*युवाओं को शस्त्र और शास्त्र के साथ लव जिहाद व धर्मान्तरण जैसे ज्वलंतशील जैसे मुद्दों का विशेष ज्ञान होना चाहिए -- हरिओम शर्मा ।* *छोटे छोटे आपसी मतभेद समाप्त हों एवं विशेष रूप से युवावर्ग को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होना चाहिए - अमृता भावसार* *सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है - अभिषेक गुप्ता.* *गौ माता के वध पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे विषयों पर निर्णायक संकल्प लिया जाना चाहिए - शिखा गुप्ता.* *स्वदेशी सामान व विदेशी सामान की पहचान होना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी सामानो का उपयोग ही देश को विकास की गती मिल सकेगी - श्रीमती जयश्री जैन* *वर्तमान परिस्तिथि को देखते हुए बच्चों को ऐसे संस्कार दिए जाएं कि वे हमारे देश के महापुरुषों से प्रेरणा ले - पद्मिनी चौहाण* *संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष मे नगर कुक्षी की चार बस्तीयो में विराट हिंदू सम्मेलन हुआ सम्पन्न ,* *हजारों की संख्या में मातृशक्ति की विशेष उपस्तिथि रही।* *समस्त हिन्दू समाजों की रही सहभागिता, संत व प्रबुद्ध जन हुए शामिल।* *कुक्षी।* नगर की ( *माधव, केशव, सुदर्शन व मधुकर* ) चार बस्तीयों में 11 जनवरी 26 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। चार बस्तीयो के सम्मेलनो में नगर के समस्त हिन्दू धर्मवलम्बी व हजारों की संख्या मे मातृशक्ति सहित आए लगभग 10 हजार से अधिक सनातनी बंधुओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर वक्ताओं ने ओजस्वी विचार रखे। आयोजन के दौरान संत श्री मनीष बाबा मसा, संत श्री राघवेंद्रा नंद जी मसा.,संत श्री अखंडदा नंद जी मसा., संत श्री शास्त्री स्वामी सूर्यप्रकाश दास जी मसा.सहित विद्वतजनों के द्वारा हिंदू समाज को दिशा देने के लिए धर्म उपदेश दिए गए। इस दौरान समाज जनो के वरिष्ठ व बुद्धिजीवि मचासीन रहे । वहीं चार बस्तीयो मे हुए आयोजित हिंदू सम्मेलन में समस्त व्यवस्थाओं में नगर के हिन्दू सनातनी युवाओ की विशेष भूमिका रही। इस दौरान बस्तीयो मे मातृशक्ति प्रवक्ता पद्मिनी दीदी चौहाण, श्रीमति अमृता दीदी भावसार, श्रीमती जयश्री जैन,, शिखा गुप्ता द्वारा मातृ शक्ति से कुटुंब प्रबोधन का आह्वान करते हुए कहा गया कि वर्तमान हालातो को देखते हुए हमें बच्चों को लव जिहाद व धर्मान्तरण से दूर रखने की आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान होना चाहिए तथा ऐसे संस्कार दिए जाएं कि वे बिरसा मुंडा, टंट्या मामा, छत्रपति शिवाजी , महाराणा प्रताप और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लें। वहीं उन्होंने कहा कि हम सनातनियों को अपने धर्म के हिसाब से अपनी कर्म पर ध्यान देना चाहिए वहीं उन्होंने अन्न के ग्रहण करने को लेकर कहा कि आज हम अपनी पुरानी परंपराओं को भूल रहे हैं। हम सनातनी किसी भी चीज का भोग करते हैं ना कि भक्षण इसलिए खाना नहीं भोजन ग्रहण करने के समय भोजन शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही प्रमुख वक्ता हरिओम जी शर्मा, अभिषेक जी गुप्ता, ने संस्कृति के अंधानुकरण से बचते हुए भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के समय जिस प्रकार पूरे विश्व में हर्ष और उल्लास का वातावरण बना, वैसा ही वातावरण पुनः निर्मित करना होगा, ताकि देश में गौ माता के वध पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे विषयों पर निर्णायक संकल्प लिया जा सके। उन्होंने कहा कि एक हमारा देश है जहां हम तुलसी के वृक्ष और नदियों को मां का दर्जा देते हैं। लेकिन ऐसा अन्य किसी और देश में देखने को नहीं मिलता है। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में हरिओम जी शर्मा ने कहा कि भारतीय समाज में एकता, सद्भावना एवं समरसता का भाव मजबूत करना एवं भारतीय नागरिकों के बीच सनातन संस्कृति के संस्कारों के अनुपालन को बढ़ावा देना भी शामिल हैं। भारतवर्ष में वर्तमान मे चल रही धर्मान्तरण वाली प्रथा व लव जिहाद से बचने के लिए हमें अपने घर व अपनी बेटियों को बताना बहुत आवश्यक है और इसका ज्ञान जरूरी है साथ ही भारतवर्ष मे धर्म का अनुसरण करते हुए, अपने जीवन में प्रत्यक्ष रूप से धार्मिक संस्कारों का आचरण करने वाली तपस्वी, त्यागी एवं ज्ञानी विभूतियां एक अखंड परम्परा के रूप में अवतरित होती आई हैं। इन्हीं महान विभूतियों के चलते ही भारत की एक राष्ट्र के रूप में वास्तविक रक्षा हुई है। अतः हम भारतीय नागरिकों को यह भली भांति समझना होगा कि भारतीय समाज को समर्थ, धर्मनिष्ठ, प्रतिष्ठित बनाने में हम तभी सफल हो सकेंगे जब हम भारत की प्राचीन परम्परा को युगानुकूल बनाकर एक बार पुनः इसे पुनर्जीवित करेंगे। साथ ही उन्होंने संघ द्वारा संचालित पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए स्वदेशी के उपयोग, नागरिक कर्तव्यों के पालन, जाति-पांति भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता, संयुक्त परिवार की आवश्यकता और स्व के बोध पर जोर दिया। इसलिए ये हमारी राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने वाले आयोजन सिद्ध हुए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष केवल इतिहास की उपलब्धियां नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा का संकल्प हैं। सम्मेलन में क्षेत्र के प्रबुद्ध समाज जनो ने भी उपस्थिति दर्ज कराई इस दौरान उन्होंने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है एक सच्चरित्र, प्रामाणिक और संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण करना। ऐसी पीढ़ी समाज का वातावरण सुधार कर घर और समाज में सुख शांति स्थापित कर सकती है। इसलिए, इन मूल्यों और संस्कारों को महत्व देने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के प्रयास आज घर घर में होने लगा हैं। लोग अब ऐसे सभी मंचों और माध्यमों से जुड़ने के लिए प्रयत्नशील हैं जो इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। जैसे जैसे हिंदुत्व पर विश्वास बढ़ रहा है, वैसे वैसे भारत के प्रति श्रद्धा और विश्वास, व्यापक और गहरा हो रहा है। वहीं उन्होंने कहा कि आज भारत "वसुधैव कुटुंबकम्" के आदर्श पर चलकर भारत न केवल अपने समाज को सशक्त करेगा, बल्कि पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और सहयोग का संदेश देकर विश्वगुरु की भूमिका निभाएगा। सभी चारो बस्तीयो मे कार्यक्रम के अत में युवाओं द्वारा सनातनियों को सम्रसभोज परसा सभी के साथ बैठकर भोजन किया। उक्त हिन्दू सम्मेलनों में न केवल मातृशक्ति सहित सकल हिन्दू समाज की उत्साहपूर्वक भागीदारी रही है बल्कि साधु सन्त महात्माओं द्वारा भी खुले हृदय से आशीर्वचन प्रदान किए गये। इस सम्मेलनों का आयोजन सकल हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिलकर किया गया है। छोटे छोटे आपसी मतभेद समाप्त हों एवं विशेष रूप से युवा नागरिकों को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होने का सौभाग्य प्राप्त हो । हिन्दू सम्मेलनों के आयोजन का उद्देश्य भी सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है, जिसकी प्राप्ति होती हुई दिख रही है। कार्यक्रम में साधु-संत, कथा प्रवक्ता एवं बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मंचासीन रहे। सम्मेलन शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।
*युवाओं को शस्त्र और शास्त्र के साथ लव जिहाद व धर्मान्तरण जैसे ज्वलंतशील जैसे मुद्दों का विशेष ज्ञान होना चाहिए -- हरिओम शर्मा ।* *छोटे छोटे आपसी मतभेद समाप्त हों एवं विशेष रूप से युवावर्ग को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होना चाहिए - अमृता भावसार* *सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है - अभिषेक गुप्ता.* *गौ माता के वध पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे विषयों पर निर्णायक संकल्प लिया जाना चाहिए - शिखा गुप्ता.* *स्वदेशी सामान व विदेशी सामान की पहचान होना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी सामानो का उपयोग ही देश को विकास की गती मिल सकेगी - श्रीमती जयश्री जैन* *वर्तमान परिस्तिथि को देखते हुए बच्चों को ऐसे संस्कार दिए जाएं कि वे हमारे देश के महापुरुषों से प्रेरणा ले - पद्मिनी चौहाण* *संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष मे नगर कुक्षी की चार बस्तीयो में विराट हिंदू सम्मेलन हुआ सम्पन्न ,* *हजारों की संख्या में मातृशक्ति की विशेष उपस्तिथि रही।