सांगोद में 'वंदे गंगाजल संरक्षण जन अभियान' के तहत एक विशेष स्वच्छता कार्यक्रम पीपली घाट स्थित गणेश कुंज पर आयोजित किया गया, जिसका आगाज ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने गणेशपाल मंदिर में गणपति का विधिवत पूजन कर किया। इस दौरान पूरा परिसर 'गंगा माता की जय' के जयकारों से गूंज उठा और अभियान के प्रति जन-जागरूकता के लिए महिलाओं द्वारा कलश यात्रा भी निकाली गई। यह राज्यव्यापी अभियान 25 मई से शुरू होकर 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) तक चलेगा। अभियान के शुभारंभ पर मंत्री नागर ने खुद स्वच्छता की कमान संभालते हुए सांगोद के पीपली घाट पर आमजन और अधिकारियों के साथ मिलकर भारी मात्रा में श्रमदान किया। उन्होंने नदी किनारे फैले प्लास्टिक, अनुपयोगी अपशिष्ट और गंदगी को अपने हाथों से बटोरकर साफ किया, जिससे वहाँ मौजूद नागरिकों और युवाओं में भारी उत्साह भर गया और वे भी इस सफाई यज्ञ में जुट गए। आमजन को संबोधित करते हुए मंत्री नागर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में देश और प्रदेश बदल रहा है, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ने से हर घर में शौचालय बन गए हैं और खुले में शौच से मुक्ति मिली है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस अभियान के तहत सभी सरकारी विभागों के भवनों और कार्यालयों की सफाई व रंग-रोगन का कार्य भी किया जाएगा, साथ ही जल स्रोतों को स्वच्छ रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी बताई। मीडिया से बातचीत में मंत्री नागर ने स्पष्ट किया कि इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य पानी की बर्बादी को रोकना, जलाशयों की सफाई करना, जल स्रोतों का पुनर्भरण करना और गांवों से कचरा हटाकर उन्हें पूर्णतः स्वच्छ बनाना है। उन्होंने आमजन से इस महाअभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए, मंत्री हीरालाल नागर ने नदी में कचरा फेंक रहे एक युवक को मौके पर ही टोका। उन्होंने युवक को समझाइश देते हुए कहा कि नदी-नालों में किसी भी प्रकार का प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट या पूजन सामग्री न डालें। इसके साथ ही, उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए कि नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और नदी को दूषित करने वालों व अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों पर सख्त रोक लगाई जाए। मंत्री नागर ने नदी किनारे स्थित सरकारी स्कूल के पीछे गणेश कुंज पर नीम और पीपल के पौधों का रोपण भी किया। उन्होंने नगर पालिका अधिशासी अधिकारी मनोज मालव को सख्त निर्देश दिए कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति से पानी की व्यवस्था की जाए, परिसर से अनुपयोगी बबूल के पेड़ों को तुरंत हटाया जाए, और मिट्टी का लैंडस्केपिंग कार्य कर इस पूरे क्षेत्र को एक सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया जाए, जिसमें पॉम खजूर जैसे आकर्षक पौधे लगाए जाएं। स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी सौगात के तौर पर सांगोद विधानसभा के लगभग 50 हजार परिवारों को विधायक कोष से दो-दो डस्टबिन (कुल 1 लाख डस्टबिन) मुफ्त दिए जाएंगे, ताकि लोग घर पर ही सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग निस्तारण कर सकें।
सांगोद में 'वंदे गंगाजल संरक्षण जन अभियान' के तहत एक विशेष स्वच्छता कार्यक्रम पीपली घाट स्थित गणेश कुंज पर आयोजित किया गया, जिसका आगाज ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने गणेशपाल मंदिर में गणपति का विधिवत पूजन कर किया। इस दौरान पूरा परिसर 'गंगा माता की जय' के जयकारों से गूंज उठा और अभियान के प्रति जन-जागरूकता के लिए महिलाओं द्वारा कलश यात्रा भी निकाली गई। यह राज्यव्यापी अभियान 25 मई से शुरू होकर 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) तक चलेगा। अभियान के शुभारंभ पर मंत्री नागर ने खुद स्वच्छता की कमान संभालते हुए सांगोद के पीपली घाट पर आमजन और अधिकारियों के साथ मिलकर भारी मात्रा में श्रमदान किया। उन्होंने नदी किनारे फैले प्लास्टिक, अनुपयोगी अपशिष्ट और गंदगी को अपने हाथों से बटोरकर साफ किया, जिससे
