कटनी नगर निगम की एमआईसी ने राजीव गांधी (ईश्वर शाह) शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के 26 साल पुराने विवाद में कोर्ट में ₹10 करोड़ जमा कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस फैसले को राहत से ज़्यादा एक गंभीर और चुभते सवाल के रूप में देखा जा रहा है: यह ₹10 करोड़ की राशि कहां से आ रही है? यह पैसा किसी नेता या अफसर की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि कटनी की आम जनता की खून-पसीने की कमाई है, जो टैक्स चुकाकर शहर में बेहतर सड़कें, साफ पानी, स्ट्रीट लाइटें और ड्रेनेज सिस्टम की उम्मीद करती है। लेकिन आरोप है कि जनता के इस पैसे का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे सफेदपोशों और बेलगाम अफसरों की दशकों पुरानी अकर्मण्यता और लापरवाही के कचरे को साफ करने के लिए किया जा रहा है। यह पूरा मामला, जो अब ₹67 करोड़ की कुर्की तक पहुंच चुका है, प्रशासनिक नाकामी का जीता-जागता दस्तावेज़ है। साल 2000 से लेकर अब तक, ड्राइंग-डिज़ाइन समय पर न देने से लेकर कानूनी मोर्चे पर बरती गई ढिलाई के पीछे जो भी अधिकारी, इंजीनियर या जनप्रतिनिधि ज़िम्मेदार रहे हैं, उन्हें आज तक जवाबदेह नहीं ठहराया गया है। नियमों के अनुसार, किसी भी वित्तीय नुकसान के पीछे अगर व्यक्तिगत लापरवाही है, तो उसकी वसूली सीधे तौर पर संबंधित ज़िम्मेदार व्यक्ति से की जानी चाहिए। लेकिन यहां स्थिति उलट है: जिन अफसरों ने समय पर फैसले नहीं लिए या जो जनप्रतिनिधि फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे रहे, वे तो अपनी मलाईदार कुर्सियों का आनंद लेकर चले गए या आज भी व्यवस्था का हिस्सा हैं, जबकि सज़ा कटनी की जनता को मिल रही है। जनता के टैक्स के ₹10 करोड़ (और भविष्य में जाने वाली संभावित और भी बड़ी राशि) को इस तरह कोर्ट की चौखट पर 'स्वाहा' कर देना सीधे तौर पर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और साल 2000 से लेकर आज तक इस फाइल से जुड़े हर उस चेहरे को बेनकाब किया जाए, जिसकी 'टेबल-टेबल' खेलने की आदत ने कटनी नगर निगम को इस कगार पर ला खड़ा किया है। यह ₹10 करोड़ की राशि उन तत्कालीन अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की पेंशन, संपत्ति या वेतन से वसूली जानी चाहिए, न कि शहर के बजट को रोककर। चेतावनी दी गई है कि अगर आज जनता की आवाज़ नहीं उठी, तो कल को किसी और बड़ी लापरवाही का बिल भी इसी तरह कटनी वासियों के माथे मढ़ दिया जाएगा।
कटनी नगर निगम की एमआईसी ने राजीव गांधी (ईश्वर शाह) शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के 26 साल पुराने विवाद में कोर्ट में ₹10 करोड़ जमा कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस फैसले को राहत से ज़्यादा एक गंभीर और चुभते सवाल के रूप में देखा जा रहा है: यह ₹10 करोड़ की राशि कहां से आ रही है? यह पैसा किसी नेता या अफसर की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि कटनी की आम जनता की खून-पसीने की कमाई है, जो टैक्स चुकाकर शहर में बेहतर सड़कें, साफ पानी, स्ट्रीट लाइटें और ड्रेनेज सिस्टम की उम्मीद करती है। लेकिन आरोप है कि जनता के इस पैसे का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे सफेदपोशों और बेलगाम अफसरों की दशकों पुरानी अकर्मण्यता और लापरवाही के कचरे को साफ करने के लिए किया जा रहा है। यह पूरा मामला, जो अब ₹67 करोड़ की कुर्की तक पहुंच चुका है, प्रशासनिक नाकामी का जीता-जागता दस्तावेज़ है। साल 2000 से लेकर अब तक, ड्राइंग-डिज़ाइन समय पर न देने से लेकर कानूनी मोर्चे पर बरती गई ढिलाई के पीछे जो भी अधिकारी, इंजीनियर या जनप्रतिनिधि ज़िम्मेदार रहे हैं, उन्हें आज तक जवाबदेह नहीं ठहराया गया है। नियमों के अनुसार, किसी भी वित्तीय नुकसान के पीछे अगर व्यक्तिगत लापरवाही है, तो उसकी वसूली सीधे तौर पर संबंधित ज़िम्मेदार व्यक्ति से की जानी चाहिए। लेकिन यहां स्थिति उलट है: जिन अफसरों ने समय पर फैसले नहीं लिए या जो जनप्रतिनिधि फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे रहे, वे तो अपनी मलाईदार कुर्सियों का आनंद लेकर चले गए या आज भी व्यवस्था का हिस्सा हैं, जबकि सज़ा कटनी की जनता को मिल रही है। जनता के टैक्स के ₹10 करोड़ (और भविष्य में जाने वाली संभावित और भी बड़ी राशि) को इस तरह कोर्ट की चौखट पर 'स्वाहा' कर देना सीधे तौर पर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और साल 2000 से लेकर आज तक इस फाइल से जुड़े हर उस चेहरे को बेनकाब किया जाए, जिसकी 'टेबल-टेबल' खेलने की आदत ने कटनी नगर निगम को इस कगार पर ला खड़ा किया है। यह ₹10 करोड़ की राशि उन तत्कालीन अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की पेंशन, संपत्ति या वेतन से वसूली जानी चाहिए, न कि शहर के बजट को रोककर। चेतावनी दी गई है कि अगर आज जनता की आवाज़ नहीं उठी, तो कल को किसी और बड़ी लापरवाही का बिल भी इसी तरह कटनी वासियों के माथे मढ़ दिया जाएगा।
