उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2013 में प्रधानाचार्य की नियुक्तियों को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को निरस्त किया! 13 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश के शिक्षा सेवा चयन आयोग से इंटर कॉलेजों में चयनित प्रधानाचार्यो की ज्वाइनिंग का रास्ता लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच में हुए एक फैसले से साफ हो गया है। अतर्रा नगर निवासी यूपी चयनित प्रधानाचार्य संघ के संयोजक डॉ विनोद पांडे एवं महासचिव डॉ राजेंद्र कुमार चौरसिया ने बताया कि 2013 में प्रधानाचार्य पद के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा निकाले गए विज्ञापन के आधार पर समूचे उत्तर प्रदेश के अंतर्गत लगभग 600 प्रधानाचार्यो का चयन वर्ष 2020 में हुए इंटरव्यू एवं 2022 में हुए अंतिम चयन के आधार पर आयोग द्वारा किया गया था। अब विभिन्न इंटर कॉलेज में पदस्थ प्रधानाचार्यो को पद से हटना पड़ेगा और चयनित प्रधानाचार्यो की जॉइनिंग का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। निर्णय न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला खंडपीठ ने श्याम शंकर उपाध्याय व अन्य तथा यूपी सेकेंड्री एजुकेशन सर्विसेज, इलाहाबाद की ओर से दाखिल अलग-अलग अपीलों पर पारित किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने प्रदेश भर के इंटर कॉलेजों में वर्ष 2013 के विज्ञापन के क्रम में की गई प्रधानाचार्यों की नियुक्तियों को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को निरस्त कर दिया है। 2023 में ही न्यायालय ने पाया था कि बड़ी मात्रा में हो चुकी नियुक्तियां एकल पीठ के निर्णय से प्रभावित होंगी तथा अपीलार्थीगण प्रधानाचार्य के पद पर दिसंबर 2022 से कार्य भी कर रहे हैं। ऐसे में कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया था। बता दें कि इस मामले में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति प्रकिया साल 2013 में विज्ञापन संख्या 3 जारी करते हुए शुरू की गई थी। एकल पीठ के समक्ष कहा गया था कि यह प्रकिया 9 सालों तक ठप रही और अचानक साल 2022 में एक महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कर दिया गया, जिसमें अन्य नियमों का भी ख्याल नहीं रखा गया। एकल पीठ ने एक फरवरी 2023 के अपने फैसले में कहा था कि विज्ञापन जारी करने के नौ वर्ष बाद की गईं नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हैं। एकल पीठ ने नियुक्तियों को रद् करने के साथ ही नए सिरे से नियुक्तियों की प्रकिया जल्द पूरी करने का आदेश दिया था। हालांकि इस फैसले के अंतिम तौर पर निरस्त हो जाने के बाद आयोग से चयनित प्रधानाचार्यो की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2013 में प्रधानाचार्य की नियुक्तियों को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को निरस्त किया! 13 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश के शिक्षा सेवा चयन आयोग से इंटर कॉलेजों में चयनित प्रधानाचार्यो की ज्वाइनिंग का रास्ता लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच में हुए एक फैसले से साफ हो गया है। अतर्रा नगर निवासी यूपी चयनित प्रधानाचार्य संघ के संयोजक डॉ विनोद पांडे एवं महासचिव डॉ राजेंद्र कुमार चौरसिया ने बताया कि 2013 में प्रधानाचार्य पद के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा निकाले गए विज्ञापन के आधार पर समूचे उत्तर प्रदेश के अंतर्गत लगभग 600 प्रधानाचार्यो का चयन वर्ष 2020 में हुए इंटरव्यू एवं 2022 में हुए अंतिम चयन के आधार पर आयोग द्वारा किया गया था। अब विभिन्न इंटर कॉलेज में पदस्थ प्रधानाचार्यो को पद से हटना पड़ेगा और चयनित प्रधानाचार्यो की जॉइनिंग का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। निर्णय न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला खंडपीठ ने श्याम शंकर उपाध्याय व अन्य तथा यूपी सेकेंड्री एजुकेशन सर्विसेज, इलाहाबाद की ओर से दाखिल अलग-अलग अपीलों पर पारित किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने प्रदेश भर के इंटर कॉलेजों में वर्ष 2013 के विज्ञापन के क्रम में की गई प्रधानाचार्यों की नियुक्तियों को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को निरस्त कर दिया है। 2023 में ही न्यायालय ने पाया था कि बड़ी मात्रा में हो चुकी नियुक्तियां एकल पीठ के निर्णय से प्रभावित होंगी तथा अपीलार्थीगण प्रधानाचार्य के पद पर दिसंबर 2022 से कार्य भी कर रहे हैं। ऐसे में कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया था। बता दें कि इस मामले में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति प्रकिया साल 2013 में विज्ञापन संख्या 3 जारी करते हुए शुरू की गई थी। एकल पीठ के समक्ष कहा गया था कि यह प्रकिया 9 सालों तक ठप रही और अचानक साल 2022 में एक महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कर दिया गया, जिसमें अन्य नियमों का भी ख्याल नहीं रखा गया। एकल पीठ ने एक फरवरी 2023 के अपने फैसले में कहा था कि विज्ञापन जारी करने के नौ वर्ष बाद की गईं नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हैं। एकल पीठ ने नियुक्तियों को रद् करने के साथ ही नए सिरे से नियुक्तियों की प्रकिया जल्द पूरी करने का आदेश दिया था। हालांकि इस फैसले के अंतिम तौर पर निरस्त हो जाने के बाद आयोग से चयनित प्रधानाचार्यो की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