वहाँ मौजूद नागरिकों और युवाओं में भारी उत्साह भर गया और वे भी इस सफाई यज्ञ में जुट गए। आमजन को संबोधित करते हुए मंत्री नागर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में देश और प्रदेश बदल रहा है, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ने से हर घर में शौचालय बन गए हैं और खुले में शौच से मुक्ति मिली है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस अभियान के तहत सभी सरकारी विभागों के भवनों और कार्यालयों की सफाई व रंग-रोगन का कार्य भी किया जाएगा, साथ ही जल स्रोतों को स्वच्छ रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी बताई। मीडिया से बातचीत में मंत्री नागर ने स्पष्ट किया कि इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य पानी की बर्बादी को रोकना, जलाशयों
की सफाई करना, जल स्रोतों का पुनर्भरण करना और गांवों से कचरा हटाकर उन्हें पूर्णतः स्वच्छ बनाना है। उन्होंने आमजन से इस महाअभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए, मंत्री हीरालाल नागर ने नदी में कचरा फेंक रहे एक युवक को मौके पर ही टोका। उन्होंने युवक को समझाइश देते हुए कहा कि नदी-नालों में किसी भी प्रकार का प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट या पूजन सामग्री न डालें। इसके साथ ही, उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए कि नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और नदी को दूषित करने वालों व अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों पर सख्त रोक लगाई जाए। मंत्री नागर ने नदी किनारे स्थित सरकारी स्कूल के
पीछे गणेश कुंज पर नीम और पीपल के पौधों का रोपण भी किया। उन्होंने नगर पालिका अधिशासी अधिकारी मनोज मालव को सख्त निर्देश दिए कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति से पानी की व्यवस्था की जाए, परिसर से अनुपयोगी बबूल के पेड़ों को तुरंत हटाया जाए, और मिट्टी का लैंडस्केपिंग कार्य कर इस पूरे क्षेत्र को एक सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया जाए, जिसमें पॉम खजूर जैसे आकर्षक पौधे लगाए जाएं। स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी सौगात के तौर पर सांगोद विधानसभा के लगभग 50 हजार परिवारों को विधायक कोष से दो-दो डस्टबिन (कुल 1 लाख डस्टबिन) मुफ्त दिए जाएंगे, ताकि लोग घर पर ही सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग निस्तारण कर सकें।
- राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत (STFI) का 58वां प्रांतीय महासमिति अधिवेशन कोटा में धूमधाम के साथ शुरू हुआ। इस अधिवेशन का शुभारंभ प्रांतीय सभाध्यक्ष याकूब खान, प्रांतीय अध्यक्ष महावीर सिहाग और प्रदेश महामंत्री उपेंद्र शर्मा ने झंडारोहण के साथ किया। अधिवेशन की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने की, जबकि प्रांतीय सभाध्यक्ष याकूब खान और कोटा जिलाध्यक्ष महेंद्र चौधरी ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। जनवादी लेखक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हंसराज चौधरी ने उद्घाटन करते हुए मौजूदा देश के नेतृत्व पर शिक्षा और स्वास्थ्य को सरकारी दायरे से हटाकर निजीकरण की राह पर ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार शिक्षा से वैज्ञानिक सोच को दूर कर रही है और पूंजीपतियों के हित में सार्वजनिक संस्थानों को कमजोर कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की आलोचना करते हुए इसे बिना संबंधित पक्षों से संवाद किए लागू करने को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया और 8 घंटे की ड्यूटी लागू करने के प्रयासों को श्रम कानूनों की भावना के खिलाफ करार दिया। सिहाग ने शिक्षकों से पढ़ाने के अनुकूल वातावरण, स्थानांतरण, डीपीसी, संविदा भर्ती समाप्ति, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति और कार्य घंटे कम करने जैसी मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। प्रांतीय महामंत्री उपेंद्र शर्मा ने संगठन का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह केवल कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि संघर्षों का इतिहास, वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण और भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। शर्मा ने बताया कि पूरे राजस्थान में संघर्ष जत्थों