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राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पर पैंथरों का आतंक देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम होते ही एक साथ 3 से 4 पैंथर दिखाई दिए, जिसके बाद वन विभाग ने इस संबंध में चेतावनी जारी कर दी है।

7 hrs ago
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News Anchor चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
7 hrs ago

राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पर पैंथरों का आतंक देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम होते ही एक साथ 3 से 4 पैंथर दिखाई दिए, जिसके बाद वन विभाग ने इस संबंध में चेतावनी जारी कर दी है।

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  • चित्तौड़गढ़ में भाजपा शासन के 12 वर्ष पूरे होने पर सांसद सीपी जोशी ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया। भाजपा इन वर्षों को विकास, सुशासन और राष्ट्र निर्माण का कालखंड बता रही है। हालांकि, इसी समय चित्तौड़गढ़ जिले में आमजन के जीवन, किसानों की जमीन, पर्यावरण, जल स्रोतों, रोजगार और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जो अब जिले की राजनीति का प्रमुख विमर्श बन गए हैं। इस विरोधाभास के केंद्र में यह प्रश्न है कि विकास का मॉडल कैसा हो – क्या यह केवल उद्योगों और परियोजनाओं की संख्या से मापा जाएगा या जनता की सुरक्षित जिंदगी, स्वच्छ हवा, पानी और रोजगार से भी। बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स अपशिष्ट को लेकर उपजा विवाद अब केवल गंदगी हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी, पर्यावरण सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा बन चुका है। ग्रामीणों और संघर्ष समिति का आरोप है कि बड़े पैमाने पर अपशिष्ट डाले जाने से जनस्वास्थ्य को खतरा है और वे इस मामले की पारदर्शी जांच तथा भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह मामला अब जनता के विश्वास की परीक्षा बन चुका है। इसी तरह, चंदेरिया में हिन्दुस्तान जिंक के फर्टिलाइजर प्लांट और बेगूं, निंबाहेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं को लेकर भी विकास और पर्यावरण के बीच बहस तेज है। जहां परियोजना समर्थक निवेश, रोजगार और आर्थिक मजबूती का तर्क देते हैं, वहीं ग्रामीण और पर्यावरण से जुड़े लोग जल, हवा, मिट्टी और स्थानीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के अध्ययन की मांग करते हैं। जनता का सवाल है कि क्या कागजों पर पर्यावरणीय सुरक्षा पर्याप्त है या इसका असर जमीन पर भी दिखेगा, क्योंकि हवा और पानी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में महसूस होते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि उद्योग जरूरी हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें। चित्तौड़गढ़ के अफीम किसान वर्षों से लाइसेंस व्यवस्था, उत्पादन नीति, लागत, मौसम की मार और गुणवत्ता मानकों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहते हैं, विशेषकर जब सरकार किसान सम्मान और कृषि विकास की बात करती है। उनकी चिंता केवल फसल तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार, भविष्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। वहीं, जिले में उद्योग और बड़े प्रोजेक्ट होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने का सवाल उठ रहा है। ग्रामीण युवा कौशल विकास और स्थायी रोजगार के ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि विकास केवल जमीन लेने तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समाज को उसका हिस्सा भी मिले। इसके अतिरिक्त, विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को जहां विरासत संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना गया, वहीं यह सवाल भी उठा कि वर्षों तक अतिक्रमण होने पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही, और अब जनता केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर स्थायी व्यवस्था चाहती है। इन 12 सालों की उपलब्धियों के दावों के बीच, चित्तौड़गढ़ में उठ रहे ये जनमुद्दे संकेत देते हैं कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है। जनता सवाल कर रही है कि क्या किसान मजबूत हुए, क्या अफीम किसान सुरक्षित हैं, युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिला और उद्योगों के साथ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा? चित्तौड़गढ़ आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण, किसान और स्थानीय समुदाय के अधिकारों की चुनौती है। लोकतंत्र में सरकारों की सफलता केवल परियोजनाओं की संख्या से नहीं बल्कि जनता के विश्वास से तय होती है। विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो इंसान, प्रकृति और भविष्य तीनों को साथ लेकर चले। आने वाले समय में जिले की सियासत इसी मूल प्रश्न से तय होगी: 'विकास किसका, कीमत किसकी और लाभ किस तक?'।
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    चित्तौड़गढ़ में भाजपा शासन के 12 वर्ष पूरे होने पर सांसद सीपी जोशी ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया। भाजपा इन वर्षों को विकास, सुशासन और राष्ट्र निर्माण का कालखंड बता रही है। हालांकि, इसी समय चित्तौड़गढ़ जिले में आमजन के जीवन, किसानों की जमीन, पर्यावरण, जल स्रोतों, रोजगार और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जो अब जिले की राजनीति का प्रमुख विमर्श बन गए हैं। इस विरोधाभास के केंद्र में यह प्रश्न है कि विकास का मॉडल कैसा हो – क्या यह केवल उद्योगों और परियोजनाओं की संख्या से मापा जाएगा या जनता की सुरक्षित जिंदगी, स्वच्छ हवा, पानी और रोजगार से भी।

बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स अपशिष्ट को लेकर उपजा विवाद अब केवल गंदगी हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी, पर्यावरण सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा बन चुका है। ग्रामीणों और संघर्ष समिति का आरोप है कि बड़े पैमाने पर अपशिष्ट डाले जाने से जनस्वास्थ्य को खतरा है और वे इस मामले की पारदर्शी जांच तथा भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह मामला अब जनता के विश्वास की परीक्षा बन चुका है। इसी तरह, चंदेरिया में हिन्दुस्तान जिंक के फर्टिलाइजर प्लांट और बेगूं, निंबाहेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं को लेकर भी विकास और पर्यावरण के बीच बहस तेज है। जहां परियोजना समर्थक निवेश, रोजगार और आर्थिक मजबूती का तर्क देते हैं, वहीं ग्रामीण और पर्यावरण से जुड़े लोग जल, हवा, मिट्टी और स्थानीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के अध्ययन की मांग करते हैं। जनता का सवाल है कि क्या कागजों पर पर्यावरणीय सुरक्षा पर्याप्त है या इसका असर जमीन पर भी दिखेगा, क्योंकि हवा और पानी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में महसूस होते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि उद्योग जरूरी हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें।

चित्तौड़गढ़ के अफीम किसान वर्षों से लाइसेंस व्यवस्था, उत्पादन नीति, लागत, मौसम की मार और गुणवत्ता मानकों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहते हैं, विशेषकर जब सरकार किसान सम्मान और कृषि विकास की बात करती है। उनकी चिंता केवल फसल तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार, भविष्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। वहीं, जिले में उद्योग और बड़े प्रोजेक्ट होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने का सवाल उठ रहा है। ग्रामीण युवा कौशल विकास और स्थायी रोजगार के ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि विकास केवल जमीन लेने तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समाज को उसका हिस्सा भी मिले। इसके अतिरिक्त, विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को जहां विरासत संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना गया, वहीं यह सवाल भी उठा कि वर्षों तक अतिक्रमण होने पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही, और अब जनता केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर स्थायी व्यवस्था चाहती है।

