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सुशासन की नई इबारत: जगरगुंडा में लौटी रोशनी और रौनक* सुकमा *सुशासन की नई इबारत: जगरगुंडा में लौटी रोशनी और रौनक* सुकमा कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में घिरा जगरगुंडा आज विकास और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन की पहल ने इस संवेदनशील क्षेत्र में सुशासन की नई सुबह ला दी है। अंधेरे से उजाले की ओर जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, वहीं अब सोलर स्ट्रीट लाइटों की चमक विकास की गवाही दे रही है। जिला खनिज न्यास (DMF) मद से पूरे क्षेत्र को सौर ऊर्जा से रोशन किया गया है। दो दशक तक संपर्क, सुरक्षा और सुविधाओं के अभाव से जूझता जगरगुंडा अब मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ रहा है। 22 साल बाद बैंकिंग सेवा की वापसी वर्ष 2003 में बैंक लूट की घटना के बाद बंद हुई बैंकिंग सेवाएं अब फिर बहाल हो गई हैं। 2025 में Indian Overseas Bank की नई शाखा खुलने से ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार मिला है,विकास के नए आयाम कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, तहसील भवन निर्माण, 1.30 करोड़ की लागत से बनने वाला बस स्टैंड, 1.50 करोड़ की हाईटेक नर्सरी, वन विभाग रेंज कार्यालय और सीएचसी का उन्नयन ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगी,जगरगुंडा अब डर का नहीं, विकास का प्रतीक बन रहा है। यह बदलाव केवल निर्माण कार्यों का नहीं, बल्कि विश्वास, भागीदारी और सुशासन की पुनर्स्थापना का है जहां शासन सच में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

15 hrs ago
user_अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriya)
अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriya)
Voice of people सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
15 hrs ago

सुशासन की नई इबारत: जगरगुंडा में लौटी रोशनी और रौनक* सुकमा *सुशासन की नई इबारत: जगरगुंडा में लौटी रोशनी और रौनक* सुकमा कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में घिरा जगरगुंडा आज विकास और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन की पहल ने इस संवेदनशील क्षेत्र में सुशासन की नई सुबह ला दी है। अंधेरे से उजाले की ओर जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, वहीं अब सोलर स्ट्रीट लाइटों की चमक विकास की गवाही दे रही है। जिला खनिज न्यास (DMF) मद से पूरे क्षेत्र को सौर ऊर्जा से रोशन किया गया है। दो दशक तक संपर्क, सुरक्षा और सुविधाओं के अभाव से जूझता जगरगुंडा अब मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ रहा

है। 22 साल बाद बैंकिंग सेवा की वापसी वर्ष 2003 में बैंक लूट की घटना के बाद बंद हुई बैंकिंग सेवाएं अब फिर बहाल हो गई हैं। 2025 में Indian Overseas Bank की नई शाखा खुलने से ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार मिला है,विकास के नए आयाम कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, तहसील भवन निर्माण, 1.30 करोड़ की लागत से बनने वाला बस स्टैंड, 1.50 करोड़ की हाईटेक नर्सरी, वन विभाग रेंज कार्यालय और सीएचसी का उन्नयन ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगी,जगरगुंडा अब डर का नहीं, विकास का प्रतीक बन रहा है। यह बदलाव केवल निर्माण कार्यों का नहीं, बल्कि विश्वास, भागीदारी और सुशासन की पुनर्स्थापना का है जहां शासन सच में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

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  • सुकमा *सुशासन की नई इबारत: जगरगुंडा में लौटी रोशनी और रौनक* सुकमा कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में घिरा जगरगुंडा आज विकास और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन की पहल ने इस संवेदनशील क्षेत्र में सुशासन की नई सुबह ला दी है। अंधेरे से उजाले की ओर जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, वहीं अब सोलर स्ट्रीट लाइटों की चमक विकास की गवाही दे रही है। जिला खनिज न्यास (DMF) मद से पूरे क्षेत्र को सौर ऊर्जा से रोशन किया गया है। दो दशक तक संपर्क, सुरक्षा और सुविधाओं के अभाव से जूझता जगरगुंडा अब मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ रहा है। 22 साल बाद बैंकिंग सेवा की वापसी वर्ष 2003 में बैंक लूट की घटना के बाद बंद हुई बैंकिंग सेवाएं अब फिर बहाल हो गई हैं। 2025 में Indian Overseas Bank की नई शाखा खुलने से ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार मिला है,विकास के नए आयाम कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, तहसील भवन निर्माण, 1.30 करोड़ की लागत से बनने वाला बस स्टैंड, 1.50 करोड़ की हाईटेक नर्सरी, वन विभाग रेंज कार्यालय और सीएचसी का उन्नयन ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगी,जगरगुंडा अब डर का नहीं, विकास का प्रतीक बन रहा है। यह बदलाव केवल निर्माण कार्यों का नहीं, बल्कि विश्वास, भागीदारी और सुशासन की पुनर्स्थापना का है जहां शासन सच में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
