झालावाड़ पर्यटन विकास समिति ने आज जल दुर्ग गागरोन को विश्व सूची में शामिल हुए 13 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दुर्ग परिसर में एक गोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर समिति के संयोजक ओम पाठक ने बताया कि जल दुर्ग गागरोन का ऐतिहासिक और गौरवशाली इतिहास रहा है, और यह सदियों से पर्यटन का मुख्य केंद्र रहा है। उन्होंने दुर्ग की अद्भुत विशेषता पर प्रकाश डाला कि यह विशाल दुर्ग बिना नींव के चट्टानों पर अडिग खड़ा है, जिसके कारण 21 जून 2013 को इसे विश्व विरासत में शामिल किया गया था। पाठक ने विभागीय लापरवाही पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण समिति के प्रयासों से आवंटित बजट का योजनाबद्ध तरीके से सदुपयोग नहीं हो सका। समिति द्वारा प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के फलस्वरूप नदी पर दो पुलियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनके बनने के बाद पर्यटक पूरे 12 महीने सुगमता से दुर्ग आ सकेंगे। समिति ने दुर्ग को और आकर्षक बनाने के लिए ऊंट सवारी, दुर्ग के अंदर एक संग्रहालय गैलरी और पर्यटकों को लुभाने वाले कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। गोष्ठी में समिति के उपाध्यक्ष और इतिहासकार ललित शर्मा ने जल दुर्ग गागरोन के गौरवशाली इतिहास का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि इस दुर्ग का निर्माण 12वीं सदी में हुआ था, जहां दो जौहर और 14 युद्ध हुए हैं। इसकी प्राकृतिक संरचना के कारण यह विश्व प्रसिद्ध है, और यूनेस्को की टीम इसे देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप इसे 21 जून 2013 को विश्व विरासत में शामिल किया गया। शर्मा ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन को दुर्ग में कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित करनी चाहिए, जिससे इसका सौंदर्य और पर्यटन अधिक विकसित हो सके। उन्होंने शासक प्रताप राव का भी उल्लेख किया, जिन्होंने राज-पाट छोड़कर भक्ति मार्ग अपनाया और संत पीपा जी के नाम से भक्ति की अलख जगाई। उन्हीं के वंशज अचल दास खींची गागरोन के ख्याति प्राप्त शासक हुए। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्ग में आदमी की बोली बोलने वाले राय तोते विश्व प्रसिद्ध हैं। समिति के सदस्य डॉ. नंद सिंह राठौड़ ने गागरोन दुर्ग में स्थित सभी देवालयों में मूर्ति स्थापना और पूजा-अर्चना की मांग की, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सके। एक अन्य सदस्य भगवती प्रकाश मेहर ने झालावाड़ जल दुर्ग के प्रचार-प्रसार के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित सभी सार्वजनिक स्थलों पर दुर्ग के इतिहास की जानकारी वाले पोस्ट लगाने का सुझाव दिया। गोष्ठी के बाद, समिति के सदस्यों ने दुर्ग गागरोन का अवलोकन किया और उपस्थित पर्यटकों को इससे संबंधित जानकारी प्रदान की।
झालावाड़ पर्यटन विकास समिति ने आज जल दुर्ग गागरोन को विश्व सूची में शामिल हुए 13 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दुर्ग परिसर में एक गोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर समिति के संयोजक ओम पाठक ने बताया कि जल दुर्ग गागरोन का ऐतिहासिक और गौरवशाली इतिहास रहा है, और यह सदियों से पर्यटन का मुख्य केंद्र रहा है। उन्होंने दुर्ग की अद्भुत विशेषता पर प्रकाश डाला कि यह विशाल दुर्ग बिना नींव के चट्टानों पर अडिग खड़ा है, जिसके कारण 21 जून 2013 को इसे विश्व विरासत में शामिल किया गया था। पाठक ने विभागीय लापरवाही पर चिंता व्यक्त की, जिसके
कारण समिति के प्रयासों से आवंटित बजट का योजनाबद्ध तरीके से सदुपयोग नहीं हो सका। समिति द्वारा प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के फलस्वरूप नदी पर दो पुलियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनके बनने के बाद पर्यटक पूरे 12 महीने सुगमता से दुर्ग आ सकेंगे। समिति ने दुर्ग को और आकर्षक बनाने के लिए ऊंट सवारी, दुर्ग के अंदर एक संग्रहालय गैलरी और पर्यटकों को लुभाने वाले कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। गोष्ठी में समिति के उपाध्यक्ष और इतिहासकार ललित शर्मा ने जल दुर्ग गागरोन के गौरवशाली इतिहास का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि इस दुर्ग का निर्माण 12वीं सदी