के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया गया था। उन्होंने जानकारी दी कि 27 मई 2025 से 1 जून 2025 तक नावा, टोंक और सीकर से निकले पैदल संघर्ष जत्थों ने शिक्षा मंत्री को वार्ता के लिए मजबूर किया, और 2 जून 2025 को जयपुर में निकाली गई 8 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक यात्रा को जनसंगठनों का व्यापक समर्थन मिला, जिसके बाद शिक्षा मंत्री को झुकना पड़ा। सीटू महामंत्री मुरारीलाल बैरवा ने अधिवेशन में विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी दी। इन प्रस्तावों में आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों की वापसी, पेट्रोल-डीजल व गैस की बढ़ती महंगाई का विरोध तथा सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष करना प्रमुख रहे। ये प्रस्ताव राधेश्याम यादव, शुभकरण, भंवरलाल काला, हेमंत खराड़ी, पवन छींपा सहित कई नेताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए और सर्वसम्मति से पारित हुए। कोषाध्यक्ष राधेश्याम यादव ने आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया, और प्रतिवेदन पर वेदपाल मलिक, रामावतार जांगिड़, फारूख अली, सरस्वती मारू सहित कई प्रतिनिधियों ने विस्तृत बहस में भाग लिया। मंच पर देवेंद्र झाझड़िया, भंवरलाल काला, भंवरलाल कसवां, पवन छींपा, रामस्वरूप चौधरी, अशोक लोदवाल, अंजू दुलड़, सुनीता सिहाग, महावीर मीणा, ईश्वर सिंह और चंद्रशेखर शर्मा सहित कई नेता मौजूद रहे। अधिवेशन के समापन पर, प्रदेश महामंत्री उपेंद्र शर्मा ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को बचाने, शिक्षक हितों की रक्षा करने और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लेने की बात कही। यह अधिवेशन सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा, वैज्ञानिक सोच के विकास और शिक्षक हितों की लड़ाई के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।4
- गंगा दशमी के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर, 24 मई को भारतीय किसान संघ ने किसानों की खुशहाली और समृद्धि की कामना के साथ एक विशेष धार्मिक आयोजन किया। यह कार्यक्रम कोटा जिले के सुल्तानपुर स्थित मंडावरा गांव में चंबल नदी पुलिया पर संपन्न हुआ, जहाँ माँ चर्मण्यवती की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई और उन्हें चुनरी ओढ़ाई गई। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व भारतीय किसान संघ के कोटा जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा ने किया। पूजा-अर्चना के बाद महाआरती और दीपदान का कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें कोटा जिले के सुल्तानपुर, दीगोद, इटावा और बूंदी जिले के रोटेदा क्षेत्र से आए बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत इस आयोजन में, सभी उपस्थित किसानों ने माँ चर्मण्यवती से क्षेत्र में अच्छी फसल, समग्र समृद्धि और चौतरफा खुशहाली के लिए भावपूर्ण प्रार्थना की।1
- कापरेन में स्टेट हाइवे 37 ए पर कापरेन-रोटेदा मार्ग स्थित आलण की पुलिया अत्यंत जर्जर हो चुकी है। यह पुलिया सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रही है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, क्षेत्र के ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पुलिया की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।1
- चित्तौड़गढ़ ज़िले के करणपुरा में महात्मा गांधी नरेगा कार्यस्थल पर गई महिलाओं को बिना फोटो खिंचवाए वापस लौटना पड़ा। महिलाओं का कहना है कि वे निर्धारित समय पर पहुंची थीं, इसके बावजूद उनकी फोटो नहीं खींची गई, जिससे उन्हें वापस घर आना पड़ा।1
- तिलस्वा घाट क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे की सूचना सामने आई है, जहाँ यात्रियों से भरी एक बस अनियंत्रित होकर घाट से नीचे जा गिरी। इस घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, बस घाट से गुजर रही थी तभी अचानक चालक का संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। बस में महिलाएँ और बच्चे सहित कई यात्री सवार थे। हादसे में कई लोगों के घायल होने की सूचना है, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि तिलस्वा घाट में पहले भी कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं। इसको देखते हुए, लोगों ने प्रशासन से माँग की है कि घाट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, चेतावनी संकेत लगाए जाएँ और सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएँ।1
