बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी के राखड़ बांध से लगातार हो रहे जल रिसाव को लेकर किसानों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के बैनर तले प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से हो रहे फसल नुकसान की भरपाई और स्थायी समाधान की मांग की है। किसानों का आरोप है कि एनटीपीसी सीपत के राखड़ बांध नंबर-3 से वर्ष 2007 से लगातार जल रिसाव हो रहा है। इसके कारण आसपास की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी खेती बर्बाद हो रही है और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि प्रभावित किसान वर्ष 2009 से लगातार मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उचित राहत नहीं मिल सकी है। किसानों का कहना है कि उनकी जीविका का मुख्य आधार खेती और सब्जी उत्पादन है, लेकिन जलभराव और भूमि की क्षति के कारण वे खेती करने से वंचित हो रहे हैं। किसानों ने प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में अपनी लगभग 5.34 एकड़ भूमि प्रभावित होने की बात कही है। इस मामले को लेकर पहले भी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा संबंधित विभागों को पत्र लिखकर किसानों की समस्या पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आग्रह किया गया था। उस पत्र में उल्लेख था कि सीपत क्षेत्र के आठ गांवों के सैकड़ों किसान इस समस्या से प्रभावित हैं और लगभग 500 एकड़ भूमि पर खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा है कि वर्ष 2009 से अब तक हुए फसल नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। वहीं, जिला प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी के राखड़ बांध से लगातार हो रहे जल रिसाव को लेकर किसानों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के बैनर तले प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से हो रहे फसल नुकसान की भरपाई और स्थायी समाधान की मांग की है। किसानों का आरोप है कि एनटीपीसी सीपत के राखड़ बांध नंबर-3 से वर्ष 2007 से लगातार जल रिसाव हो रहा है। इसके कारण आसपास
की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी खेती बर्बाद हो रही है और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि प्रभावित किसान वर्ष 2009 से लगातार मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उचित राहत नहीं मिल सकी है। किसानों का कहना है कि उनकी जीविका का मुख्य आधार खेती और सब्जी उत्पादन है, लेकिन जलभराव और भूमि की क्षति के कारण वे खेती करने से वंचित हो रहे
हैं। किसानों ने प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में अपनी लगभग 5.34 एकड़ भूमि प्रभावित होने की बात कही है। इस मामले को लेकर पहले भी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा संबंधित विभागों को पत्र लिखकर किसानों की समस्या पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आग्रह किया गया था। उस पत्र में उल्लेख था कि सीपत क्षेत्र के आठ गांवों के सैकड़ों किसान इस समस्या से प्रभावित हैं और लगभग 500
एकड़ भूमि पर खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा है कि वर्ष 2009 से अब तक हुए फसल नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। वहीं, जिला प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
- रायगढ़ के कोतरारोड थाना में आबकारी अधिनियम के तहत गिरफ्तार बंदी संजय बघेल की संदिग्ध मृत्यु के मामले में ज़िला पुलिस ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है। मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, एसएसपी शशि मोहन सिंह ने मीडिया के सामने थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और पूरी कार्रवाई का ब्यौरा प्रस्तुत किया। पुलिस ने दावा किया है कि गिरफ्तारी से लेकर जेल भेजे जाने तक आरोपी के साथ किसी भी चरण में मारपीट या दुर्व्यवहार नहीं किया गया। पुलिस के अनुसार, 10 जून को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए संजय बघेल के कब्ज़े से 30 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद की गई थी। दोपहर 12:43 बजे उसे कोतरारोड थाना लाया गया और वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर दोपहर 2:15 बजे विधिवत गिरफ्तार किया गया। एसएसपी ने बताया कि थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज में संजय बघेल के साथ पुलिस का सामान्य और मानवीय व्यवहार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिसमें उसे पानी पिलाते, भोजन कराते और परिजनों से मुलाकात कराते हुए भी दिखाया गया है। शाम 4:35 बजे संजय बघेल को मेडिकल परीक्षण और न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए थाना से रवाना किया गया था, जहाँ चिकित्सीय परीक्षण के दौरान उसने किसी चोट या शारीरिक परेशानी की शिकायत नहीं की, और मेडिकल रिपोर्ट में उसे फिट बताया गया था। इसके बाद शाम करीब 6:30 बजे परिजनों की मौजूदगी में उसे जेल दाखिल कराया गया। पुलिस ने मामले में प्राप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मृतक के शरीर पर पाई गई चोटों को मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण नहीं माना गया है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच कराई जा रही है, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। संजय बघेल की मृत्यु की न्यायिक जांच जेएमएफसी रायगढ़ द्वारा की जा रही है, जिसमें पुलिस पूरा सहयोग देने और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कह रही है। हालांकि, मृतक के परिजनों द्वारा पुलिसकर्मियों पर रुपये लेने के आरोप को एसएसपी ने गंभीरता से लिया है। इस आरोप के चलते मामले के जांचकर्ता प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और आरक्षक शंभू चौहान को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। इस शिकायत की विस्तृत जांच डीएसपी मुख्यालय को सौंपी गई है।1
