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चंदौली जिले के नौगढ़ स्थित विशेश्वरपुर मझगावां पुल के पास लगा हैंडपंप पिछले तीन महीने से खराब पड़ा है। स्थानीय लोगों द्वारा इसकी शिकायत किए जाने के बावजूद, इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में प्रधान और सचिव सहित सभी संबंधित लोगों की मिलीभगत है, जिसके कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
Rakesh maurya
चंदौली जिले के नौगढ़ स्थित विशेश्वरपुर मझगावां पुल के पास लगा हैंडपंप पिछले तीन महीने से खराब पड़ा है। स्थानीय लोगों द्वारा इसकी शिकायत किए जाने के बावजूद, इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में प्रधान और सचिव सहित सभी संबंधित लोगों की मिलीभगत है, जिसके कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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- चंदौली जिले के चकिया स्थित वार्ड नंबर 4 के कबीर नगर में नाली की समस्या गंभीर बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नाली निर्माण के लिए बजट भी पारित हो चुका है और आवश्यक नाप-जोख भी पूरी कर ली गई है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। निवासियों का आरोप है कि नगर के अन्य सभी कार्य प्रगति पर हैं, जबकि उनके वार्ड में नाली का यह महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़ा है। वार्ड नंबर 4, कबीर नगर, चकिया में जल्द से जल्द नाली निर्माण की मांग की जा रही है।1
- सिकंदरपुर के समीप भीषमपुर–सिकंदरपुर मार्ग पर कथित अवैध मिट्टी खनन को लेकर ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इस अवैध गतिविधि की शिकायत तहसील प्रशासन से की गई है। शिकायतों के मद्देनजर, तहसील प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।2
- उत्तर प्रदेश में, योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गरीब व्यक्ति को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई किसी गरीब को हटाने का प्रयास करता है, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।1
- अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कल शाम कैमूर जिले के पानापुर गांव का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल के उद्घाटन मैच में पहुँचकर युवाओं का उत्साहवर्धन किया।1
- Post by Chandan kumar gupta1
- कैमूर की पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासी समाज को आज भी पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए गंभीर संघर्ष करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में पानी का इतना भीषण संकट है कि महिलाएं और बच्चे मीलों दूर से पीने का पानी लाने को विवश हैं, जो उनकी दैनिक दिनचर्या का एक कठिन हिस्सा बन चुका है। इस विकट स्थिति के बावजूद, सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस या बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। यह वीडियो कैमूर के पहाड़ी इलाकों की वास्तविक और अनदेखी स्थिति को दर्शाता है, जिसकी ओर मीडिया और नेता कथित तौर पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जैसा कि स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त किया गया है, "नेता आते हैं… लेकिन पानी नहीं!", जो पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए आदिवासी समाज की निरंतर मजबूरी को रेखांकित करता है। इस आवाज को सरकार तक पहुँचाने और इस गंभीर समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की गई है।1
- चंदौली जिले के सकलडीहा क्षेत्र के बरठीं गांव में बिजली के तार बेहद नीचे झूल रहे हैं, जो लोगों के सिर से भी थोड़ा ही ऊपर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इन तारों से किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की प्रबल संभावना है। ग्रामीणों ने इस संबंध में विभाग से कई बार शिकायत भी की है और इन तारों को ऊपर करवाने या हटवाने का अनुरोध किया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। गांव के लोगों ने संबंधित अधिकारियों से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और उचित कदम उठाने की अपील की है।1
- चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र में, भीषमपुर-सिकंदरपुर मार्ग पर सिकंदरपुर के पास कथित अवैध मिट्टी खनन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई कर उसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से ढोया जा रहा है। इन शिकायतों के मद्देनजर, तहसील प्रशासन ने मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि मिट्टी ढुलाई में लगे कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अपनी क्षमता से अधिक भार लेकर सड़कों पर चल रही हैं, जिससे सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरा है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। उनका कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण मार्ग भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि यह खनन कार्य वैध है, तो संबंधित अनुमति और नियमों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए तहसील प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस जांच के दौरान खनन गतिविधियों, वाहनों के दस्तावेजों और परिवहन से जुड़े नियमों का परीक्षण किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि अनियंत्रित मिट्टी खनन से भूमि कटान, जल निकासी व्यवस्था और कृषि भूमि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जबकि ओवरलोड वाहन सड़कों को नुकसान पहुंचाते हैं और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्षेत्र में नियमित निगरानी और संयुक्त जांच अभियान चलाए जाएं। फिलहाल, स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं, और वे यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित विभाग आगे क्या कदम उठाते हैं।4