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बुढ़ाना में स्मार्ट मीटर का विरोध भारतीय किसान यूनियन बुढ़ाना नगर की टीम स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर उनका विरोध करते हुए नगर सचिव साहिल चौधरी बुढ़ाना और पूरी नगर की टीम स्मार्ट मीटर उतरवाते हुए पारसी बस स्टैण्ड के पीछे का मामला

1 day ago
user_दैनिक भास्कर इरशाद राणा
दैनिक भास्कर इरशाद राणा
Journalist बुढाना, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
1 day ago

बुढ़ाना में स्मार्ट मीटर का विरोध भारतीय किसान यूनियन बुढ़ाना नगर की टीम स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर उनका विरोध करते हुए नगर सचिव साहिल चौधरी बुढ़ाना और पूरी नगर की टीम स्मार्ट मीटर उतरवाते हुए पारसी बस स्टैण्ड के पीछे का मामला

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  • सूदखोरी से पीड़ित विकलांग की फरियाद सुनी बिलाल अख्तर मुख्यमंत्री तक जाने की चेतावनी के बाद हरकत में आई पुलिस, सूदखोरी से पीड़ित विकलांग की फरियाद सुनी खतौली। सूदखोरी के कथित जाल में फंसे एक विकलांग व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक न्याय की गुहार लगाने की चेतावनी देने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय नजर आया। पीड़ित की बात सुनने के लिए खुद कोतवाली स्तर पर पहल की गई और कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। खतौली कोतवाली क्षेत्र के गांव दाहोड़ निवासी सोनू पुत्र कृष्ण पाल शनिवार को कोतवाली पहुंचे, जहां उन्होंने इंस्पेक्टर दिनेश बघेल से मुलाकात कर अपनी आपबीती दोहराई। सोनू का कहना है कि आजीविका चलाने के लिए उसने गांव के ही एक व्यक्ति से 32 हजार रुपये ब्याज पर लिए थे, लेकिन अब तक वह सूदखोर को एक लाख 12 हजार रुपये से अधिक चुका चुका है। इसके बावजूद उस पर और रकम बकाया होने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि सूदखोर ने दबाव बनाकर उसकी दुकान पर कब्जा कर लिया और उसकी मां के नाम दर्ज दुकान का कथित रूप से फर्जी बैनामा भी करा लिया। सोनू का कहना है कि विकलांग होने के कारण वह लगातार शोषण का शिकार हो रहा है और उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। पीड़ित ने चेतावनी दी कि यदि उसे स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में सीधे अपनी फरियाद रखेगा। इस चेतावनी के बाद पुलिस अधिकारियों में हलचल देखी गई और पीड़ित को निष्पक्ष जांच व उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सूदखोरी और कमजोर वर्गों के शोषण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
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    सूदखोरी से पीड़ित विकलांग की फरियाद सुनी
बिलाल अख्तर
मुख्यमंत्री तक जाने की चेतावनी के बाद हरकत में आई पुलिस, सूदखोरी से पीड़ित विकलांग की फरियाद सुनी
खतौली। सूदखोरी के कथित जाल में फंसे एक विकलांग व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक न्याय की गुहार लगाने की चेतावनी देने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय नजर आया। पीड़ित की बात सुनने के लिए खुद कोतवाली स्तर पर पहल की गई और कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया।
खतौली कोतवाली क्षेत्र के गांव दाहोड़ निवासी सोनू पुत्र कृष्ण पाल शनिवार को कोतवाली पहुंचे, जहां उन्होंने इंस्पेक्टर दिनेश बघेल से मुलाकात कर अपनी आपबीती दोहराई। सोनू का कहना है कि आजीविका चलाने के लिए उसने गांव के ही एक व्यक्ति से 32 हजार रुपये ब्याज पर लिए थे, लेकिन अब तक वह सूदखोर को एक लाख 12 हजार रुपये से अधिक चुका चुका है। इसके बावजूद उस पर और रकम बकाया होने का दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित का आरोप है कि सूदखोर ने दबाव बनाकर उसकी दुकान पर कब्जा कर लिया और उसकी मां के नाम दर्ज दुकान का कथित रूप से फर्जी बैनामा भी करा लिया। सोनू का कहना है कि विकलांग होने के कारण वह लगातार शोषण का शिकार हो रहा है और उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही।
पीड़ित ने चेतावनी दी कि यदि उसे स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में सीधे अपनी फरियाद रखेगा। इस चेतावनी के बाद पुलिस अधिकारियों में हलचल देखी गई और पीड़ित को निष्पक्ष जांच व उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सूदखोरी और कमजोर वर्गों के शोषण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
    user_Bilal Akhtar Journalist
    Bilal Akhtar Journalist
    Journalist खतौली, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मकान में घुसकर चोरी की घटना को दिया था अंजाम पुलिस ने पड़कर जेल भेज दिया
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    मकान में घुसकर चोरी की घटना को दिया था अंजाम पुलिस ने पड़कर जेल भेज दिया
    user_P7tv
    P7tv
