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दौसा जिले के मंडावर क्षेत्र के ग्राम उकरूंद में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क अब गंभीर विवादों में घिर गई है। शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने एक दिन पहले बनी सड़क के हिस्से को खुद तोड़कर उसकी गुणवत्ता की पोल खोल दी, जिसके बाद सड़क निर्माण स्थल आंदोलन का केंद्र बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है और निर्माण में गंभीर अनियमितताएं, घटिया सामग्री का उपयोग और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक टिकाऊ रहने वाली यह सड़क निर्माण के अगले ही दिन टूटने लगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा; इसमें घटिया बजरी, डस्ट और कम मात्रा में सीमेंट का प्रयोग हो रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने शिकायत की कि सड़क निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है, फिर भी काम अधूरा है और इसमें तेजी दिखाने के बजाय गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। एक और गंभीर आरोप यह है कि जल निकासी के लिए हर निर्धारित दूरी पर पाइप लाइन डालने का नियम है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा, जिससे भविष्य में जलभराव और सड़क के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। इन गंभीर गड़बड़ियों की शिकायत पर ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता (एईएन) को मौके पर बुलाया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जमा हो गए और ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच, नमूने लैब में भेजना, जिम्मेदारी तय करना और जल निकासी की उचित व्यवस्था शामिल है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। उकरूंद में यह 50 लाख रुपये की सड़क अब केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर एक बड़ा सवाल बन गई है। ग्रामीणों द्वारा नई बनी सड़क को तोड़ा जाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब सभी की नजर प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क इतनी कमजोर क्यों बनी?

6 hrs ago
user_Rajasthan lok news 24x7
Rajasthan lok news 24x7
Court reporter मंडावर, दौसा, राजस्थान•
6 hrs ago

दौसा जिले के मंडावर क्षेत्र के ग्राम उकरूंद में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क अब गंभीर विवादों में घिर गई है। शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने एक दिन पहले बनी सड़क के हिस्से को खुद तोड़कर उसकी गुणवत्ता की पोल खोल दी, जिसके बाद सड़क निर्माण स्थल आंदोलन का केंद्र बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है और निर्माण में गंभीर अनियमितताएं, घटिया सामग्री का उपयोग और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक टिकाऊ रहने वाली यह सड़क निर्माण के अगले ही दिन टूटने लगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा; इसमें घटिया बजरी, डस्ट और कम मात्रा में सीमेंट का प्रयोग हो रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने शिकायत की कि सड़क निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है, फिर भी काम अधूरा है और इसमें तेजी दिखाने के बजाय गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। एक और गंभीर आरोप यह है कि जल निकासी के लिए हर निर्धारित दूरी पर पाइप लाइन डालने का नियम है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा, जिससे भविष्य में जलभराव और सड़क के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। इन गंभीर

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गड़बड़ियों की शिकायत पर ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता (एईएन) को मौके पर बुलाया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जमा हो गए और ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच, नमूने लैब में भेजना, जिम्मेदारी तय करना और जल निकासी की उचित व्यवस्था शामिल है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। उकरूंद में यह 50 लाख रुपये की सड़क अब केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर एक बड़ा सवाल बन गई है। ग्रामीणों द्वारा नई बनी सड़क को तोड़ा जाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब सभी की नजर प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क इतनी कमजोर क्यों बनी?

