जयपुर में, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सोमवार, 16 जून को अपने राजकीय आवास पर 'स्टॉप डायरिया कैंपेन' का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे प्रदेश में 16 जून से 31 जुलाई तक विशेष रूप से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य दस्त रोग से बचाव और उपचार के लिए बच्चों को ओआरएस एवं जिंक की गोली उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर मंत्री ने आमजन में जागरूकता के लिए तैयार किए गए पोस्टर का भी विमोचन किया। चिकित्सा मंत्री ने इस दौरान बताया कि देश भर में लगभग 4.3 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु दस्त या उससे होने वाली जटिलताओं के कारण होती है, और गर्मी-बारिश के मौसम में डायरिया होने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे – 6 (2023-24) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में बच्चों में दस्त रोग का प्रसार दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.9 प्रतिशत है, जो प्रदेश में रोकथाम व उपचार के प्रभावी प्रयासों का परिणाम है। अभियान के तहत, आमजन में "स्वच्छ जल, समुचित उपचार – डायरिया से बचें हर बार" की थीम के साथ विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएंगी। निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि 'स्टॉप डायरिया कैंपेन' में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रत्येक बच्चे को 2 ओआरएस के पैकेट और 14 दिन की जिंक की खुराक प्रदान करेंगी, ताकि दस्त होने पर तत्काल आवश्यक उपचार मिल सके। साथ ही, सभी चिकित्सा संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर ओआरएस-जिंक कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे, जहां मरीजों और उनके परिजनों को ओआरएस घोल बनाने की विधि और जिंक टेबलेट की खुराक के बारे में जानकारी दी जाएगी। श्री खींवसर ने अभियान में सभी से संचालित की जाने वाली गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। इस शुभारंभ कार्यक्रम में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर और परियोजना निदेशक बाल स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
जयपुर में, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सोमवार, 16 जून को अपने राजकीय आवास पर 'स्टॉप डायरिया कैंपेन' का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे प्रदेश में 16 जून से 31 जुलाई तक विशेष रूप से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य दस्त रोग से बचाव और उपचार के लिए बच्चों को ओआरएस एवं जिंक की गोली उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर मंत्री ने आमजन में जागरूकता के लिए तैयार किए गए पोस्टर का भी विमोचन किया। चिकित्सा मंत्री ने इस दौरान बताया कि देश भर में लगभग 4.3 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु दस्त या उससे होने वाली जटिलताओं के कारण होती है, और गर्मी-बारिश के मौसम में डायरिया होने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे – 6 (2023-24) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में बच्चों में दस्त रोग का प्रसार दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.9 प्रतिशत है, जो प्रदेश में रोकथाम व उपचार के प्रभावी प्रयासों का परिणाम है। अभियान के तहत, आमजन में "स्वच्छ जल, समुचित उपचार – डायरिया से बचें हर बार" की थीम के साथ विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएंगी। निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि 'स्टॉप डायरिया कैंपेन' में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रत्येक बच्चे को 2 ओआरएस के पैकेट और 14 दिन की जिंक की खुराक प्रदान करेंगी, ताकि दस्त होने पर तत्काल आवश्यक उपचार मिल सके। साथ ही, सभी चिकित्सा संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर ओआरएस-जिंक कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे, जहां मरीजों और उनके परिजनों को ओआरएस घोल बनाने की विधि और जिंक टेबलेट की खुराक के बारे में जानकारी दी जाएगी। श्री खींवसर ने अभियान में सभी से संचालित की जाने वाली गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। इस शुभारंभ कार्यक्रम में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर और परियोजना निदेशक बाल स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
- एक ननंद ने भाभी की विस्तृत परिभाषा प्रस्तुत की है। उन्होंने पाठकों से इस परिभाषा को व्यावहारिक रूप से समझने और समाज में इसकी परख करने का आग्रह किया है। ननंद ने लोगों से ईमानदारी से यह तय करने को कहा है कि वे इस परिभाषा का समर्थन करते हैं या नहीं, और टिप्पणी करके यह बताने की अपील की है कि यह सही है या गलत।1
- जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने एक बड़े अभियान की घोषणा की है, जिसके तहत ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की जाएगी जिनमें आगे या पीछे अतिरिक्त बंपर (बंपर गार्ड) लगे हुए हैं। पुलिस इन वाहनों का चालान कर सकती है, और वाहन मालिकों को इस पर ध्यान देने की चेतावनी दी गई है। ट्रैफिक विशेषज्ञों के मुताबिक, वाहनों में नियमों के खिलाफ किए गए इस तरह के मॉडिफिकेशन सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने अपने जांच अभियान को और तेज कर दिया है। इस विशेष अभियान, अतिरिक्त बंपर से जुड़े मोटर वाहन नियमों, और पुलिस की कार्रवाई की पूरी जानकारी के लिए लोगों को 'हमारी खास रिपोर्ट' देखने का आग्रह किया गया है। यह घोषणा जस्ट जयपुर लाइव द्वारा की गई है, जो जयपुर शहर की हर छोटी-बड़ी खबर तुरंत देने का दावा करता है।1
- Available for Sale Locality : Tunga Expected Price : 5500000 Property Type : Agricultural / Farm Land Property Condition : Old फॉर्म हाउस के लिए चाहिए तो ये ऑन रोड पर है1