* *समस्त हिन्दू समाजों की रही सहभागिता, संत व प्रबुद्ध जन हुए शामिल।* *कुक्षी।* नगर की ( *माधव, केशव, सुदर्शन व मधुकर* ) चार बस्तीयों में 11 जनवरी 26 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। चार बस्तीयो के सम्मेलनो में नगर के समस्त हिन्दू धर्मवलम्बी व हजारों की संख्या मे मातृशक्ति सहित आए लगभग 10 हजार से अधिक सनातनी बंधुओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर वक्ताओं ने ओजस्वी विचार रखे। आयोजन के दौरान संत श्री मनीष बाबा मसा, संत श्री राघवेंद्रा नंद जी मसा.,संत श्री अखंडदा नंद जी मसा., संत श्री शास्त्री स्वामी सूर्यप्रकाश दास जी मसा.सहित विद्वतजनों के द्वारा हिंदू समाज को
दिशा देने के लिए धर्म उपदेश दिए गए। इस दौरान समाज जनो के वरिष्ठ व बुद्धिजीवि मचासीन रहे । वहीं चार बस्तीयो मे हुए आयोजित हिंदू सम्मेलन में समस्त व्यवस्थाओं में नगर के हिन्दू सनातनी युवाओ की विशेष भूमिका रही। इस दौरान बस्तीयो मे मातृशक्ति प्रवक्ता पद्मिनी दीदी चौहाण, श्रीमति अमृता दीदी भावसार, श्रीमती जयश्री जैन,, शिखा गुप्ता द्वारा मातृ शक्ति से कुटुंब प्रबोधन का आह्वान करते हुए कहा गया कि वर्तमान हालातो को देखते हुए हमें बच्चों को लव जिहाद व धर्मान्तरण से दूर रखने की आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान होना चाहिए तथा ऐसे संस्कार दिए जाएं कि वे बिरसा मुंडा, टंट्या मामा, छत्रपति शिवाजी , महाराणा प्रताप और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लें। वहीं उन्होंने कहा कि हम सनातनियों को अपने धर्म के हिसाब से अपनी कर्म पर ध्यान देना चाहिए वहीं उन्होंने अन्न के ग्रहण करने को लेकर कहा कि आज हम अपनी पुरानी परंपराओं को भूल रहे हैं। हम सनातनी किसी भी चीज का भोग करते हैं ना कि भक्षण इसलिए खाना नहीं भोजन ग्रहण करने के समय भोजन शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही प्रमुख वक्ता हरिओम जी शर्मा, अभिषेक जी गुप्ता, ने संस्कृति के अंधानुकरण से बचते हुए भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के समय जिस प्रकार पूरे विश्व में हर्ष और उल्लास का वातावरण बना, वैसा ही वातावरण पुनः निर्मित करना होगा, ताकि देश में गौ माता के वध पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे विषयों पर निर्णायक संकल्प लिया जा सके। उन्होंने कहा कि एक हमारा देश है जहां हम
तुलसी के वृक्ष और नदियों को मां का दर्जा देते हैं। लेकिन ऐसा अन्य किसी और देश में देखने को नहीं मिलता है। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में हरिओम जी शर्मा ने कहा कि भारतीय समाज में एकता, सद्भावना एवं समरसता का भाव मजबूत करना एवं भारतीय नागरिकों के बीच सनातन संस्कृति के संस्कारों के अनुपालन को बढ़ावा देना भी शामिल हैं। भारतवर्ष में वर्तमान मे चल रही धर्मान्तरण वाली प्रथा व लव जिहाद से बचने के लिए हमें अपने घर व अपनी बेटियों को बताना बहुत आवश्यक है और इसका ज्ञान जरूरी है साथ ही भारतवर्ष मे धर्म का अनुसरण करते हुए, अपने जीवन में प्रत्यक्ष रूप से धार्मिक संस्कारों का आचरण करने वाली तपस्वी, त्यागी एवं ज्ञानी विभूतियां एक अखंड परम्परा के रूप में अवतरित होती आई हैं। इन्हीं महान विभूतियों के चलते ही भारत की एक राष्ट्र के रूप में वास्तविक रक्षा हुई है। अतः हम भारतीय नागरिकों को यह भली भांति समझना होगा कि भारतीय समाज को समर्थ, धर्मनिष्ठ, प्रतिष्ठित बनाने में हम तभी सफल हो सकेंगे जब हम भारत की प्राचीन परम्परा को युगानुकूल बनाकर एक बार पुनः इसे पुनर्जीवित करेंगे। साथ ही उन्होंने संघ द्वारा संचालित पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए स्वदेशी के उपयोग, नागरिक कर्तव्यों के पालन, जाति-पांति भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता, संयुक्त परिवार की आवश्यकता और स्व के बोध पर जोर दिया। इसलिए ये हमारी राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने वाले आयोजन सिद्ध हुए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष केवल इतिहास की उपलब्धियां नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा का संकल्प हैं। सम्मेलन में क्षेत्र के प्रबुद्ध समाज जनो ने भी उपस्थिति दर्ज कराई इस दौरान उन्होंने कहा
कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है एक सच्चरित्र, प्रामाणिक और संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण करना। ऐसी पीढ़ी समाज का वातावरण सुधार कर घर और समाज में सुख शांति स्थापित कर सकती है। इसलिए, इन मूल्यों और संस्कारों को महत्व देने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के प्रयास आज घर घर में होने लगा हैं। लोग अब ऐसे सभी मंचों और माध्यमों से जुड़ने के लिए प्रयत्नशील हैं जो इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। जैसे जैसे हिंदुत्व पर विश्वास बढ़ रहा है, वैसे वैसे भारत के प्रति श्रद्धा और विश्वास, व्यापक और गहरा हो रहा है। वहीं उन्होंने कहा कि आज भारत "वसुधैव कुटुंबकम्" के आदर्श पर चलकर भारत न केवल अपने समाज को सशक्त करेगा, बल्कि पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और सहयोग का संदेश देकर विश्वगुरु की भूमिका निभाएगा। सभी चारो बस्तीयो मे कार्यक्रम के अत में युवाओं द्वारा सनातनियों को सम्रसभोज परसा सभी के साथ बैठकर भोजन किया। उक्त हिन्दू सम्मेलनों में न केवल मातृशक्ति सहित सकल हिन्दू समाज की उत्साहपूर्वक भागीदारी रही है बल्कि साधु सन्त महात्माओं द्वारा भी खुले हृदय से आशीर्वचन प्रदान किए गये। इस सम्मेलनों का आयोजन सकल हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिलकर किया गया है। छोटे छोटे आपसी मतभेद समाप्त हों एवं विशेष रूप से युवा नागरिकों को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होने का सौभाग्य प्राप्त हो । हिन्दू सम्मेलनों के आयोजन का उद्देश्य भी सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है, जिसकी प्राप्ति होती हुई दिख रही है। कार्यक्रम में साधु-संत, कथा प्रवक्ता एवं बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मंचासीन रहे। सम्मेलन शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।
- बड़वानी प्रेरणा बच्चन के निधन पर शोक राजनीति से ऊपर मानवत विजयवर्गीय और उमंग सिंगार पहुंचे कासेल1
- मनावर: खाद की कालाबाजारी चरम पर, MRP से दोगुने दाम वसूल रहे दुकानदार; अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला मनावर (धार)। क्षेत्र के किसानों के साथ खाद की कीमतों को लेकर सरेआम लूट का मामला सामने आया है। मनावर स्थित एक खाद की दुकान पर यूरिया के निर्धारित दाम से कहीं अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगा है। क्या है पूरा मामला? ग्राम जुलवानिया के किसान रमेश सोलंकी अपनी खेती के लिए यूरिया खाद लेने बाजार पहुंचे थे। किसान रमेश सोलंकी का आरोप है कि दुकानदार ने उनसे यूरिया के मात्र 2 बैग के बदले 1100 रुपये वसूले। किसान के पास इस पूरी धांधली का वीडियो साक्ष्य भी मौजूद है। पवन मंडलोई (आईटी सेल जिला अध्यक्ष) और रमेश बर्मन पहुंचे समर्थन में मामले की जानकारी मिलते ही आईटी सेल के जिला अध्यक्ष पवन मंडलोई और रमेश बर्मन पीड़ित किसान रमेश सोलंकी के समर्थन में पहुंचे। उन्होंने किसान के साथ हो रहे इस अन्याय और खाद की कालाबाजारी का कड़ा विरोध किया। अधिकारियों का ढुलमुल रवैया किसान द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अधिकारियों ने टालमटोल करते हुए मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।2
- सैंधवा में हिन्दू सम्मेलन के तहत भंडारे 30 हजार लोग शामिल1
- नन्हे कदम, ऊँचे विचार, जय श्री राम का गूंजता जयकार। बच्चों की संध्या फेरी — एक सार्थक प्रयास 🌺1
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- *👉 देपालपुर विधानसभा में ग्राम पंचायत स्तर एवं बूथ स्तर पर कांग्रेस कमेटी का गठन✍️* *👉 वरिष्ठ कांग्रेस नेता राधेश्याम पटेल, मोती सिंह पटेल एवं उमराव सिंह मौर्य की मौजूदगी में हुआ गठन✍️* *👉 हर खबर पर नजर, खोजी नजर ✍️* *👉 देखें टीम प्रेस क्लब बेटमा की खबरें ✍️*1
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