- सबसे जूनियर सहायक अल्पसंख्यक अधिकारी श्री भगवती प्रसाद त्रिवेदी को जनपद देहरादून में नियमों के विरुद्ध जिला अल्पसंख्यक अधिकारी बनाए जाने का मैं विरोध करता हूँ। क्योंकि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कर्मचारी मोहसिन खान की मृत्यु से संबंधित प्रकरण में इनकी भूमिका की सीबी-सीआईडी जाँच चल रही है तथा यह मामला माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल में भी चल रहा है। ओर इनको अल्पसंख्यक आयोग में सचिव बनाने की बात भी चल रही है साथ ही इनकी ग्रेड पे ₹2800 है, जबकि संबंधित पद के लिए ₹5400 ग्रेड पे होना आवश्यक है। यह नियुक्ति अल्पसंख्यक विभाग के वरिष्ठ सहायकों के साथ अन्याय एवं उनका अपमान है और अल्पसंख्यक समाज का भी अपमान है। माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र अनुरोध है कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को ध्यान में रखते हुए श्री भगवती प्रसाद त्रिवेदी को जनपद देहरादून में तैनात न रखा जाए तथा इस मामले में नियमानुसार उचित निर्णय लिया जाए।1
- मानसून के दौरान नदी-नालों से रहें दूर, SDRF की अपील।।।।।।।।। 🌧️ The Aman Times | जनहित सूचना मानसून के दौरान नदी-नालों से रहें दूर, SDRF की अपील। जोली ग्रांट/डोईवाला_ लगातार हो रही बारिश को देखते हुए SDRF के सेनानायक श्री अर्पण यदुवंशी ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों से बरसाती नदी-नालों, गदेरों और तेज बहाव वाले जलस्रोतों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन ने जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही, सेल्फी और वीडियो बनाने से बचने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या SDRF को सूचना दें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। 🌧️🚨1
- हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने रोड का किया शिलान्यास हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने रोड का किया शिलान्यास लगातार विकास कार्यों में जुटी है हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत1
- हर पल दिन हो या रात राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट लगातार प्रशासन के कंधे से कंधा मिला कर कर रहा है कार्य राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट द्वारा संचालित कांवड़ सेवा एवं चलित मेडिकल सेवा शिविरों में संगठन के पदाधिकारियों का प्रमुख योगदान रहा। भगीरथ के सम्मान में हम आ गए मैदान में" के संकल्प के साथ की टीम हरिद्वार से रुड़की तक शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई है। 1. डॉ. सतपाल सैनी जिला संरक्षक, रुड़की 2. डॉ. सुरेश सैनी जिला संरक्षक, हरिद्वार एवं जिला चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार 3. श्री चेतन चौधरी युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, हरिद्वार 4. श्रीमती अलका सैनी राष्ट्रीय सचिव, 5. श्री प्रदीप शर्मा प्रदेश अध्यक्ष, 6. श्री पंकज सैनी राष्ट्रीय अध्यक्ष, सभी अपनी टीम के साथ चलित कांवड़ सेवा कर रहे हैं। शिविरों में निशुल्क जल, विश्राम, मार्गदर्शन एवं डॉ. दीपमाला के नेतृत्व में 11 डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रदीप शर्मा ने कहा कि संगठन के सभी पदाधिकारी तन-मन-धन से सेवा में लगे हैं। रुड़की और हरिद्वार के संरक्षकों व युवा मोर्चा के सहयोग से हजारों कांवड़ियों को राहत मिली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज सैनी ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना की और कहा कि आगे भी इसी तरह मानव सेवा में लगा रहेगा।4
- मंशादेवी मंदिर प्रबंधन द्वारा पिछले दिनों दावा किया गया था कि मंदिर में चढाए गये फूल, चुनरी, नारियल आदि सामग्री फिर से मंदिर में नहीं चढ़ने के लिए नहीं आएंगे लेकिन यह दावा कोरा दावा ही रहा! मंदिर में चढ़ने वाली यह सामग्री फिर से बिकने के लिए चोर रास्तों से मंदिर मार्ग पर बनी प्रसाद की दुकानों तक पहुंचाई जा रही है। जहां फिर से दुकानदार श्रद्धालुओं को इसे बेच देते हैं और फिर यह सभी सामग्री फिर वहीं पहुंच जाती है जहां पहले चढा़ई गई थी। दरअसल श्रद्धालुओं की आस्था का स्थल मंशादेवी मंदिर कुछ लोगों के लिए मोटी कमाई का स्थान है। चढ़ावे को फिर से चढ़ाने में सौ फीसदी का टर्नओवर है, जिससे इस काम में माफिया टाईप के लोगों का इनवाल्वमेंट है,जिनकी मंदिर प्रबंधन में पैठ है, जिसके कारण मंदिर प्रबंधन के दावे एक तरफ और सच्चाई दूसरी तरफ बनी हुई है। (_कुमार दुष्यंत_)1
- देहरादून में कैब ड्राइवर पर बदसलूकी का आरोप, सुनसान रास्ते से ले जाने की कोशिश; विरोध करने पर बारिश में उतारा देहरादून में एक युवती ने रैपिडो कैब ड्राइवर पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। युवती का कहना है कि ड्राइवर ऐप में दिख रहे मार्ग की बजाय सुनसान रास्ते से गाड़ी ले जा रहा था। विरोध करने पर उसने गाली-गलौज की और तेज बारिश के बीच युवती व उसके दोस्त को सड़क पर उतारकर चला गया। दोनों को देर तक बारिश में दूसरी कैब का इंतजार करना पड़ा और रात करीब 10 बजे घर पहुंचे। युवती ने पूरी घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया है।1