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वन विभाग की घोर लापरवाही से जला औषधीय वन 27,500 पौधे राख – जिम्मेदार कौन? अनूपपुर जिले के अमरकंटक वन परिक्षेत्र में वन विभाग की भारी लापरवाही का शर्मनाक उदाहरण सामने आया है। 50 हेक्टेयर में फैला औषधीय वन भीषण आग में जलकर पूरी तरह खाक हो गया, जिसमें 2021-22 में लगाए गए करीब 27,500 पौधे नष्ट हो गए। हैरानी की बात यह है कि विभाग को आग लगने की समय पर जानकारी तक नहीं लगी। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे, जब पूरा जंगल जल रहा था। अनूपपुर।आयुष वन योजना के तहत तैयार किया गया यह औषधीय वन क्षेत्र कभी हरियाली और औषधीय महत्व के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह क्षेत्र केवल राख और जली हुई जमीन में तब्दील हो चुका है। मौके पर मौजूद चौकीदार के बयान ने वन विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। चौकीदार के अनुसार, उसे लगातार अन्य जगहों पर आग बुझाने भेज दिया जाता था, जिससे इस क्षेत्र की देखरेख पूरी तरह नजरअंदाज होती रही है।सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पौधारोपण के बाद से अब तक न तो इन पौधों में खाद डाली गई और न ही किसी प्रकार की दवाइयों का उपयोग किया गया। इसके अलावा, पिछले एक साल से क्षेत्र में फैले सूखे झाड़-झंखाड़ और घास की सफाई भी नहीं कराई गई, जिसने आग को भड़काने में अहम भूमिका निभाई है।यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि वन विभाग केवल कागजों में योजनाएं चलाने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदतर हैं। अब देखना यह है कि इस भारी नुकसान के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाता है। चौकीदार का खुलासा: जमीनी सच्चाई आई सामने मौके पर तैनात चौकीदार ने जो बयान दिया है, वह वन विभाग के दावों की सच्चाई उजागर करता है। उसका कहना है कि उसे अक्सर अन्य जगहों पर आग बुझाने के लिए भेज दिया जाता था, जिससे इस औषधीय वन की निगरानी पूरी तरह प्रभावित होती रही। यानी जिस व्यक्ति को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई, उसे ही वहां से हटा दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस क्षेत्र की जिम्मेदारी किसके भरोसे छोड़ी गई थी। चौकीदार के बयान ने विभाग की लापरवाही को खुलकर सामने ला दिया है। न खाद, न दवाई: पौधों को यूं ही मरने के लिए छोड़ा औषधीय पौधों के संरक्षण और विकास के लिए नियमित देखभाल बेहद जरूरी होती है, लेकिन यहां तो हालात बिल्कुल उलट रहे। चौकीदार के अनुसार, 2021-22 में पौधारोपण के बाद से अब तक इन पौधों में न तो खाद डाली गई और न ही किसी प्रकार की कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया गया। इससे पौधे पहले से ही कमजोर हो चुके थे। विभाग ने केवल पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली और बाद की देखभाल पूरी तरह नजरअंदाज कर दी, जिसका नतीजा आज सामने है। एक साल से नहीं हुई सफाई: आग को मिला खुला ईंधन वन क्षेत्र में आग फैलने का सबसे बड़ा कारण सूखी घास और झाड़-झंखाड़ होता है, जिसे समय-समय पर हटाना बेहद जरूरी है। लेकिन यहां पिछले एक साल से सफाई नहीं कराई गई। नतीजा यह हुआ कि पूरे क्षेत्र में सूखा कचरा जमा हो गया, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की। यदि समय रहते सफाई की गई होती, तो आग इतनी विकराल नहीं होती। यह सीधी-सीधी लापरवाही है, जिसने पूरे औषधीय वन को तबाह कर दिया। करोड़ों की योजना, जमीनी हकीकत शून्य आयुष वन योजना के तहत इस क्षेत्र में हजारों पौधे लगाए गए थे, जिस पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग ने केवल कागजों में काम दिखाया और असल में देखभाल नहीं की। यह घटना बताती है कि सरकारी योजनाएं किस तरह केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। जब निगरानी और रखरखाव ही नहीं होगा, तो ऐसी योजनाओं का क्या फायदा? यह जनता के पैसे और संसाधनों की खुली बर्बादी का उदाहरण है। जिम्मेदारी तय कब होगी? जवाबदेही से भागता विभाग इतनी बड़ी घटना के बाद भी वन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। न ही अब तक किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। सवाल यह है कि जब 50 हेक्टेयर का वन जल रहा था, तब विभाग कहां था? क्या सिर्फ जांच के नाम पर मामला दबा दिया जाएगा या वास्तव में दोषियों पर कार्यवाही होगी? यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जाएंगी। अब जरूरत है जवाबदेही तय करने और कड़ी कार्यवाही की।

17 hrs ago
user_Mrigendra  Singh Gaharwar
Mrigendra Singh Gaharwar
कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