    Journalist Shamli, Uttar Pradesh•
    19 hrs ago
  • मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है। बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।" किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है। जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। क्या है समाधान का रास्ता? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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    मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया
मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार
इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है।
बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग
कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।"
किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह
जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है।
जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ
मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है।
क्या है समाधान का रास्ता?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
    user_Koshar cho
    Koshar cho
    मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    35 min ago
  • मुज़फ्फरनगर!शहर की नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित आबकारी पुलिस चौकी पर शीत लहर के प्रकोप के बीच पुलिस कर्मी अलाव के सहारे पूरी तरह अलर्ट दिखाई दिए। आपको बता दें कि रविवार सुबह से ही मौसम ने अचानक करवट लेते हुए शीत लहर का विकराल रूप ले लिया है। कड़ाके की ठंड से जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं पुलिस कर्मी बढ़ती सर्दी के बावजूद अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात नज़र आ रहे हैं। कड़ाके की ठंड में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की यह सजगता प्रशंसनीय है। पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यक सतर्कता बरतते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ❄️👮‍♂️
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    मुज़फ्फरनगर!शहर की नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित आबकारी पुलिस चौकी पर शीत लहर के प्रकोप के बीच पुलिस कर्मी अलाव के सहारे पूरी तरह अलर्ट दिखाई दिए।
आपको बता दें कि रविवार सुबह से ही मौसम ने अचानक करवट लेते हुए शीत लहर का विकराल रूप ले लिया है। कड़ाके की ठंड से जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं पुलिस कर्मी बढ़ती सर्दी के बावजूद अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात नज़र आ रहे हैं।
कड़ाके की ठंड में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की यह सजगता प्रशंसनीय है। पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यक सतर्कता बरतते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ❄️👮‍♂️
    user_Mohit kalyani journalist
    Mohit kalyani journalist
    Journalist मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    47 min ago
  • मुजफ्फरनगर के Nh 58 पुलिस चौकी रुड़की चुंगी के पास मैं लगा गंदगी का ढेर आने जाने वाले सभी व्यक्तियों को गंदगी की दुर्गंध वे स्थानीय लोगों को गंदगी का सामना करना पड़ रहा है इस गंदगी से काफी परेशानियां हो रही है आने जाने वाले सभी लोगों को इस दुर्गंध को झेलना पड़ता है प्रशासन इस चीज का ध्यान नहीं रख पा रहा है नगर पालिका द्वारा की यहां खुले में कूड़ा डाल रखा है आने वाली बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है
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    मुजफ्फरनगर के Nh 58 पुलिस चौकी रुड़की चुंगी के पास  मैं लगा गंदगी का ढेर आने जाने वाले सभी व्यक्तियों को गंदगी की दुर्गंध वे स्थानीय लोगों को गंदगी का सामना करना पड़ रहा है इस गंदगी से काफी परेशानियां हो रही है आने जाने वाले सभी लोगों को इस दुर्गंध को झेलना पड़ता है प्रशासन इस चीज का ध्यान नहीं रख पा रहा है नगर पालिका द्वारा की यहां खुले में कूड़ा डाल रखा है आने वाली बीमारियों  का खतरा मंडरा रहा है
    user_Sameer Kumar
    Sameer Kumar
    Journalist मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    58 min ago
  • Post by Ssnews UTTAR PRDESH
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    Post by Ssnews UTTAR PRDESH
    user_Ssnews UTTAR PRDESH
    Ssnews UTTAR PRDESH
    Muzaffarnagar, Uttar Pradesh•
    4 hrs ago
  • सैनी होटल संचालक पर किया था चाकू से हमला लूट को दिया था अंजाम पुलिस ने गोली मार कर किया गिरफ्तार
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    सैनी होटल संचालक पर किया था चाकू से हमला लूट को दिया था अंजाम पुलिस ने गोली मार कर किया गिरफ्तार
    user_P7tv
    P7tv
