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हिंदू भाई ने अपने ऑटो में "खाटू श्याम जी" का भजन चला रखा था ऑटो में सवार खातूनों ने गाना बंद करने को कहा भाई ने खातूनों को ही बीच रास्ते उतार दिया
पवन सिंह रघुवंशी
हिंदू भाई ने अपने ऑटो में "खाटू श्याम जी" का भजन चला रखा था ऑटो में सवार खातूनों ने गाना बंद करने को कहा भाई ने खातूनों को ही बीच रास्ते उतार दिया
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- पीडीडीयू नगर में इस बार चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन के समय में परिवर्तन देखने को मिला। कहीं 2 तारीख को, तो कही 3 की भोर में तो कहीं देर रात्रि में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से होलिका दहन किया। मंगलवार की रात्रि पीडीडीयू नगर स्थित जी टी रोड धर्मशाला सड़क के सामने होलिका दहन किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। लोगों ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। चंद्र ग्रहण को देखते हुए पंडितों द्वारा निर्धारित मुहूर्त के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर होलिका जलाई गई। सुरक्षा के भी समुचित इंतजाम किए गए थे। होली पर्व को लेकर नगर में उत्साह का माहौल बना हुआ है।1
- चन्दौली वाराणसी खंडग्रास चंद्रग्रहण के अवसर पर मंगलवार को काशी के गंगा घाटों पर आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। ग्रहण के स्पर्श से लेकर मोक्ष काल तक हरिनाम जप, संकीर्तन और साधना का क्रम चलता रहा।दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर उमड़ी भीड़ दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखी गई। ग्रहण काल में दान-पुण्य की मान्यता के चलते बड़ी संख्या में जरूरतमंद और भिक्षुक घाटों के आसपास जुटे रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने दोपहर की गंगा आरती के बाद ही अपने लिए स्थान सुरक्षित कर लिया था।ग्रहण के दौरान लोगों ने घरों में भी उपवास रखा। खाने-पीने की वस्तुओं की शुद्धता के लिए उनमें कुश या तुलसी डालने की परंपरा का पालन किया गया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, जल पुलिस रही सतर्क ग्रहण के मद्देनजर घाटों पर पुलिस और जल पुलिस की विशेष तैनाती की गई थी। जल पुलिस के जवान घाट किनारे बंधी नौकाओं पर मुस्तैद रहे और श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकते रहे। प्रमुख घाटों पर पानी के भीतर बांस लगाकर बैरिकेडिंग की गई थी ताकि कोई दुर्घटना न हो।शंकराचार्य घाट पर शहनाई वादन केदारघाट और हरिश्चंद्र घाट के बीच स्थित शंकराचार्य घाट पर ग्रहणकाल के दौरान आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने शहनाई वादन के माध्यम से प्रभु का सुमिरन किया। ग्रहण काल में भजन और मंत्रजाप की मान्यता के अनुरूप शहनाई की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। बंद रहे मंदिरों के कपाट, मोक्ष के बाद शुरु हुआ दर्शनखंडग्रास चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार सुबह ही काशी के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन हनुमान मंदिर, कालभैरव मंदिर और दुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन रोक दिया गया था।संकटमोचन मंदिर के कपाट प्रातः आरती के बाद सुबह 9 बजे बंद कर दिए गए थे। ग्रहण के मोक्ष के बाद शाम 7 बजे मंदिरों में विधिवत शुद्धिकरण और पूजन के पश्चात दर्शन का क्रम शुरू हुआ। संध्या आरती और रात्रि शयन आरती नियमानुसार संपन्न कराई गई। ग्रहण काल में श्रद्धालु घरों और घाटों पर कीर्तन, मंत्रजाप और साधना में लीन रहे। काशी में एक बार फिर आस्था, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।1
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