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चित्तौड़गढ़ में प्रदेशाध्यक्ष ममता भूपेश का जन्मदिवस सादगीपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने गौशाला में गायों की सेवा कर उनका जन्मदिन मनाया और उनकी दीर्घायु की कामना की।
Hello Chittorgarh News
चित्तौड़गढ़ में प्रदेशाध्यक्ष ममता भूपेश का जन्मदिवस सादगीपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने गौशाला में गायों की सेवा कर उनका जन्मदिन मनाया और उनकी दीर्घायु की कामना की।
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- राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पर पैंथरों का आतंक देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम होते ही एक साथ 3 से 4 पैंथर दिखाई दिए, जिसके बाद वन विभाग ने इस संबंध में चेतावनी जारी कर दी है।1
- समाचार प्लस की खबर के अनुसार, निम्बाहेड़ा में हुई आत्महत्या के मामले की जांच में एक नया मोड़ सामने आया है।1
- मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है। फूल तोड़कर लौट रहे रवि माली की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई है। इस घटना से आक्रोशित परिजन शव रखकर प्रदर्शन कर रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के नीमच स्थित सब्जी मंडी की मौजूदा स्थिति को 'नरक' जैसा बताया गया है। मंडी से सामने आईं तस्वीरें इतनी भयावह हैं कि वे देखने वालों के होश उड़ा देंगी। इन बेहद खराब हालातों के लिए प्रशासन की बड़ी लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है।1
- चित्तौड़गढ़ में होटल पैराडाइज से जुड़े देह व्यापार प्रकरण को लेकर कई महिलाएं और पुरुष महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए तैयार हो गए हैं। इन लोगों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। 'हेलो चित्तौड़गढ़ न्यूज़ चैनल' ने भी इस पूरे प्रकरण में उचित मार्गदर्शन और सुनवाई की अपील की है।1
- निम्बाहेड़ा जिला हॉस्पिटल से बाईक चोरी करते हुए कुछ चोरों को ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ लिया है। ग्रामीणों ने मौके पर ही बाईक चुरा रहे इन चोरों को धर दबोचा।1
- एक ही समाज और एक ही रिश्ते में सोच का कितना बड़ा अंतर है, यह दो अलग-अलग वीडियो में साफ देखा जा सकता है। एक वीडियो में एक बहू अपने बुजुर्ग ससुर को अमानवीय तरीके से घसीटती हुई दिख रही है, मानो वह इंसान नहीं बल्कि एक बोझ हों। वहीं, दूसरे वीडियो में एक बहू अपने ससुर को अपने पिता के समान मानकर पूरी सेवा कर रही है, उन्हें नहला रही है और सम्मान दे रही है। यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि रिश्तों की खूबसूरती खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि संस्कारों और व्यवहार से तय होती है। यह केवल बहू या ससुर का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर इंसानियत का सवाल है। आज की पीढ़ी को यह तय करना होगा कि वे अपने बच्चों के लिए कैसा उदाहरण स्थापित करना चाहते हैं। शब्द 'बहू' भले ही एक हो, लेकिन किसी के लिए बुजुर्ग बोझ के समान हैं तो किसी के लिए वे भगवान का रूप। यह अंतर सिर्फ संस्कारों का ही है।1