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गोपालगंज पुलिस ने विशम्भरपुर थाना क्षेत्र में हुए एक खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा मात्र 15 दिनों में कर दिया है। यह घटना किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है, जहाँ दूसरों की मौत की सुपारी देने वाला शख्स ही अंततः उन्हीं हत्यारों का शिकार बन गया। इस 'खूनी खेल' में पुलिस ने गन्ने के खेत से एक कटा सिर बरामद किया था। मामले की जाँच में सामने आया कि जिस व्यक्ति ने दो लोगों की हत्या की सुपारी दी थी, वह खुद ही अपने बुने जाल में फँसकर शिकार बन गया।
हथुआ हलचल
गोपालगंज पुलिस ने विशम्भरपुर थाना क्षेत्र में हुए एक खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा मात्र 15 दिनों में कर दिया है। यह घटना किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है, जहाँ दूसरों की मौत की सुपारी देने वाला शख्स ही अंततः उन्हीं हत्यारों का शिकार बन गया। इस 'खूनी खेल' में पुलिस ने गन्ने के खेत से एक कटा सिर बरामद किया था। मामले की जाँच में सामने आया कि जिस व्यक्ति ने दो लोगों की हत्या की सुपारी दी थी, वह खुद ही अपने बुने जाल में फँसकर शिकार बन गया।
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- गोपालगंज जिले के हथुआ प्रखंड अंतर्गत सवरेजी पंचायत के मुखिया अफरोज खान पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर पुलिस ने मुडेरा गांव के पांच युवकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित मुखिया अफरोज खान ने बताया कि वह माधवा लाल बाबा के मजार पर लगे मेले से अपने बच्चों के साथ मुडेरा के रास्ते घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कुछ युवक उनके मोहल्ले के लड़के के साथ विवाद कर रहे थे। जब मुखिया खान ने अपनी बाइक रोककर विवाद का कारण जानने का प्रयास किया, तभी मौके पर मौजूद युवकों ने उन पर हमला कर दिया।1
- यह वीडियो दृष्टि दोष से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा। इसमें विस्तारपूर्वक बताया जाएगा कि दृष्टि दोष क्या होता है, यह कितने प्रकार का होता है, और यह क्यों होता है। वीडियो में दृष्टि दोष होने के कारणों और इसके विभिन्न उपचारों के बारे में भी बताया जाएगा।1
- एक शैक्षिक वीडियो में दृष्टि दोष (defect of vision) के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह वीडियो स्पष्ट करेगा कि दृष्टि दोष क्या होता है, यह कितने प्रकार का होता है, इसके पीछे के कारण क्या हैं और इसके उपचार के लिए क्या-क्या तरीके उपलब्ध हैं। #rahulsirpcb द्वारा प्रस्तुत यह रील्स वीडियो शिक्षा और मानव आँख से संबंधित इस महत्वपूर्ण जानकारी को कवर करेगा।1
- सिवान के चर्चित दुर्गा कचहरी दुर्गा माता मंदिर में विराजमान माता की प्रतिमा के गले से हार चोरी होने की घटना सामने आई है। चोरी की यह पूरी वारदात मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें एक महिला संदिग्ध रूप से हार चुराते हुए दिखाई दे रही है। इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी वीडियो जारी कर आम लोगों से अपील की है। पुलिस ने कहा है कि यदि कोई इस महिला की पहचान करता है या उसके संबंध में कोई जानकारी रखता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या संबंधित पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना दे। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।1
- बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के अंतिम दिन पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित विपिन उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर हाईटेक नकल का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी को कान में बेहद छोटा ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर नकल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी अभ्यर्थी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर तैनात बिहार पुलिस के जवानों की नजर एक परीक्षार्थी की संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ी। उसके हाव-भाव और बार-बार की हरकतों ने जवानों का ध्यान खींचा, जिसके बाद लंबे समय तक निगरानी की गई। संदेह गहराने पर तलाशी ली गई, जिसमें उसके कान के अंदर से एक अत्याधुनिक ब्लूटूथ डिवाइस बरामद हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि अभ्यर्थी लगभग पूरी परीक्षा इसी तकनीक के सहारे दे चुका था और उसे तब पकड़ा गया जब परीक्षा समाप्त होने में महज पांच मिनट ही बचे थे। कुछ मिनट और बीत जाते तो वह परीक्षा पूरी कर केंद्र से बाहर निकल जाता। गिरफ्तार अभ्यर्थी की पहचान नवादा जिले के पताहा गांव निवासी अजय कुमार के रूप में हुई है। पुलिस उससे गहन पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने यह डिवाइस खुद व्यवस्थित किया था या इसके पीछे कोई संगठित सॉल्वर गिरोह सक्रिय है। इस घटना ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इतनी कड़ी जांच के बावजूद इतना सूक्ष्म डिजिटल उपकरण केंद्र के अंदर कैसे पहुंचा, यह एक बड़ा जांच का विषय बन गया है। जानकारों के अनुसार, बरामद ब्लूटूथ डिवाइस बेहद छोटे आकार का था, जो आसानी से कान में फिट हो जाता है और सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आता। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी है और बिहार पुलिस भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में डिजिटल नकल का यह मामला सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ गया है।1
- पश्चिम चंपारण के अमवा मझार पंचायत में एक मिनी सचिवालय का उद्घाटन किया गया है। इस अवसर पर, प्रभारी मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एक विकसित पंचायत के माध्यम से ही एक विकसित बिहार का निर्माण संभव हो पाएगा।1
