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Apke Nagar Ki App…

पाइपलाइन बिछी, नल भी लगे, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण आठनेर के दहीपानी में नल-जल योजना बनी शोपीस, कुएं से पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण; टैंकर से जलापूर्ति की मांग आठनेर जनपद पंचायत आठनेर के अंतर्गत ग्राम पंचायत अंबाड़ा के आश्रित ग्राम दहीपानी में पेयजल समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन इसके बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। नलों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण योजना ग्रामीणों के लिए महज पाइपलाइन और नलों तक सीमित होकर रह गई है। पेयजल की समस्या के चलते ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में पर्याप्त और सुचारू जलस्रोत उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को दूर स्थित कुओं एवं अन्य खुले जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीण रस्सी और डिब्बे के सहारे कुओं से पानी खींचकर उसे घरों तक पहुंचा रहे हैं। मोटरसाइकिल और साइकिल से ढोना पड़ रहा पानी पेयजल संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को पानी के बर्तन मोटरसाइकिल और साइकिल पर रखकर घरों तक ले जाने पड़ रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के साथ ग्रामीणों को भी प्रतिदिन पानी की व्यवस्था करने के लिए काफी समय और मेहनत खर्च करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें इस तरह परेशान होना पड़ रहा है, जबकि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन पहले से बिछाई जा चुकी है। यदि योजना की जलापूर्ति व्यवस्था को ठीक कर दिया जाए तो ग्रामीणों की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान ग्रामीणों के मुताबिक पेयजल समस्या को लेकर पंचायत स्तर से लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार जानकारी दी गई है। इसके बावजूद पाइपलाइन में पानी नहीं आने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल गर्मी के दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य दिनों में भी उन्हें पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में स्थापित नल-जल योजना की तकनीकी जांच कराकर पाइपलाइन, जलस्रोत, मोटर एवं पंपिंग व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट की जाए और जो भी कमी है, उसे तत्काल दूर किया जाए। जब तक योजना शुरू नहीं, टैंकर से मिले पानी ग्रामीणों ने मांग की है कि नल-जल योजना को तत्काल चालू कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जब तक पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से दहीपानी में पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं से पानी ढोने के लिए मजबूर न होना पड़े। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कर जलसंकट का स्थायी समाधान करेगा और नल-जल योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंचाएगा।

1 hr ago
user_भैंसदेही संवाददाता
भैंसदेही संवाददाता
Local News Reporter भैंसदेही, बैतूल, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

पाइपलाइन बिछी, नल भी लगे, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण आठनेर के दहीपानी में नल-जल योजना बनी शोपीस, कुएं से पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण; टैंकर से जलापूर्ति की मांग आठनेर जनपद पंचायत आठनेर के अंतर्गत ग्राम पंचायत अंबाड़ा के आश्रित ग्राम दहीपानी में पेयजल समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन इसके बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। नलों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण योजना ग्रामीणों के लिए महज पाइपलाइन और नलों तक सीमित होकर रह गई है। पेयजल की समस्या के चलते ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में पर्याप्त और सुचारू जलस्रोत उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को दूर स्थित कुओं एवं अन्य खुले जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीण रस्सी और डिब्बे के सहारे कुओं से पानी खींचकर उसे घरों तक पहुंचा रहे हैं। मोटरसाइकिल और साइकिल

से ढोना पड़ रहा पानी पेयजल संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को पानी के बर्तन मोटरसाइकिल और साइकिल पर रखकर घरों तक ले जाने पड़ रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के साथ ग्रामीणों को भी प्रतिदिन पानी की व्यवस्था करने के लिए काफी समय और मेहनत खर्च करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें इस तरह परेशान होना पड़ रहा है, जबकि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन पहले से बिछाई जा चुकी है। यदि योजना की जलापूर्ति व्यवस्था को ठीक कर दिया जाए तो ग्रामीणों की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान ग्रामीणों के मुताबिक पेयजल समस्या को लेकर पंचायत स्तर से लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार जानकारी दी गई है। इसके बावजूद पाइपलाइन में पानी नहीं आने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना

