बड़े महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया दौसा। कुण्डल तहसील मुख्यालय में स्थित बड़े महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । श्रद्धालुओं महिलाओं ने लाल व पीले वस्त्रों में दिखाई दी भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, गंगाजल अर्पण तथा बिल्व पत्र इत्र चढ़ाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और परिवार की शुभमंगलकामनाए की गई। मंदिर परिसरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया। दिनभर “हर-हर महादेव”और “बम-बम भोले” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा एवं । कई स्थानों पर युवाओं महिलाएं द्वारा भव्य शिव बारात व ज़ेगड निकाली गई, जिसमें भगवान शिव की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। रात्रि जागरण में गूंजे शिव भजन महाशिवरात्रि की रात्रि को विभिन्न मंदिरों एवं सामुदायिक स्थलों पर भव्य रात्रि जागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय भजन मंडलियों और कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शिव भजन प्रस्तुत किए। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर भजनों पर नृत्य किया। ग्रामीणों द्वारा कई कई जगह पर , फलाहार एवं चाय-पानी की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम की सुव्यवस्थित व्यवस्था के लिए युवाओं और स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आया। सामाजिक एकता और सौहार्द का संदेश पर्व के अवसर पर समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ दर्शन और पूजा-अर्चना में शामिल हुए। महाशिवरात्रि ने एक बार फिर सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी प्रेम को बढ़ाते हैं। पंडित विष्णु पाराशर ने बताया कि महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इसे शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था और सृष्टि के संचालन की शक्ति का प्रदर्शन किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। इसी स्मरण में भक्त उपवास रखकर रात्रि जागरण करते हैं। महाशिवरात्रि पर व्रत रखने, रुद्राभिषेक करने और रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त इस दिन संयम, तप और भक्ति के माध्यम से आत्मशुद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं। कुंडल एवं आसपास के क्षेत्रों में महाशिवरात्रि का पर्व देर रात तक भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरा क्षेत्र शिवमय वातावरण में सराबोर नजर आया।
बड़े महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया दौसा। कुण्डल तहसील मुख्यालय में स्थित बड़े महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । श्रद्धालुओं महिलाओं ने लाल व पीले वस्त्रों में दिखाई दी भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, गंगाजल अर्पण तथा बिल्व पत्र इत्र चढ़ाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और परिवार की शुभमंगलकामनाए की गई। मंदिर परिसरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया। दिनभर “हर-हर महादेव”और “बम-बम भोले” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा एवं । कई स्थानों पर युवाओं महिलाएं द्वारा भव्य शिव बारात व ज़ेगड निकाली गई, जिसमें भगवान शिव की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। रात्रि जागरण में गूंजे शिव भजन महाशिवरात्रि की रात्रि को विभिन्न मंदिरों एवं सामुदायिक स्थलों पर भव्य रात्रि जागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय भजन मंडलियों और कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शिव भजन प्रस्तुत किए। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर भजनों पर नृत्य किया। ग्रामीणों द्वारा कई कई जगह पर , फलाहार एवं चाय-पानी की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम की सुव्यवस्थित व्यवस्था के लिए युवाओं और स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आया। सामाजिक एकता और सौहार्द
का संदेश पर्व के अवसर पर समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ दर्शन और पूजा-अर्चना में शामिल हुए। महाशिवरात्रि ने एक बार फिर सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी प्रेम को बढ़ाते हैं। पंडित विष्णु पाराशर ने बताया कि महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इसे शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था और सृष्टि के संचालन की शक्ति का प्रदर्शन किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। इसी स्मरण में भक्त उपवास रखकर रात्रि जागरण करते हैं। महाशिवरात्रि पर व्रत रखने, रुद्राभिषेक करने और रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त इस दिन संयम, तप और भक्ति के माध्यम से आत्मशुद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं। कुंडल एवं आसपास के क्षेत्रों में महाशिवरात्रि का पर्व देर रात तक भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरा क्षेत्र शिवमय वातावरण में सराबोर नजर आया।
