मध्य प्रदेश के राजगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक रविवार को जिला पंचायत सभागृह में आयोजित हुई। इस दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को साझा किया गया, जिसमें उन्होंने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होना चाहिए। उनके अनुसार, यूसीसी का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता, महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि एक धर्मनिरपेक्ष और समान नागरिक संहिता से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होगा, जिससे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी। बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज के सभी वर्गों और आमजन की राय लेना तथा उसे विधिवत दर्ज करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समुदायों के विचारों, सुझावों और मतों को संकलित कर उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना है। प्रोफेसर शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी की अवधारणा कोई नई नहीं है, बल्कि इसका उल्लेख भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में किया गया है। संविधान निर्माताओं ने पहले ही यह परिकल्पना की थी कि देश की सामाजिक परिस्थितियों और विकास के अनुरूप समय आने पर समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव, खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी, भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह गुर्जर, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले, अपर कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान, और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य एवं भावना वही बनी रहनी चाहिए, जिसकी परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक रविवार को जिला पंचायत सभागृह में आयोजित हुई। इस दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को साझा किया गया, जिसमें उन्होंने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होना चाहिए। उनके अनुसार, यूसीसी का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता, महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि एक धर्मनिरपेक्ष और समान नागरिक संहिता से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होगा, जिससे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी। बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज के सभी वर्गों और आमजन की राय लेना तथा उसे विधिवत दर्ज करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समुदायों के विचारों, सुझावों और मतों को संकलित कर उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना है। प्रोफेसर शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी की अवधारणा कोई नई नहीं है, बल्कि इसका उल्लेख भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में किया गया है। संविधान निर्माताओं ने पहले ही यह परिकल्पना की थी कि देश की सामाजिक परिस्थितियों और विकास के अनुरूप समय आने पर समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव, खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी, भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह गुर्जर, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले, अपर कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान, और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य एवं भावना वही बनी रहनी चाहिए, जिसकी परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी।
- मध्य प्रदेश के राजगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक रविवार को जिला पंचायत सभागृह में आयोजित हुई। इस दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को साझा किया गया, जिसमें उन्होंने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होना चाहिए। उनके अनुसार, यूसीसी का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता, महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि एक धर्मनिरपेक्ष और समान नागरिक संहिता से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होगा, जिससे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी। बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज के सभी वर्गों और आमजन की राय लेना तथा उसे विधिवत दर्ज करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समुदायों के विचारों, सुझावों और मतों को संकलित कर उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना है। प्रोफेसर शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी की अवधारणा कोई नई नहीं है, बल्कि इसका उल्लेख भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में किया गया है। संविधान निर्माताओं ने पहले ही यह परिकल्पना की थी कि देश की सामाजिक परिस्थितियों और विकास के अनुरूप समय आने पर समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव, खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी, भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह गुर्जर, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले, अपर कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान, और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य एवं भावना वही बनी रहनी चाहिए, जिसकी परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी।1
- मध्य प्रदेश के अगर मालवा जिले में हुई एक जिला स्तरीय नशा मुक्ति रैली के आकर्षण का पर्दाफाश हुआ है।1
- सुसनेर: देहरिया में युवक को मिली जान से मारने की धमकी, मांगी अवैध फिरौती; पुलिस जांच में जुटी1
- आज आसमान में सूरज के चारों ओर एक अद्भुत इंद्रधनुषी घेरा देखा गया। इस अनोखे और मनमोहक प्राकृतिक नज़ारे ने लोगों में काफी कौतूहल पैदा कर दिया, जो इसे उत्सुकता से निहारते रहे।1
- आगर मालवा के नवीन बस स्टैंड क्षेत्र में रविवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक विद्युत डीपी के पास स्थित गैरेज गुमटी में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और इसकी चपेट में पास की बिजली डीपी भी आ गई, जिससे ऊंची उठती लपटों के कारण पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही नगर पालिका की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान, घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए एसडीओपी मोतीलाल कुशवाहा सहित पुलिस बल को काफी प्रयास करने पड़े। जेसीबी की मदद से गैरेज गुमटी का सारा सामान बाहर निकाला गया। इस भीषण अग्निकांड में गैरेज संचालक सोनू माली को लाखों रुपए का भारी नुकसान हुआ है, वहीं ग्राहकों की कई मोटरसाइकिलें भी जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं।4
- भोपाल संभाग के ब्यूरो चीफ सैफ अली ने 'भारत संवाद' और 'परिवर्तन उदय' नामक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों का परिचय दिया है। 'भारत संवाद' एक लाइव न्यूज चैनल भी है। सैफ अली ने पाठकों से प्रमुख खबरों के लिए इन समाचार पत्रों और न्यूज चैनल के साथ बने रहने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, खबर और विज्ञापन संबंधी जानकारी के लिए एक संपर्क नंबर भी साझा किया गया है।1
- शाजापुर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए लगभग 388 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। अपने संबोधन के दौरान, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "दो कौड़ी का प्रदेश अध्यक्ष" कहकर संबोधित किया। मुख्यमंत्री यादव ने जीतू पटवारी को "रद्दी" और "दो कौड़ी का अध्यक्ष" भी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में सियासत गर्मा गई है, जिससे मध्य प्रदेश में सियासी पारा हाई हो गया है।1
- जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज़ बुलंद की है। उनकी प्रमुख मांगों में मानदेय में वृद्धि शामिल है, जिसके साथ ही वे अन्य कई मुद्दों पर भी अपनी बात रख रही हैं।1