है कि समस्या केवल गर्मी के दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य दिनों में भी उन्हें पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में स्थापित नल-जल योजना की तकनीकी जांच कराकर पाइपलाइन, जलस्रोत, मोटर एवं पंपिंग व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट की जाए और जो भी कमी है, उसे तत्काल दूर किया जाए। जब तक योजना शुरू नहीं, टैंकर से मिले पानी ग्रामीणों ने मांग की है कि नल-जल योजना को तत्काल चालू कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जब तक पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से दहीपानी में पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं से पानी ढोने के लिए मजबूर न होना पड़े। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कर जलसंकट का स्थायी समाधान करेगा और नल-जल योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंचाएगा।

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  • पाइपलाइन बिछी, नल भी लगे, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण आठनेर के दहीपानी में नल-जल योजना बनी शोपीस, कुएं से पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण; टैंकर से जलापूर्ति की मांग आठनेर जनपद पंचायत आठनेर के अंतर्गत ग्राम पंचायत अंबाड़ा के आश्रित ग्राम दहीपानी में पेयजल समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन इसके बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। नलों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण योजना ग्रामीणों के लिए महज पाइपलाइन और नलों तक सीमित होकर रह गई है। पेयजल की समस्या के चलते ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में पर्याप्त और सुचारू जलस्रोत उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को दूर स्थित कुओं एवं अन्य खुले जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीण रस्सी और डिब्बे के सहारे कुओं से पानी खींचकर उसे घरों तक पहुंचा रहे हैं। मोटरसाइकिल और साइकिल से ढोना पड़ रहा पानी पेयजल संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को पानी के बर्तन मोटरसाइकिल और साइकिल पर रखकर घरों तक ले जाने पड़ रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के साथ ग्रामीणों को भी प्रतिदिन पानी की व्यवस्था करने के लिए काफी समय और मेहनत खर्च करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें इस तरह परेशान होना पड़ रहा है, जबकि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन पहले से बिछाई जा चुकी है। यदि योजना की जलापूर्ति व्यवस्था को ठीक कर दिया जाए तो ग्रामीणों की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान ग्रामीणों के मुताबिक पेयजल समस्या को लेकर पंचायत स्तर से लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार जानकारी दी गई है। इसके बावजूद पाइपलाइन में पानी नहीं आने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल गर्मी के दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य दिनों में भी उन्हें पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में स्थापित नल-जल योजना की तकनीकी जांच कराकर पाइपलाइन, जलस्रोत, मोटर एवं पंपिंग व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट की जाए और जो भी कमी है, उसे तत्काल दूर किया जाए। जब तक योजना शुरू नहीं, टैंकर से मिले पानी ग्रामीणों ने मांग की है कि नल-जल योजना को तत्काल चालू कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जब तक पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से दहीपानी में पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं से पानी ढोने के लिए मजबूर न होना पड़े। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कर जलसंकट का स्थायी समाधान करेगा और नल-जल योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंचाएगा।
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    पाइपलाइन बिछी, नल भी लगे, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण
आठनेर के दहीपानी में नल-जल योजना बनी शोपीस, कुएं से पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण; टैंकर से जलापूर्ति की मांग
आठनेर
जनपद पंचायत आठनेर के अंतर्गत ग्राम पंचायत अंबाड़ा के आश्रित ग्राम दहीपानी में पेयजल समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन इसके बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। नलों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण योजना ग्रामीणों के लिए महज पाइपलाइन और नलों तक सीमित होकर रह गई है।
पेयजल की समस्या के चलते ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में पर्याप्त और सुचारू जलस्रोत उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को दूर स्थित कुओं एवं अन्य खुले जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीण रस्सी और डिब्बे के सहारे कुओं से पानी खींचकर उसे घरों तक पहुंचा रहे हैं।