17 hrs ago
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वन विभाग की घोर लापरवाही से जला औषधीय वन 27,500 पौधे राख – जिम्मेदार कौन? अनूपपुर जिले के अमरकंटक वन परिक्षेत्र में वन विभाग की भारी लापरवाही का शर्मनाक उदाहरण सामने आया है। 50 हेक्टेयर में फैला औषधीय वन भीषण आग में जलकर पूरी तरह खाक हो गया, जिसमें 2021-22 में लगाए गए करीब 27,500 पौधे नष्ट हो गए। हैरानी की बात यह है कि विभाग को आग लगने की समय पर जानकारी तक नहीं लगी। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे, जब पूरा जंगल जल रहा था। अनूपपुर।आयुष वन योजना के तहत तैयार किया गया यह औषधीय वन क्षेत्र कभी हरियाली और औषधीय महत्व के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह क्षेत्र केवल राख और जली हुई जमीन में तब्दील हो चुका है। मौके पर मौजूद चौकीदार के बयान ने वन विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। चौकीदार के अनुसार, उसे लगातार अन्य जगहों पर आग बुझाने भेज दिया जाता था, जिससे इस क्षेत्र की देखरेख पूरी तरह नजरअंदाज होती रही है।सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पौधारोपण के बाद से अब तक न तो इन पौधों में खाद डाली गई और न ही किसी प्रकार की दवाइयों का उपयोग किया गया। इसके अलावा, पिछले एक साल से क्षेत्र में फैले सूखे झाड़-झंखाड़ और घास की सफाई भी नहीं कराई गई, जिसने आग को भड़काने में अहम भूमिका निभाई है।यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि वन विभाग केवल कागजों में योजनाएं

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चलाने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदतर हैं। अब देखना यह है कि इस भारी नुकसान के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाता है। चौकीदार का खुलासा: जमीनी सच्चाई आई सामने मौके पर तैनात चौकीदार ने जो बयान दिया है, वह वन विभाग के दावों की सच्चाई उजागर करता है। उसका कहना है कि उसे अक्सर अन्य जगहों पर आग बुझाने के लिए भेज दिया जाता था, जिससे इस औषधीय वन की निगरानी पूरी तरह प्रभावित होती रही। यानी जिस व्यक्ति को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई, उसे ही वहां से हटा दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस क्षेत्र की जिम्मेदारी किसके भरोसे छोड़ी गई थी। चौकीदार के बयान ने विभाग की लापरवाही को खुलकर सामने ला दिया है। न खाद, न दवाई: पौधों को यूं ही मरने के लिए छोड़ा औषधीय पौधों के संरक्षण और विकास के लिए नियमित देखभाल बेहद जरूरी होती है, लेकिन यहां तो हालात बिल्कुल उलट रहे। चौकीदार के अनुसार, 2021-22 में पौधारोपण के बाद से अब तक इन पौधों में न तो खाद डाली गई और न ही किसी प्रकार की कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया गया। इससे पौधे पहले से ही कमजोर हो चुके थे। विभाग ने केवल पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली और बाद की देखभाल पूरी तरह नजरअंदाज कर दी, जिसका नतीजा आज सामने है। एक साल से नहीं हुई सफाई: आग को मिला खुला ईंधन वन क्षेत्र में आग फैलने का सबसे बड़ा कारण सूखी घास और झाड़-झंखाड़ होता

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है, जिसे समय-समय पर हटाना बेहद जरूरी है। लेकिन यहां पिछले एक साल से सफाई नहीं कराई गई। नतीजा यह हुआ कि पूरे क्षेत्र में सूखा कचरा जमा हो गया, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की। यदि समय रहते सफाई की गई होती, तो आग इतनी विकराल नहीं होती। यह सीधी-सीधी लापरवाही है, जिसने पूरे औषधीय वन को तबाह कर दिया। करोड़ों की योजना, जमीनी हकीकत शून्य आयुष वन योजना के तहत इस क्षेत्र में हजारों पौधे लगाए गए थे, जिस पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग ने केवल कागजों में काम दिखाया और असल में देखभाल नहीं की। यह घटना बताती है कि सरकारी योजनाएं किस तरह केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। जब निगरानी और रखरखाव ही नहीं होगा, तो ऐसी योजनाओं का क्या फायदा? यह जनता के पैसे और संसाधनों की खुली बर्बादी का उदाहरण है। जिम्मेदारी तय कब होगी? जवाबदेही से भागता विभाग इतनी बड़ी घटना के बाद भी वन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। न ही अब तक किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। सवाल यह है कि जब 50 हेक्टेयर का वन जल रहा था, तब विभाग कहां था? क्या सिर्फ जांच के नाम पर मामला दबा दिया जाएगा या वास्तव में दोषियों पर कार्यवाही होगी? यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जाएंगी। अब जरूरत है जवाबदेही तय करने और कड़ी कार्यवाही की।