    Journalist Shamli, Uttar Pradesh•
    19 hrs ago
  • पेपर मिल का जहरीला पानी सिंचाई नाले में छोड़ा जा रहा, सूख गए राष्ट्रीय राजमार्ग के पेड़ मुजफ्फरनगर। जनपद में पर्यावरण और स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सिंचाई विभाग के एक नाले में पेपर मिल का जहरीला औद्योगिक अपशिष्ट बेरोकटोक छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषित पानी के सिंचाई में इस्तेमाल का असर अब राजमार्ग पर लगे हजारों हरे-भरे पेड़ों को सुखा कर साफ दिखाई देने लगा है। विषैला पानी, सूखते पेड़ और चिंतित नागरिक स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पाया है कि एक निजी पेपर मिल की गंदगी को सिंचाई नाले में डाला जा रहा है। यह नाला स्थानीय किसानों द्वारा खेतों की सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जहरीले रसायन सीधे फसलों और मिट्टी में जा रहे हैं। इसी पानी को, जानकारी के अभाव या विकल्पहीनता में, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे हरियाली बनाए रखने के लिए भी उपयोग किया जा रहा है। अब उसी राजमार्ग के किनारे लगे पेड़ तेजी से मुरझाने और सूखने लगे हैं। बड़ी संख्या में पेड़ों का सूखना साफ इशारा कर रहा है कि पानी में मौजूद भारी रसायन और केमिकल्स पौधों की जड़ों को मार रहे हैं। पर्यावरणीय खतरा और स्वास्थ्य संकट पेपर मिलों के अपशिष्ट में क्लोरीन, डाइऑक्सिन, फरफ्यूरल और भारी धातु जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं। जब यह पानी खेतों में जाता है, तो यह मिट्टी की सेहत को बर्बाद कर देता है, भूजल को जहरीला बना देता है और अंतत: फसलों के जरिए मानव शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। पेड़ों का सूखना तो इस गंभीर समस्या का सिर्फ दृश्यमान हिस्सा है। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह एक बड़ा संकट है। विभागीय लापरवाही और जिम्मेदारों पर सवाल यह घटना मुजफ्फरनगर में सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ समय में विभाग अपने काम की घटिया गुणवत्ता के कारण विवादों में रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई एक सड़क महज पांच दिन में ही उखड़ गई थी और उसमें घास उग आई थी। इस मामले में समाजसेवी सुमित मलिक ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल तक की थी। ऐसे में, सवाल उठता है कि क्या उसी विभाग द्वारा संचालित नाले में जहरीला पानी छोड़ने की अनदेखी की जा रही है? क्या मिल मालिकों और निगरानी न करने वाले अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है? किसान नेता और स्थानीय लोग पहले भी विभाग के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। नए साल के पहले दिन से ही एक कार्यकर्ता ने विभाग के 'घटिया खेल' के खिलाफ भूख हड़ताल जारी रखी हुई है। प्रशासन से मांग और भविष्य की चुनौती स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं: 1. सबसे पहले पेपर मिल द्वारा नाले में अपशिष्ट छोड़ने पर तुरंत रोक लगाई जाए। 2. प्रदूषित नाले के पानी और आसपास की मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। 3. सूखे पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाएं, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था के साथ। 4. पिछले मामलों की तरह इस मामले में भी भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखते हजारों पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं मर रहे, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि के लिए खतरे की घंटी है। प्रशासन की ओर से तुरंत और ठोस कार्रवाई ही इस संकट से निपट सकती है और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण दे सकती है।
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    पेपर मिल का जहरीला पानी सिंचाई नाले में छोड़ा जा रहा, सूख गए राष्ट्रीय राजमार्ग के  पेड़
मुजफ्फरनगर। जनपद में पर्यावरण और स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सिंचाई विभाग के एक नाले में पेपर मिल का जहरीला औद्योगिक अपशिष्ट बेरोकटोक छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषित पानी के सिंचाई में इस्तेमाल का असर अब राजमार्ग पर लगे हजारों हरे-भरे पेड़ों को सुखा कर साफ दिखाई देने लगा है।
विषैला पानी, सूखते पेड़ और चिंतित नागरिक
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पाया है कि एक निजी पेपर मिल की गंदगी को सिंचाई नाले में डाला जा रहा है। यह नाला स्थानीय किसानों द्वारा खेतों की सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जहरीले रसायन सीधे फसलों और मिट्टी में जा रहे हैं। इसी पानी को, जानकारी के अभाव या विकल्पहीनता में, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे हरियाली बनाए रखने के लिए भी उपयोग किया जा रहा है।