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  • दौसा जिले के मंडावर क्षेत्र के ग्राम उकरूंद में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क अब गंभीर विवादों में घिर गई है। शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने एक दिन पहले बनी सड़क के हिस्से को खुद तोड़कर उसकी गुणवत्ता की पोल खोल दी, जिसके बाद सड़क निर्माण स्थल आंदोलन का केंद्र बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है और निर्माण में गंभीर अनियमितताएं, घटिया सामग्री का उपयोग और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक टिकाऊ रहने वाली यह सड़क निर्माण के अगले ही दिन टूटने लगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा; इसमें घटिया बजरी, डस्ट और कम मात्रा में सीमेंट का प्रयोग हो रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने शिकायत की कि सड़क निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है, फिर भी काम अधूरा है और इसमें तेजी दिखाने के बजाय गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। एक और गंभीर आरोप यह है कि जल निकासी के लिए हर निर्धारित दूरी पर पाइप लाइन डालने का नियम है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा, जिससे भविष्य में जलभराव और सड़क के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। इन गंभीर गड़बड़ियों की शिकायत पर ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता (एईएन) को मौके पर बुलाया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जमा हो गए और ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच, नमूने लैब में भेजना, जिम्मेदारी तय करना और जल निकासी की उचित व्यवस्था शामिल है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। उकरूंद में यह 50 लाख रुपये की सड़क अब केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर एक बड़ा सवाल बन गई है। ग्रामीणों द्वारा नई बनी सड़क को तोड़ा जाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब सभी की नजर प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क इतनी कमजोर क्यों बनी?
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    दौसा जिले के मंडावर क्षेत्र के ग्राम उकरूंद में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क अब गंभीर विवादों में घिर गई है। शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने एक दिन पहले बनी सड़क के हिस्से को खुद तोड़कर उसकी गुणवत्ता की पोल खोल दी, जिसके बाद सड़क निर्माण स्थल आंदोलन का केंद्र बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है और निर्माण में गंभीर अनियमितताएं, घटिया सामग्री का उपयोग और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक टिकाऊ रहने वाली यह सड़क निर्माण के अगले ही दिन टूटने लगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा; इसमें घटिया बजरी, डस्ट और कम मात्रा में सीमेंट का प्रयोग हो रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने शिकायत की कि सड़क निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है, फिर भी काम अधूरा है और इसमें तेजी दिखाने के बजाय गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। एक और गंभीर आरोप यह है कि जल निकासी के लिए हर निर्धारित दूरी पर पाइप लाइन डालने का नियम है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा, जिससे भविष्य में जलभराव और सड़क के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है।

इन गंभीर गड़बड़ियों की शिकायत पर ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता (एईएन) को मौके पर बुलाया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जमा हो गए और ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच, नमूने लैब में भेजना, जिम्मेदारी तय करना और जल निकासी की उचित व्यवस्था शामिल है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।

उकरूंद में यह 50 लाख रुपये की सड़क अब केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर एक बड़ा सवाल बन गई है। ग्रामीणों द्वारा नई बनी सड़क को तोड़ा जाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब सभी की नजर प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क इतनी कमजोर क्यों बनी?
    user_Rajasthan lok news 24x7
    Rajasthan lok news 24x7
    Court reporter मंडावर, दौसा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • Post by Saurabh meena
    1
    Post by Saurabh meena
    user_Saurabh meena
    Saurabh meena
    भुसावर, भरतपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • आज करौली जिले के पत्रकारों की एक आवश्यक बैठक हिंडौन के सनी रिजॉर्ट में आयोजित की गई। इस बैठक में पत्रकार बंधुओं और संगठन के पदाधिकारियों ने पत्रकारों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान, संगठन में एकजुटता और मजबूती लाने पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर से आए पत्रकार बंधुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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    आज करौली जिले के पत्रकारों की एक आवश्यक बैठक हिंडौन के सनी रिजॉर्ट में आयोजित की गई। इस बैठक में पत्रकार बंधुओं और संगठन के पदाधिकारियों ने पत्रकारों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान, संगठन में एकजुटता और मजबूती लाने पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में जिले भर से आए पत्रकार बंधुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
    user_कैलाश सत्तावन टोडाभीम
    कैलाश सत्तावन टोडाभीम
    टोडाभीम, करौली, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • अखिल भारतीय प्रारंभिक शिक्षक महासंघ राजस्थान इकाई के आह्वान पर बीकानेर के निदेशालय परिसर में शिक्षा विभाग में कार्यरत संविदा और नियमित शिक्षकों ने अपनी वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों के निराकरण हेतु एक विशाल प्रांतीय धरना आयोजित किया। यह धरना शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए बुलाया गया था। धरने को विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया, जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राममूर्ति स्वामी, प्रदेश संयोजक जगदीश ढाका, शिवशंकर गोदारा और झालावाड़ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष भारत भूषण मीणा प्रमुख थे। वक्ताओं ने सरकार से समय रहते इन मांगों को पूरा करने का आग्रह किया। प्रमुख मांगों में संविदा कार्मिकों का नियमितीकरण, टेट (TET) की अनिवार्यता वापस लेना, पदोन्नतियों को शीघ्र अमलीजामा पहनाना, वेतन विसंगतियों को दूर करना, वेतन वसूली पर रोक लगाना और शिक्षकों के मान-सम्मान का पूरा ध्यान रखना शामिल था। इस दौरान निदेशक महोदय को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें समस्याओं के त्वरित निराकरण की मांग की गई। शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का त्वरित निराकरण नहीं किया जाता है, तो संपूर्ण प्रदेश में आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। झालावाड़ जिले से भारत भूषण मीणा के नेतृत्व में जगदीश प्रसाद, मांगीलाल, रामप्रकाश, दुर्गाशंकर, दिलराज सहित दर्जनों शिक्षकों ने शिक्षक संघ प्रगतिशील की ओर से इस विशाल धरने में सक्रिय भागीदारी की।
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    अखिल भारतीय प्रारंभिक शिक्षक महासंघ राजस्थान इकाई के आह्वान पर बीकानेर के निदेशालय परिसर में शिक्षा विभाग में कार्यरत संविदा और नियमित शिक्षकों ने अपनी वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों के निराकरण हेतु एक विशाल प्रांतीय धरना आयोजित किया। यह धरना शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए बुलाया गया था।