- बांसखोह कस्बे के मोहनपुरा स्थित ठाकुर जी महाराज के मंदिर से एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पंडितों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर शिखर कलश और ध्वज का पूजन किया, जिसके बाद आरती करके डीजे की धुन पर कलश यात्रा को रवाना किया गया। इस मौके पर महिलाओं ने अपने सिर पर कलश धारण कर डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए सहभागिता की। यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। यह कलश यात्रा ढाकला की ढाणी स्थित शिवजी के मंदिर में पहुंची। बताया गया कि बुधवार को शिवजी के मंदिर में फूल बंगले से एक आकर्षक झांकी सजाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, पंडितों द्वारा विधि-विधान से शिखर कलश की पूजा-अर्चना करके उसे मंदिर में चढ़ाया जाएगा, जिसके उपरांत हवन यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। यह पूरा कार्यक्रम सभी के सहयोग से संपन्न किया जाएगा।1
- दौसा के कुण्डल तहसील मुख्यालय पर कोलवा थाना पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजस्थान पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष सड़क सुरक्षा अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई, जिसमें कुल 20 वाहनों के चालान काटे गए। कोलवा थाना पुलिस ने इस अभियान के दौरान वाहनों पर लगी काली फिल्म, अवैध मॉडिफिकेशन, गलत लिखावट और अन्य अनियमितताओं की गहनता से जांच की। ASI समय सिंह और ASI समुंदर सिंह की अगुवाई में हुई यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देशों के तहत की गई। इस विशेष जांच अभियान में यातायात नियमों का उल्लंघन करने के कई मामले सामने आए, जिनमें 9 मोटरसाइकिल, 4 ट्रैक्टर, 2 बोलेरो, 3 लोडिंग टेम्पो और 2 पिकअप वाहन शामिल थे, जिनके चालान किए गए। सभी संबंधित चालकों को भविष्य में नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई। अभियान के दौरान ASI समय सिंह और ASI समुंदर सिंह ने चालकों को यातायात नियमों की जानकारी भी दी। उन्होंने सभी वाहन चालकों से हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और वाहन के आवश्यक दस्तावेज साथ रखने का अनुरोध करते हुए यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया। कोलवा थाना पुलिस की इस विशेष अभियान के तहत की गई कार्रवाई की ग्रामीणों ने बहुत सराहना की है। ग्रामीणों ने पुलिस के इस प्रयास को सराहनीय पहल बताया, जिसमें नियमों की पालना के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। कोलवा थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।3
- सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का "असली कॉकरोच" मिल गया है। इस पोस्ट में दर्शकों को वीडियो को अंत तक देखने की अपील की गई है, यह कहते हुए कि इसे देखकर उनकी हँसी रुकने का नाम नहीं लेगी। यह जानकारी #कॉकरोच_जनता_पार्टी और #कॉकरोचपार्टी हैशटैग के साथ साझा की गई है, जो इस पूरे विषय में एक मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक लहजा जोड़ती है।1
- जयपुर के 200 फीट बाईपास क्षेत्र में टैक्सी ड्राइवर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से परेशान हैं। ड्राइवरों का आरोप है कि पुलिस उन्हें रेड लाइट जंप करने की बात कहकर रोकती है, जबकि वे किसी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं करते। टैक्सी ड्राइवरों का कहना है कि यदि किसी वाहन चालक पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया जाता है, तो इसके स्पष्ट सबूत जैसे कैमरा फुटेज या अन्य प्रमाण दिखाए जाने चाहिए। वहीं, पोस्ट में यह भी जोर दिया गया है कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों का पालन करना सभी वाहन चालकों की जिम्मेदारी है। इस संबंध में, पोस्ट ने पाठकों से पूछा है कि क्या उन्हें भी ऐसे किसी अनुभव का सामना करना पड़ा है, और उनसे अपनी राय कमेंट में साझा करने का आग्रह किया है।1
- यह पोस्ट कांग्रेस पार्टी को ‘भारतीयों का दुर्भाग्य’ करार देते हुए उस पर तीखा हमला करती है। पोस्ट के अनुसार, कांग्रेस को एक ‘आवारा औरत’ के समान बताया गया है, जो कथित तौर पर अपने ‘खसम’ (पति) के दम पर खाती है, लेकिन अपने ‘यार’ (प्रेमी) पाकिस्तान और बांग्लादेश के गीत गाती है।4
- प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले या शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष बढ़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा केंद्र उसी जिले में या अधिकतम 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही दिए जाएं। यह इसलिए आवश्यक है ताकि छात्रों को अनावश्यक यात्रा, अतिरिक्त खर्च और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दिन हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के एक साथ शहरों में पहुंचने से गंभीर अव्यवस्था पैदा हो जाती है। इस दौरान ऑटो, रिक्शा, बस, होटल, ढाबे, पार्किंग स्थलों, अमानती घरों और फोटोकॉपी सेंटरों पर मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिससे परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूरस्थ परीक्षा केंद्रों का नकारात्मक असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम जनता, यातायात व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पर भी पड़ता है। इसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे सामान्य नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से मांग की है कि वे सेंटर आवंटन प्रक्रिया में स्थानीयता को प्राथमिकता दें। उनका स्पष्ट कहना है कि परीक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों को सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन्हें लंबी यात्रा, अनावश्यक खर्च और अव्यवस्था झेलने के लिए मजबूर करना।1