इन 12 सालों की उपलब्धियों के दावों के बीच, चित्तौड़गढ़ में उठ रहे ये जनमुद्दे संकेत देते हैं कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है। जनता सवाल कर रही है कि क्या किसान मजबूत हुए, क्या अफीम किसान सुरक्षित हैं, युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिला और उद्योगों के साथ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा? चित्तौड़गढ़ आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण, किसान और स्थानीय समुदाय के अधिकारों की चुनौती है। लोकतंत्र में सरकारों की सफलता केवल परियोजनाओं की संख्या से नहीं बल्कि जनता के विश्वास से तय होती है। विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो इंसान, प्रकृति और भविष्य तीनों को साथ लेकर चले। आने वाले समय में जिले की सियासत इसी मूल प्रश्न से तय होगी: 'विकास किसका, कीमत किसकी और लाभ किस तक?'।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    43 min ago
  • श्री सांवलियाजी मंदिर के भीतर एक गेट खोला जाएगा। हालांकि, यह सवाल उठाया जा रहा है कि रथयात्रा मार्ग और डेयरी गेट सहित मंदिर के बाहर के गेट पहले की तरह कब खुलेंगे।
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    श्री सांवलियाजी मंदिर के भीतर एक गेट खोला जाएगा। हालांकि, यह सवाल उठाया जा रहा है कि रथयात्रा मार्ग और डेयरी गेट सहित मंदिर के बाहर के गेट पहले की तरह कब खुलेंगे।
    user_Lucky sukhwal
    Lucky sukhwal
    Priest चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ के गांधी नगर स्थित आकाशवाणी चौराहा पर आयुष हॉस्पिटल में आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से सफलतापूर्वक इलाज किया जा रहा है। यहाँ ऐसे मरीज जिन्हें पहले बहुत परेशानी थी, उन्हें आयुर्वेद चिकित्सा से आराम मिल रहा है। हॉस्पिटल ने बताया है कि मरीज अपनी जुबानी खुद अपने आराम की कहानी सुना रहे हैं, जो आयुर्वेद चिकित्सा के कमाल को दर्शाता है।
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    चित्तौड़गढ़ के गांधी नगर स्थित आकाशवाणी चौराहा पर आयुष हॉस्पिटल में आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से सफलतापूर्वक इलाज किया जा रहा है। यहाँ ऐसे मरीज जिन्हें पहले बहुत परेशानी थी, उन्हें आयुर्वेद चिकित्सा से आराम मिल रहा है। हॉस्पिटल ने बताया है कि मरीज अपनी जुबानी खुद अपने आराम की कहानी सुना रहे हैं, जो आयुर्वेद चिकित्सा के कमाल को दर्शाता है।
    user_Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉ
    Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉ
    Ayurvedic Practitioner Chittaurgarh, Chittorgarh•
    4 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ में होटल पैराडाइज से जुड़े देह व्यापार प्रकरण को लेकर कई महिलाएं और पुरुष महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए तैयार हो गए हैं। इन लोगों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। 'हेलो चित्तौड़गढ़ न्यूज़ चैनल' ने भी इस पूरे प्रकरण में उचित मार्गदर्शन और सुनवाई की अपील की है।
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    चित्तौड़गढ़ में होटल पैराडाइज से जुड़े देह व्यापार प्रकरण को लेकर कई महिलाएं और पुरुष महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए तैयार हो गए हैं। इन लोगों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। 'हेलो चित्तौड़गढ़ न्यूज़ चैनल' ने भी इस पूरे प्रकरण में उचित मार्गदर्शन और सुनवाई की अपील की है।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पर पैंथरों का आतंक देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम होते ही एक साथ 3 से 4 पैंथर दिखाई दिए, जिसके बाद वन विभाग ने इस संबंध में चेतावनी जारी कर दी है।
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    राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पर पैंथरों का आतंक देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम होते ही एक साथ 3 से 4 पैंथर दिखाई दिए, जिसके बाद वन विभाग ने इस संबंध में चेतावनी जारी कर दी है।
    user_DS7NEWS NETWORK
    DS7NEWS NETWORK
    News Anchor चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • फ्रांस ने नॉर्वे के खिलाफ एक मुकाबले में 4-1 से बड़ी जीत हासिल की है। इस मैच में फ्रांस की तरफ से काफी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें यह महत्वपूर्ण जीत मिली।
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    फ्रांस ने नॉर्वे के खिलाफ एक मुकाबले में 4-1 से बड़ी जीत हासिल की है। इस मैच में फ्रांस की तरफ से काफी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें यह महत्वपूर्ण जीत मिली।
    user_Neeraj Sharma
    Neeraj Sharma
    Content Creator (YouTuber) चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे आयोजन स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का सागर हिलोरें लेने लगा। इस अवसर पर कथा के माध्यम से श्रोताओं को यह बताया गया कि भगवान का ज्ञान ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे आयोजन स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का सागर हिलोरें लेने लगा। इस अवसर पर कथा के माध्यम से श्रोताओं को यह बताया गया कि भगवान का ज्ञान ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • एक ही समाज और एक ही रिश्ते में सोच का कितना बड़ा अंतर है, यह दो अलग-अलग वीडियो में साफ देखा जा सकता है। एक वीडियो में एक बहू अपने बुजुर्ग ससुर को अमानवीय तरीके से घसीटती हुई दिख रही है, मानो वह इंसान नहीं बल्कि एक बोझ हों। वहीं, दूसरे वीडियो में एक बहू अपने ससुर को अपने पिता के समान मानकर पूरी सेवा कर रही है, उन्हें नहला रही है और सम्मान दे रही है। यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि रिश्तों की खूबसूरती खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि संस्कारों और व्यवहार से तय होती है। यह केवल बहू या ससुर का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर इंसानियत का सवाल है। आज की पीढ़ी को यह तय करना होगा कि वे अपने बच्चों के लिए कैसा उदाहरण स्थापित करना चाहते हैं। शब्द 'बहू' भले ही एक हो, लेकिन किसी के लिए बुजुर्ग बोझ के समान हैं तो किसी के लिए वे भगवान का रूप। यह अंतर सिर्फ संस्कारों का ही है।
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    एक ही समाज और एक ही रिश्ते में सोच का कितना बड़ा अंतर है, यह दो अलग-अलग वीडियो में साफ देखा जा सकता है। एक वीडियो में एक बहू अपने बुजुर्ग ससुर को अमानवीय तरीके से घसीटती हुई दिख रही है, मानो वह इंसान नहीं बल्कि एक बोझ हों। वहीं, दूसरे वीडियो में एक बहू अपने ससुर को अपने पिता के समान मानकर पूरी सेवा कर रही है, उन्हें नहला रही है और सम्मान दे रही है।

यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि रिश्तों की खूबसूरती खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि संस्कारों और व्यवहार से तय होती है। यह केवल बहू या ससुर का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर इंसानियत का सवाल है। आज की पीढ़ी को यह तय करना होगा कि वे अपने बच्चों के लिए कैसा उदाहरण स्थापित करना चाहते हैं।

शब्द 'बहू' भले ही एक हो, लेकिन किसी के लिए बुजुर्ग बोझ के समान हैं तो किसी के लिए वे भगवान का रूप। यह अंतर सिर्फ संस्कारों का ही है।
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    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    7 hrs ago
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