मोटरसाइकिल और साइकिल से ढोना पड़ रहा पानी
पेयजल संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को पानी के बर्तन मोटरसाइकिल और साइकिल पर रखकर घरों तक ले जाने पड़ रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के साथ ग्रामीणों को भी प्रतिदिन पानी की व्यवस्था करने के लिए काफी समय और मेहनत खर्च करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें इस तरह परेशान होना पड़ रहा है, जबकि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन पहले से बिछाई जा चुकी है। यदि योजना की जलापूर्ति व्यवस्था को ठीक कर दिया जाए तो ग्रामीणों की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान
ग्रामीणों के मुताबिक पेयजल समस्या को लेकर पंचायत स्तर से लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार जानकारी दी गई है। इसके बावजूद पाइपलाइन में पानी नहीं आने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल गर्मी के दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य दिनों में भी उन्हें पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में स्थापित नल-जल योजना की तकनीकी जांच कराकर पाइपलाइन, जलस्रोत, मोटर एवं पंपिंग व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट की जाए और जो भी कमी है, उसे तत्काल दूर किया जाए।
जब तक योजना शुरू नहीं, टैंकर से मिले पानी
ग्रामीणों ने मांग की है कि नल-जल योजना को तत्काल चालू कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जब तक पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से दहीपानी में पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं से पानी ढोने के लिए मजबूर न होना पड़े।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कर जलसंकट का स्थायी समाधान करेगा और नल-जल योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंचाएगा।
    user_भैंसदेही संवाददाता
    भैंसदेही संवाददाता
    Local News Reporter भैंसदेही, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • ग्राम दहीपानी में नल-जल योजना कागजों पर सिमटी, पाइपलाइन होने के बाद भी कुएं और गढ्ढों से पानी ढोने को मजबूर हैं ग्रामीण, आठनेर विकासखण्ड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अंम्बाड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम दहीपानी में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बारिश के दिनों में ग्रामीण बुंद बुंद पानी के मशक्कत करते नजर आ रहे हैं। शासन और प्रशासन के दावों के विपरीत, गांव में बिछाई गई नल-जल योजना की पाइपलाइन शो पीस की वस्तु बनकर रह गई है। पाइपलाइन होने के बावजूद उसमें एक बूंद पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण मटमेला पानी पिने को मजबूर हैं। जान जोखिम में डालकर बिना मुंडेर और फिसलन जैसे कुओं से पानी निकाल रहें हैं ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सरपंच सहित जनप्रतिनिधियों को मामले से अवगत कराया परन्तु आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से नल-जल योजना की जांच और निराकरण की मांग की है। ​
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    ग्राम दहीपानी में नल-जल योजना कागजों पर सिमटी, पाइपलाइन होने के बाद भी कुएं और गढ्ढों से पानी ढोने को मजबूर हैं ग्रामीण,

आठनेर विकासखण्ड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अंम्बाड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम दहीपानी में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बारिश के दिनों में ग्रामीण बुंद बुंद पानी के मशक्कत करते नजर आ रहे हैं। शासन और प्रशासन के दावों के विपरीत, गांव में बिछाई गई नल-जल योजना की पाइपलाइन शो पीस की वस्तु बनकर रह गई है। पाइपलाइन होने के बावजूद उसमें एक बूंद पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण मटमेला पानी पिने को मजबूर हैं। जान जोखिम में डालकर बिना मुंडेर और फिसलन जैसे कुओं से पानी निकाल रहें हैं ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सरपंच सहित जनप्रतिनिधियों को मामले से अवगत कराया परन्तु आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से नल-जल योजना की जांच और निराकरण की मांग की है।
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    user_आठनेर रिपोर्टर
    आठनेर रिपोर्टर