- राजस्थान के बारां जिले में प्रभात फेरी के आयोजन के साथ जल संरक्षण महाअभियान की शुरुआत की गई है। इस महाअभियान का उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।1
- राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ईंधन बचाने और सरकारी खर्च में कटौती का संदेश देते हुए रोडवेज बस से यात्रा कर कोटा पहुंचे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी स्वयं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे तो आम जनता भी इससे प्रेरित होगी। कोटा में कई शैक्षणिक और पंचायती राज से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने आए मंत्री दिलावर ने नागरिकों से अपील की कि वे निजी वाहनों के बजाय बस और ट्रेन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार, ऐसा करने से न सिर्फ ईंधन की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण भी कम होगा और राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह अपील पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के मद्देनजर केंद्र सरकार की ओर से की गई अपील के अनुरूप है।3
- कोटा में जिला कलेक्ट्रेट गेट पर जेके सिंथेटिक फैक्ट्री के पूर्व मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना भीषण गर्मी के बावजूद 461वें दिन भी जारी रहा। सैकड़ों मजदूर, महिलाएं और उनके परिजन सीटू के बैनर तले पिछले 15 महीनों से अपने 29 साल पुराने बकाया वेतन के भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आरोप है कि फैक्ट्री प्लांट की जमीन अधिग्रहण के बावजूद राजस्थान सरकार ने मजदूरों को बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ₹260 करोड़ से अधिक का बकाया वेतन 18 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान किया जाना था, जो अब ब्याज जोड़कर ₹500 करोड़ से अधिक हो चुका है। सीटू नेता कामरेड अली मोहम्मद ने बताया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को बार-बार मजदूरों की पीड़ा से अवगत कराया गया है, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई और जिला प्रशासन वार्ता की मांगों पर भी गंभीर नहीं दिख रहा है। धरने को संबोधित करते हुए कामरेड हबीब खान, कामरेड उमाशंकर, कामरेड नरेंद्र सिंह और कामरेड कालीचरण सोनी ने सरकार को चेतावनी दी कि जब तक समस्त मजदूरों का बकाया वेतन 18 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान नहीं किया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों और भूमाफियाओं के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2023 में राजस्थान सरकार को साफ आदेश दिया था कि जमीन अधिग्रहण के साथ-साथ मजदूरों का बकाया वेतन चुकाया जाए, लेकिन सरकार ने इस आदेश की अवहेलना की है। 461वें दिन धरने पर कामरेड महावीर प्रसाद, कामरेड गिरजाशंकर पांडे, कामरेड शिशुपाल, कामरेड हनुमान सिंह, कामरेड अशोक सिंह, कामरेड जेठाराम, कामरेड छीतरलाल, कामरेड गणेश प्रसाद, कामरेड रामफूल सहित महिला मजदूर कंचन बाई, सजन बाई, रहीसा बानो, रेशमा देवी, कैलाशी बाई, भूली बाई, मंजू बाई, नजमा बेगम, संतोष बाई, बरज कंवर, साइना, प्रेम बाई, चंद्रकला, जन्नत बानो, राजकुमारी और राजू देवी समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सीटू और माकपा कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं और मजदूरों के परिजन भी धरना स्थल पर उपस्थिति दे रहे हैं। सीटू मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने दोहराया कि मजदूर सुप्रीम कोर्ट की शर्तों को लागू करवाने और अपना हक दिलवाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे, इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की।4
- कवि कुमार विश्वास ने देहरादून में 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कॉकरोच बने हैं तो उनका इलाज करने के लिए 'हिट' भी हैं, जिससे युवाओं के बीच नई बहस छिड़ गई है। यह बयान NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर आवाज उठा रहे युवाओं को 'कीड़ा' कहने पर हंगामा खड़ा कर रहा है।1