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मंदसौर तहसील की कार्रवाई के खिलाफ एक किसान का सब्र जवाब दे गया। अपना धैर्य खोकर, किसान ने कड़ी धूप में बैठकर सीधे तौर पर तहसील द्वारा की जा रही कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह कदम तहसील की कार्यप्रणाली से उसकी अत्यधिक परेशानी को दर्शाता है, जिसके चलते उसे विरोध का यह रास्ता अपनाना पड़ा।
भविष्य न्यूज़ 24
मंदसौर तहसील की कार्रवाई के खिलाफ एक किसान का सब्र जवाब दे गया। अपना धैर्य खोकर, किसान ने कड़ी धूप में बैठकर सीधे तौर पर तहसील द्वारा की जा रही कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह कदम तहसील की कार्यप्रणाली से उसकी अत्यधिक परेशानी को दर्शाता है, जिसके चलते उसे विरोध का यह रास्ता अपनाना पड़ा।
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- नीमच शहर के स्कीम नंबर 36-ए स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में 31 मई से लेकर 7 जून तक एक सात दिवसीय धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ होगा, जिसमें श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा, भूमिया सरकार का दिव्य दरबार और महाप्रसादी सहित कई अन्य धार्मिक आयोजन शामिल रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कार्यक्रम स्थल पर विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं।1
- दतिया में बुधवार, 29 मई 2026 को मांझी समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। समाज ने विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची क्रमांक-12 से हटाने और उन्हें मूल मांझी जनजाति के रूप में मान्यता देने की मांग की। उनका कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों में इन जातियों को मांझी जनजाति का अभिन्न हिस्सा माना गया है। ज्ञापन में बताया गया कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख द्वारा 7 जनवरी 1950 को जारी परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS-49 में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को मांझी जाति के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग मध्यप्रदेश के आयुक्त द्वारा जारी पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी इन समुदायों को मूल रूप से मांझी जनजाति में समाहित माना गया है। समाज ने यह भी दावा किया कि 13 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश विधानसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न क्रमांक-1121 के उत्तर में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने भी स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश क्षेत्र के केवट, धीमर, मल्लाह एवं भोई समुदाय मांझी जनजाति के ही अंग हैं। मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया एवं टीकमगढ़ जिलों में "मांझी" नाम से कोई पृथक जाति मौजूद नहीं है। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को ही मूल मांझी जनजाति के रूप में जाना और पहचाना जाता है। समाजजनों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उपलब्ध ऐतिहासिक एवं शासकीय दस्तावेजों का गहन परीक्षण कर इन समुदायों को ओबीसी सूची से हटाकर उन्हें मूल मांझी जनजाति के समस्त अधिकार प्रदान किए जाएं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उसे शासन स्तर तक उचित कार्रवाई हेतु भेजने का आश्वासन दिया।2
- मंदसौर तहसील की कार्रवाई के खिलाफ एक किसान का सब्र जवाब दे गया। अपना धैर्य खोकर, किसान ने कड़ी धूप में बैठकर सीधे तौर पर तहसील द्वारा की जा रही कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह कदम तहसील की कार्यप्रणाली से उसकी अत्यधिक परेशानी को दर्शाता है, जिसके चलते उसे विरोध का यह रास्ता अपनाना पड़ा।1
- मनासा क्षेत्र के सेमली आंतरी गांव में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां नदी में नहाने गए बाप-बेटे की डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतकों की पहचान दशरथ पिता ईश्वर सिंह (40 वर्ष) और उनके पुत्र लखन पिता दशरथ (20 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दशरथ और लखन देर शाम नदी में नहाने के लिए गए थे। नहाते समय बेटा लखन अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। अपने बेटे को बचाने के प्रयास में पिता दशरथ ने भी नदी में छलांग लगा दी, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण दोनों पानी में समा गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, परंतु सफलता नहीं मिल पाई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) टीम को बुलाया गया। SDRF टीम द्वारा देर शाम तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिसके फलस्वरूप दशरथ का शव बरामद कर लिया गया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उनके पुत्र लखन की तलाश जारी थी। इस दुखद हादसे के कारण सेमली आंतरी गांव में गहरा मातम पसरा हुआ है।1
- मनासा तहसील के सेमली आंतरी गांव में नदी में डूबने की एक दर्दनाक घटना के बाद, विधायक अनिरुद्ध माधव मारू तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। विधायक मारू ने इस हादसे को "अत्यंत दुखद और हृदय विदारक" बताते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि वे इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ पूरी तरह खड़े हैं, तथा दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति मिले, इसकी प्रार्थना की।1
- नीमच से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ सड़क निर्माण कार्य के दौरान हुई एक दुर्घटना में एक युवक की जान चली गई। बताया जा रहा है कि यह घटना नीमच सिटी थाना क्षेत्र के बोरदिया गांव से अपने गांव आमलीखेड़ा लौट रहे रघुवीर सिंह के साथ हुई, जब वे अपनी मेडिकल दुकान बंद कर घर जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, जिस मार्ग से रघुवीर सिंह गुजर रहे थे, वहाँ सड़क निर्माण कार्य चल रहा था और सड़क के ठीक बीचों-बीच मिट्टी का एक ढेर पड़ा हुआ था। इसी दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर उस मिट्टी के ढेर पर चढ़ गई, जिससे रघुवीर सिंह लगभग 10 फीट दूर जा गिरे और उनके सिर में गंभीर चोट आई। हादसे के बाद, मौके पर मौजूद राहगीरों ने तत्काल मानवता का परिचय देते हुए उन्हें एक निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुँचाया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने रघुवीर सिंह का उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान ही उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई, और उनके अंकल बलवंत सिंह भी तुरंत अस्पताल पहुँचे। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। फिलहाल, इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। इस घटना ने सड़क निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1