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    सुकमा 
*सुशासन की नई इबारत: जगरगुंडा में लौटी रोशनी और रौनक*
सुकमा कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में घिरा जगरगुंडा आज विकास और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन की पहल ने इस संवेदनशील क्षेत्र में सुशासन की नई सुबह ला दी है। अंधेरे से उजाले की ओर जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, वहीं अब सोलर स्ट्रीट लाइटों की चमक विकास की गवाही दे रही है। जिला खनिज न्यास (DMF) मद से पूरे क्षेत्र को सौर ऊर्जा से रोशन किया गया है। दो दशक तक संपर्क, सुरक्षा और सुविधाओं के अभाव से जूझता जगरगुंडा अब मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ रहा है। 22 साल बाद बैंकिंग सेवा की वापसी वर्ष 2003 में बैंक लूट की घटना के बाद बंद हुई बैंकिंग सेवाएं अब फिर बहाल हो गई हैं। 2025 में Indian Overseas Bank की नई शाखा खुलने से ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार मिला है,विकास के नए आयाम कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, तहसील भवन निर्माण, 1.30 करोड़ की लागत से बनने वाला बस स्टैंड, 1.50 करोड़ की हाईटेक नर्सरी, वन विभाग रेंज कार्यालय और सीएचसी का उन्नयन ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगी,जगरगुंडा अब डर का नहीं, विकास का प्रतीक बन रहा है। यह बदलाव केवल निर्माण कार्यों का नहीं, बल्कि विश्वास, भागीदारी और सुशासन की पुनर्स्थापना का है जहां शासन सच में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
    user_अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriya)
    अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriya)
    Voice of people सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • जगदलपुर शहर के रिहायशी इलाका कहे जाने वाला धरमपुरा रोड पर गाड़ियों का जाम लगा, हालांकि जाम सूखे हुए पेड़ों को काटने के लिए एक साइड के रास्ता को रोका गया था और दूसरी साइड से गाड़ी जाने दी जा रही थी। मौके पर वन कर्मी तैनात
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    जगदलपुर शहर के रिहायशी इलाका कहे जाने वाला धरमपुरा रोड पर गाड़ियों का जाम लगा, 
हालांकि जाम सूखे हुए पेड़ों को काटने के लिए एक साइड के रास्ता को रोका गया था और दूसरी साइड से गाड़ी जाने दी जा रही थी।
मौके पर वन कर्मी तैनात
    user_SAMYAK NAHATA
    SAMYAK NAHATA
    Local News Reporter जगदलपुर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • शिक्षकों और शाला प्रबंधन की अनूठी पहल: बिंजोली डोंगरीगुड़ा के बच्चों ने समुद्र की लहरों के बीच जाना नौसेना का शौर्य* कोंडागांव - जिले के विकासखंड माकड़ी अंतर्गत शासकीय उच्च प्राथमिक शाला बिंजोली,डोंगरीगुड़ा के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं को आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम का भ्रमण कराया गया।
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    शिक्षकों और शाला प्रबंधन की अनूठी पहल: बिंजोली डोंगरीगुड़ा के बच्चों ने समुद्र की लहरों के बीच जाना नौसेना का शौर्य* कोंडागांव - जिले के विकासखंड माकड़ी अंतर्गत शासकीय उच्च प्राथमिक शाला बिंजोली,डोंगरीगुड़ा के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं को आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम का भ्रमण कराया गया।
    user_ESHENDRA PATEL
    ESHENDRA PATEL
    पत्रकार कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • मिट रहा है दहशत का निशान! जिन स्मारकों पर था नक्सलियों को नाज, जवानों ने किया उसे ध्वस्त
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    मिट रहा है दहशत का निशान! जिन स्मारकों पर था नक्सलियों को नाज, जवानों ने किया उसे ध्वस्त
    user_रौशन ठाकुर
    रौशन ठाकुर
    नारायणपुर, नारायणपुर, छत्तीसगढ़•
    18 hrs ago
  • Post by सतभक्ति संदेश
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    Post by सतभक्ति संदेश
    user_सतभक्ति संदेश
    सतभक्ति संदेश
    Fraternal organization केसकाल, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    58 min ago
