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चम्बा में शिक्षा क्रांति: सेंट स्टीफन स्कूल को ICSE बोर्ड की मान्यता, बच्चों को मिलेगी हाई-टेक और वैश्विक शिक्षा PANGI NEWS 24 की खबर हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण आया है। प्रतिष्ठित सेंट स्टीफन सीनियर सेकेंडरी स्कूल को आखिरकार काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (ICSE) बोर्ड से आधिकारिक मान्यता प्राप्त हो गई है। वर्षों के कड़े परिश्रम, समर्पण और लगातार सुधारों के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है, जो चम्बा के हजारों बच्चों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा के द्वार खोल देगी। स्कूल के चेयरमैन विशाल स्त्रावला ने आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए इस सफलता का श्रेय प्रबंधन, स्टाफ, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को दिया। उन्होंने बताया कि सेंट स्टीफन स्कूल की नींव 1976 में मंडी में रखी गई थी, लेकिन 2004 में इसे चम्बा में स्थापित किया गया। शुरुआती वर्षों में स्कूल किराए के भवन में मात्र 11वीं और 12वीं कक्षाओं के साथ संचालित होता था। धीरे-धीरे संस्थान ने विस्तार किया और 2016 में गांव बनियाग में अपना भव्य कैंपस तैयार हुआ, जहां 2017 से पूर्ण रूप से संचालन हो रहा है। विशाल स्त्रावला ने कहा, "हमारा सपना हमेशा से चम्बा के बच्चों को ICSE जैसी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना था। पिछले एक वर्ष से हमने बोर्ड के कड़े मानकों को पूरा करने के लिए स्कूल में व्यापक बदलाव किए।" इनमें आधुनिक परीक्षा हॉल, पूर्ण रूप से सुसज्जित साइंस लैब (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी), कंप्यूटर लैब, हाई-टेक पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं शामिल हैं। काउंसिल द्वारा दो बार किए गए गहन निरीक्षणों में स्कूल सभी पैमानों पर खरा उतरा, जिसके बाद मान्यता प्रदान की गई। ICSE बोर्ड की खासियतें भी विशाल ने विस्तार से बताईं। यह बोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम पर आधारित है, जिसमें अंग्रेजी भाषा और साहित्य को दो अलग-अलग विषय बनाया गया है। इससे छात्रों के संचार कौशल, व्याकरण और अभिव्यक्ति क्षमता में जबरदस्त सुधार होता है। कक्षा 6वीं से विज्ञान को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में विभाजित किया जाता है, जो JEE, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करता है। कक्षा 9वीं से छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुन सकते हैं, जैसे इकोनॉमिक्स, कमर्शियल स्टडीज या साइंस। यह लचीलापन छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार करता है। यह मान्यता चम्बा जैसे पहाड़ी क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी, जहां पहले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर ही वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सकेगी, जो ग्रामीण बच्चों के सपनों को पंख देगी। विशाल ने कहा, "यह केवल एक मान्यता नहीं, बल्कि चम्बा के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प है। हम आधुनिक संसाधनों और उत्कृष्ट शिक्षण से छात्रों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।" स्थानीय अभिभावक और शिक्षा प्रेमी इस उपलब्धि पर खुशी जता रहे हैं। एक अभिभावक ने कहा, "यह चम्बा के लिए गर्व का विषय है। अब हमारे बच्चे बिना शहर छोड़े ICSE की शिक्षा पा सकेंगे।" स्कूल प्रबंधन ने जल्द ही नए सत्र से ICSE पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।

7 hrs ago
user_PANGI NEWS 24
PANGI NEWS 24
Social Media Manager Pangi, Chamba•
7 hrs ago
68b629ac-02ae-46bb-bc7d-d6d3dcaaad08

