तिल्दा नेवरा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन, 597 मामलों का हुआ निराकरण तिल्दा नेवरा में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आपसी सहमति और संवाद के जरिए न्याय प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है। व्यवहार न्यायालय तिल्दा नेवरा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में कुल 597 मामलों का निराकरण किया गया। लोक अदालत के दौरान कुल 6 लाख 95 हजार 800 रुपये के अवार्ड पारित किए गए, जिससे सैकड़ों लोगों को राहत मिली। अदालत में क्रिमिनल केस, चेक बाउंस, ट्रैफिक चालान, बैंक संबंधी प्रकरण, मोटर दुर्घटना क्लेम, बीमा विवाद, पारिवारिक मामले, बिजली बिल, संपत्तिकर, जलकर सहित अन्य राजीनामा योग्य मामलों का समाधान किया गया। कई ऐसे मामले, जो वर्षों से लंबित थे, उनका आपसी सहमति से निपटारा हुआ। इससे जहां आम नागरिकों को त्वरित न्याय मिला, वहीं विभिन्न विभागों को भी लंबित वसूली और विवादों के समाधान का अवसर प्राप्त हुआ। लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर न्यायालय एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने इसे न्याय व्यवस्था को सुलभ और जनहितकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
तिल्दा नेवरा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन, 597 मामलों का हुआ निराकरण तिल्दा नेवरा में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आपसी सहमति और संवाद के जरिए न्याय प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है। व्यवहार न्यायालय तिल्दा नेवरा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में कुल 597 मामलों का निराकरण किया गया। लोक अदालत के दौरान कुल 6 लाख 95 हजार 800 रुपये के अवार्ड पारित किए गए, जिससे सैकड़ों लोगों को राहत मिली। अदालत में क्रिमिनल केस, चेक बाउंस, ट्रैफिक चालान, बैंक संबंधी प्रकरण, मोटर दुर्घटना क्लेम, बीमा विवाद, पारिवारिक मामले, बिजली बिल, संपत्तिकर, जलकर सहित अन्य राजीनामा योग्य मामलों का समाधान किया गया। कई ऐसे मामले, जो वर्षों से लंबित थे, उनका आपसी सहमति से निपटारा हुआ। इससे जहां आम नागरिकों को त्वरित न्याय मिला, वहीं विभिन्न विभागों को भी लंबित वसूली और विवादों के समाधान का अवसर प्राप्त हुआ। लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर न्यायालय एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने इसे न्याय व्यवस्था को सुलभ और जनहितकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
- कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… गरियाबंद। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है? जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है। आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है? क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है? विडंबना देखिए… एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है। पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है। लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है। आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े। यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा? प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए। क्योंकि अगर कलम डर गई… तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी। आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें। लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है। “अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”1
- दुर्घटना को आमंत्रण देता सदर रोड पर जंग लगा बिजली का खंबा वार्ड पार्षद को नहीं है इसकी कोई जानकारी दुर्घटना को आमंत्रण देता सदर रोड पर जंग लगकर सड चुका वार्ड क्रमांक 11 का बिजली का खंबा नवापारा राजिम। नगर पालिका क्षेत्र के सबसे व्यस्ततम मार्ग सदर रोड में पुष्पा फोटो स्टूडियो के पास स्थित एक बिजली का खंबा जंग लगने के कारण खराब हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खंबा कभी भी आंधी तूफान या तेज हवाओं में धराशायी हो सकता है। हाल ही में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा है और शाम के समय तेज हवाओं के साथ आंधी तूफान की संभावना रहती है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि वार्ड नंबर 11स्थित यह खंबा सड़क पर चलते वाहन चालकों और राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। किसी भी समय खंबा टूट कर गिर सकता है, जिससे बड़ी दुर्घटना की आशंका है। उन्होंने बिजली विभाग से आग्रह किया है कि इस खंभे को तत्काल बदलकर सुरक्षित किया जाए। नगरवासियों का कहना है कि सदर रोड नगर का हृदय स्थल होने के कारण यहां आने-जाने वाले लोगों की संख्या अधिक रहती है, इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह अत्यंत आवश्यक है कि बिजली विभाग तत्काल कार्रवाई करे। अगर समय रहते इसे ठीक नहीं किया गया तो गंभीर हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.2
- माल वाहन गाड़ियों भी सवारी ले जाते हुए बलौदा बाजार मुख्यालय से गुजर कर जा रही है गाड़ियां यातायात के नियमों का उड़ा रहे हैं धज्जियां अब देखते हैं क्या ऐसे लोगों पर भी होगी कार्रवाई1
- छत्तीसगढ़ में 12वीं हिंदी परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी वेणु जंघेल को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी से इस बड़े घोटाले के पीछे की पूरी कड़ी खुलने की उम्मीद जगी है, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ा था।1
- बिलासपुर के परसदा गाँव में मदर्स डे पर एक शराबी बेटे ने अपनी माँ और बहन के साथ बेल्ट व लोटे से बेरहमी से मारपीट की। इस हमले में माँ और बहन दोनों घायल हो गईं, जिसके बाद उन्होंने चकरभाठा थाने में शिकायत दर्ज कराई। आरोपी बेटा नशे का आदी है, जिसकी वजह से उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर जा चुकी है।1
- बिलासपुर के बिल्हा में स्थित मानस केटरिंग, अपनी लाजवाब सेवाओं के लिए क्षेत्र में लोकप्रिय है। यह स्थानीय आयोजनों और उत्सवों में स्वादिष्ट भोजन का भरोसेमंद विकल्प बन गया है।1
- धान घोटाले में 'डिजिटल डाका'! कंप्यूटर ऑपरेटर ने किसानों के नाम पर डकारे लाख, अफसरों की चुप्पी से 'सिस्टम' पर सवाल धान घोटाले में 'डिजिटल डाका'! कंप्यूटर ऑपरेटर ने किसानों के नाम पर डकारे लाख, अफसरों की चुप्पी से 'सिस्टम' पर सवाल1
- कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735 गरियाबंद। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है? जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है। आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है? क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है? विडंबना देखिए… एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है। पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है। लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है। आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े। यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा? प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए। क्योंकि अगर कलम डर गई… तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी। आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें। लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है। “अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”1