया रहा। "या अली... या हुसैन" की सदाओं और नौहा-मर्सिया की सोज़भरी आवाज़ों के बीच परंपरागत ताजिया जुलूस पूरे धार्मिक उल्लास, अनुशासन और भक्तिभाव के साथ निकाला गया। घूरपुर घोसियाना स्थित इमामबाड़े से शुरू होकर रीवा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरता हुआ यह जुलूस निर्धारित मार्गों पर आगे बढ़ा, जिसमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाओं सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। अंत में, सदियों पुरानी परंपरा निभाते हुए कर्बला में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया और अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। आशूरा का दिन इस्लामी इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन कर्बला की तपती रेत पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.), उनके परिवार और 72 वफ़ादार साथियों ने इंसानियत, सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी। कर्बला का यह पैगाम आज भी अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष तथा हक़ और इंसाफ़ के लिए हर कुर्बानी देने की प्रेरणा देता है। जुलूस के दौरान युवाओं ने पारंपरिक लाठी, तलवारबाजी और युद्ध-कौशल का मनमोहक प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। साथ ही, विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों और अकीदतमंदों ने शरबत, खीचड़ा, जलेबी, बिस्कुट तथा अन्य खाद्य सामग्री का लंगर लगाकर रोजेदारों और राहगीरों की सेवा की। ताजिया जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। कौंधियारा एसीपी अब्दुल सलाम ने सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया, जबकि घूरपुर थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्र पुलिस बल के साथ लगातार जुलूस के साथ मौजूद रहे। प्रशासन की सतर्क निगरानी, पुलिस की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों के आपसी सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रही, जिससे अमन-चैन और भाईचारे का संदेश स्थापित हुआ।2
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद के चरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत सैयद सरावां गाँव निवासी फखरुल उस्मानी ने प्रेरा शहीद किसान यूनियन उत्तर प्रदेश के श्रीमान अनुज सिंह से पट्टे की भूमि को लेकर उत्पन्न विवाद और मिल रही धमकियों के संबंध में मदद की गुहार लगाई है। फखरुल उस्मानी के अनुसार, उन्हें 2017 में ग्राम प्रधान द्वारा पट्टे पर भूमि दी गई थी, क्योंकि वह भूमिहीन होने के कारण इसके योग्य थे। यह भूमि खसरा संख्या 1556, आराजी संख्या 263, भि०/०.०४०, भा० आर० ₹320 है। उस्मानी का कहना है कि उनके पड़ोसी रोज़ाना उन्हें धमकी दे रहे हैं कि पट्टा उन्होंने कराया है। जब उस्मानी उन्हें तहसील में जाकर पट्टे की जांच कराने को कहते हैं, तो वे नहीं मानते और धमकियां जारी रखते हैं। उस्मानी ने बताया कि ये लोग चरवा थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके ऊपर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पीड़ित फखरुल उस्मानी ने अनुज सिंह से आग्रह किया है कि मामले की उचित जांच कराकर प्रार्थी की मदद की जाए।1
- प्रयागराज में रील बनाने के दौरान एक युवक की जान पर बन आई, जब उसे एक मृत जहरीला सांप मिला। वीडियो बनाने के लिए उसने मृत सांप को कई बार अपने मुँह में डालकर बाहर निकाला। इस दौरान, सांप के शरीर में मौजूद विष उसके मुँह के रास्ते युवक के शरीर में पहुँच गया। ज़हर के कारण युवक की हालत गंभीर रूप से बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।1
- प्रयागराज में रेहड़ी-पटरी और फुटपाथ दुकानदारों के लिए आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज समापन हो गया है। इस अवसर पर भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता और एमएलसी सुरेंद्र चौधरी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई और उन्हें प्रमाण पत्र व किट भी वितरित किए गए। 'फुटपाथ व्यापारी एकता समिति' के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष शिविर का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी, ठेला और खुमचा लगाने वाले छोटे दुकानदारों को प्रशिक्षित करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने व्यापारियों का हौसला बढ़ाया और इस पहल को 'इतिहास रचने वाला काम' बताया। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान स्पष्ट किया कि यह प्रशिक्षण शिविर 'स्वच्छ भारत शुद्ध मिशन' के तहत 'स्वच्छ भोजन, स्वस्थ मस्तिष्क' के उद्देश्य को पूरा करने के लिए आयोजित किया गया है। एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि इस शिविर में छोटे फूड वेंडर्स, जिनमें मोमोज, चाउमीन, पिज्जा, इडली, सांभर-डोसा जैसे व्यंजन बेचने वाले शामिल हैं, उन्हें स्वच्छता के उच्च मानक अपनाने के गुर सिखाए गए हैं। उन्होंने इस पहल का लक्ष्य इन छोटे व्यापारियों की दुकानों को पूरी तरह से 'चमकती और लपलपाती हुई' बनाना बताया। उनका कहना था कि इन दुकानों पर उपलब्ध भोजन और व्यंजन इतने स्वादिष्ट और स्वच्छ हों कि बड़े-बड़े फाइव स्टार होटलों में जाने वाले लोग भी रेहड़ी-पटरी और ठेले की दुकानों पर आकर खाने का आनंद ले सकें।1
- उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जहाँ राजघाट पुल पर एक महिला गंगा नदी में छलांग लगाने ही वाली थी। इस दौरान, एक युवक ने चुपचाप पुल के स्ट्रक्चर पर चढ़कर सही समय पर महिला को पकड़ लिया और उसे नीचे खींचकर एक बड़ी दुर्घटना टाल दी। युवक की कुछ ही सेकंड की सूझबूझ और हिम्मत ने महिला की ज़िंदगी बचा ली। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग युवक की बहादुरी और साहस की जमकर सराहना कर रहे हैं, जिसने महिला की जान 'फिल्मी अंदाज़' में बचाई।1