बिहार के रोहतास जिले में विक्रमगंज स्थित माँ यक्षिणी भवानी मंदिर के लिए 'यक्षिणी माई साईं संस्थान समिति' के गठन को लेकर विवाद गहरा गया है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा समिति के गठन के बाद से ही स्थानीय पुजारियों और ग्रामीणों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि नई कमेटी का मंदिर से कोई संबंध नहीं है। स्थानीय पुजारी हरेंद्र पंडित ने स्पष्ट किया है कि धर्म न्यास बोर्ड द्वारा बनाई गई वर्तमान समिति का यक्षिणी भवानी माता से कोई लेना-देना नहीं है। काशीनाथ पंडित ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग षड्यंत्र करके भ्रम फैला रहे हैं, जो निंदनीय है। हरिवंश पंडित के अनुसार, माँ यक्षिणी भवानी मंदिर में पारंपरिक रूप से भलुनी, बरढ़िहाँ और खरीका के ब्राह्मण ही पूजा-पाठ करते आए हैं, और इससे पहले किसी की दखलअंदाजी नहीं हुई है। देव वंश पंडित ने यह भी बताया कि साईं मंदिर की कमेटी रजिस्टर्ड है, जिसका यक्षिणी भवानी मंदिर से कोई संबंध नहीं है, और लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। इससे पूर्व, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने यह आरोप भी लगाया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार और व्यवस्था में वर्षों से सक्रिय पुराने सेवकों को नई समिति में जगह नहीं दी गई है। इस पूरे मामले पर दिनारा विधायक आलोक सिंह ने भी नाराजगी व्यक्त की है और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को जायज ठहराया है। उन्होंने जिला प्रशासन को एक पत्र लिखकर स्थानीय कमेटी गठित करने की पहल करने की जानकारी दी है और धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रणवीर नंदन से भी इस संबंध में बात की है। ग्रामीण और श्रद्धालु धार्मिक न्यास बोर्ड से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और पुराने सेवकों को समिति में शामिल करने की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि रोहतास मुख्यालय सासाराम से 50 किलोमीटर और दिनारा प्रखंड से सात किलोमीटर पूरब में स्थित यक्षिणी भवानी धाम एक अति प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिसका उल्लेख श्रीमद देवी भागवत, मार्कंडेय पुराण और वाल्मीकि रामायण जैसे धर्मग्रंथों में भी मिलता है। यहाँ भगवान और भगवान इंद्र ने भी पूजा-अर्चना और तपस्या की थी। यक्षिणी माई साईं संस्थान समिति के गठन की इस चर्चा ने पुजारियों और ग्रामीणों के बीच संशय पैदा कर दिया है।
बिहार के रोहतास जिले में विक्रमगंज स्थित माँ यक्षिणी भवानी मंदिर के लिए 'यक्षिणी माई साईं संस्थान समिति' के गठन को लेकर विवाद गहरा गया है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा समिति के गठन के बाद से ही स्थानीय पुजारियों और ग्रामीणों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि नई कमेटी का मंदिर से कोई संबंध नहीं है। स्थानीय पुजारी हरेंद्र पंडित ने स्पष्ट किया है कि धर्म न्यास बोर्ड द्वारा बनाई गई वर्तमान समिति का यक्षिणी भवानी माता से कोई लेना-देना नहीं है। काशीनाथ पंडित ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग षड्यंत्र करके भ्रम फैला रहे हैं, जो निंदनीय है। हरिवंश पंडित के अनुसार, माँ यक्षिणी भवानी मंदिर में पारंपरिक रूप से भलुनी, बरढ़िहाँ और खरीका के ब्राह्मण ही पूजा-पाठ करते आए हैं, और इससे पहले किसी की दखलअंदाजी नहीं हुई है। देव वंश पंडित ने यह भी बताया कि साईं मंदिर की कमेटी रजिस्टर्ड है, जिसका यक्षिणी भवानी मंदिर से कोई संबंध नहीं है, और लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। इससे पूर्व, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने यह आरोप भी लगाया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार और व्यवस्था में वर्षों से सक्रिय पुराने सेवकों को नई समिति में जगह नहीं दी गई है। इस पूरे मामले पर दिनारा विधायक आलोक सिंह ने भी नाराजगी व्यक्त की है और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को जायज ठहराया है। उन्होंने जिला प्रशासन को एक पत्र लिखकर स्थानीय कमेटी गठित करने की पहल करने की जानकारी दी है और धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रणवीर नंदन से भी इस संबंध में बात की है। ग्रामीण और श्रद्धालु धार्मिक न्यास बोर्ड से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और पुराने सेवकों को समिति में शामिल करने की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि रोहतास मुख्यालय सासाराम से 50 किलोमीटर और दिनारा प्रखंड से सात किलोमीटर पूरब में स्थित यक्षिणी भवानी धाम एक अति प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिसका उल्लेख श्रीमद देवी भागवत, मार्कंडेय पुराण और वाल्मीकि रामायण जैसे धर्मग्रंथों में भी मिलता है। यहाँ भगवान और भगवान इंद्र ने भी पूजा-अर्चना और तपस्या की थी। यक्षिणी माई साईं संस्थान समिति के गठन की इस चर्चा ने पुजारियों और ग्रामीणों के बीच संशय पैदा कर दिया है।
- रोहतास जिले में नए जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने विधिवत अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्होंने निवर्तमान जिलाधिकारी उदिता सिंह से प्रभार लिया, जिन्हें सरकार ने नालंदा जिले की नई जिम्मेदारी सौंपी है। पदभार संभालने के बाद, नए जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना और जिले में चल रही विकास योजनाओं को समय पर पूरा करना होगा। कार्यभार संभालते ही उन्हें एक्शन मोड में देखा गया, जहाँ उन्होंने कहा कि वर्तमान में मुहर्रम को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए उन्होंने जिले में सुरक्षा और विधि-व्यवस्था का अवलोकन भी किया। जिलाधिकारी मिश्रा ने सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और विकास कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि मुहर्रम के दौरान जिले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना है।4
- अभिषेक कुमार ई-मीडिया ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर भरत तिवारी को आत्मसमर्पण कर देने के बाद भी पुलिस ने उन पर गोली क्यों चलाई।1
- बिहार सरकार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी भरत तिवारी मामले के संबंध में बिलौटी पहुंचे हैं।1
- आरा की धरती से 'सातवीं फेल मुख्यमंत्री' सम्राट चौधरी को भरत भूषण तिवारी द्वारा एक खुली और सीधी चुनौती दी गई है। फर्जी एनकाउंटर और बिहार पुलिस के संदर्भ में, चुनौती देने वालों ने स्पष्ट कहा है कि वे सम्राट चौधरी को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं करने देंगे।1
- औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड अंतर्गत जैतपुर गांव निवासी प्रमोद कुमार शर्मा की बेटी स्वाति कुमारी ने बीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी का पद हासिल किया है। इस उपलब्धि पर उनके परिजनों सहित पूरे गांव के ग्रामीणों ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं, जिससे हसपुरा की बेटी के रूप में उनकी यह सफलता क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।1
- पटना जंक्शन के इन्क्वायरी काउंटर पर यात्रियों को ट्रेन की जानकारी के लिए लगातार आवाज लगानी पड़ी, लेकिन वहां मौजूद जिम्मेदार कर्मचारी नींद में पाए गए। इस घटना से 'राजधानी की राजधानी में व्यवस्था बेहोश' होने का आरोप लगा है। यात्रियों को समय पर जानकारी न मिलने पर रेल सेवा के बेहतर दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, और यह पूछा जा रहा है कि क्या यही यात्रियों के प्रति जवाबदेही है। इस दौरान 'यात्री परेशान, कर्मचारी आराम!' की स्थिति दिखी, और पटना स्टेशन का यह वीडियो वायरल हो गया है।1
- बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा भरत तिवारी की कथित हत्या को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि इस कृत्य के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मी को तत्काल फांसी की सजा दी जानी चाहिए। न्याय की इस तीव्र मांग के साथ 'जय बिहार' का नारा भी बुलंद किया गया है, जो स्थानीय भावनाओं और विरोध को दर्शाता है।1
- भरत तिवारी एनकाउंटर मामले से जुड़ी जानकारी सामने आई है। इस पूरे प्रकरण को लेकर भरत तिवारी की बहन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और इस विषय पर अपनी बात रखी है।1