धरने को विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया, जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राममूर्ति स्वामी, प्रदेश संयोजक जगदीश ढाका, शिवशंकर गोदारा और झालावाड़ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष भारत भूषण मीणा प्रमुख थे। वक्ताओं ने सरकार से समय रहते इन मांगों को पूरा करने का आग्रह किया। प्रमुख मांगों में संविदा कार्मिकों का नियमितीकरण, टेट (TET) की अनिवार्यता वापस लेना, पदोन्नतियों को शीघ्र अमलीजामा पहनाना, वेतन विसंगतियों को दूर करना, वेतन वसूली पर रोक लगाना और शिक्षकों के मान-सम्मान का पूरा ध्यान रखना शामिल था।

इस दौरान निदेशक महोदय को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें समस्याओं के त्वरित निराकरण की मांग की गई। शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का त्वरित निराकरण नहीं किया जाता है, तो संपूर्ण प्रदेश में आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। झालावाड़ जिले से भारत भूषण मीणा के नेतृत्व में जगदीश प्रसाद, मांगीलाल, रामप्रकाश, दुर्गाशंकर, दिलराज सहित दर्जनों शिक्षकों ने शिक्षक संघ प्रगतिशील की ओर से इस विशाल धरने में सक्रिय भागीदारी की।
    user_Neeraj Maheshwari
    Neeraj Maheshwari
    Reporters राजगढ़, अलवर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • अलवर जिले के मुबारिकपुर गाँव के ग्रामीणों ने अपनी दैनिक आवागमन की समस्या को उजागर करते हुए मुबारिकपुर से अलवर के लिए बंद पड़ी बस सेवा को तुरंत फिर से शुरू करने की जोरदार मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि मुबारिकपुर से बड़ी संख्या में छात्र, कर्मचारी, व्यापारी सहित अन्य लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं, और बस सुविधा के अभाव में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने बस स्टैंड पर भी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए, ग्रामीणों ने मत्स्यनगर आगार के मुख्य प्रबंधक को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें बस संचालन को तत्काल बहाल करने और बस स्टैंड का सौंदर्यीकरण कराने की अपील की गई है।
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    अलवर जिले के मुबारिकपुर गाँव के ग्रामीणों ने अपनी दैनिक आवागमन की समस्या को उजागर करते हुए मुबारिकपुर से अलवर के लिए बंद पड़ी बस सेवा को तुरंत फिर से शुरू करने की जोरदार मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि मुबारिकपुर से बड़ी संख्या में छात्र, कर्मचारी, व्यापारी सहित अन्य लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं, और बस सुविधा के अभाव में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने बस स्टैंड पर भी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए, ग्रामीणों ने मत्स्यनगर आगार के मुख्य प्रबंधक को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें बस संचालन को तत्काल बहाल करने और बस स्टैंड का सौंदर्यीकरण कराने की अपील की गई है।
    user_R Balvinder Singh
    R Balvinder Singh
    Court reporter रामगढ़, अलवर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • अलवर के थानागाजी में एससी प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष धर्मवीर वर्मा ने अपना 36वां जन्मदिन रक्तदान शिविर का आयोजन कर मनाया। इस विशेष अवसर पर, माननीय प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली ने फोन के माध्यम से उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। जिला अध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने भी फोन पर धर्मवीर वर्मा को शुभकामनाएँ दीं, जबकि जिला अध्यक्ष जलाराम एससी प्रकोष्ठ ने स्वयं उपस्थित होकर उन्हें बधाई दी और सम्मानित किया। शिविर में रक्तदान करने वाले सभी दाताओं को हेलमेट और एक प्रत्येक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में पत्रकार और मानव अधिकार प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी राजेंद्र जी, और अमित सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
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    अलवर के थानागाजी में एससी प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष धर्मवीर वर्मा ने अपना 36वां जन्मदिन रक्तदान शिविर का आयोजन कर मनाया। इस विशेष अवसर पर, माननीय प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली ने फोन के माध्यम से उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

