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11 दिनों से आदिवासी प्रदर्शन कर रहे हैं छतरपुर में

10 hrs ago
user_Media samaj sevak
Media samaj sevak
Farmer Alirajpur, Madhya Pradesh•
10 hrs ago

11 दिनों से आदिवासी प्रदर्शन कर रहे हैं छतरपुर में

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मध्यप्रदेश के पाटी आदिवासी आज भी कंधों पर सवार मरीज जाता ह इलाज हेतु 112 भी वही चार व्यक्ति आदिवासी पर निर्भर सेवा।
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    मध्यप्रदेश के पाटी आदिवासी आज भी कंधों पर सवार मरीज जाता ह इलाज हेतु 112 भी वही चार व्यक्ति आदिवासी पर निर्भर सेवा।
    user_Hemant Nagziriya
    Hemant Nagziriya
    News Anchor बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by NIMAD DASTAK NEWS
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    Post by NIMAD DASTAK NEWS
    user_NIMAD DASTAK NEWS
    NIMAD DASTAK NEWS
    Local News Reporter बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बड़वानी। देश में स्मार्ट गांव और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बड़वानी जिला के पाटी ब्लॉक की ग्राम पंचायत पीपरकुंड की तस्वीर इन दावों की हकीकत उजागर कर रही है। यहां आज भी बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस नहीं, बल्कि इंसानों के कंधों का सहारा लेना पड़ता है। 8 हजार की है आबादी करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की आबादी लगभग 8 हजार है, जबकि कुंडिया फलिया में 100 से ज्यादा परिवार निवास करते हैं। हैरानी की बात यह है कि आज तक यहां पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी। गांव तक पहुंचने के लिए करीब 7 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह कच्चा, उबड़-खाबड़ और खतरनाक है, जहां चार पहिया वाहन तो दूर, एम्बुलेंस का पहुंचना भी नामुमकिन है। इसी मजबूरी के चलते ग्रामीण मरीजों को कपड़े की झोली में डालकर कंधों पर उठाकर पक्के रास्ते तक ले जाते हैं। यह दृश्य केवल दर्दनाक नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी को भी उजागर करता है। हर बार यही स्थिति बनती है। गांव के निवासी प्रदीप, जो खुद एक मरीज को कंधे पर ढोते नजर आए, बताते हैं कि हर बार यही स्थिति बनती है। थकान और बेबसी के बीच वे कहते हैं, “हर बार इसी तरह मरीजों को ले जाना पड़ता है।” रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं। जंगल का इलाका, घना अंधेरा और जंगली जानवरों का डर ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा देता है। गांव के ही फतिया बताते हैं कि बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी जानलेवा हो जाता है। नाले उफान पर होते हैं और पथरीले रास्तों पर चलना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार तो लोग मरीज को ले जाने के लिए सुबह होने का इंतजार करते हैं, और कई बार यही इंतजार जिंदगी पर भारी पड़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनसुनवाई में आवेदन दिए और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका सीधा सवाल है—जब हम भी वोट देते हैं और सरकार बनाने में भागीदारी करते हैं, तो हमें बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम इलाकों की है जहां आज भी सड़क नहीं है और इसी कारण जिंदगी कंधों पर ढोई जा रही है। अब सवाल यही है कि आखिर ये 7 किलोमीटर की सड़क कब बनेगी, क्योंकि जब तक सड़क नहीं पहुंचेगी, तब तक यहां जिंदगी इसी तरह कंधों पर चलती रहेगी। मामले में क्या बोले अधिकारी एसडीएम भूपेंद्र रावत के अनुसार, धरती आभा योजना के अंतर्गत ऐसे गांवों को चिह्नित किया गया है जहां 100 से अधिक आबादी है। इन गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए निर्माण कार्य प्रस्तावित है। हालांकि, ग्रामीणों को अब भी इंतजार है कि ये योजनाएं जमीन पर कब उतरेंगी।
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    बड़वानी।
देश में स्मार्ट गांव और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बड़वानी जिला के पाटी ब्लॉक की ग्राम पंचायत पीपरकुंड की तस्वीर इन दावों की हकीकत उजागर कर रही है। यहां आज भी बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस नहीं, बल्कि इंसानों के कंधों का सहारा लेना पड़ता है।
8 हजार की है आबादी
करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की आबादी लगभग 8 हजार है, जबकि कुंडिया फलिया में 100 से ज्यादा परिवार निवास करते हैं। हैरानी की बात यह है कि आज तक यहां पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी। गांव तक पहुंचने के लिए करीब 7 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह कच्चा, उबड़-खाबड़ और खतरनाक है, जहां चार पहिया वाहन तो दूर, एम्बुलेंस का पहुंचना भी नामुमकिन है।
इसी मजबूरी के चलते ग्रामीण मरीजों को कपड़े की झोली में डालकर कंधों पर उठाकर पक्के रास्ते तक ले जाते हैं। यह दृश्य केवल दर्दनाक नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी को भी उजागर करता है।
हर बार यही स्थिति बनती है।
गांव के निवासी प्रदीप, जो खुद एक मरीज को कंधे पर ढोते नजर आए, बताते हैं कि हर बार यही स्थिति बनती है। थकान और बेबसी के बीच वे कहते हैं, “हर बार इसी तरह मरीजों को ले जाना पड़ता है।”
रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं। जंगल का इलाका, घना अंधेरा और जंगली जानवरों का डर ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा देता है।
गांव के ही फतिया बताते हैं कि बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी जानलेवा हो जाता है। नाले उफान पर होते हैं और पथरीले रास्तों पर चलना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार तो लोग मरीज को ले जाने के लिए सुबह होने का इंतजार करते हैं, और कई बार यही इंतजार जिंदगी पर भारी पड़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनसुनवाई में आवेदन दिए और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका सीधा सवाल है—जब हम भी वोट देते हैं और सरकार बनाने में भागीदारी करते हैं, तो हमें बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं
यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम इलाकों की है जहां आज भी सड़क नहीं है और इसी कारण जिंदगी कंधों पर ढोई जा रही है। अब सवाल यही है कि आखिर ये 7 किलोमीटर की सड़क कब बनेगी, क्योंकि जब तक सड़क नहीं पहुंचेगी, तब तक यहां जिंदगी इसी तरह कंधों पर चलती रहेगी।
मामले में क्या बोले अधिकारी
एसडीएम भूपेंद्र रावत के अनुसार, धरती आभा योजना के अंतर्गत ऐसे गांवों को चिह्नित किया गया है जहां 100 से अधिक आबादी है। इन गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए निर्माण कार्य प्रस्तावित है। हालांकि, ग्रामीणों को अब भी इंतजार है कि ये योजनाएं जमीन पर कब उतरेंगी।
    user_पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
    पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
    पत्रकार बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • बड़वानी जिले सहित अन्य स्थानों से अतिथि शिक्षकों द्वारा भोपाल में प्रदर्शन किया जाएगा,जिसकी तैयारियों को लेकर अतिथि शिक्षकों की बैठकों का दौर शुरू हुआ है।
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    बड़वानी जिले सहित अन्य स्थानों से अतिथि शिक्षकों द्वारा भोपाल में प्रदर्शन किया जाएगा,जिसकी तैयारियों को लेकर अतिथि शिक्षकों की बैठकों का दौर शुरू हुआ है।
    user_सतीश केवट
    सतीश केवट
    Local News Reporter पानसेमल, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by निमाड़ का दबंग न्यूज
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    Post by निमाड़ का दबंग न्यूज
    user_निमाड़ का दबंग न्यूज
    निमाड़ का दबंग न्यूज
    निवाली, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी (एक बंदर ने बचाई बच्चे की जान, सोशल मीडिया पर वायरल विडियो को मील रहा खासा समर्थन) किसी ने सच ही कहा है कि मां की ममता पाक दिवानी जैसें मां गंगा का पानी जीसने मां की कदर ना जानी उस नर की बैकार जिन्दगानी,जी हां आज हम शौशल मिडीया पर वायरल हो रहें एक दुष्य ने सब को हेरत में डाल दिया किसी शहर में एक छोटा मासुम बच्चा खेलते खेलते अचानक बिलडींग की गेलेरी पर लटक गया जो मासुम जी जान सांतत में आ गई लेकिन मारने वाले से बचाने वाला महान होता है पास ही एक काले मुह का बंदर था जीसने गेलेरी में लटकते हुए बचे की जान बचाई, लोगों ने इस वायरल विडियो को देखकर कंहा की मारने वाला है भगवान बचाने वाला है भगवान
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    कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी 
(एक बंदर ने बचाई बच्चे की जान, सोशल मीडिया पर वायरल विडियो को मील रहा खासा समर्थन)
किसी ने सच ही कहा है कि मां की ममता पाक दिवानी जैसें मां गंगा का पानी जीसने मां की कदर ना जानी उस नर की बैकार जिन्दगानी,जी हां आज हम शौशल मिडीया पर वायरल हो रहें एक दुष्य ने सब को हेरत में डाल दिया किसी शहर में एक छोटा मासुम बच्चा खेलते खेलते अचानक बिलडींग की गेलेरी पर लटक गया जो मासुम जी जान सांतत में आ गई लेकिन मारने वाले से बचाने वाला महान होता है पास ही एक काले मुह का बंदर था जीसने गेलेरी में लटकते हुए बचे की जान बचाई, लोगों ने इस वायरल विडियो को देखकर कंहा की मारने वाला है भगवान बचाने वाला है भगवान
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • Post by NIMAD DASTAK NEWS
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    Post by NIMAD DASTAK NEWS
    user_NIMAD DASTAK NEWS
    NIMAD DASTAK NEWS
    Local News Reporter बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बड़वानी शहर के नवलपुरा में नवाचार आपकी बात,पुलिस के साथ, के दौरान SP बड़वानी पद्मविलोचन शुक्ल पहुंचे,जनता से चर्चा करते हुए विभिन्न विषयों पर जागरूक किया।
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    बड़वानी शहर के नवलपुरा में नवाचार आपकी बात,पुलिस के साथ, के दौरान SP बड़वानी पद्मविलोचन शुक्ल पहुंचे,जनता से चर्चा करते हुए विभिन्न विषयों पर जागरूक किया।
    user_सतीश केवट
    सतीश केवट
    Local News Reporter पानसेमल, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Vajid Patel
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    Post by Vajid Patel
    user_Vajid Patel
    Vajid Patel
    बड़नगर, उज्जैन, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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