- ग्राम पंचायत जौपाडा के खोखला की ढाणी मे शनिवार को रात्री में एक छप्परपोश कच्चे घरों में आग लग गई। इस घटना में घरो में रखा हजारों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि उनके छप्परपोश कच्चे घरों में अज्ञात कारणों से आग लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। घर में रखा 5 बोरी अनाज,50 मन तुडा कपड़े, दैनिक उपयोग का सामान और कुछ 50 हजार रूपये नगद पैसे पूरी तरह जल गए। परिवार के सदस्यों ने भागकर अपनी जान बचाई। आग की लपटें उठती देख गांव के सैकड़ों की संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद करीब एक घंटे बाद आग को फैलने से रोका गया। पीड़ित भोमाराम पुत्र कजोड मल ने घटना की सूचना हल्का पटवारी व सरपंच ग्राम विकास अधिकारी को दी है। उन्होंने प्रशासन से आग से हुई क्षति की भरपाई के लिए त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने भी पीड़ित परिवार की मदद की अपील की है। हल्का पटवारी ने बताया है कि खसरा नम्बर 297 खातेदार भूमि मे छप्परपोश कच्चा घर मे रहता था उपस्थित लोगों ने बताया कि रात को अज्ञात कर्म से पूरे छप्परपोश में आग लग गई जिससे से हजारों रुपए का नुकसान हो गया1
- बस्सी क्षेत्र के आगरा रोड स्थित गायत्री कॉलोनी आशीर्वाद बालाजी धाम पर महाशिवरात्रि के पर्व पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लगी भीड़ इस दौरान श्रद्धालु भोले बाबा के मंदिर में गाजर, मोगरी , बोर प्रसाद माला आदि चढ़ाकर अपने परिवार की सुख शांति की मनोकामना मांगते हुए नजर आए इस दौरान मंदिर में भोले बाबा की जय जयकार लगाते हुए श्रद्धालु नजर आए इस दौरान श्रद्धालुओं में काफी उत्साह दिखाई दिया1
- लालसोट उपखंड में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर महर्षि बालीनाथ धाम मंडावरी में पूर्व संध्या महर्षि बालीनाथ महाराज के जाकर खंडार विधायक जितेंद्र गोठवाल ने महाराज के श्री चरणों में नमन किया और देश और प्रदेश की जनता के लिए सुख समृद्धि और विकास की कामना की इस अवसर पर विधायक गोठवाल ने बैरवा समाज के बारे में विचार व्यक्त किया और महर्षि बालीनाथ के आदर्शों पर चलने के लिए लोगों से कहा महर्षि बालनाथ एक ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने सभी समाज के विकास एवं कृतियों को दूर करने के लिए उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा इसी प्रकार राष्ट्रीय बेरवा विकास संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बीरो विकास संघ के सभी कार्यकर्ता वहां मौजूद रहे बेरवा विकास संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संगठन के कार्यकर्ता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभु दयाल जी जय नारायण जी तहसील अध्यक्ष मन्नालाल जी राम मनोहर जी अशोक जी जगमोहन जी ओम प्रकाश जी बलराम जी श्याम लाल जी राम खिलाड़ी की रामस्वरूप जी महेंद् मनोहर जी घनश्याम जी वह अन्य भक्तगण महर्षि बालीनाथ महाराज के श्री चरणों में नमन किया और उनके आदर्शों पर चलने के लिए वचनबद्ध किया समाज में फैली हुई प्रवृत्तियों को दूर करने काफैसला लिया ।4
- महादेव पूजन1
- yahan bahut jyada condition road ki kharab ho rahi hai civil line bhi Dale hue kam se kam 8 sal ho gaye hain road Dale hue bhi 8 sal Ho Gaye1
- रिंग रोड जयपुर हिंगोनिया टोल प्लाजा की घटना आरटीओ के कर्मचारी पर ट्रक वाले ने चढ़ाया , मौके पर ही मौत1
- करौली-भाजपा अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष का करौली दौरा, खेड़ा टोल प्लाजा पर लोगों ने किया स्वागत1
- सांगानेर मे पहली बार शिव जी की बारात निकाली गई जिसका दृश्य देखने लायक था काफी संख्या मे भीड़ और उज्जैन जैसा नजारा देखने को मिला1
- स्थान --- जयपुर जवाहर सर्किल पत्रिका गेट जयपुर। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अखिल भारतीय घोष दिवस के तहत जयपुर महानगर के महामना मालवीय जिले द्वारा भव्य घोष वादन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मालवीय नगर सेक्टर-3 स्थित आदर्श विद्या मंदिर से हुई, जो अनुशासित संचलन के साथ जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट पर संपन्न हुआ। इस अवसर पर भाग संचालक राममोहन गर्ग एवं बुद्धि प्रकाश का उद्बोधन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों एवं नागरिकों की उपस्थिति रही। घोष वादन की सुमधुर स्वर-लहरियों से पूरा क्षेत्र राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा। बुद्धि प्रकाश ने अपने उद्बोधन में कहा कि देशभर में अनेक स्थानों पर अखिल भारतीय घोष दिवस के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि घोष की परंपरा प्रांगणीय संगीत की वह विधा है, जो मैदान में सामूहिक रूप से प्रस्तुत की जाती है। शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका संगठन अपने शारीरिक कार्यक्रमों के साथ संगीत साधना पर भी विशेष ध्यान देता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान विश्वनाथ के डमरू की स्मृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत और साधना भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग हैं।2