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BJP की बड़ी जीत के बाद कांसाबेल में जश्न | आतिशबाजी और झालमुरी के साथ मनाई खुशी BJP की बड़ी जीत के बाद कांसाबेल में जश्न | आतिशबाजी और झालमुरी के साथ मनाई खुशी
Ibnul khan
BJP की बड़ी जीत के बाद कांसाबेल में जश्न | आतिशबाजी और झालमुरी के साथ मनाई खुशी BJP की बड़ी जीत के बाद कांसाबेल में जश्न | आतिशबाजी और झालमुरी के साथ मनाई खुशी
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- PM मोदी पर भरोसा, BJP को मिला प्रचंड जनादेश1
- इंदिरा आवास ढहने से बुजुर्ग की मौत, गांव में शोक और आक्रोश डुमरी (गुमला): डुमरी प्रखंड के खेतली पंचायत अंतर्गत बरटोली गांव में मंगलवार देर रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। प्राकृतिक आपदा के बीच एक प्रधानमंत्री आवास (इंदिरा आवास) के अचानक ढह जाने से उसमें सो रहे 72 वर्षीय भोवा झोरा की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई है। जानकारी के मुताबिक, रात करीब 1 बजे तेज हवा और लगातार बारिश के कारण जर्जर स्थिति में बना आवास अचानक भरभराकर गिर पड़ा। उस समय भोवा झोरा घर के अंदर सो रहे थे और मलबे में दब गए। घटना की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया। ग्रामीण लिली टोप्पो के अनुसार, बाहर निकालने के बाद कुछ समय तक उनकी सांसें चल रही थीं, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। ग्राम पंचायत के मुखिया जवाहर कवर ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि मृतक के पास एक पुराना कच्चा मकान सुरक्षित था, जबकि सरकारी योजना के तहत बना आवास घटिया निर्माण के कारण जर्जर हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दलालों के जरिए घटिया निर्माण कराए जाने से यह हादसा हुआ। मुखिया ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और जल्द सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। घटना के बाद बरटोली गांव में मातम के साथ-साथ आक्रोश भी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जर्जर आवासों की जांच और मरम्मत की जाती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से राहत और कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।1
- Post by Salim Dungdung1
- गुमला: आज बुधवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने चंदाली स्थित ईवीएम वेयरहाउस का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने ईवीएम वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी आवश्यक पहलुओं की गहन जांच की। इस क्रम में सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति एवं उनके रख-रखाव का जायजा लिया गया। उपायुक्त ने संपूर्ण परिसर का भ्रमण करते हुए विद्युत व्यवस्था, बैलट यूनिट हॉल, अग्निशमन व्यवस्था, कमरों की सीलिंग, डबल लॉक प्रणाली सहित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाए रखने तथा सभी उपकरणों के नियमित रख-रखाव सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। मौके पर डीसीएलआर गुमला राजीव कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी सुषमा लकड़ा, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि—कांग्रेस पार्टी से फिरोज आलम एवं रामनिवास प्रसाद, झारखंड मुक्ति मोर्चा से रणजीत सरदार, राष्ट्रीय जनता दल से रविन्द्र बड़ाइक एवं अरविंद कुमार महतो—सहित निर्वाचन कार्यालय के शेखर कुमार, विकास शर्मा, शशिकांत भारती एवं अन्य कर्मीगण उपस्थित थे।2
- महिला से पानी मांगा, फिर हाथ-पैर बांधकर किया अपहरण, फिर पति से फोन कर कहा- पत्नी चाहिए तो 22 लाख दो, 2 गिरफ्तार अपहरण के मामले में शामिल तीसरे आरोपी की तलाश जारी, मुख्य आरोपी को महिला के पति के रिटायर होने पर बड़ी रकम मिलने की थी जानकारी, पैसे की लालच में वारदात को दिया अंजाम सूरजपुर. एक महिला का अपहरण कर पति से 22 लाख की फिरौती मांगने के मामले में पुलिस ने 2 आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल मुख्य आरोपी को यह जानकारी मिली थी कि महिला का पति एसईसीएल की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ है और उसे बड़ी रकम मिली है। बस इसी लालच में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर महिला का अपहरण कर रकम की डिमांड की थी। पानी मांगने के बहाने महिला के घर घुसे आरोपियों ने उसके हाथ-पैर बांधकर अपहरण कर लिया था। हालांकि पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण आरोपी महिला को घायल अवस्था में छोड़ कर भाग गए थे, लेकिन मुख्य आरोपी व उसका एक सहयोगी पकड़े गए, जबकि एक अन्य फरार है जिसकी तलाश जारी है। 