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प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले या शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष बढ़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा केंद्र उसी जिले में या अधिकतम 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही दिए जाएं। यह इसलिए आवश्यक है ताकि छात्रों को अनावश्यक यात्रा, अतिरिक्त खर्च और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दिन हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के एक साथ शहरों में पहुंचने से गंभीर अव्यवस्था पैदा हो जाती है। इस दौरान ऑटो, रिक्शा, बस, होटल, ढाबे, पार्किंग स्थलों, अमानती घरों और फोटोकॉपी सेंटरों पर मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिससे परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूरस्थ परीक्षा केंद्रों का नकारात्मक असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम जनता, यातायात व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पर भी पड़ता है। इसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे सामान्य नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से मांग की है कि वे सेंटर आवंटन प्रक्रिया में स्थानीयता को प्राथमिकता दें। उनका स्पष्ट कहना है कि परीक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों को सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन्हें लंबी यात्रा, अनावश्यक खर्च और अव्यवस्था झेलने के लिए मजबूर करना।

9 hrs ago
user_Isha sharma
Isha sharma
Jaipur, Rajasthan•
9 hrs ago

प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले या शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष बढ़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा केंद्र उसी जिले में या अधिकतम 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही दिए जाएं। यह इसलिए आवश्यक है ताकि छात्रों को अनावश्यक यात्रा, अतिरिक्त खर्च और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दिन हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के एक साथ शहरों में पहुंचने से गंभीर अव्यवस्था पैदा हो जाती है। इस दौरान ऑटो, रिक्शा, बस, होटल, ढाबे, पार्किंग स्थलों, अमानती घरों और फोटोकॉपी सेंटरों पर मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिससे परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूरस्थ परीक्षा केंद्रों का नकारात्मक असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम जनता, यातायात व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पर भी पड़ता है। इसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे सामान्य नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से मांग की है कि वे सेंटर आवंटन प्रक्रिया में स्थानीयता को प्राथमिकता दें। उनका स्पष्ट कहना है कि परीक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों को सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन्हें लंबी यात्रा, अनावश्यक खर्च और अव्यवस्था झेलने के लिए मजबूर करना।

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  • सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का "असली कॉकरोच" मिल गया है। इस पोस्ट में दर्शकों को वीडियो को अंत तक देखने की अपील की गई है, यह कहते हुए कि इसे देखकर उनकी हँसी रुकने का नाम नहीं लेगी। यह जानकारी #कॉकरोच_जनता_पार्टी और #कॉकरोचपार्टी हैशटैग के साथ साझा की गई है, जो इस पूरे विषय में एक मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक लहजा जोड़ती है।
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    सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का "असली कॉकरोच" मिल गया है। इस पोस्ट में दर्शकों को वीडियो को अंत तक देखने की अपील की गई है, यह कहते हुए कि इसे देखकर उनकी हँसी रुकने का नाम नहीं लेगी। यह जानकारी #कॉकरोच_जनता_पार्टी और #कॉकरोचपार्टी हैशटैग के साथ साझा की गई है, जो इस पूरे विषय में एक मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक लहजा जोड़ती है।
    user_Pawan sharma
    Pawan sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने एक बड़े अभियान की घोषणा की है, जिसके तहत ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की जाएगी जिनमें आगे या पीछे अतिरिक्त बंपर (बंपर गार्ड) लगे हुए हैं। पुलिस इन वाहनों का चालान कर सकती है, और वाहन मालिकों को इस पर ध्यान देने की चेतावनी दी गई है। ट्रैफिक विशेषज्ञों के मुताबिक, वाहनों में नियमों के खिलाफ किए गए इस तरह के मॉडिफिकेशन सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने अपने जांच अभियान को और तेज कर दिया है। इस विशेष अभियान, अतिरिक्त बंपर से जुड़े मोटर वाहन नियमों, और पुलिस की कार्रवाई की पूरी जानकारी के लिए लोगों को 'हमारी खास रिपोर्ट' देखने का आग्रह किया गया है। यह घोषणा जस्ट जयपुर लाइव द्वारा की गई है, जो जयपुर शहर की हर छोटी-बड़ी खबर तुरंत देने का दावा करता है।
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    जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने एक बड़े अभियान की घोषणा की है, जिसके तहत ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की जाएगी जिनमें आगे या पीछे अतिरिक्त बंपर (बंपर गार्ड) लगे हुए हैं। पुलिस इन वाहनों का चालान कर सकती है, और वाहन मालिकों को इस पर ध्यान देने की चेतावनी दी गई है।

ट्रैफिक विशेषज्ञों के मुताबिक, वाहनों में नियमों के खिलाफ किए गए इस तरह के मॉडिफिकेशन सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने अपने जांच अभियान को और तेज कर दिया है।

