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सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का "असली कॉकरोच" मिल गया है। इस पोस्ट में दर्शकों को वीडियो को अंत तक देखने की अपील की गई है, यह कहते हुए कि इसे देखकर उनकी हँसी रुकने का नाम नहीं लेगी। यह जानकारी #कॉकरोच_जनता_पार्टी और #कॉकरोचपार्टी हैशटैग के साथ साझा की गई है, जो इस पूरे विषय में एक मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक लहजा जोड़ती है।
Pawan sharma
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का "असली कॉकरोच" मिल गया है। इस पोस्ट में दर्शकों को वीडियो को अंत तक देखने की अपील की गई है, यह कहते हुए कि इसे देखकर उनकी हँसी रुकने का नाम नहीं लेगी। यह जानकारी #कॉकरोच_जनता_पार्टी और #कॉकरोचपार्टी हैशटैग के साथ साझा की गई है, जो इस पूरे विषय में एक मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक लहजा जोड़ती है।
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- जयपुर में, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सोमवार, 16 जून को अपने राजकीय आवास पर 'स्टॉप डायरिया कैंपेन' का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे प्रदेश में 16 जून से 31 जुलाई तक विशेष रूप से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य दस्त रोग से बचाव और उपचार के लिए बच्चों को ओआरएस एवं जिंक की गोली उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर मंत्री ने आमजन में जागरूकता के लिए तैयार किए गए पोस्टर का भी विमोचन किया। चिकित्सा मंत्री ने इस दौरान बताया कि देश भर में लगभग 4.3 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु दस्त या उससे होने वाली जटिलताओं के कारण होती है, और गर्मी-बारिश के मौसम में डायरिया होने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे – 6 (2023-24) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में बच्चों में दस्त रोग का प्रसार दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.9 प्रतिशत है, जो प्रदेश में रोकथाम व उपचार के प्रभावी प्रयासों का परिणाम है। अभियान के तहत, आमजन में "स्वच्छ जल, समुचित उपचार – डायरिया से बचें हर बार" की थीम के साथ विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएंगी। निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि 'स्टॉप डायरिया कैंपेन' में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रत्येक बच्चे को 2 ओआरएस के पैकेट और 14 दिन की जिंक की खुराक प्रदान करेंगी, ताकि दस्त होने पर तत्काल आवश्यक उपचार मिल सके। साथ ही, सभी चिकित्सा संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर ओआरएस-जिंक कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे, जहां मरीजों और उनके परिजनों को ओआरएस घोल बनाने की विधि और जिंक टेबलेट की खुराक के बारे में जानकारी दी जाएगी। श्री खींवसर ने अभियान में सभी से संचालित की जाने वाली गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। इस शुभारंभ कार्यक्रम में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर और परियोजना निदेशक बाल स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।1
- अरविंद केजरीवाल को थप्पड़ पड़ने की पुरानी घटना और हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' के संस्थापक Abhijeet Deepke को थप्पड़ मारे जाने की घटना के बीच समानताओं को लेकर सवाल उठाया गया है।1
- एक बहु ने 'सास' शब्द की बेहद मार्मिक और हास्यपूर्ण व्याख्या की है, जिसके जरिए उन्होंने अपने मन की सारी भड़ास निकाली है। इस हास्य व्यंग्य को सटीक और सार्थक बताया गया है, और इस प्रयास की सराहना की गई है। इस पर टिप्पणी करते हुए आशा व्यक्त की गई है कि काश भारत की सासें इस तरह के प्रयासों से सुधर पातीं, तो कितने ही बच्चों के घर टूटने से बच जाते। पोस्ट में 'भारत की सास' को 'कुख्यात' बताया गया है।1
- जयपुर-सीकर हाईवे पर हरमाड़ा थाना क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार एक युवक और युवती की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सुबह करीब 9 बजे नींदड़ मोड़ के पास हुआ, जब तेज रफ्तार सीमेंट से भरे एक ट्रेलर ने पीछे से बाइक को टक्कर मार दी। हरमाड़ा थाना प्रभारी उदय सिंह यादव के अनुसार, चौमूं से जयपुर की ओर जा रहे ट्रेलर से टक्कर लगने के बाद युवक-युवती सड़क पर गिर पड़े और ट्रेलर उन्हें रौंदते हुए निकल गया, जिससे दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के तत्काल बाद, ट्रेलर चालक वाहन को वहीं छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही हरमाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कांवटिया अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रेलर को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश में जुट गई है। इसके साथ ही, पुलिस बाइक के नंबर के आधार पर मृतक युवक और युवती की पहचान करने का प्रयास भी कर रही है, और मामले की आगे की जांच जारी है।1
- जोधपुर के मंडोर थाना क्षेत्र से देर रात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें थाने पर भारी हंगामा होते देखा जा सकता है। यह हंगामा शराब के नशे में पकड़े गए एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद उसके परिजनों द्वारा किया गया। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने आरोपी के साथ मारपीट की और उसके पर्स से पैसे भी निकाल लिए। जानकारी के अनुसार, आरोपी की पत्नी, जो एक सीएलजी सदस्य बताई जा रही हैं, और उनके बेटे ने मंडोर थाने पहुंचकर पुलिस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और विरोध दर्ज कराया। हालांकि, पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट और पैसे निकालने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि व्यक्ति को शराब के नशे में होने के कारण कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। देर रात तक चले इस विवाद को बाद में थाना अधिकारी ने अपनी समझाइश से शांत कराया, जिसके बाद परिजन वापस लौट गए। इस पूरी घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस की कार्रवाई और आमजन के अधिकारों के बीच सही संतुलन कैसे स्थापित किया जाए, ताकि कानून व्यवस्था भी बनी रहे और किसी भी पक्ष को अन्याय महसूस न हो।1
- एक ननंद ने भाभी की विस्तृत परिभाषा प्रस्तुत की है। उन्होंने पाठकों से इस परिभाषा को व्यावहारिक रूप से समझने और समाज में इसकी परख करने का आग्रह किया है। ननंद ने लोगों से ईमानदारी से यह तय करने को कहा है कि वे इस परिभाषा का समर्थन करते हैं या नहीं, और टिप्पणी करके यह बताने की अपील की है कि यह सही है या गलत।1
- जयपुर में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति को लेकर जमकर चर्चा हो रही है, जिसने पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई थी और अब जयपुर में हुए कॉक्रोज पार्टी के प्रदर्शन के दौरान उसके समर्थन में दिखाई देने की बात कही जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचकों का स्पष्ट कहना है कि जिस व्यक्ति ने पहले एक राजनीतिक दल के प्रति उत्साह दिखाया, वही अब दूसरे मंच पर सक्रिय दिख रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर व्यंग्य और कटाक्षों की बाढ़ आ गई है। कई उपयोगकर्ता मजाकिया अंदाज में लिख रहे हैं कि "राजनीति में विचारधारा नहीं, अवसरधारा चल रही है।" वहीं, कुछ लोगों ने तंज कसते हुए यह सुझाव भी दिया कि ऐसे नेताओं और समर्थकों के लिए अलग से "दलबदलू सम्मान" शुरू किया जाना चाहिए। जयपुर में हुए प्रदर्शन के बाद वायरल पोस्टों में यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति हर नए आंदोलन और राजनीतिक मंच के साथ खुद को जोड़ लेता है, जिससे उसकी राजनीतिक प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।1