    पत्रकारिता आठनेर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • सीमांकन हुआ, लेकिन पूर्वजों का मकान कहां गया?आंदोलनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पथराव की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। बोरदेही। ग्राम करोपानी में जमीन विवाद को लेकर ग्रामीणों की भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही, लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन अब तक मौके पर पहुंचकर उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। तीन दिन से ग्रामीण भूख हड़ताल पर बैठे हैं और इसी बीच रात में आंदोलन स्थल पर कथित पथराव की घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। आंदोलनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पथराव की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। सीमांकन हुआ, लेकिन पूर्वजों का मकान कहां गया? ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल विवादित भूमि के सीमांकन को लेकर है। आंदोलनकारियों का दावा है कि मौके पर वर्षों से मौजूद पूर्वजों का बना मकान और पुराने कब्जे की वास्तविक स्थिति सीमांकन दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब मौके पर मकान मौजूद है तो सीमांकन रिपोर्ट में उसका उल्लेख क्यों नहीं है? आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पंचनामा तैयार करते समय भी मौके की पूरी वास्तविक स्थिति दर्ज नहीं की गई। उनका कहना है कि वर्षों पुराने कब्जे, मकान और खेती-किसानी से जुड़े तथ्यों को यदि रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया, तो उसी आधार पर आगे की राजस्व कार्रवाई कितनी सही मानी जाए—यह बड़ा सवाल है। फील्ड बुक और सीमांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग ग्रामीणों ने सीमांकन रिपोर्ट में कथित काटछांट की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि यदि सीमांकन पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार हुआ है तो फील्ड बुक, सीमांकन नक्शा, पंचनामा और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड सामने रखने में क्या आपत्ति है? आंदोलनकारियों की मांग है कि विवादित जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके की स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में कोई अंतर है या नहीं। मामला न्यायालय में विचाराधीन, फिर कार्रवाई की जल्दबाजी क्यों? ग्रामीणों के अनुसार जमीन और कब्जे से जुड़ा विवाद एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। परिवारों की ओर से जमीन पर तीन पीढ़ियों से कब्जे और पैतृक संपत्ति का दावा किया जा रहा है। ऐसे में आंदोलनकारियों का सवाल है कि जब मामला न्यायिक प्रक्रिया में है, तो कब्जा दिलाने अथवा बेदखली से जुड़ी कार्रवाई को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? ग्रामीणों ने मांग की है कि न्यायालयीन स्थिति स्पष्ट होने तक किसी भी पक्ष के अधिकार प्रभावित न हों और पूरे राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए। पथराव ने बढ़ाई चिंता, आंदोलन स्थल की सुरक्षा पर सवाल भूख हड़ताल के तीसरे दिन रात में कथित पथराव की घटना ने आंदोलनकारियों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने घटना की जांच कर दोषियों का पता लगाने और आंदोलन स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। ढाई लाख के कथित लेनदेन की चर्चा भी जांच के घेरे में आंदोलनकारियों के बीच राजनीतिक दबाव और करीब ढाई लाख रुपए के कथित लेनदेन को लेकर भी चर्चा होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इस कथित लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह महज अफवाह है तो जांच से स्थिति साफ हो जाएगी और यदि इसमें कोई तथ्य है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी बात रखने गए करोपानी के किसानों पर गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। आंदोलनकारियों ने इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता का भी है। भूख हड़ताल तीसरे दिन में पहुंच चुकी है, पथराव की घटना सामने आ चुकी है और ग्रामीण दस्तावेजों की जांच की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मौके की वास्तविक स्थिति, सीमांकन रिपोर्ट, फील्ड बुक, पंचनामा और न्यायालयीन रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराकर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाए।
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    सीमांकन हुआ, लेकिन पूर्वजों का मकान कहां गया?आंदोलनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पथराव की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

बोरदेही। ग्राम करोपानी में जमीन विवाद को लेकर ग्रामीणों की भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही, लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन अब तक मौके पर पहुंचकर उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। तीन दिन से ग्रामीण भूख हड़ताल पर बैठे हैं और इसी बीच रात में आंदोलन स्थल पर कथित पथराव की घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। आंदोलनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पथराव की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
सीमांकन हुआ, लेकिन पूर्वजों का मकान कहां गया?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल विवादित भूमि के सीमांकन को लेकर है। आंदोलनकारियों का दावा है कि मौके पर वर्षों से मौजूद पूर्वजों का बना मकान और पुराने कब्जे की वास्तविक स्थिति सीमांकन दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब मौके पर मकान मौजूद है तो सीमांकन रिपोर्ट में उसका उल्लेख क्यों नहीं है?