इस विशेष अभियान, अतिरिक्त बंपर से जुड़े मोटर वाहन नियमों, और पुलिस की कार्रवाई की पूरी जानकारी के लिए लोगों को 'हमारी खास रिपोर्ट' देखने का आग्रह किया गया है। यह घोषणा जस्ट जयपुर लाइव द्वारा की गई है, जो जयपुर शहर की हर छोटी-बड़ी खबर तुरंत देने का दावा करता है।
    user_Just Jaipur Live
    Just Jaipur Live
    Journalist जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Available for Sale Locality : Tunga Expected Price : 5500000 Property Type : Agricultural / Farm Land Property Condition : Old फॉर्म हाउस के लिए चाहिए तो ये ऑन रोड पर है
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    Available for Sale
Locality : Tunga
Expected Price : 5500000
Property Type : Agricultural / Farm Land
Property Condition : Old
फॉर्म हाउस के लिए चाहिए तो ये ऑन रोड पर है
    user_SHIVJI RAM
    SHIVJI RAM
    तुंगा, जयपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • रेनवाल टोल पर भारी अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं, जिसके कारण वहां की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इसके साथ ही, टोल से गुजरने वाली सड़क भी दिनों-दिन जर्जर होती जा रही है।
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    रेनवाल टोल पर भारी अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं, जिसके कारण वहां की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इसके साथ ही, टोल से गुजरने वाली सड़क भी दिनों-दिन जर्जर होती जा रही है।
    user_Rakesh Kumar Swami
    Rakesh Kumar Swami
    सांगानेर, जयपुर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 'थप्पड़ थप्पड़' मामले को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
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    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 'थप्पड़ थप्पड़' मामले को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
    user_Pawan sharma
    Pawan sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • जयपुर के 200 फीट बाईपास क्षेत्र में टैक्सी ड्राइवर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से परेशान हैं। ड्राइवरों का आरोप है कि पुलिस उन्हें रेड लाइट जंप करने की बात कहकर रोकती है, जबकि वे किसी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं करते। टैक्सी ड्राइवरों का कहना है कि यदि किसी वाहन चालक पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया जाता है, तो इसके स्पष्ट सबूत जैसे कैमरा फुटेज या अन्य प्रमाण दिखाए जाने चाहिए। वहीं, पोस्ट में यह भी जोर दिया गया है कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों का पालन करना सभी वाहन चालकों की जिम्मेदारी है। इस संबंध में, पोस्ट ने पाठकों से पूछा है कि क्या उन्हें भी ऐसे किसी अनुभव का सामना करना पड़ा है, और उनसे अपनी राय कमेंट में साझा करने का आग्रह किया है।
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    जयपुर के 200 फीट बाईपास क्षेत्र में टैक्सी ड्राइवर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से परेशान हैं। ड्राइवरों का आरोप है कि पुलिस उन्हें रेड लाइट जंप करने की बात कहकर रोकती है, जबकि वे किसी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं करते।

टैक्सी ड्राइवरों का कहना है कि यदि किसी वाहन चालक पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया जाता है, तो इसके स्पष्ट सबूत जैसे कैमरा फुटेज या अन्य प्रमाण दिखाए जाने चाहिए। वहीं, पोस्ट में यह भी जोर दिया गया है कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों का पालन करना सभी वाहन चालकों की जिम्मेदारी है।

इस संबंध में, पोस्ट ने पाठकों से पूछा है कि क्या उन्हें भी ऐसे किसी अनुभव का सामना करना पड़ा है, और उनसे अपनी राय कमेंट में साझा करने का आग्रह किया है।
    user_Just Jaipur Live
    Just Jaipur Live
    Journalist जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • यह पोस्ट कांग्रेस पार्टी को ‘भारतीयों का दुर्भाग्य’ करार देते हुए उस पर तीखा हमला करती है। पोस्ट के अनुसार, कांग्रेस को एक ‘आवारा औरत’ के समान बताया गया है, जो कथित तौर पर अपने ‘खसम’ (पति) के दम पर खाती है, लेकिन अपने ‘यार’ (प्रेमी) पाकिस्तान और बांग्लादेश के गीत गाती है।
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    यह पोस्ट कांग्रेस पार्टी को ‘भारतीयों का दुर्भाग्य’ करार देते हुए उस पर तीखा हमला करती है। पोस्ट के अनुसार, कांग्रेस को एक ‘आवारा औरत’ के समान बताया गया है, जो कथित तौर पर अपने ‘खसम’ (पति) के दम पर खाती है, लेकिन अपने ‘यार’ (प्रेमी) पाकिस्तान और बांग्लादेश के गीत गाती है।
    user_दौलत राम शर्मा शास्त्री
    दौलत राम शर्मा शास्त्री
    Voice of people आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले या शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष बढ़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा केंद्र उसी जिले में या अधिकतम 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही दिए जाएं। यह इसलिए आवश्यक है ताकि छात्रों को अनावश्यक यात्रा, अतिरिक्त खर्च और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दिन हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के एक साथ शहरों में पहुंचने से गंभीर अव्यवस्था पैदा हो जाती है। इस दौरान ऑटो, रिक्शा, बस, होटल, ढाबे, पार्किंग स्थलों, अमानती घरों और फोटोकॉपी सेंटरों पर मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिससे परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूरस्थ परीक्षा केंद्रों का नकारात्मक असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम जनता, यातायात व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पर भी पड़ता है। इसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे सामान्य नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से मांग की है कि वे सेंटर आवंटन प्रक्रिया में स्थानीयता को प्राथमिकता दें। उनका स्पष्ट कहना है कि परीक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों को सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन्हें लंबी यात्रा, अनावश्यक खर्च और अव्यवस्था झेलने के लिए मजबूर करना।
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    प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले या शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष बढ़ रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा केंद्र उसी जिले में या अधिकतम 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही दिए जाएं। यह इसलिए आवश्यक है ताकि छात्रों को अनावश्यक यात्रा, अतिरिक्त खर्च और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।

छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दिन हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के एक साथ शहरों में पहुंचने से गंभीर अव्यवस्था पैदा हो जाती है। इस दौरान ऑटो, रिक्शा, बस, होटल, ढाबे, पार्किंग स्थलों, अमानती घरों और फोटोकॉपी सेंटरों पर मनमानी वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिससे परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दूरस्थ परीक्षा केंद्रों का नकारात्मक असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम जनता, यातायात व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पर भी पड़ता है। इसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे सामान्य नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से मांग की है कि वे सेंटर आवंटन प्रक्रिया में स्थानीयता को प्राथमिकता दें। उनका स्पष्ट कहना है कि परीक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों को सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन्हें लंबी यात्रा, अनावश्यक खर्च और अव्यवस्था झेलने के लिए मजबूर करना।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    9 hrs ago
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