जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और बल प्रयोग की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। किसी भी संवेदनशील समाज के लिए ऐसे दृश्य अत्यंत चिंता का विषय हैं। लोकतंत्र में अपनी बात रखना कोई अपराध नहीं है और किसी भी परिस्थिति में महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि कानून की रक्षा करने वाले ही मर्यादाओं का उल्लंघन करते दिखाई दें, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लोकतंत्र की ताकत भय और बल प्रयोग में नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ और संविधान में है। महिलाओं के सम्मान की रक्षा करना हर संस्था की पहली जिम्मेदारी है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और बल प्रयोग की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। किसी भी संवेदनशील समाज के लिए ऐसे दृश्य अत्यंत चिंता का विषय हैं। लोकतंत्र में अपनी बात रखना कोई अपराध नहीं है और किसी भी परिस्थिति में महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि कानून की रक्षा करने वाले ही मर्यादाओं का उल्लंघन करते दिखाई दें, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लोकतंत्र की ताकत भय और बल प्रयोग में नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ और संविधान में है। महिलाओं के सम्मान की रक्षा करना हर संस्था की पहली जिम्मेदारी है।
- नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का असर उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भी देखने को मिल रहा है। नीट पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और नई दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ हुई धक्का-मुक्की व गिरफ्तारी के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी उत्तरकाशी ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर के समीप केंद्र सरकार का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने नीट पेपर लीक व धांधली की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छात्रों पर लाठीचार्ज की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप सिंह रावत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार अहंकार और तानाशाही की राह पर चल पड़ी है और युवाओं की जायज आवाज़ पर बर्बरता से बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए और जनता इस अहंकार का अंत निश्चित करेगी। इस प्रदर्शन में पूर्व शहर अध्यक्ष विजय सेमवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष मनीष राणा, ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष राजेंद्र गुसाईं, प्रदेश उपाध्यक्ष विजेंद्र नौटियाल, पूर्व प्रधान नवीन भंडारी, ब्लॉक अध्यक्ष विनोद जयाड़ा, मास्टर ट्रेनर बिपिन नौटियाल, ग्राम प्रधान विनोद पड़ियार, कविता जोगेला, मधु रावत, एकादशी देवी, राखी राणा, सुधीश पंवार, सूर्यबल्लभ नौटियाल, भगवानचंद शाह, रमन कटैथ, उत्तम गुसाईं, एनएसयूआई अध्यक्ष आदर्श राणा, दीपक नेगी, अनवीर पंवार, मनोज राही, पपेंद्र नेगी और दीपक रावत सहित कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।4
- 20 जुलाई को केतन लाल प्रकरण को लेकर टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर में लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। इस मामले के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद रखकर, चक्काजाम करके और थाने का घेराव कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच प्रक्रिया में तेजी लाने, कथित सहयोगी आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। हालांकि, इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा की जानी अभी शेष है।1
- उत्तर प्रदेश में पेपर लीक प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन किया है। इस प्रदर्शन के दौरान पार्टी की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है।1
- उत्तराखंड के बड़कोट में सैकड़ों युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। परीक्षा की अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी और रोजगार के ज्वलंत मुद्दों को लेकर युवाओं ने विशाल कैंडल मार्च निकाला। हाथों में कैंडल, जुबां पर उग्र नारे और दिल में रोजगार की उम्मीद लिए सैकड़ों युवा सड़कों पर उतरे। इस प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने कथित Nit पेपर लीक मामले में अपनी जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। भर्ती में हो रही लगातार देरी और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ युवाओं ने अपना विरोध दर्ज कराया।1
- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और बल प्रयोग की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। किसी भी संवेदनशील समाज के लिए ऐसे दृश्य अत्यंत चिंता का विषय हैं। लोकतंत्र में अपनी बात रखना कोई अपराध नहीं है और किसी भी परिस्थिति में महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि कानून की रक्षा करने वाले ही मर्यादाओं का उल्लंघन करते दिखाई दें, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लोकतंत्र की ताकत भय और बल प्रयोग में नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ और संविधान में है। महिलाओं के सम्मान की रक्षा करना हर संस्था की पहली जिम्मेदारी है।1