अब उसी राजमार्ग के किनारे लगे पेड़ तेजी से मुरझाने और सूखने लगे हैं। बड़ी संख्या में पेड़ों का सूखना साफ इशारा कर रहा है कि पानी में मौजूद भारी रसायन और केमिकल्स पौधों की जड़ों को मार रहे हैं।
पर्यावरणीय खतरा और स्वास्थ्य संकट
पेपर मिलों के अपशिष्ट में क्लोरीन, डाइऑक्सिन, फरफ्यूरल और भारी धातु जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं। जब यह पानी खेतों में जाता है, तो यह मिट्टी की सेहत को बर्बाद कर देता है, भूजल को जहरीला बना देता है और अंतत: फसलों के जरिए मानव शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। पेड़ों का सूखना तो इस गंभीर समस्या का सिर्फ दृश्यमान हिस्सा है। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह एक बड़ा संकट है।
विभागीय लापरवाही और जिम्मेदारों पर सवाल
यह घटना मुजफ्फरनगर में सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ समय में विभाग अपने काम की घटिया गुणवत्ता के कारण विवादों में रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई एक सड़क महज पांच दिन में ही उखड़ गई थी और उसमें घास उग आई थी। इस मामले में समाजसेवी सुमित मलिक ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल तक की थी।
ऐसे में, सवाल उठता है कि क्या उसी विभाग द्वारा संचालित नाले में जहरीला पानी छोड़ने की अनदेखी की जा रही है? क्या मिल मालिकों और निगरानी न करने वाले अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है? किसान नेता और स्थानीय लोग पहले भी विभाग के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। नए साल के पहले दिन से ही एक कार्यकर्ता ने विभाग के 'घटिया खेल' के खिलाफ भूख हड़ताल जारी रखी हुई है।
प्रशासन से मांग और भविष्य की चुनौती
स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं:
1. सबसे पहले पेपर मिल द्वारा नाले में अपशिष्ट छोड़ने पर तुरंत रोक लगाई जाए।
2. प्रदूषित नाले के पानी और आसपास की मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।
3. सूखे पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाएं, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था के साथ।
4. पिछले मामलों की तरह इस मामले में भी भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखते हजारों पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं मर रहे, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि के लिए खतरे की घंटी है। प्रशासन की ओर से तुरंत और ठोस कार्रवाई ही इस संकट से निपट सकती है और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण दे सकती है।
    user_Koshar cho
    Koshar cho
    मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    44 min ago
  • मुज़फ्फरनगर | खबर मुज़फ्फरनगर में पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल चौबे के निर्देशानुसार शहर के प्रमुख अटल चौक पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों द्वारा रूटीन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान दोपहिया व चारपहिया वाहनों को रोककर दस्तावेज़ों की जांच, हेलमेट व सीट बेल्ट की अनिवार्यता सहित यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया गया। अचानक हुई चेकिंग से वाहन चालकों में हड़कंप मचा रहा। आपको बता दें कि बढ़ती ठंड और घने कोहरे के चलते सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा देखने को मिल रहा है, जिसे नियंत्रित करने के उद्देश्य से ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह सतर्कता बरत रही है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए इस प्रकार के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। 🚦
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    मुज़फ्फरनगर | खबर
मुज़फ्फरनगर में पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल चौबे के निर्देशानुसार शहर के प्रमुख अटल चौक पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों द्वारा रूटीन चेकिंग अभियान चलाया गया।
इस दौरान दोपहिया व चारपहिया वाहनों को रोककर दस्तावेज़ों की जांच, हेलमेट व सीट बेल्ट की अनिवार्यता सहित यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया गया। अचानक हुई चेकिंग से वाहन चालकों में हड़कंप मचा रहा।
आपको बता दें कि बढ़ती ठंड और घने कोहरे के चलते सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा देखने को मिल रहा है, जिसे नियंत्रित करने के उद्देश्य से ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह सतर्कता बरत रही है।
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए इस प्रकार के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। 🚦
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    Mohit kalyani journalist
    Journalist मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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