में हुआ था, जहां दो जौहर और 14 युद्ध हुए हैं। इसकी प्राकृतिक संरचना के कारण यह विश्व प्रसिद्ध है, और यूनेस्को की टीम इसे देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप इसे 21 जून 2013 को विश्व विरासत में शामिल किया गया। शर्मा ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन को दुर्ग में कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित करनी चाहिए, जिससे इसका सौंदर्य और पर्यटन अधिक विकसित हो सके। उन्होंने शासक प्रताप राव का भी उल्लेख किया, जिन्होंने राज-पाट छोड़कर भक्ति मार्ग अपनाया और संत पीपा जी के नाम से भक्ति की अलख जगाई। उन्हीं के वंशज अचल दास खींची गागरोन के ख्याति प्राप्त शासक
हुए। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्ग में आदमी की बोली बोलने वाले राय तोते विश्व प्रसिद्ध हैं। समिति के सदस्य डॉ. नंद सिंह राठौड़ ने गागरोन दुर्ग में स्थित सभी देवालयों में मूर्ति स्थापना और पूजा-अर्चना की मांग की, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सके। एक अन्य सदस्य भगवती प्रकाश मेहर ने झालावाड़ जल दुर्ग के प्रचार-प्रसार के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित सभी सार्वजनिक स्थलों पर दुर्ग के इतिहास की जानकारी वाले पोस्ट लगाने का सुझाव दिया। गोष्ठी के बाद, समिति के सदस्यों ने दुर्ग गागरोन का अवलोकन किया और उपस्थित पर्यटकों को इससे संबंधित जानकारी प्रदान की।
- झालावाड़ पर्यटन विकास समिति ने आज जल दुर्ग गागरोन को विश्व सूची में शामिल हुए 13 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दुर्ग परिसर में एक गोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर समिति के संयोजक ओम पाठक ने बताया कि जल दुर्ग गागरोन का ऐतिहासिक और गौरवशाली इतिहास रहा है, और यह सदियों से पर्यटन का मुख्य केंद्र रहा है। उन्होंने दुर्ग की अद्भुत विशेषता पर प्रकाश डाला कि यह विशाल दुर्ग बिना नींव के चट्टानों पर अडिग खड़ा है, जिसके कारण 21 जून 2013 को इसे विश्व विरासत में शामिल किया गया था। पाठक ने विभागीय लापरवाही पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण समिति के प्रयासों से आवंटित बजट का योजनाबद्ध तरीके से सदुपयोग नहीं हो सका। समिति द्वारा प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के फलस्वरूप नदी पर दो पुलियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनके बनने के बाद पर्यटक पूरे 12 महीने सुगमता से दुर्ग आ सकेंगे। समिति ने दुर्ग को और आकर्षक बनाने के लिए ऊंट सवारी, दुर्ग के अंदर एक संग्रहालय गैलरी और पर्यटकों को लुभाने वाले कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। गोष्ठी में समिति के उपाध्यक्ष और इतिहासकार ललित शर्मा ने जल दुर्ग गागरोन के गौरवशाली इतिहास का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि इस दुर्ग का निर्माण 12वीं सदी में हुआ था, जहां दो जौहर और 14 युद्ध हुए हैं। इसकी प्राकृतिक संरचना के कारण यह विश्व प्रसिद्ध है, और यूनेस्को की टीम इसे देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप इसे 21 जून 2013 को विश्व विरासत में शामिल किया गया। शर्मा ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन को दुर्ग में कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित करनी चाहिए, जिससे इसका सौंदर्य और पर्यटन अधिक विकसित हो सके। उन्होंने शासक प्रताप राव का भी उल्लेख किया, जिन्होंने राज-पाट छोड़कर भक्ति मार्ग अपनाया और संत पीपा जी के नाम से भक्ति की अलख जगाई। उन्हीं के वंशज अचल दास खींची गागरोन के ख्याति प्राप्त शासक हुए। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्ग में आदमी की बोली बोलने वाले राय तोते विश्व प्रसिद्ध हैं। समिति के सदस्य डॉ. नंद सिंह राठौड़ ने गागरोन दुर्ग में स्थित सभी देवालयों में मूर्ति स्थापना और पूजा-अर्चना की मांग की, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सके। एक अन्य सदस्य भगवती प्रकाश मेहर ने झालावाड़ जल दुर्ग के प्रचार-प्रसार के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित सभी सार्वजनिक स्थलों पर दुर्ग के इतिहास की जानकारी वाले पोस्ट लगाने का सुझाव दिया। गोष्ठी के बाद, समिति के सदस्यों ने दुर्ग गागरोन का अवलोकन किया और उपस्थित पर्यटकों को इससे संबंधित जानकारी प्रदान की।4