जिला अध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने भी फोन पर धर्मवीर वर्मा को शुभकामनाएँ दीं, जबकि जिला अध्यक्ष जलाराम एससी प्रकोष्ठ ने स्वयं उपस्थित होकर उन्हें बधाई दी और सम्मानित किया। शिविर में रक्तदान करने वाले सभी दाताओं को हेलमेट और एक प्रत्येक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में पत्रकार और मानव अधिकार प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी राजेंद्र जी, और अमित सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
    user_महेंद्र सिंह
    महेंद्र सिंह
    Local News Reporter अलवर, अलवर, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • अलवर के बगर तिराया डंपिंग यार्ड में 15-16 मृत गौवंश मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना की खबर मिलते ही गौभक्तों और प्रशासन की एक टीम तत्काल मौके पर पहुँच गई। इस गंभीर मामले में अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इस घटना का जिम्मेदार कौन है।
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    अलवर के बगर तिराया डंपिंग यार्ड में 15-16 मृत गौवंश मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना की खबर मिलते ही गौभक्तों और प्रशासन की एक टीम तत्काल मौके पर पहुँच गई। इस गंभीर मामले में अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इस घटना का जिम्मेदार कौन है।
    user_Voice of Labour
    Voice of Labour
    Alwar, Rajasthan•
    18 hrs ago
  • तालुका विधिक सेवा समिति राजगढ़ की सचिव भाग्यश्री मीणा ने बताया कि माननीय अध्यक्ष, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तालुका विधिक सेवा समिति राजगढ़, जिला अलवर के निर्देशानुसार 20 जून 2026 को एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राजगढ़ मुख्यालय स्थित करोठ, काली पहाड़ी और बड़ला गांवों में मोबाइल वैन के माध्यम से आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से लगाया गया था। इस शिविर में पीएलवी श्री सुबेन्द्र कुमार सैनी ने उपस्थित नागरिकों को नालसा (मानव-वन्यजीव संघर्ष से पीड़ित के लिए विधिक सेवाएँ) योजना 2025 और नालसा वीर परिवार सहायता योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही, बाल विवाह उन्मूलन, बाल विवाह रोकथाम और बाल विवाह निषेध अधिनियम से संबंधित विषयों पर भी महत्वपूर्ण विधिक जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने NALSA योजना के तहत निःशुल्क विधिक सहायता, बाल विवाह पर प्रतिबंध, विवाह की कानूनी आयु, बाल विवाह के प्रतिकूल सामाजिक परिणाम, बच्चों के अधिकार और उपलब्ध कानूनी उपायों के संबंध में भी लोगों को जागरूक किया। शिविर के दौरान विशेष योग्यजनों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही, NALSA हेल्पलाइन नंबर 15100 के विषय में भी उपस्थित लोगों को अवगत कराया गया।
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    तालुका विधिक सेवा समिति राजगढ़ की सचिव भाग्यश्री मीणा ने बताया कि माननीय अध्यक्ष, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तालुका विधिक सेवा समिति राजगढ़, जिला अलवर के निर्देशानुसार 20 जून 2026 को एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राजगढ़ मुख्यालय स्थित करोठ, काली पहाड़ी और बड़ला गांवों में मोबाइल वैन के माध्यम से आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से लगाया गया था।

इस शिविर में पीएलवी श्री सुबेन्द्र कुमार सैनी ने उपस्थित नागरिकों को नालसा (मानव-वन्यजीव संघर्ष से पीड़ित के लिए विधिक सेवाएँ) योजना 2025 और नालसा वीर परिवार सहायता योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही, बाल विवाह उन्मूलन, बाल विवाह रोकथाम और बाल विवाह निषेध अधिनियम से संबंधित विषयों पर भी महत्वपूर्ण विधिक जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने NALSA योजना के तहत निःशुल्क विधिक सहायता, बाल विवाह पर प्रतिबंध, विवाह की कानूनी आयु, बाल विवाह के प्रतिकूल सामाजिक परिणाम, बच्चों के अधिकार और उपलब्ध कानूनी उपायों के संबंध में भी लोगों को जागरूक किया।

शिविर के दौरान विशेष योग्यजनों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही, NALSA हेल्पलाइन नंबर 15100 के विषय में भी उपस्थित लोगों को अवगत कराया गया।
    user_Neeraj Maheshwari
    Neeraj Maheshwari
    Reporters राजगढ़, अलवर, राजस्थान•
    21 hrs ago
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