प्रयागराज के करछना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा मेडरा में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) करछना ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एसडीएम के समक्ष उपस्थित होकर ग्राम पंचायत की विभिन्न समस्याओं को रखा और ग्राम प्रधान पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के कई मकान आज भी अधूरे पड़े हैं, जिसके कारण पात्र लाभार्थियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि ग्राम प्रधान एवं रोजगार सेवक द्वारा विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं। ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि रोजगार सेवक स्वयं प्रधान का पुत्र है, जिसके चलते पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। इसके अलावा आशा बहन के लिए उपलब्ध कराई गई कुर्सी, मेज एवं अन्य आवश्यक सामग्री का भी सही उपयोग नहीं किया गया और उसमें भी अनियमितता बरती गई है। ग्रामीणों की तमाम शिकायतों को सुनने के बाद एसडीएम ने संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीण धीरज कुमार पांडेय सहित अन्य ग्रामीणों ने गांव की समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की।
प्रयागराज के करछना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा मेडरा में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) करछना ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एसडीएम के समक्ष उपस्थित होकर ग्राम पंचायत की विभिन्न समस्याओं को रखा और ग्राम प्रधान पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के कई मकान आज भी अधूरे पड़े हैं, जिसके कारण पात्र लाभार्थियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि ग्राम प्रधान एवं रोजगार सेवक द्वारा विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं। ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि रोजगार सेवक स्वयं प्रधान का पुत्र है, जिसके चलते पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। इसके अलावा आशा बहन के लिए उपलब्ध कराई गई कुर्सी, मेज एवं अन्य आवश्यक सामग्री का भी सही उपयोग नहीं किया गया और उसमें भी अनियमितता बरती गई है। ग्रामीणों की तमाम शिकायतों को सुनने के बाद एसडीएम ने संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीण धीरज कुमार पांडेय सहित अन्य ग्रामीणों ने गांव की समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की।
- धीरज कुमार पांडेयकरछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेशघोटाला बाजों को नये उपजिलाधिकारी करछना बक्सेगे नहीं न्यायी अधिकारी के हाथ फंसे मेडरा गांव के भ्रष्टाचारी12 hrs ago
- मनोज कुमार पांडेयकरछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेशबहुत बड़ा पहुंच बाज डकैत है प्रधान पुत्र रोजगार सेवक मेडरा 22 मई 2026 से ही वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीन लिया गया है फिर भी ग्राम सभा के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है गवाहों को डरा रहा है और साक्ष्य को मिटा रहा है16 hrs ago
- मूरतगंज ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम सभा सैयद सरावां के निबिहा गांव में बच्चों को हर दिन पढ़ाई के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। हाथों में किताबें थामे मासूम बच्चे रोज कीचड़ और दलदल से भरे बदहाल रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। यह स्थिति इलाके में प्रशासनिक नाकामी और जिम्मेदार अधिकारियों की खुली लापरवाही को बयां करती है। बरसात का मौसम आते ही गांव की सड़कों की हालत बद से बदतर हो जाती है। रास्तों पर जगह-जगह पानी भरा हुआ है और कीचड़ इतना गहरा है कि चलना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में भी बच्चे कीचड़ में फिसलते और संभलते हुए किसी तरह अपने स्कूल की ओर बढ़ते हैं। इसके साथ ही आसपास जमा गंदगी और जलभराव से गांव में बीमारियां फैलने का खतरा भी लगातार बना हुआ है। गांव के लोगों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की तरफ से कागजों में तो विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर जमीनी हकीकत में बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है।1
