हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत सुमेरपुर कस्बे में संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति के साक्षी स्वामी विवेकानंद की जयंती और सूर्य सेन की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ये दोनों महान देशभक्त थे। देश के प्रति इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। स्वामी विवेकानंद युवा हृदय सम्राट थे और सूर्य सेन चटगांव विद्रोह के नायक थे। स्वामी जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के घर कोलकाता में हुआ था। इनका वास्तविक नाम नरेंद्र दत्त था। इनके आदर्श और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। इनका जीवन का एक सूत्र उठो, जागो और तब तक न रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाय, लोगों के लिए जीवन मंत्र बन गया। विश्व धर्म सम्मेलन में 11 सितंबर 1893 में इनका आख्यान विश्व प्रसिद्ध हो गया और ये विश्व में छा गए। रामकृष्ण परमहंस इनके गुरु थे। कालांतर में इनका 4 जुलाई 1902 में बेलूर मठ बंगाल में निधन हो गया। इसी तरह सूर्य सेन का 1894 को चटगांव में रमा निरंजन तथा शशिबाला के घर जन्म हुआ था। ये गणित के शिक्षक थे, इसलिए इन्हें मास्टर दा कहा जाता था। इन्होंने 1930 के चटगांव में गोरों से मुकाबले में युवाओं का नेतृत्व किया था। अंग्रेजों के शस्त्रागार में कब्जा करने के कारण इन्हें चटगांव विद्रोह का नायक कहा गया। इन्हें गिरफ्तार कर चटगांव में ही 12 जनवरी 1934 को फांसी पर लटका दिया गया था। इस कार्यक्रम में सिद्धा, महावीर प्रजापति इलेक्ट्रीशियन, रिचा, रामनरायन सोनकर, विकास, सागर, प्रिन्स, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।
हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत सुमेरपुर कस्बे में संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति के साक्षी स्वामी विवेकानंद की जयंती और सूर्य सेन की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ये दोनों महान देशभक्त थे। देश के प्रति इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। स्वामी विवेकानंद युवा हृदय सम्राट थे और सूर्य सेन चटगांव विद्रोह के नायक थे। स्वामी जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के घर कोलकाता में हुआ था। इनका वास्तविक नाम नरेंद्र दत्त था। इनके आदर्श और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। इनका जीवन का एक सूत्र उठो, जागो और तब तक न रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाय, लोगों के लिए जीवन मंत्र बन गया। विश्व धर्म सम्मेलन में 11 सितंबर 1893 में इनका आख्यान विश्व प्रसिद्ध हो गया और ये विश्व में छा गए। रामकृष्ण परमहंस इनके गुरु थे। कालांतर में इनका 4 जुलाई 1902 में बेलूर मठ बंगाल में निधन हो गया। इसी तरह सूर्य सेन का 1894 को चटगांव में रमा निरंजन तथा शशिबाला के घर जन्म हुआ था। ये गणित के शिक्षक थे, इसलिए इन्हें मास्टर दा कहा जाता था। इन्होंने 1930 के चटगांव में गोरों से मुकाबले में युवाओं का नेतृत्व किया था। अंग्रेजों के शस्त्रागार में कब्जा करने के कारण इन्हें चटगांव विद्रोह का नायक कहा गया। इन्हें गिरफ्तार कर चटगांव में ही 12 जनवरी 1934 को फांसी पर लटका दिया गया था। इस कार्यक्रम में सिद्धा, महावीर प्रजापति इलेक्ट्रीशियन, रिचा, रामनरायन सोनकर, विकास, सागर, प्रिन्स, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।
- हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत सुमेरपुर कस्बे में संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति के साक्षी स्वामी विवेकानंद की जयंती और सूर्य सेन की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ये दोनों महान देशभक्त थे। देश के प्रति इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। स्वामी विवेकानंद युवा हृदय सम्राट थे और सूर्य सेन चटगांव विद्रोह के नायक थे। स्वामी जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के घर कोलकाता में हुआ था। इनका वास्तविक नाम नरेंद्र दत्त था। इनके आदर्श और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। इनका जीवन का एक सूत्र उठो, जागो और तब तक न रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाय, लोगों के लिए जीवन मंत्र बन गया। विश्व धर्म सम्मेलन में 11 सितंबर 1893 में इनका आख्यान विश्व प्रसिद्ध हो गया और ये विश्व में छा गए। रामकृष्ण परमहंस इनके गुरु थे। कालांतर में इनका 4 जुलाई 1902 में बेलूर मठ बंगाल में निधन हो गया। इसी तरह सूर्य सेन का 1894 को चटगांव में रमा निरंजन तथा शशिबाला के घर जन्म हुआ था। ये गणित के शिक्षक थे, इसलिए इन्हें मास्टर दा कहा जाता था। इन्होंने 1930 के चटगांव में गोरों से मुकाबले में युवाओं का नेतृत्व किया था। अंग्रेजों के शस्त्रागार में कब्जा करने के कारण इन्हें चटगांव विद्रोह का नायक कहा गया। इन्हें गिरफ्तार कर चटगांव में ही 12 जनवरी 1934 को फांसी पर लटका दिया गया था। इस कार्यक्रम में सिद्धा, महावीर प्रजापति इलेक्ट्रीशियन, रिचा, रामनरायन सोनकर, विकास, सागर, प्रिन्स, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।1
- चेतना विचारधारा घाटमपुर *तेज रफ्तार डीसीएम ने बाइक में मारी टक्कर बेटे व मां की हुई मौत* घाटमपुर-सजेती थाना क्षेत्र के कैथा गांव के पास रविवार को तेज रफ्तार डीसीएम ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दिया जिसके चलते बाइक में सवार मां बेटे की मौत हो गई तथा एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।सूचना पर पहुंची पुलिस ने एम्बुलेंस के माध्यम से तीनों को घायल अवस्था में घाटमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आया गया जहां डॉक्टरों ने मां और बेटे को मृत्यु घोषित कर दिया और एक महिला की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों द्वारा उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया जहां उसका उपचार जारी है।1
- अपने वक्त के कुछ पल शायद आपको भी पसंद आएंगा1
- कानपुर देहात पत्नी ने छोड़ा साथ तो पति ने घर के अन्दर लगाईं फांसी मामला सटटी थाना क्षेत्र के टयोंगा गांव का है।1
- Address: Kanpur Govind Nagar1
- विधायक विनोद चतुर्वेदी ने फीता काटकर दीनदयाल प्रदर्शनी व मकर संक्रांति मेले का किया भव्य शुभारंभ! कालपी (जालौन) एम.एस.वी. इंटर कॉलेज ग्राउंड कालपी में आज हुआ दीनदयाल उपाध्याय प्रदर्शनी एवं मकर संक्रांति मेले का धमाकेदार उद्घाटन। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक विनोद चतुर्वेदी ने नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद यादव की मौजूदगी में फीता काटा। विधायक ने कहा— मेला हमारी संस्कृति को जीवित रखता है लोगों के मिलने-जुलने और मनोरंजन का बड़ा माध्यम कालपी के धार्मिक स्मारकों का सुंदरीकरण तेज़ी से जारी जल्द ही कालपी बनेगा प्रमुख तीर्थ स्थल एसडीएम ने भरोसा दिलाया— मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बच्चों,महिलाओं और नागरिकों को मिलेगा सुरक्षित मनोरंजन नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद यादव बोले— जहां जरूरत होगी, पालिका हर सुविधा उपलब्ध कराएगी समारोह में बड़ी संख्या में पहुंचे जनप्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों को फूल मालाओं व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सभी मीडिया के साथी मौजूद रहे सभी नेता मौजूद रहे!सभी समाजसेवी के लोगों मौजूद रहे!3
- Post by Raju Bhai1
- ऑटो और चार पहिया वाहन की सीधी टक्कर में तीन लोग गंभीर रूप से हुए घायल मौदहा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मौदहा बसवारी मार्ग पर रमना गांव के पास रविवार शाम करीब 6 बजे एक ऑटो और सामने से आ रहे अज्ञात चार पहिया वाहन की आमने सामने जोरदार टक्कर हो गई हादसे में ऑटो सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए सूचना पर पहुंची 108 एम्बुलेंस तीनों घायलों को मौदहा सीएससी पहुंची तीनों की हालत नाजुक देख प्राथमिक उपचार के बाद किया गया जिला अस्पताल रेफर1