- उत्तराखंड में जोशीमठ के पास बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर कई किलोमीटर लंबा और हैरान कर देने वाला भीषण ट्रैफिक जाम देखा गया है। यात्रा में अत्यधिक भीड़ के कारण लोग कई-कई घंटों तक धूप में फंसे रहे। बार-बार यह सलाह दी जाती है कि मई-जून के पीक सीज़न में, खासकर वीकेंड पर, पहाड़ों पर जाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पहाड़ों पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं होतीं और रास्ते भर दुकानों पर पीने का पानी या भोजन सामग्री जैसी चीजें हर जगह उपलब्ध नहीं होतीं। जाम में फंसने पर गाड़ी को वापस मोड़ना भी संभव नहीं होता। इसके बावजूद, लोग इन चेतावनियों को मानने को तैयार नहीं होते और पढ़े-लिखे तथा समझदार होने के बाद भी, खासकर शनिवार और रविवार को, बिना सोचे-समझे निकल पड़ते हैं। फिर जब वे घंटों जाम में फंसे रहते हैं, तो व्यवस्थाओं और सिस्टम को दोष देते हैं।1
- कटनी में जायन्ट्स ग्रुप ऑफ कटनी सहेली एवं जायन्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन ने मंगलवार को माधव नगर गेट के सामने स्थित बजरंगबली जी मंदिर में विशाल मां भंडारा और शरबत वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। भीषण गर्मी और लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद, संगठन के सदस्यों और महिला शक्ति ने पूरे उत्साह, अनुशासन तथा सेवा भावना के साथ इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप दिया, जिससे यह सेवा, समर्पण और संगठन शक्ति का अद्भुत संगम बन गया। इस दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में कटनी जिले के समाजसेवी बसंती यादव, शिवराज गोस्वामी, राजेंद्र शर्मा, देशराज, बालकिशन नामदेव, बसंत भैया के बेटे सहित सैकड़ों की संख्या में महिला मित्र मंडली, ग्रुप के सदस्य एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महिला शक्ति का योगदान विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ ग्रुप की अध्यक्ष और महिला सदस्यों ने तपती धूप में श्रद्धालुओं को शरबत वितरित कर मानव सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उन्होंने पूरी व्यवस्था को कुशलतापूर्वक संभालते हुए यह प्रमाणित किया कि समाज सेवा, धार्मिक आस्था और संगठन को मजबूत बनाने में महिला शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं के लिए मां भंडारे तथा शरबत वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, जिसकी स्थानीय नागरिकों ने जमकर सराहना की। आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मानव सेवा, सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और संगठन को और अधिक मजबूत बनाना था। कार्यक्रम के अंत में, सभी सदस्यों ने भगवान बजरंगबली से क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की, और यह सेवा, सहयोग तथा सामाजिक समर्पण की भावना से आयोजित कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना।4
- कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम अमाड़ी में आंगनवाड़ी भवन वर्षों से बेहद जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। भवन की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। भवन के असुरक्षित होने की वजह से, छोटे बच्चों को तेज धूप और मौसम की मार के बीच खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है और वहीं पोषण आहार लेना भी पड़ रहा है। यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों को पेड़ों की छांव में या खुले मैदान में संभालने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की यह मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही एक नया आंगनवाड़ी भवन बनाया जाए या फिर इस जर्जर भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।1
- मैहर में अचानक मौसम का मिजाज बदला है, जिससे चिलचिलाती गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी की मार झेल रहे मैहरवासियों को आज बादलों के छाने और ठंडी हवाएं चलने से सुहाने मौसम का अनुभव हुआ। मौसम में इस बदलाव के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली और उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।2
- जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज, रविवार, 31 मई 2026 को प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हुए। इस अवसर पर भक्तों ने 'जय हो माई की' का जयघोष किया।2
- जिला कलेक्टर के निर्देश पर एक वार्डन को शो काज नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर के सीधे आदेश पर की गई।1
- चंद घंटों के एक अबोध बच्चे के सामने ही उसकी माँ का गला रेतकर उसे तड़प-तड़पकर मरने के लिए छोड़ दिया गया। वह मासूम बच्चा, जो केवल अपनी माँ को ही जानता है और उसी का दूध पीकर अपना पेट भरता है, असहाय होकर अपनी तड़पती माँ को 'माँ-माँ' कहकर पुकारता रहा, जबकि माँ की जान तड़प-तड़पकर निकल रही थी। इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि यह कैसी निर्दयता है और यह कैसा त्योहार है, जहाँ गर्दनें काटकर जश्न मनाया जा रहा है।1
- पूरा पटेल समाज मनीष पटेल के लिए न्याय की मांग कर रहा है। उनकी स्पष्ट चेतावनी है कि यदि मनीष पटेल को न्याय नहीं मिलता है, तो 'शुद्ध प्रदेश' में शासन-प्रशासन पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा। समाज का कहना है कि जातिवाद के आधार पर एफ.आई.आर. दर्ज की जा रही हैं, जिसके खिलाफ आवाज उठाई गई है। पटेल समाज ने दृढ़ संकल्प लिया है कि जब तक मनीष पटेल को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। इस मांग के समर्थन में "पटेल एकता जिंदाबाद जिंदाबाद जय सरदार पटेल" के नारे भी लगाए गए हैं।1