चम्बा में शिक्षा क्रांति: सेंट स्टीफन स्कूल को ICSE बोर्ड की मान्यता, बच्चों को मिलेगी हाई-टेक और वैश्विक शिक्षा PANGI NEWS 24 की खबर हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण आया है। प्रतिष्ठित सेंट स्टीफन सीनियर सेकेंडरी स्कूल को आखिरकार काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (ICSE) बोर्ड से आधिकारिक मान्यता प्राप्त हो गई है। वर्षों के कड़े परिश्रम, समर्पण और लगातार सुधारों के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है, जो चम्बा के हजारों बच्चों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा के द्वार खोल देगी। स्कूल के चेयरमैन विशाल स्त्रावला ने आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए इस सफलता का श्रेय प्रबंधन, स्टाफ, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को दिया। उन्होंने बताया कि सेंट स्टीफन स्कूल की नींव 1976 में मंडी में रखी गई थी, लेकिन 2004 में इसे चम्बा में स्थापित किया गया। शुरुआती वर्षों में स्कूल किराए के भवन में मात्र 11वीं और 12वीं कक्षाओं के साथ संचालित होता था। धीरे-धीरे संस्थान ने विस्तार किया और 2016 में गांव बनियाग में अपना भव्य कैंपस तैयार हुआ, जहां 2017 से पूर्ण रूप से संचालन हो रहा है। विशाल स्त्रावला ने कहा, "हमारा सपना हमेशा से चम्बा के बच्चों को ICSE जैसी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना था। पिछले एक वर्ष से हमने बोर्ड के कड़े मानकों को पूरा करने के लिए स्कूल में व्यापक बदलाव किए।" इनमें आधुनिक परीक्षा हॉल, पूर्ण रूप से सुसज्जित साइंस लैब (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी), कंप्यूटर लैब, हाई-टेक पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं शामिल हैं। काउंसिल द्वारा दो बार किए गए गहन निरीक्षणों में स्कूल सभी पैमानों पर खरा उतरा, जिसके बाद मान्यता प्रदान की गई। ICSE बोर्ड की खासियतें भी विशाल ने विस्तार से बताईं। यह बोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम पर आधारित है, जिसमें अंग्रेजी भाषा और साहित्य को दो अलग-अलग विषय बनाया गया है। इससे छात्रों के संचार कौशल, व्याकरण और अभिव्यक्ति क्षमता में जबरदस्त सुधार होता है। कक्षा 6वीं से विज्ञान को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में विभाजित किया जाता है, जो JEE, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करता है। कक्षा 9वीं से छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुन सकते हैं, जैसे इकोनॉमिक्स, कमर्शियल स्टडीज या साइंस। यह लचीलापन छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार करता है। यह मान्यता चम्बा जैसे पहाड़ी क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी, जहां पहले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर ही वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सकेगी, जो ग्रामीण बच्चों के सपनों को पंख देगी। विशाल ने कहा, "यह केवल एक मान्यता नहीं, बल्कि चम्बा के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प है। हम आधुनिक संसाधनों और उत्कृष्ट शिक्षण से छात्रों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।" स्थानीय अभिभावक और शिक्षा प्रेमी इस उपलब्धि पर खुशी जता रहे हैं। एक अभिभावक ने कहा, "यह चम्बा के लिए गर्व का विषय है। अब हमारे बच्चे बिना शहर छोड़े ICSE की शिक्षा पा सकेंगे।" स्कूल प्रबंधन ने जल्द ही नए सत्र से ICSE पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।

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  • चम्बा - 18 फरवरी चम्बा जिले मैहला के लोथल गांव में पति ने पत्नी की हत्या कर खुद पेड़ से लटककर दी जान यह घटना देर रात को दिया वारदात को अंजाम,घर में थे केवल पति-पत्नी सुरेंद्र ठाकुर चम्बा जिले के विकास खंड मैहला की ग्राम पंचायत के लोथल गांव में मंगलवार देर रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की तेजधार हथियार से हत्या करने के बाद घर के आंगन में पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलते ही गेहरा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और दोनों शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। लोथल निवासी सरवन कुमार पुत्र तनी राम ने मंगलवार देर रात अपनी पत्नी अंजू देवी पर तेजधार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सरवन कुमार ने घर के आंगन में लगे पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली। घटना का खुलासा बुधवार सुबह उस समय हुआ जब सरवन कुमार के भाई का बेटा खच्चरों को घास डालने के लिए गोशाला गया। वहां उसने आंगन में पेड़ से लटका शव देखा और परिजनों को सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत गेहरा पुलिस चौकी को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी