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सभी क्षेत्रवासी भक्ति रस का आनंद लें रहे हैं।
समाज की हलचल लोकेश कुमार सेन
सभी क्षेत्रवासी भक्ति रस का आनंद लें रहे हैं।
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- कोटा में जेके फैक्ट्री के मजदूर बकाया भुगतान की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर एक साल से ज़्यादा समय से धरने पर बैठे हैं। इस लंबी अवधि के बावजूद मजदूरों का जोश और जज्बा बरकरार है, जो उनकी संघर्ष की भावना को दर्शाता है।1
- राजस्थान के पाली जिले के काणेचा गांव में सिलेंडर में लीकेज के कारण भीषण आग लग गई। इस हृदय विदारक घटना में एक माँ और उसकी दो बेटियां जिंदा जल गईं, जिससे पूरे गांव में सनसनी फैल गई है।1
- कोटा के बोरखेड़ा में एक अवैध सब्जी मंडी से परेशानी बढ़ गई है। यहां सब्जी विक्रेताओं से गैरकानूनी तरीके से किराया वसूला जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।1
- कोटा में छात्रों के बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन पर डॉ. नितिन शर्मा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बच्चों को सिर्फ 'स्टूडेंट' न समझें, बल्कि उनसे प्यार से बात कर एक भावनात्मक सहारा दें। उनका मानना है कि 'रैंक से पहले जिंदगी जरूरी है', और अपनापन किसी की जान बचा सकता है।1
- राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में पिंकी महावर ने दम तोड़ दिया। दो दिन तक हालत बिगड़ने और कथित तौर पर किडनी फेल्योर छिपाने के आरोपों के बीच उनकी मौत हुई। इस घटना से अस्पताल प्रशासन पर फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।3
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की NNW दिशा प्रेम, आकर्षण और भावनात्मक जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि इस दिशा में गंदगी, अंधेरा या दोष हों, तो पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव और दूरियां आ सकती हैं। यह दिशा व्यवसाय में ग्राहकों को आकर्षित करने में भी अहम भूमिका निभाती है, इसलिए इसे संतुलित रखना फायदेमंद है।1
- कोटा: सिजेरियन के बाद 'मौत का तांडव', 4 महिलाओं की मौत से हड़कंप; स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौर ने संभाला मोर्चा कोटा | 11 मई, 2026 कोटा के नए मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत और किडनी फेलियर के मामलों ने पूरे राजस्थान के चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। अब तक 4 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य महिलाएं किडनी इन्फेक्शन (Renal Failure) और गंभीर जटिलताओं के कारण आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौर का कड़ा रुख मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव (प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा) गायत्री राठौर ने स्वयं कोटा का दौरा किया और अस्पताल के आईसीयू व ओटी (OT) का निरीक्षण किया। उन्होंने इस घटना को "अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए प्रारंभिक जांच के आधार पर बड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं: बड़ी कार्रवाई: एक डॉक्टर (डॉ. श्रद्धा उपाध्याय) की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार और दो नर्सिंग ऑफिसर्स (गुरजोत कौर व निमिष वर्मा) को निलंबित कर दिया गया है। कारण की तलाश: गायत्री राठौर ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मेडिकल प्रोटोकॉल के उल्लंघन और संक्रमण (Sepsis) का मामला लग रहा है। दवाओं के रिएक्शन की भी जांच की जा रही है, जिसके चलते पूरे प्रदेश में संबंधित दवाओं के बैच पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। क्या है पूरा मामला? लक्षण: 4 मई को सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली करीब 12-13 महिलाओं में अचानक ब्लड प्रेशर कम होने, प्लेटलेट्स गिरने और यूरिन रुकने (किडनी ब्लॉक) की शिकायत आई। मृतकों के नाम: अब तक पायल, ज्योति रवि और प्रिया महावर सहित चार महिलाओं की जान जा चुकी है। किडनी इन्फेक्शन: डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण इतना गहरा था कि महिलाओं की किडनी ने काम करना बंद कर दिया। वर्तमान में 3-4 महिलाएं अभी भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती हैं। अस्पताल प्रशासन पर सवाल परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में स्टरलाइजेशन (साफ-सफाई) की कमी और घटिया क्वालिटी की दवाओं के कारण यह इन्फेक्शन फैला है। स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल के यूनिट हेड्स और संस्थान के मुखिया की जवाबदेही तय की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। "हमारी प्राथमिकता मरीजों की जान बचाना और इस लापरवाही की जड़ तक पहुंचना है। पूरे राजस्थान के अस्पतालों में स्टरलाइजेशन और दवाओं की गुणवत्ता के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं।" > — गायत्री राठौर, प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य)1
- कोटा में जेके फैक्ट्री के मजदूर 30 साल से बकाया भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले सवा साल से कलेक्ट्रेट पर चल रहे उनके धरने को दिल्ली के किसान आंदोलन की तरह डिस्टर्ब करने की कोशिशें हो रही हैं।1
- कोटा के बोरखेड़ा में सब्जी मंडी के पास जाम नालियों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुश्किल कर दिया है। गंदगी और बदबू से क्षेत्रवासी परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।1