*एटा: भाकियू किसान ने जलेसर तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ किया तहसील का घेराव, उग्र आंदोलन की चेतावनी। एटा। जलेसर तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में राष्ट्रीय किसान यूनियन (किसान) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर के नेतृत्व में किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया। अबागढ़ मंडी समिति से बड़ी संख्या में किसान काफिले के रूप में एकत्र होकर तहसील जलेसर के लिए रवाना हुए। काफिले में शामिल किसानों ने रास्ते भर नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया और अपनी एकजुटता का परिचय दिया। अवागढ़ से किसानों के साथ कूच करते हुए संगठन ने तहसील पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। साथ ही मांगों के समाधान न होने पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर ने आरोप लगाया कि जलेसर तहसील में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लेखपाल से लेकर उच्च अधिकारियों तक अधिकांश कर्मचारी एक ही व्यवस्था का हिस्सा बन गए हैं और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ठाकुर ने दावा किया कि कई लेखपाल रिश्वत के पैसे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के पास इन आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि किसानों की प्रमुख समस्याओं में बिजली आपूर्ति की अनियमितता, जमीन की पैमाइश से जुड़े विवाद, और बिजली हादसों में घायल या अंगभंग हुए लोगों को मुआवजा दिलाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन सभी समस्याओं को लेकर तहसील प्रशासन से ठोस और समयबद्ध समाधान की मांग की गई है। किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा कानून के दायरे में रहकर जन समस्याओं को उठाता रहा है और आगे भी किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
*एटा: भाकियू किसान ने जलेसर तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ किया तहसील का घेराव, उग्र आंदोलन की चेतावनी। एटा। जलेसर तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में राष्ट्रीय किसान यूनियन (किसान) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर के नेतृत्व में किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया। अबागढ़ मंडी समिति से बड़ी संख्या में किसान काफिले के रूप में एकत्र होकर तहसील जलेसर के लिए रवाना हुए। काफिले में शामिल किसानों ने रास्ते भर नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया और अपनी एकजुटता का परिचय दिया। अवागढ़ से किसानों के साथ कूच करते हुए संगठन ने तहसील पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। साथ ही मांगों के समाधान न होने पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर ने आरोप लगाया कि जलेसर तहसील में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लेखपाल से लेकर उच्च अधिकारियों तक अधिकांश कर्मचारी एक ही व्यवस्था का हिस्सा बन गए हैं और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ठाकुर ने दावा किया कि कई लेखपाल रिश्वत के पैसे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के पास इन आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि किसानों की प्रमुख समस्याओं में बिजली आपूर्ति की अनियमितता, जमीन की पैमाइश से जुड़े विवाद, और बिजली हादसों में घायल या अंगभंग हुए लोगों को मुआवजा दिलाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन सभी समस्याओं को लेकर तहसील प्रशासन से ठोस और समयबद्ध समाधान की मांग की गई है। किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा कानून के दायरे में रहकर जन समस्याओं को उठाता रहा है और आगे भी किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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- आगरा के शमशाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नवजात की मौत के बाद अस्पताल की लापरवाही से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में ला खड़ा किया है। वायरल वीडियो में नवजात वार्ड में नियमों की खुलेआम अनदेखी होती दिखाई दे रही है। आरोप है कि स्टाफ नर्स की अनुपस्थिति में मासूम बच्चों की जिम्मेदारी ‘आशा’ कार्यकर्ता के भरोसे छोड़ दी गई थी। बताया जा रहा है कि संबंधित आशा कार्यकर्ता का पहले भी पैसे लेते हुए वीडियो वायरल हो चुका है, जिसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब नवजात की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल मामला शमशाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बताया जा रहा है और वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।2
- एटा। जलेसर तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में राष्ट्रीय किसान यूनियन (किसान) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर के नेतृत्व में किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया। अबागढ़ मंडी समिति से बड़ी संख्या में किसान काफिले के रूप में एकत्र होकर तहसील जलेसर के लिए रवाना हुए। काफिले में शामिल किसानों ने रास्ते भर नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया और अपनी एकजुटता का परिचय दिया। अवागढ़ से किसानों के साथ कूच करते हुए संगठन ने तहसील पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। साथ ही मांगों के समाधान न होने पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर ने आरोप लगाया कि जलेसर तहसील में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लेखपाल से लेकर उच्च अधिकारियों तक अधिकांश कर्मचारी एक ही व्यवस्था का हिस्सा बन गए हैं और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ठाकुर ने दावा किया कि कई लेखपाल रिश्वत के पैसे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के पास इन आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि किसानों की प्रमुख समस्याओं में बिजली आपूर्ति की अनियमितता, जमीन की पैमाइश से जुड़े विवाद, और बिजली हादसों में घायल या अंगभंग हुए लोगों को मुआवजा दिलाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन सभी समस्याओं को लेकर तहसील प्रशासन से ठोस और समयबद्ध समाधान की मांग की गई है। किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा कानून के दायरे में रहकर जन समस्याओं को उठाता रहा है और आगे भी किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।1