बुलाया, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि घटना के समय घर में केवल पति-पत्नी ही मौजूद थे। सरवन कुमार के तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि करीब 16 वर्षीय बेटा उस समय अपने रिश्तेदार के घर गया हुआ था । जिससे वह इस घटना से बाल-बाल बच गया। पुलिस के अनुसार हत्या और आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस आसपास के लोगों और रिश्तेदारों से पूछताछ कर रही है । गेहरा पुलिस चौकी ने मामला दर्ज कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा फोरेंसिक जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और सनसनी का माहौल है।
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    चम्बा - 18 फरवरी 
चम्बा जिले मैहला के लोथल गांव में पति ने पत्नी की हत्या कर खुद पेड़ से लटककर दी जान 
यह घटना देर रात को दिया वारदात को अंजाम,घर में थे केवल पति-पत्नी 
सुरेंद्र ठाकुर 
चम्बा जिले के विकास खंड मैहला की ग्राम पंचायत के लोथल गांव में मंगलवार देर रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की तेजधार हथियार से हत्या करने के बाद घर के आंगन में पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलते ही गेहरा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और दोनों शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। लोथल निवासी सरवन कुमार पुत्र तनी राम ने मंगलवार देर रात  अपनी पत्नी अंजू देवी पर तेजधार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सरवन कुमार ने  घर के आंगन में लगे पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली। घटना का खुलासा बुधवार सुबह उस समय हुआ जब सरवन कुमार के भाई का बेटा खच्चरों को घास डालने के लिए गोशाला गया। वहां उसने आंगन में पेड़ से लटका शव देखा और परिजनों को सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत गेहरा पुलिस चौकी को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी बुलाया, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि घटना के समय घर में केवल पति-पत्नी ही मौजूद थे। सरवन कुमार के तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि करीब 16 वर्षीय बेटा उस समय अपने रिश्तेदार के घर गया हुआ था । जिससे वह इस घटना से बाल-बाल बच गया। पुलिस के अनुसार हत्या और आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस आसपास के लोगों और रिश्तेदारों से पूछताछ कर रही है । गेहरा पुलिस चौकी ने मामला दर्ज कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा फोरेंसिक जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और सनसनी का माहौल है।
    user_Surender Thakur
    Surender Thakur
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    4 hrs ago
  • विधानसभा के शून्य काल में विधायक डॉ. जनक राज ने उठाया गंभीर मुद्दा। पांगी घाटी में करोड़ों की 33KV विद्युत लाइन परियोजना बिना Forest Clearance के शुरू करने का प्रयास — काम बीच में रुका। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग। ⚡ पांगी जैसे दुर्गम जनजातीय क्षेत्र में बिजली जीवनरेखा है। ⚡ प्रशासनिक लापरवाही से जनता को भुगतनी पड़ रही है कीमत। ⚡ विधायक ने दी चेतावनी — जरूरत पड़ी तो मुद्दा सदन से सड़क तक जाएगा।
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    विधानसभा के शून्य काल में विधायक डॉ. जनक राज ने उठाया गंभीर मुद्दा।
पांगी घाटी में करोड़ों की 33KV विद्युत लाइन परियोजना बिना Forest Clearance के शुरू करने का प्रयास — काम बीच में रुका।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग।
⚡ पांगी जैसे दुर्गम जनजातीय क्षेत्र में बिजली जीवनरेखा है।
⚡ प्रशासनिक लापरवाही से जनता को भुगतनी पड़ रही है कीमत।
⚡ विधायक ने दी चेतावनी — जरूरत पड़ी तो मुद्दा सदन से सड़क तक जाएगा।
    user_PANGI NEWS 24
    PANGI NEWS 24
    Social Media Manager Pangi, Chamba•
    7 hrs ago