- पीलीभीत में बीसलपुर-बरेली हाईवे पर भड़रिया मोड़ के पास जलभराव के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़क की अस्थायी मरम्मत किसान नेता एवं क्रांतिकारी विचार मंच उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संरक्षक देव स्वरूप पटेल ने कराई। उन्होंने मंगलवार रात संगठन के कार्यकर्ताओं और मंडरा सुमन के ग्राम प्रधान अजय सिंह गंगवार के सहयोग से ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से ईंट, रोड़ा और राबिश डलवाकर सड़क के गड्ढों को भरवाया। देव स्वरूप पटेल ने बताया कि भड़रिया मोड़ पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से लगातार जलभराव हो रहा है, जिससे सड़क बार-बार टूट रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। स्थानीय दुकानदारों ने उन्हें बताया कि पिछले वर्ष जल निकासी के लिए जो नाला खुदवाया गया था, उसका एक हिस्सा इस बार पाट दिया गया है। इस पर किसान नेता ने नाला पाटने को गैरकानूनी व जनहित के विरुद्ध बताते हुए जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बीसलपुर के उप जिलाधिकारी से संपर्क न होने पर जिलाधिकारी पीलीभीत तथा लोक निर्माण विभाग बरेली के मुख्य अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर पाटे गए नाले की तत्काल खुदाई और सड़क सुधार की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बीसलपुर, बरेली और लखीमपुर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हाईवे है, जिससे रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। साथ ही सावन माह में कछला, बरेली, बाबा गुलेश्वरनाथ बीसलपुर और छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ जाने वाले हजारों कांवड़िए भी इसी मार्ग से गुजरेंगे। किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया और कोई दुर्घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।2
- जंतर-मंतर से जुड़े आंदोलन का रुझान और असर अब हर जगह देखने को मिल रहा है। इस आंदोलन की गूंज और प्रभाव व्यापक रूप से हर तरफ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।1
- अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा (एआईकेएमएस) का उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन 25 और 26 जुलाई को गोहनिया स्थित स्वास्तिक गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में एआईकेएमएस किसानों के अधिकारों पर मंथन करने के लिए जुटेगा। कार्यक्रम की शुरुआत संगठन के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड अशोक मेहता द्वारा उद्घाटन के साथ होगी। वहीं 25 जुलाई को सुबह 11 बजे सम्मेलन का खुला सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता स्वागत समिति के अध्यक्ष विजय चितौरी करेंगे।1
- प्रयागराज के शंकरगढ़ स्थित रानीगंज तिराहे पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत ग्रुप) के कार्यकर्ताओं ने देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की घटना से बेहद आक्रोशित थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से तुरंत बर्खास्त करने की मांग उठाई।1
- उत्तर प्रदेश के मूरतगंज ब्लॉक स्थित ग्राम सभा सैयद सरावां के निबिहा गांव में बच्चों को हर दिन स्कूल पहुंचने के लिए दलदल और कीचड़ भरे खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। हाथों में किताबें थामे ये मासूम बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। यह स्थिति विकास के दावों के बीच सिस्टम की नाकामी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की खुली पोल खोल रही है। बरसात का मौसम आते ही गांव की सड़कों की हालत बद से बदतर हो गई है, जहां जगह-जगह गहरा पानी और कीचड़ भरा रहता है। इस रास्ते पर बच्चे फिसलते-संभलते किसी तरह स्कूल की ओर बढ़ते हैं, वहीं गंदगी और जलभराव के कारण इलाके में बीमारियां फैलने का भी लगातार खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन कागजों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।1
- भारतीय किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र उपाध्याय ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी कार्यप्रणाली को तानाशाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम व्यवस्था संभालना है, लेकिन सरकार को जवाब देना चाहिए कि सफेदपोश लोग कहां से आ रहे हैं। उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि मौजूदा समय में लड़कों के ऊपर ट्रकों से गिट्टी लाकर डलवाई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जवाबदेही से बचने के लिए नेता सदन और प्रधानमंत्री नीट परीक्षा तथा अन्य प्रमुख मुद्दों पर सदन छोड़कर भाग रहे हैं, जबकि इसी देश ने कभी उनके लिए थाली, घंटा और हथौड़ी बजाई थी। उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चंदा चोरी से जुड़े बयान पर सवाल उठाते हुए मांग की कि दूध का दूध और पानी का पानी अलग करके स्थिति साफ की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हनुमान गढ़ी पर जानबूझकर विवाद पैदा करने की कोशिश हो रही है, जबकि उसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था और वहां इसका शिलापट भी लगा है। किसान नेता ने सरकार पर देश को बांटने और डर के माहौल में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज जनता और विपक्ष के साथ न्याय नहीं हो रहा है।1
- भागलपुर जिले के जटामा और मोहानी के बीच परिजन अपने ही तीन मासूम बच्चों को सड़क किनारे लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और मामले की सूचना पुलिस को दी। सड़क किनारे मिले इन बच्चों में से एक की उम्र करीब डेढ़ महीने, दूसरे की करीब डेढ़ साल और तीसरे बच्चे की उम्र ढाई से तीन साल के बीच बताई गई है।1