- बिलासपुर में एक पॉक्सो मामले की जाँच में लापरवाही सामने आने के बाद एसएसपी ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस कार्रवाई के तहत, सिरगिट्टी थाना प्रभारी टीआई अभय सिंह और एसआई संतोषी अग्रवाल को लाइन अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह टीआई वायपी सिंह को सिरगिट्टी का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसी तरह, पचपेड़ी थाना प्रभारी राज सिंह को भी पद से हटाकर टीआई कमला पुसाम को उस थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह प्रशासनिक कार्रवाई मुख्यमंत्री से शिकायत मिलने के बाद की गई। एसएसपी ने मामले की जाँच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर तलब की है।1
- बिलासपुर में पुलिस देवदूत की तरह पहुंची और एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान बचाई है।1
- बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी के राखड़ बांध से लगातार हो रहे जल रिसाव को लेकर किसानों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के बैनर तले प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से हो रहे फसल नुकसान की भरपाई और स्थायी समाधान की मांग की है। किसानों का आरोप है कि एनटीपीसी सीपत के राखड़ बांध नंबर-3 से वर्ष 2007 से लगातार जल रिसाव हो रहा है। इसके कारण आसपास की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी खेती बर्बाद हो रही है और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि प्रभावित किसान वर्ष 2009 से लगातार मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उचित राहत नहीं मिल सकी है। किसानों का कहना है कि उनकी जीविका का मुख्य आधार खेती और सब्जी उत्पादन है, लेकिन जलभराव और भूमि की क्षति के कारण वे खेती करने से वंचित हो रहे हैं। किसानों ने प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में अपनी लगभग 5.34 एकड़ भूमि प्रभावित होने की बात कही है। इस मामले को लेकर पहले भी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा संबंधित विभागों को पत्र लिखकर किसानों की समस्या पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आग्रह किया गया था। उस पत्र में उल्लेख था कि सीपत क्षेत्र के आठ गांवों के सैकड़ों किसान इस समस्या से प्रभावित हैं और लगभग 500 एकड़ भूमि पर खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा है कि वर्ष 2009 से अब तक हुए फसल नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। वहीं, जिला प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।4
- भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत और विशेष रूप से रायगढ़ कथक घराने के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है, क्योंकि रायगढ़ कथक घराने के वरिष्ठ कथकाचार्य एवं पद्मश्री से सम्मानित पंडित रामलाल बरेठ को 'अकादमी रत्न' से सम्मानित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह सम्मान पंडित बरेठ के साथ-साथ रायगढ़ की कला विरासत के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।1
- Post by Kallu Bakoriya1
- न्यायधानी बिलासपुर में सोमवार का दिन खूनी वारदातों के नाम रहा, जहाँ महज कुछ घंटों के भीतर दो अलग-अलग हत्या की घटनाओं ने पूरे शहर को दहला दिया। पहली घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की दीनदयाल आवास कॉलोनी में सामने आई, जहाँ 65 वर्षीय पंचू सोनवानी ने अपनी पत्नी सुमित्रा सोनवानी की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी। प्रारंभिक जाँच में इस हत्याकांड की वजह चरित्र संदेह और पारिवारिक विवाद बताई गई है। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम तुरंत मौके पर पहुँची, जिसके बाद आरोपी पति पंचू सोनवानी को हिरासत में ले लिया गया। इसी 12 घंटे की अवधि में शहर में एक और हत्या की वारदात हुई, जिसमें पत्थरों से कुचलकर जान ली गई।1
- बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित संगम नगर में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ 70 वर्षीय पंचूराम सोनवानी ने अपनी पत्नी सुमित्रा बाई सोनवानी की हत्या कर दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी पंचूराम अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था, जिसके चलते दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। मंगलवार को उनका विवाद हिंसक हो गया और पंचूराम ने धारदार हथियार से सुमित्रा बाई पर हमला कर दिया, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया। इस भयावह घटना ने पूरे बिलासपुर को झकझोर कर रख दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि एक ही दिन में सिविल लाइन और सिरगिट्टी क्षेत्र में हुई यह हत्या की दूसरी वारदात थी। 70 साल की उम्र में हत्यारा बनकर सलाखों के पीछे पहुँचे पंचूराम सोनवानी की इस करतूत ने इलाके में सनसनी फैला दी है।1