  • किलाड़ (पांगी घाटी): जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में बुधवार को पंगवाल समुदाय का प्रमुख लोकपर्व ‘जुकारू’ एवं ‘पड़ीद’ पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। अमावस्या की रात्रि को ‘सिल्ल’ के रूप में जुकारू उत्सव की शुरुआत होती है, जबकि अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा की प्रथम तिथि को पड़ीद मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित माना जाता है। सूर्य अर्घ्य से होता है पड़ीद का शुभारंभ पड़ीद के दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का शुभारंभ करते हैं। इसके बाद छोटे सदस्य घर के बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। चरण स्पर्श से पहले ‘जेवरा’ के फूल एक-दूसरे को भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है। जेवरा गेहूं या मक्की के दानों से तैयार की गई कोमल कलियां होती हैं, जिन्हें जुकारू से लगभग 10–15 दिन पूर्व विशेष विधि से उगाया जाता है। घर का मुखिया ‘राजावली’ के समक्ष माथा टेककर प्रार्थना करता है कि समस्त नकारात्मक शक्तियां नाग लोक को प्रस्थान करें और धरती पर सुख-शांति बनी रहे। पितरों की पूजा और सूर्य अर्घ्य के बाद पशुधन को भी पकवान खिलाकर जुकारू किया जाता है। घर लौटते समय शुभ वचन कहे जाते हैं, जिनका उत्तर गृहलक्ष्मी ‘शगुन’ के रूप में देती हैं। पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव पर्व के अवसर पर पूरा परिवार एक-दूसरे के चरण स्पर्श कर गले मिलता है। घर में तैयार घी मंडे और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य, गृहस्वामिनी को छोड़कर, भोजपत्र में पकवान सजाकर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के घर ‘जुकारू भेंट’ लेकर जाते हैं। जेवरा के फूल अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। मेजबान परिवार अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पकवानों, मांस और स्थानीय पेय से करता है। किलाड़ में रात दो बजे से परंपरा पांगी मुख्यालय किलाड़ में पड़ीद उत्सव की शुरुआत रात दो बजे से ही हो जाती है। प्रातःकाल लोग समीपवर्ती प्राचीन शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ और नाग देवता को जुकारू भेंट अर्पित करते हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर में पूजा के बाद चौकी किलाड़ स्थित ऐतिहासिक राजकोठी में जाकर राजा को भी जुकारू भेंट किया जाता है। यह परंपरा राजतंत्र काल से चली आ रही है। मान्यता है कि पूर्व समय में धरवास और किरयूनी क्षेत्र के लोग भी इस अवसर पर किलाड़ पहुंचते थे, किंतु एक बार भारी हिमपात के कारण वे शामिल नहीं हो सके। तब से किलाड़ के लोगों ने इस परंपरा को अपने स्तर पर निरंतर बनाए रखा है। जेवरा फूल का विशेष महत्व जुकारू पर्व में ‘जेवरा’ का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। माघ पूर्णिमा के तीसरे दिन मिट्टी में भेड़-बकरियों के बारीक गोबर को मिलाकर उसमें गेहूं और मक्की के बीज डाले जाते हैं। लगभग 10–12 दिनों में तैयार हुई इन कलियों का उपयोग 12 दिनों तक फूल के रूप में किया जाता है। स्थानीय पुजारी जयराम के अनुसार, जेवरा की कलियां जितनी अच्छी और शीघ्र तैयार होती हैं, उसे आने वाले वर्ष में अच्छी फसल का संकेत माना जाता है। पड़ीद के दिन सूर्य भगवान को भोग लगाने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। पौराणिक और लोकमान्यताएं जुकारू पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महादानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि के त्याग से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया कि माघ और फाल्गुन मास की विशेष अमावस्याओं पर पृथ्वी पर उनकी पूजा होगी। पांगी का जुकारू पर्व इसी मान्यता से जुड़ा माना जाता है। एक अन्य लोककथा के अनुसार, क्षेत्र में राणा और ठाकुरों के बीच लंबे समय तक संघर्ष रहता था। आपसी वैमनस्य को समाप्त करने और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में कुछ विशेष दिन आपसी मिलन के लिए निर्धारित किए गए, जिन्हें बाद में ‘जुकारू’ नाम दिया गया। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कड़ाके की सर्दियों में सामाजिक संपर्क सीमित होने के कारण, विशेषकर विवाहित बेटियों को मायके आने का अवसर देने के उद्देश्य से यह पर्व प्रारंभ हुआ। आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक जुकारू और पड़ीद केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पंगवाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पितरों की श्रद्धा, देव पूजन, पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव की यह परंपरा आज भी पांगी घाटी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे। #पांगीघाटी #किलाड़ #जुकारू #पड़ीद #पंगवालसमुदाय #जनजातीयसंस्कृति #हिमाचलप्रदेश #हिमाचलकीसंस्कृति #लोकपर्व #पारंपरिकत्योहार #देवसंस्कृति #सूर्यअर्घ्य #पितृसमर्पण #संस्कृतिकीझलक #IncredibleHimachal लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।
