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ऐसा क्या हुआ कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर निकलने को कहा गया? और रोबोटिक्स की दुनिया में जहां तकनीक को लेकर उत्साह होना चाहिए था, वहां अब विवाद खड़ा हो गया है। ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक वायरल वीडियो के बाद सुर्खियों में आ गई है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में एक चीनी कंपनी के रोबोडॉग को अपना विकसित किया हुआ प्रोजेक्ट बताया। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से अधिकारियों ने विश्वविद्यालय को समिट स्थल खाली करने के लिए कहा। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने ऐसे किसी निर्देश से इनकार किया है।
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ऐसा क्या हुआ कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर निकलने को कहा गया? और रोबोटिक्स की दुनिया में जहां तकनीक को लेकर उत्साह होना चाहिए था, वहां अब विवाद खड़ा हो गया है। ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक वायरल वीडियो के बाद सुर्खियों में आ गई है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में एक चीनी कंपनी के रोबोडॉग को अपना विकसित किया हुआ प्रोजेक्ट बताया। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से अधिकारियों ने विश्वविद्यालय को समिट स्थल खाली करने के लिए कहा। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने ऐसे किसी निर्देश से इनकार किया है।
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- कानपुर दक्षिण में बीजेपी सरकार द्वारा बनकर तैयार खड़ा 100 बेड का अस्पताल अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इसी के विरोध में आज समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, लेकिन प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली. कानपुर दक्षिण की जनता को बेहतर इलाज का सपना दिखाकर बनाया गया यह 100 बेड का अस्पताल आज खुद 'बीमार' हालत में सफेद हाथी बना खड़ा है। अस्पताल की इमारत तैयार है, लेकिन इसे जनता के लिए नहीं खोला गया। इसी से नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार को जगाने के लिए 'सद्बुद्धि यज्ञ' का आयोजन किया। हंगामा तब बढ़ गया जब सपाइयों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जबरन यज्ञ रुकवाया और बर्बरता की। कार्यकर्ताओं का गंभीर आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने हवन सामग्री में लात मारी, जिससे धार्मिक भावनाएं भी आहत हुईं। सपा पार्षद अर्पित यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक अस्पताल की चाबी जनता को नहीं सौंपी जाती, उनका आंदोलन थमेगा नहीं. "यह सरकार पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है। करोड़ों की लागत से अस्पताल बनकर तैयार है, लेकिन दक्षिण की जनता आज भी इलाज के लिए भटक रही है। जब हम शांतिपूर्ण तरीके से सद्बुद्धि यज्ञ कर रहे थे, तो पुलिस ने सत्ता के दबाव में आकर न सिर्फ हमारे साथ बदसलूकी की, बल्कि पवित्र हवन कुंड में लात मारकर आस्था का भी अपमान किया। पुलिस की यह लाठी और बर्बरता हमें डरा नहीं सकती। जब तक यह अस्पताल चालू नहीं होगा, हम सरकार को जगाने का काम जारी रखेंगे. अर्पित यादव (पार्षद) #newskhaber #KanpurNews #kanpurnews #AkhileshYadav #CMYogi #publicsuru #publicshuruews #anoopnishadpatrakaar1
- कानपुर नगर, पनकी क्षेत्र स्थित नारायणा अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान 37 वर्षीय महिला की मौत से हड़कंप मच गया, मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हालात संभालते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। मूल रूप से शिवली क्षेत्र के मैथा गांव निवासी अतुल शुक्ला अपनी पत्नी नीलम शुक्ला के साथ 15 फरवरी को रिश्तेदारी में रूमईपुर गए थे, देर शाम घर लौटते समय रास्ते में उनकी बाइक फिसल गई, जिससे नीलम गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिजन उन्हें उपचार के लिए पनकी स्थित नारायणा हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने पैर के ऑपरेशन की बात कही, परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने ऑपरेशन का खर्च करीब 20 हजार रुपये बताया और 10 हजार रुपये अग्रिम जमा करा लिए। बुधवार शाम ऑपरेशन के दौरान अचानक महिला की मौत की सूचना दे दी गई, इसके बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान महिला को अचानक कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी जान चली गई, प्रबंधन ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार करते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी। पनकी थाना प्रभारी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया गया। मामले की जांच की जा रही है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी..??1
- खबरों के अनुसार , डोरंडा में एक मर्सिडीज-बेंज कार ने एक बाइकर को टक्कर मार दी। जब घायल युवक ने मुआवजे की मांग की, जिसके बाद ग़ुस्साए चालक ने पीड़ित को कई किलोमीटर तक घसीटता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात क्या है? युवक पूरी घटना के दौरान कार के बोनट से चिपका रहा और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा, जबकि वाहन लगातार रफ्तार से भागता रहा। कार एक वकील चला रहा था - एक ऐसा व्यक्ति जिसका काम कानून का पालन करना होता है, न कि उसे रौंदना।1
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