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पंचनामा तैयार करते समय भी मौके की पूरी वास्तविक स्थिति दर्ज नहीं की गई। उनका कहना है कि वर्षों पुराने कब्जे, मकान और खेती-किसानी से जुड़े तथ्यों को यदि रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया, तो उसी आधार पर आगे की राजस्व कार्रवाई कितनी सही मानी जाए—यह बड़ा सवाल है।
फील्ड बुक और सीमांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों ने सीमांकन रिपोर्ट में कथित काटछांट की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि यदि सीमांकन पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार हुआ है तो फील्ड बुक, सीमांकन नक्शा, पंचनामा और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड सामने रखने में क्या आपत्ति है?
आंदोलनकारियों की मांग है कि विवादित जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके की स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में कोई अंतर है या नहीं।
मामला न्यायालय में विचाराधीन, फिर कार्रवाई की जल्दबाजी क्यों?
ग्रामीणों के अनुसार जमीन और कब्जे से जुड़ा विवाद एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। परिवारों की ओर से जमीन पर तीन पीढ़ियों से कब्जे और पैतृक संपत्ति का दावा किया जा रहा है। ऐसे में आंदोलनकारियों का सवाल है कि जब मामला न्यायिक प्रक्रिया में है, तो कब्जा दिलाने अथवा बेदखली से जुड़ी कार्रवाई को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि न्यायालयीन स्थिति स्पष्ट होने तक किसी भी पक्ष के अधिकार प्रभावित न हों और पूरे राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पथराव ने बढ़ाई चिंता, आंदोलन स्थल की सुरक्षा पर सवाल
भूख हड़ताल के तीसरे दिन रात में कथित पथराव की घटना ने आंदोलनकारियों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने घटना की जांच कर दोषियों का पता लगाने और आंदोलन स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
ढाई लाख के कथित लेनदेन की चर्चा भी जांच के घेरे में
आंदोलनकारियों के बीच राजनीतिक दबाव और करीब ढाई लाख रुपए के कथित लेनदेन को लेकर भी चर्चा होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इस कथित लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह महज अफवाह है तो जांच से स्थिति साफ हो जाएगी और यदि इसमें कोई तथ्य है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी बात रखने गए करोपानी के किसानों पर गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। आंदोलनकारियों ने इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता का भी है। भूख हड़ताल तीसरे दिन में पहुंच चुकी है, पथराव की घटना सामने आ चुकी है और ग्रामीण दस्तावेजों की जांच की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मौके की वास्तविक स्थिति, सीमांकन रिपोर्ट, फील्ड बुक, पंचनामा और न्यायालयीन रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराकर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाए।
    user_जिला ब्यूरो बैतूल
    जिला ब्यूरो बैतूल
    Salesperson बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • बैतूल में महाराष्ट्र की तर्ज पर देढ़ दिन के गणेश जी की स्थापना
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    बैतूल में महाराष्ट्र की तर्ज पर देढ़ दिन के गणेश जी की स्थापना
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter Multai, Betul•
    12 hrs ago
  • बरसाली स्टेशन के पास जयपुर-मैसूर एक्सप्रेस में एक्सल ओवरहीटिंग से निकला धुआं, यात्रियों में मचा हड़कंप
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    बरसाली स्टेशन के पास जयपुर-मैसूर एक्सप्रेस में एक्सल ओवरहीटिंग से निकला धुआं, यात्रियों में मचा हड़कंप
    user_AMLA NEWS
    AMLA NEWS
    आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मुलताई में जुआ फड़ पर पुलिस की दबिश, 6 आरोपी गिरफ्तार मुलताई। पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपूसे एवं एसडीओपी मुलताई एस.के. सिंह के मार्गदर्शन में थाना मुलताई पुलिस ने जुआ फड़ पर कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी निरीक्षक विकास पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 13 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर नेहरू वार्ड स्थित नागदेव मंदिर के बाजू वाली गली की टपरी पर दबिश दी। मौके पर ताश के पत्तों से रुपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे धनराज प्रजापति, गोविंद उर्फ गुड्डू साहू, सुरेन्द्र विश्वकर्मा, नरेन्द्र विश्वकर्मा, ऋषि साहू एवं आसिफ सिंघानिया को पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹1,225 नकद और 52 ताश के पत्ते जब्त किए। आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 770/26, धारा 13 जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया। सभी को सूचना नोटिस तामील कर न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। कार्रवाई में थाना प्रभारी विकास पटेल, प्र.आर. गजराज सिंह सहित आरक्षक विवेक, नरेन्द्र कुशवाह, प्रिंश अहिरवार, सेवाराम पवार, गोपाल परिहार एवं अरविंद पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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    मुलताई में जुआ फड़ पर पुलिस की दबिश, 6 आरोपी गिरफ्तार