- झालावाड़ के श्रीमती विजयाराजे सिंधिया राजकीय खेल संकुल में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सुबह 6 बजे से 8 बजे तक चला, जिसमें इस वर्ष की थीम “Yoga for Healthy Aging” (स्वस्थ आयु के लिए योग) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और सीईओ एसडी मीणा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों, पुलिस जवानों, एनसीसी कैडेट्स, स्काउट-गाइड सदस्यों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, सर्व समाज के अध्यक्षों और मेडिकल कॉलेज सहित अन्य महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस आयोजन में आमजन की भी व्यापक सहभागिता देखने को मिली। “Yoga for Healthy Aging” थीम का मूल संदेश यह है कि बढ़ती उम्र में भी योग के माध्यम से स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन जिया जा सकता है। योग को केवल शारीरिक व्यायाम ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताया गया है, जो मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस आयोजन में हजारों लोगों ने योग किया और स्वस्थ जीवन जीने की शपथ ली।1
- यह बुढ़ापे के सहारे पर आधारित एक कहानी है, जो वृद्ध माता-पिता और उनके एकमात्र बेटे के संबंध को दर्शाती है।1
- आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाकर विश्व को स्वास्थ्य की आध्यात्मिक सुंदरता से परिचित कराया है, जो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से समृद्ध रखने का एक महान सनातन उपाय है। उनके इसी आह्वान पर 21 जून को विभिन्न स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इसी क्रम में, पनवाड़ मंडल में मंडल अध्यक्ष रमाकांत गौतम सहित पूरे भाजपा परिवार ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया। वहीं, भाजपा मंडल खानपुर के तत्वावधान में आयोजित योग कार्यक्रम का संचालन रिटायर्ड शारीरिक शिक्षक कालूलाल सुमन ने किया। इस कार्यक्रम में पूर्व संसदीय सचिव और पूर्व विधायक नरेंद्र नागर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंडल के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। कुल मिलाकर, खानपुर और पनवाड़ के भाजपा मंडलों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।1
- खानपुर में विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को स्थानीय मुक्तिधाम परिसर में एक श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान में सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे परिसर की गहन साफ-सफाई की। सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से श्रमदान करते हुए आमजन को अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखने और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उल्लेखनीय है कि मुक्तिधाम को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने का यह कार्य दो चरणों में पूरा किया गया है। पिछले सप्ताह शुरू हुए पहले चरण के अभियान के दौरान परिसर के एक बड़े हिस्से की सफाई कर दी गई थी, लेकिन कुछ हिस्सों में कार्य शेष रह गया था। इसी क्रम में शनिवार को दूसरे चरण के रूप में यह विशेष अभियान आयोजित किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने सुबह से ही तत्परता दिखाते हुए शेष बचे पूरे क्षेत्र की सफाई की और कचरा हटाकर परिसर को पूरी तरह व्यवस्थित बना दिया। आयोजकों ने इस सफल अभियान के लिए सभी नगरवासियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव में इसी तरह सहयोग देने की अपील की।1
- बिहार में भरत तिवारी का दिनदहाड़े एनकाउंटर किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इस नौजवान को योजनाबद्ध तरीके से मारा गया है, और बिहार के मुख्यमंत्री की इस मामले पर चुप्पी इसी ओर इशारा करती है। इस घटना को लेकर यह भी दावा किया गया है कि भारत के अंदर जितने भी एनकाउंटर हुए हैं, चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम, वे सभी ब्राह्मणों के हुए हैं, और यह विशेष रूप से बीजेपी सरकार के कार्यकाल में हो रहा है। इस पूरी स्थिति को देश भी देख रहा है।2
- Post by VIJESH BANJARA1
- पनवाड़ क्षेत्र के दहिखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राजकीय आयुर्वेद औषधालय के तत्वावधान में 'स्वस्थ आयु के लिए योग' थीम पर केंद्रित था। इस दौरान योग प्रशिक्षक मनीष मीणा और प्रज्ञा नागर ने उपस्थित ग्रामीणों और कर्मचारियों को योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करवाया। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार सुमन ने आयुर्वेद और योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को नियमित रूप से योग करने के लिए प्रेरित किया। इस भव्य आयोजन में दहिखेड़ा से 140, शिवनगर ढाणी से 96 और सारोला कलां से 197 लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की सफल व्यवस्थाओं में आयुर्वेद कंपाउंडर गिर्राज प्रसाद गर्ग का विशेष योगदान रहा।1