30 अप्रैल को थाना सूरजपुर क्षेत्र अन्तर्गत एक व्यक्ति ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 29 अप्रैल को सुबह अपने ड्राइवर के साथ दुर्घटनाग्रस्त वाहन को बनवाने अंबिकापुर गया था। घर में पत्नी अकेली थी। दोपहर 3.30 बजे अपने ड्राइवर के साथ घर वापस पहुंचा तो पत्नी घर में नहीं थी। काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिली, इसी दौरान करीब 3.50 बजे पत्नी के मोबाइल से फोन आया, लेकिन फोन पर कोई अज्ञात व्यक्ति था, जिसने कहा कि अपनी पत्नी चाहते हो तो 22 लाख रुपए दो। मामले में प्रार्थी की रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध दर्ज किया। इधर एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की पतासाजी हेतु तत्काल तीन टीम का गठन किया। बलरामपुर इसके बाद पुलिस टीमों ने सघन पेट्रोलिंग करते हुए आरोपियों की खोजबीन शुरू कर दी। इधर पकड़े जाने के डर और पुलिस की पेट्रोलिंग से बढ़ते दबाव के बीच आरोपी महिला को ग्राम डुमरिया से पीढ़ा होते हुए पर्री से चंदरपुर जाने वाले बाइपास रोड पर ले जाकर घायल अवस्था में छोड़ दिए और पीडि़ता को ढकने में प्रयुक्त कंबल, बांधने वाला रस्सी, मुंह में लगा टेप निकालकर वहीं जला दिए और वहां से चले गए। महिला ने पति को दी थी सूचना इसके बाद महिला एक व्यक्ति के घर पहुंची और वहां से मोबाइल के जरिए पति को सूचना दी। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और महिला को बरामद कर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। फिर पुलिस टीम ने तकनीक की मदद व महिला के बताए अनुसार संदेही रौशन देवांगन पिता रामचरण देवांगन उम्र 21 वर्ष निवासी महुआपारा सूरजपुर पकड़ा। इससे पूछताछ के आधार पर बिलासपुर की ओर भाग रहे साथी शेख इशू पिता शेख इसराइल खान उम्र 23 वर्ष निवासी शांति गली मस्जिदपारा सूरजपुर को केतका में घेराबंदी कर पकड़ा गया। इन दोनों को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त अपहृता का मोबाइल, रस्सी, टेप व कंबल का जला राख, घटना में प्रयुक्त 1 बाइक, 1 स्कूटी व आरोपियों का 2 नग मोबाइल जब्त किया गया। प्रकरण में एक अन्य आरोपी फरार है। जिसकी तलाश जारी है। कार्रवाई में थाना प्रभारी सूरजपुर विमलेश दुबे, एसआई एसआर भगत, संदीप सिंह, एएसआई सुनील सिंह, आरक्षक रविराज पाण्डेय व रामप्रसाद साहू सक्रिय रहे। पीने के लिए पानी मांगा, फिर किया अपहरण पूछताछ में मुख्य आरोपी रौशन देवांगन ने बताया कि वह महिला के पति के वाहन को 18 माह तक चलाया था। इस कारण वह जानता था कि वह एसईसीएल से सेवानिवृत्त हुआ है और उसे काफी पैसा मिला है। पैसे की लालच में अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई। वह अपने साथी शेख इशू व एक अन्य के साथ मिलकर उसके घर जाकर उसकी पत्नी से बातचीत कर पीने के लिए पानी मांगा। कुछ देर बाद महिला को पकडक़र घर अंदर ले गए। फिर योजनानुसार उसके मुंह-आंखों में टेप लगाने के बाद हाथ-पैर बांध दिए। इसके बाद बाइक में बैठाकर रौशन के टायर पंक्चर दुकान डुमरिया ले गए। यहां रौशन ने महिला का मोबाइल ले लिया और ग्राम रूनियाडीह जाकर पता को फोन लगाकर 22 लाख रुपए की मांग की थी।1
- Post by Dhananajy jangde1
- Post by हमर जशपुर1
- प्रचंड जीत पर BJP कार्यकर्ताओं में जश्न, नितिन नवीन का सम्मान1
- सड़क हादसे ने खोली चैनपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, डॉक्टर और एंबुलेंस के अभाव में गई एक जान चैनपुर को अनुमंडल का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। जानकारी देते हुए मंगलवार शाम पांच बजे बताया गया कि चैनपुर थाना क्षेत्र के पाराहटोली के समीप हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। मिली जानकारी के अनुसार सुग्गासरवा निवासी अलबिनुस लकड़ा (पिता जॉर्ज लकड़ा) और अभय एक्का (पिता जोसेफ एक्का) स्कूटी से पैनसो बाजार से गाय खरीदकर अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पाराहटोली के समीप पीछे से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार एवं एएसआई संतोष धर्मपाल लुगुन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के सहयोग से घायलों को चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। लेकिन अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं रहने के कारण घायल अलबिनुस लकड़ा को मृत घोषित तक नहीं किया जा सका। अस्पताल पहुंचने के क्रम में ही उनकी मौत हो गई, जिसके बाद कागजी प्रक्रिया के लिए शव को गुमला सदर अस्पताल रेफर करना पड़ा। बताया गया कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस खड़ी तो है, लेकिन लंबे समय से कंडम घोषित होने के कारण उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। मौके पर पहुंचे प्रखंड उप प्रमुख प्रमोद खलखो ने बताया कि घायल अभय एक्का की गंभीर स्थिति को देखते हुए कई बार एक सौ आठ एंबुलेंस सेवा को कॉल किया गया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंततः मजबूर होकर परिजनों को निजी व्यवस्था से मृतक और घायल को अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अनुमंडल बनने के बावजूद यदि समय पर डॉक्टर और एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।1