मुलताई। पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपूसे एवं एसडीओपी मुलताई एस.के. सिंह के मार्गदर्शन में थाना मुलताई पुलिस ने जुआ फड़ पर कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
थाना प्रभारी निरीक्षक विकास पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 13 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर नेहरू वार्ड स्थित नागदेव मंदिर के बाजू वाली गली की टपरी पर दबिश दी। मौके पर ताश के पत्तों से रुपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे धनराज प्रजापति, गोविंद उर्फ गुड्डू साहू, सुरेन्द्र विश्वकर्मा, नरेन्द्र विश्वकर्मा, ऋषि साहू एवं आसिफ सिंघानिया को पकड़ा गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹1,225 नकद और 52 ताश के पत्ते जब्त किए। आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 770/26, धारा 13 जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया। सभी को सूचना नोटिस तामील कर न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।
कार्रवाई में थाना प्रभारी विकास पटेल, प्र.आर. गजराज सिंह सहित आरक्षक विवेक, नरेन्द्र कुशवाह, प्रिंश अहिरवार, सेवाराम पवार, गोपाल परिहार एवं अरविंद पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
    user_Kashinath Sahu
    Kashinath Sahu
    Local News Reporter मुलताई, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • mehrakhapa dadaji darbar me Rishi Panchami har sal ki tarah aaj bi dhum dham se manaya gaya jai shree dadaji ki
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    mehrakhapa dadaji darbar me Rishi Panchami har sal ki tarah aaj bi dhum dham se manaya gaya jai shree dadaji ki
    user_Reva maiya
    Reva maiya
    पांढुर्ना, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • गन्ने का दाम 600 करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग गन्ने का दाम 600 करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग देशव्यापी ज्ञापन दिवस पर भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री- मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा बैतूल। देशव्यापी ज्ञापन दिवस के तहत भारतीय किसान संघ की तहसील इकाई ने मंगलवार 15 सितंबर को किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। देशभर के किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। वहीं बैतूल की स्थानीय किसान समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर तहसीलदार को भी ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कृषि लागत, फसल क्षतिपूर्ति, सिंचाई, बिजली और किसानों से जुड़ी अन्य समस्याओं के निराकरण की मांग की गई। किसान संघ ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य 600 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग प्रमुखता से उठाई। वहीं खरीफ फसल में सोयाबीन, धान और मक्का को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर भू-राजस्व संहिता की धारा 4-6 के तहत क्षतिपूर्ति राशि तथा फसल बीमा क्लेम दिलाने की मांग की गई। सोसायटियों द्वारा बीमा राशि काटे जाने के बावजूद किसानों को रसीद नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए बैंकों के माध्यम से रसीद उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। ज्ञापन में आबादी भूमि के ड्रोन सर्वे में सामने आई त्रुटियों का भौतिक सत्यापन कराने और भू-सुधार का विकल्प देने की मांग की गई। साथ ही कम वर्षा को देखते हुए कम पानी में होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराने तथा लागत अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में भेजने की मांग रखी गई। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए तार फेंसिंग पर 60 प्रतिशत सब्सिडी और सभी फसलों का लाभकारी मूल्य निर्धारित करने की मांग भी शामिल है। सिंचाई व्यवस्था को लेकर संघ ने घोघरी डैम परियोजना के अधूरे निर्माण कार्य आगामी रबी सीजन तक पूरा कर नहर और पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई शुरू कराने की मांग की। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए एक ट्रांसफार्मर खराब होने पर पूरे स्टेशन का फीडर बंद करने के बजाय संबंधित ट्रांसफार्मर का डीओ या जंपर काटकर सुधार कार्य करने का सुझाव दिया गया, ताकि अन्य किसानों की बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके अलावा रबी सीजन के लिए ई-टोकन व्यवस्था में प्रति एकड़ खाद का कोटा बढ़ाने, ग्राम उमरी दरगाह के पास ओवरलोड की समस्या के समाधान के लिए अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने, शहरी क्षेत्र के किसानों पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर निरस्त करने तथा नगरीय किसानों को डीबीटी के माध्यम से सोलर पंप अनुदान में प्राथमिकता देने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष नकुल भूसारे, संभागीय कार्यालय मंत्री नकुल सिंह चंदेल, नगर अध्यक्ष संतोष पाल, आशाराम ढावले, नगर उपाध्यक्ष अमर नाथ चौधरी और वरिष्ठ मार्गदर्शक दीपक कपूर सहित बड़ी संख्या में किसान एवं संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
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    गन्ने का दाम 600 करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग
गन्ने का दाम 600 करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग
देशव्यापी ज्ञापन दिवस पर भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री- मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
बैतूल। देशव्यापी ज्ञापन दिवस के तहत भारतीय किसान संघ की तहसील इकाई ने मंगलवार 15 सितंबर को किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। देशभर के किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। वहीं बैतूल की स्थानीय किसान समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर तहसीलदार को भी ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कृषि लागत, फसल क्षतिपूर्ति, सिंचाई, बिजली और किसानों से जुड़ी अन्य समस्याओं के निराकरण की मांग की गई।
किसान संघ ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य 600 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग प्रमुखता से उठाई। वहीं खरीफ फसल में सोयाबीन, धान और मक्का को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर भू-राजस्व संहिता की धारा 4-6 के तहत क्षतिपूर्ति राशि तथा फसल बीमा क्लेम दिलाने की मांग की गई। सोसायटियों द्वारा बीमा राशि काटे जाने के बावजूद किसानों को रसीद नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए बैंकों के माध्यम से रसीद उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
ज्ञापन में आबादी भूमि के ड्रोन सर्वे में सामने आई त्रुटियों का भौतिक सत्यापन कराने और भू-सुधार का विकल्प देने की मांग की गई। साथ ही कम वर्षा को देखते हुए कम पानी में होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराने तथा लागत अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में भेजने की मांग रखी गई। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए तार फेंसिंग पर 60 प्रतिशत सब्सिडी और सभी फसलों का लाभकारी मूल्य निर्धारित करने की मांग भी शामिल है।
सिंचाई व्यवस्था को लेकर संघ ने घोघरी डैम परियोजना के अधूरे निर्माण कार्य आगामी रबी सीजन तक पूरा कर नहर और पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई शुरू कराने की मांग की। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए एक ट्रांसफार्मर खराब होने पर पूरे स्टेशन का फीडर बंद करने के बजाय संबंधित ट्रांसफार्मर का डीओ या जंपर काटकर सुधार कार्य करने का सुझाव दिया गया, ताकि अन्य किसानों की बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो।
इसके अलावा रबी सीजन के लिए ई-टोकन व्यवस्था में प्रति एकड़ खाद का कोटा बढ़ाने, ग्राम उमरी दरगाह के पास ओवरलोड की समस्या के समाधान के लिए अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने, शहरी क्षेत्र के किसानों पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर निरस्त करने तथा नगरीय किसानों को डीबीटी के माध्यम से सोलर पंप अनुदान में प्राथमिकता देने की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष नकुल भूसारे, संभागीय कार्यालय मंत्री नकुल सिंह चंदेल, नगर अध्यक्ष संतोष पाल, आशाराम ढावले, नगर उपाध्यक्ष अमर नाथ चौधरी और वरिष्ठ मार्गदर्शक दीपक कपूर सहित बड़ी संख्या में किसान एवं संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter Multai, Betul•
    16 hrs ago
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