- पश्चिम चंपारण जिले में हरित क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। 28 जून 2026 को, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 30 हजार सीड बॉल बिखेरे जाएंगे। यह कदम आगामी मानसून सत्र के दौरान पश्चिम चंपारण को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।1
- रविवार को पंचायत विकास दिवस के अवसर पर मझौलिया प्रखंड की अमवा मझार पंचायत में विकास का एक नया अध्याय शुरू हुआ। यहां नवनिर्मित पंचायत सरकार भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया और ग्राम विकास दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री सह पश्चिम चंपारण के जिला प्रभारी मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन, जिलाधिकारी तरनजोत सिंह, पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम और चनपटिया के पूर्व विधायक उमाकांत सिंह ने किया। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान पंचायत की विकास योजनाओं, प्राप्त और व्यय की गई धनराशि, तथा शेष बची राशि का सार्वजनिक विवरण प्रस्तुत किया गया। महिला हितैषी ग्राम पंचायत थीम पर एक विशेष चर्चा भी हुई और उत्कृष्ट पंचायतों के विकास कार्यों का वीडियो प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का सामूहिक प्रसारण भी इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण रहा। अपने संबोधन में, जिला प्रभारी मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि बिहार सरकार पंचायतों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने जोर दिया कि पंचायत सरकार भवन ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। मंत्री ने जनप्रतिनिधियों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने का आह्वान किया। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने बताया कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा, सामाजिक भागीदारी और पारदर्शिता से ही गांवों का समग्र विकास संभव है, और उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की अपील की। पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम ने सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण को विकास की पहली शर्त बताते हुए पुलिस और जनता के सहयोग से अपराधमुक्त व जागरूक समाज के निर्माण की बात कही। वहीं, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह ने आशा व्यक्त की कि पंचायत सरकार भवन ग्रामीण प्रशासन को नई दिशा देगा और गांवों के विकास को और गति प्रदान करेगा। कार्यक्रम के समापन पर, ग्रामीणों ने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की और पंचायत के समग्र विकास का संकल्प लिया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉक्टर राजीव रंजन कुमार (जो कार्यक्रम के संचालक भी थे), अंचलाधिकारी राजीव रंजन, मुखिया लालदेव राम, कनीय अभियंता सनोज कुमार अमन पाल, स्वच्छता समन्वयक अनिल कुमार, दीपु कुशवाहा, सुशील जायसवाल, अमित चौबे, प्रेम साह, प्रमोद प्रसाद, हिना गुलशन, प्रखंड नाजिर जितेंद्र कुमार, प्रधान लिपिक संतोष कुमार, दीपेंद्र कुमार, शोभा देवी, ननकी राम, अवनीश कुमार, मीना देवी और लाल मुनी देवी सहित अन्य की सराहनीय भूमिका रही। पंचायत सरकार भवन के संवेदक रमाकांत मिश्रा ने बताया कि निर्माण कार्य में मानक के अनुरूप गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा गया है।4
- पश्चिम चंपारण जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक मुनाफेदार फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका एक प्रेरणादायक उदाहरण नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे हैं। उन्होंने बिहार में दुर्लभ मानी जाने वाली थाईलैंड वैरायटी की मौसंबी की बागवानी कर खेती के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाई है। करीब छह वर्ष पहले शुरू हुई यह बागवानी अब फल देने लगी है; पिछले साल जहां पेड़ों में फल लगना शुरू हुआ था, वहीं इस साल उत्पादन अपने चरम पर पहुंच गया है। मौसंबी को आमतौर पर उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का फल माना जाता है, लेकिन बिहार जैसी उष्णकटिबंधीय जलवायु में भी इसका शानदार उत्पादन किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। शिशिर दूबे ने अपनी तीन एकड़ जमीन पर लगभग 750 मौसंबी के पौधे लगाए थे, जो छह वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अब पूर्ण विकसित पेड़ बन चुके हैं। वर्तमान में प्रत्येक पेड़ से करीब 40 किलोग्राम तक फल प्राप्त हो रहा है, और इस सीजन में उनकी बागवानी से लगभग 12 टन मौसंबी का उत्पादन होने का अनुमान है। मौसंबी की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह नींबू वर्गीय फल होने के कारण कीटों और रोगों से काफी हद तक सुरक्षित रहती है, और मवेशी भी इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे किसानों की चिंताएं कम होती हैं। बिहार में मौसंबी की खेती सीमित होने के कारण इसकी बाजार में अच्छी मांग है, और फल व्यापारी व जूस कारोबारी इसे खेत से ही 80 रुपये प्रति किलो तक की कीमत पर खरीद रहे हैं। शिशिर दूबे का कहना है कि जैसे-जैसे पेड़ों की उम्र बढ़ेगी, उत्पादन भी बढ़ता जाएगा, और आने वाले वर्षों में एक-एक पेड़ से एक क्विंटल तक फल मिलने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो मौसंबी की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ देने वाली साबित होगी। वे अन्य किसानों को थाईलैंड वैरायटी के पौधों का चयन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि उनके अनुसार इस किस्म का स्वाद सामान्य देसी मौसंबी की तुलना में अधिक मीठा और बाजार में अधिक पसंद किया जाता है। नौतन के इस किसान की सफलता यह साबित करती है कि नई तकनीक और फसलों को अपनाने का साहस करने पर खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि बेहतर आय और समृद्धि का मजबूत माध्यम भी बन सकती है, और बिहार में मौसंबी की यह सफल बागवानी अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।1