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    किलाड़ (पांगी घाटी): जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में बुधवार को पंगवाल समुदाय का प्रमुख लोकपर्व ‘जुकारू’ एवं ‘पड़ीद’ पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। अमावस्या की रात्रि को ‘सिल्ल’ के रूप में जुकारू उत्सव की शुरुआत होती है, जबकि अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा की प्रथम तिथि को पड़ीद मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित माना जाता है।
सूर्य अर्घ्य से होता है पड़ीद का शुभारंभ
पड़ीद के दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का शुभारंभ करते हैं। इसके बाद छोटे सदस्य घर के बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। चरण स्पर्श से पहले ‘जेवरा’ के फूल एक-दूसरे को भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है। जेवरा गेहूं या मक्की के दानों से तैयार की गई कोमल कलियां होती हैं, जिन्हें जुकारू से लगभग 10–15 दिन पूर्व विशेष विधि से उगाया जाता है।
घर का मुखिया ‘राजावली’ के समक्ष माथा टेककर प्रार्थना करता है कि समस्त नकारात्मक शक्तियां नाग लोक को प्रस्थान करें और धरती पर सुख-शांति बनी रहे। पितरों की पूजा और सूर्य अर्घ्य के बाद पशुधन को भी पकवान खिलाकर जुकारू किया जाता है। घर लौटते समय शुभ वचन कहे जाते हैं, जिनका उत्तर गृहलक्ष्मी ‘शगुन’ के रूप में देती हैं।
पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव
पर्व के अवसर पर पूरा परिवार एक-दूसरे के चरण स्पर्श कर गले मिलता है। घर में तैयार घी मंडे और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य, गृहस्वामिनी को छोड़कर, भोजपत्र में पकवान सजाकर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के घर ‘जुकारू भेंट’ लेकर जाते हैं। जेवरा के फूल अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। मेजबान परिवार अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पकवानों, मांस और स्थानीय पेय से करता है।
किलाड़ में रात दो बजे से परंपरा
पांगी मुख्यालय किलाड़ में पड़ीद उत्सव की शुरुआत रात दो बजे से ही हो जाती है। प्रातःकाल लोग समीपवर्ती प्राचीन शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ और नाग देवता को जुकारू भेंट अर्पित करते हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर में पूजा के बाद चौकी किलाड़ स्थित ऐतिहासिक राजकोठी में जाकर राजा को भी जुकारू भेंट किया जाता है। यह परंपरा राजतंत्र काल से चली आ रही है।
मान्यता है कि पूर्व समय में धरवास और किरयूनी क्षेत्र के लोग भी इस अवसर पर किलाड़ पहुंचते थे, किंतु एक बार भारी हिमपात के कारण वे शामिल नहीं हो सके। तब से किलाड़ के लोगों ने इस परंपरा को अपने स्तर पर निरंतर बनाए रखा है।
जेवरा फूल का विशेष महत्व
जुकारू पर्व में ‘जेवरा’ का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। माघ पूर्णिमा के तीसरे दिन मिट्टी में भेड़-बकरियों के बारीक गोबर को मिलाकर उसमें गेहूं और मक्की के बीज डाले जाते हैं। लगभग 10–12 दिनों में तैयार हुई इन कलियों का उपयोग 12 दिनों तक फूल के रूप में किया जाता है।
स्थानीय पुजारी जयराम के अनुसार, जेवरा की कलियां जितनी अच्छी और शीघ्र तैयार होती हैं, उसे आने वाले वर्ष में अच्छी फसल का संकेत माना जाता है। पड़ीद के दिन सूर्य भगवान को भोग लगाने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।
पौराणिक और लोकमान्यताएं
जुकारू पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महादानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि के त्याग से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया कि माघ और फाल्गुन मास की विशेष अमावस्याओं पर पृथ्वी पर उनकी पूजा होगी। पांगी का जुकारू पर्व इसी मान्यता से जुड़ा माना जाता है।
