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गणपत सिंह हत्याकांड
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गणपत सिंह हत्याकांड
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- सोमवार शाम को जिला कलेक्टर डॉक्टर प्रदीप के ने सिरे मंदिर रोड स्थित शीतला माता मंदिर मेले का विधिवत शुभारंभ किया, इस दौरान मंदिर में जिला कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने शीतला माता की पूजा अर्चना कर मंगल कामना की बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे2
- सिवाना में श्रद्धा के साथ महिलाओं ने की शीतला माता की कथा, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना सिवाना कस्बे में शीतला माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कस्बे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से शीतला माता की कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान महिलाओं ने माता के भजन गाए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।कथा आयोजन में महिलाओं ने शीतला माता के जीवन प्रसंगों और उनके महत्व को सुनते हुए भक्ति भाव से भाग लिया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं ने भजन-कीर्तन कथा के पश्चात महिलाओं ने माता को प्रसाद अर्पित कर उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित की। महिलाओं का कहना है कि शीतला माता की पूजा से क्षेत्र में रोग-व्याधियों से मुक्ति और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महिलाएं शीतला माता की कथा व पूजा करती हैं।इस अवसर पर कस्बे की अनेक महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से माता की आराधना कर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की कामना की।1
- राजनीति में शिक्षित युवाओं को मौका मिले, इसलिए जनप्रतिनिधियों के लिए शिक्षा जरूरी – रविन्द्र सिंह भाटी1
- आहोर माता शीतला को ठंडे पकवानों का लगा भोग: रोडला में बासोड़ा पर्व भक्ति भाव से मनाया गया, आंखरिया चौक पर गैर नृत्य का हुआ आयोजन:- आहोर उपखंड क्षेत्र के ग्राम रोडला में सोमवार को बासोड़ा पर्व भक्ति से मनाया गया। इस दौरान माता शीतला को ठंडे पकवानों का भोग लगाया गया। मान्यता है कि शीतला माता की आराधना से परिवार में सुख-शांति आती है और चेचक व खसरा जैसी बीमारियों से बचाव होता हैं।पर्व के अवसर पर सुबह से ग्रामीणों महिलाओं में उत्साह दिखा। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पारंपरिक वेशभूषा में शीतला माता मंदिर स्थल गांव पेंचका पर पूजा अर्चना के लिए पहुंची। महिलाओं ने श्रद्घापुर्वक माता को ठंडे जल से स्नान कराया। जिसे शीतलता और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा के लिए एक दिन पहले (सप्तमी को) विशेष पकवान रविवार को तैयार किए गए थे। इनमें मीठे चावल (गुड़ वाले), कड़ी- चावल, पूड़ी, हलवा और सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन शामिल थे। जिनका भोग माता को अर्पित किया गया। धार्मिक परम्परा के अनुसार बासौदा पर्व के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। पूरा परिवार माताओं को अर्पित किया गया" बासी" प्रसाद ही ग्रहण करता है। मंदिरों के आसपास का माहौल भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने समूह में बैठकर शीतला माता के भजन गाए और लोकगीतों के माध्यम से बच्चों की दीर्घायु की कामना की । स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह पर्व ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक है। इसके बाद ग्रीष्म ऋतु का पुर्ण प्रभाव शुरू हो जाता हैं ।इस कारण ठंडे भोजन और जल के सेवन के माध्यम से शरीर को बढ़ती गर्मी के प्रति अनुकूलित करने का संदेश दिया जाता हैं। रोडला में सोमवार को आंखरिया चौक पर गैर नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।4
- बालोतरा। बालोतरा के विभिन्न गांव में होली के बाद 7 दिन तक गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है।1
- Post by Reporter Rajesh pahadiya1
- सुमेरपुर । चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा को लेकर सोमवार को पंचायत समिति सभागार में बैठक हुई। इसमें विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चल रही स्क्रीनिंग, उपचार और जनजागरूकता गतिविधियों की समीक्षा की गई। ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोविंद सिंह चुंडावत ने कहा कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह व कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे में समय पर स्क्रीनिंग और उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की नियमित स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी प्रमोद गिरी और जिला नोडल अधिकारी विवेक पाल ने एनसीडी रोगों की रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाने और आशा-एएनएम की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। बैठक में सिकंदर कुमावत, देवीलाल, बिंजाराम मीणा, संदीप सिंह, मोहित कुमार, इमरान खान, विशाल सिंह, पपिया कुमारी, भावना परिहार, खुशबू सिंह सहित अन्य कार्मिक मौजूद रहे।3
- रेवदर तहसील के निम्बोड़ा गांव में बंदरों के बढ़ते आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। पिछले करीब एक सप्ताह से गांव में एक बंदर के हमलावर होने के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार अब तक दर्जनभर ग्रामीण इस बंदर के हमले का शिकार हो चुके हैं, जिनमें कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हमलों में कई बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं, जिससे गांव में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर अचानक लोगों पर झपट्टा मारकर हमला कर रहा है। खासकर छोटे बच्चों को निशाना बनाने से परिवारों में दहशत फैल गई है। कई अभिभावक अब अपने बच्चों को घर के बाहर खेलने तक नहीं भेज रहे हैं। गांव में रोजमर्रा के कामकाज के दौरान भी लोगों को बंदर के हमले का डर सताने लगा है। समाजसेवी गणपत सिंह निम्बोड़ा ने इस पूरे मामले को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह में करीब दर्जनभर लोग इस बंदर के हमले में घायल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन अब तक वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि मामले की सूचना कई बार वन विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक बंदर को पकड़ने या नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की ओर से समय रहते कार्रवाई नहीं होने से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द टीम भेजकर हमलावर बंदर को पकड़ा जाए, ताकि गांव में फैले डर के माहौल को खत्म किया जा सके और मासूम बच्चों सहित ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो ।1