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    user_Shakchhi🎁 Singh
    Shakchhi🎁 Singh
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    1 hr ago
  • अनूपपुर: खाकी के खौफ से न्याय की उम्मीद टूटी, युवक ने की आत्महत्या; परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
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    अनूपपुर: खाकी के खौफ से न्याय की उम्मीद टूटी, युवक ने की आत्महत्या; परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
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    Ravindra chaturvedi News india
    कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • एमसीबी जिले में प्राकृतिक आपदाओं में मृतकों के परिजनों को शासन द्वारा 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत सर्पदंश व डूबने से हुई मौत के मामलों में यह राहत दी गई है। तहसील नागपुर, खड़गवां और केल्हारी क्षेत्रों के चार अलग-अलग प्रकरणों में पीड़ित परिवारों को यह सहायता प्रदान की गई है। शासन की यह पहल आपदा की कठिन घड़ी में प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से की गई है। स्वीकृत राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत प्राकृतिक आपदा राहत मद से दी जाएगी।
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    एमसीबी जिले में प्राकृतिक आपदाओं में मृतकों के परिजनों को शासन द्वारा 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत सर्पदंश व डूबने से हुई मौत के मामलों में यह राहत दी गई है।
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    Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Local News Reporter Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    21 min ago
  • छिंदनार, दंतेवाड़ा बस्तर की धरती पर खेल का उत्साह अपने चरम पर है। गांव-गांव में युवाओं और बच्चों के बीच क्रिकेट को लेकर जबरदस्त जुनून देखने को मिल रहा है। “बस्तर खेले सचिन संग” जैसे अभियान न सिर्फ खेल प्रतिभाओं को मंच दे रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक माहौल भी बना रहे हैं। इस पहल के जरिए ग्रामीण अंचल के खिलाड़ी अपने सपनों को उड़ान देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। खेल अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और भविष्य निर्माण का माध्यम बनता जा रहा है। बस्तर में अब हर दिल में खेल का रंग है, और हर हाथ में एक नया सपना।
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    छिंदनार, दंतेवाड़ा
बस्तर की धरती पर खेल का उत्साह अपने चरम पर है। गांव-गांव में युवाओं और बच्चों के बीच क्रिकेट को लेकर जबरदस्त जुनून देखने को मिल रहा है। “बस्तर खेले सचिन संग” जैसे अभियान न सिर्फ खेल प्रतिभाओं को मंच दे रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक माहौल भी बना रहे हैं।
इस पहल के जरिए ग्रामीण अंचल के खिलाड़ी अपने सपनों को उड़ान देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। खेल अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और भविष्य निर्माण का माध्यम बनता जा रहा है।
बस्तर में अब हर दिल में खेल का रंग है, और हर हाथ में एक नया सपना।
    user_स्पेशल रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    स्पेशल रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    Farmer सोनहत, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • Post by Abdul salam (Bbc Live)
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    Post by Abdul salam (Bbc Live)
    user_Abdul salam (Bbc Live)
    Abdul salam (Bbc Live)
    बैकुंठपुर, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    23 hrs ago
  • Post by Dinesh Varma
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    Post by Dinesh Varma
    user_Dinesh Varma
    Dinesh Varma
    Farmer बुदार, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Sumit Singh Chandel
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    Post by Sumit Singh Chandel
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Local News Reporter गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Shakchhi🎁 Singh
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    Post by Shakchhi🎁 Singh
    user_Shakchhi🎁 Singh
    Shakchhi🎁 Singh
    Amateur theater कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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