एक अन्य लोककथा के अनुसार, क्षेत्र में राणा और ठाकुरों के बीच लंबे समय तक संघर्ष रहता था। आपसी वैमनस्य को समाप्त करने और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में कुछ विशेष दिन आपसी मिलन के लिए निर्धारित किए गए, जिन्हें बाद में ‘जुकारू’ नाम दिया गया।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कड़ाके की सर्दियों में सामाजिक संपर्क सीमित होने के कारण, विशेषकर विवाहित बेटियों को मायके आने का अवसर देने के उद्देश्य से यह पर्व प्रारंभ हुआ।
आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक
जुकारू और पड़ीद केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पंगवाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पितरों की श्रद्धा, देव पूजन, पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव की यह परंपरा आज भी पांगी घाटी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।
लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे। 
#पांगीघाटी #किलाड़ #जुकारू #पड़ीद #पंगवालसमुदाय
#जनजातीयसंस्कृति #हिमाचलप्रदेश #हिमाचलकीसंस्कृति
#लोकपर्व #पारंपरिकत्योहार #देवसंस्कृति #सूर्यअर्घ्य
#पितृसमर्पण #संस्कृतिकीझलक #IncredibleHimachal
लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    Book Shop पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    14 hrs ago
  • चंबा: सनसनीखेज वारदात: लोथल में पति-पत्नी की मौत, पुलिस जांच में जुटी। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश चंबा । भरमौर विधानसभा क्षेत्र की उपतहसील धरवाला के अंतर्गत ग्राम पंचायत लोथल के गांव लोथल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति द्वारा पत्नी की हत्या करने के बाद स्वयं आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सरवन कुमार पुत्र तानी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देर रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ, जो काफी बढ़ गया। इसी दौरान महिला की मौत हो गई और बाद में व्यक्ति ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। साथ ही फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार अक्सर हिंसक रहता था और वह पत्नी के साथ मारपीट करता था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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    चंबा: सनसनीखेज वारदात: लोथल में पति-पत्नी की मौत, पुलिस जांच में जुटी।
मोहम्मद आशिक 
चंबा हिमाचल प्रदेश
चंबा । भरमौर विधानसभा क्षेत्र की उपतहसील धरवाला के अंतर्गत ग्राम पंचायत लोथल के गांव लोथल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति द्वारा पत्नी की हत्या करने के बाद स्वयं आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सरवन कुमार पुत्र तानी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देर रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ, जो काफी बढ़ गया। इसी दौरान महिला की मौत हो गई और बाद में व्यक्ति ने भी फांसी लगाकर जान दे दी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। साथ ही फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार अक्सर हिंसक रहता था और वह पत्नी के साथ मारपीट करता था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    10 hrs ago
  • Post by Mahi Khan
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    Post by Mahi Khan
    user_Mahi Khan
    Mahi Khan
    City Star मुगलमैदान, किश्तवाड़, जम्मू और कश्मीर•
    8 hrs ago
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    user_Dhiman Taxi
    Dhiman Taxi
    नूरपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Post by Ram chand
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    Post by Ram chand
    user_Ram chand
    Ram chand
    Nurse मनाली, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
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    पांगी भरमौर के विधायक डॉक्टर जनक राज ने उठाया पांगी घाटी में चल रहे बिजली समस्या का मुद्दा 
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    user_Surender Thakur
    Surender Thakur
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    6 hrs ago
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