  • कांकेर: जिले में अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों (Anti-Naxal Operations) को अधिक सशक्त व गतिशील बनाने की दिशा में कांकेर पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस अधीक्षक  निखिल राखेचा (IPS) के निर्देशन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान डीआरजी (DRG) और थाना के जवानों को 100 अत्याधुनिक मोटरसाइकिलें सौंपी गईं। विधायक ने दिखाई हरी झंडी इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत विधायक कांकेर आशाराम नेताम की उपस्थिति में हुई। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद जवानों को वाहनों की चाबियां सुपुर्द कीं और हरी झंडी दिखाकर इन मोटरसाइकिलों को ड्यूटी के लिए रवाना किया। इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष अरुण कौशिक सहित अन्य जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। सायरन और लाउडस्पीकर से लैस हैं वाहन ये नई मोटरसाइकिलें सायरन, लाउडस्पीकर और अन्य नवीन संसाधनों से लैस हैं। 100 सीसी की ये हाई-पावर मोटरसाइकिलें विशेष रूप से दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में त्वरित मूवमेंट के लिए डिजाइन की गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जवानों की कार्यक्षमता को बढ़ाना है। इन वाहनों से निम्नलिखित लाभ मिलेंगे: त्वरित मूवमेंट: दुर्गम रास्तों और घने जंगलों में जवान तेजी से पहुंच सकेंगे। बेहतर समन्वय: थाना और कैंपों के बीच संचार व आवाजाही सुगम होगी। सर्च ऑपरेशन में तेजी: नक्सल विरोधी अभियानों और गश्त व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आपातकालीन प्रतिक्रिया: किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल में पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग बेहतर होगी। सुरक्षा का नया अध्याय "रफ्तार, संसाधन और संकल्प" के मंत्र के साथ शुरू हुई यह पहल कांकेर में सुरक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा देगी। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इन आधुनिक संसाधनों से न केवल जवानों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और विश्वास का नया अध्याय भी लिखा जाएगा। कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश साहू, गिरिजा शंकर साव डीएसपी (नक्सल ऑप्स), डॉ. मेखलेन्द्र प्रताप सिंह डीएसपी (बस्तर फाइटर्स), अविनाश ठाकुर डीएसपी (डीआरजी), आरआई दीपक साव  व आरआई गोविन्द वर्मा व अन्य अधिकारी- कर्मचारियों के साथ जनप्रतिनिधि व मीडियाकर्मी मौजूद थे।
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    कांकेर: जिले में अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों (Anti-Naxal Operations) को अधिक सशक्त व गतिशील बनाने की दिशा में कांकेर पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस अधीक्षक  निखिल राखेचा (IPS) के निर्देशन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान डीआरजी (DRG) और थाना के जवानों को 100 अत्याधुनिक मोटरसाइकिलें सौंपी गईं।
विधायक ने दिखाई हरी झंडी
इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत विधायक कांकेर आशाराम नेताम की उपस्थिति में हुई। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद जवानों को वाहनों की चाबियां सुपुर्द कीं और हरी झंडी दिखाकर इन मोटरसाइकिलों को ड्यूटी के लिए रवाना किया। इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष अरुण कौशिक सहित अन्य जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
सायरन और लाउडस्पीकर से लैस हैं वाहन
ये नई मोटरसाइकिलें सायरन, लाउडस्पीकर और अन्य नवीन संसाधनों से लैस हैं। 100 सीसी की ये हाई-पावर मोटरसाइकिलें विशेष रूप से दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में त्वरित मूवमेंट के लिए डिजाइन की गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जवानों की कार्यक्षमता को बढ़ाना है। इन वाहनों से निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
त्वरित मूवमेंट: दुर्गम रास्तों और घने जंगलों में जवान तेजी से पहुंच सकेंगे।
बेहतर समन्वय: थाना और कैंपों के बीच संचार व आवाजाही सुगम होगी।
सर्च ऑपरेशन में तेजी: नक्सल विरोधी अभियानों और गश्त व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आपातकालीन प्रतिक्रिया: किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल में पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग बेहतर होगी।
सुरक्षा का नया अध्याय
"रफ्तार, संसाधन और संकल्प" के मंत्र के साथ शुरू हुई यह पहल कांकेर में सुरक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा देगी। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इन आधुनिक संसाधनों से न केवल जवानों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और विश्वास का नया अध्याय भी लिखा जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  योगेश साहू,  गिरिजा शंकर साव डीएसपी (नक्सल ऑप्स), डॉ. मेखलेन्द्र प्रताप सिंह डीएसपी (बस्तर फाइटर्स),  अविनाश ठाकुर डीएसपी (डीआरजी),  आरआई दीपक साव  व आरआई गोविन्द वर्मा व अन्य अधिकारी- कर्मचारियों के साथ जनप्रतिनिधि व मीडियाकर्मी मौजूद थे।
    user_Ved Prakash Mishra
    Ved Prakash Mishra
    पत्रकारिता कांकेर, कांकेर, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • गोड़बीनापाल कैंप में तैनात SSB के जवान की अचानक हुई मौत
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    गोड़बीनापाल कैंप में तैनात SSB के जवान की अचानक हुई मौत
    user_Ashish parihar Parihar
    Ashish parihar Parihar
    पत्रकार कांकेर, कांकेर, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • नक्सल बैठकों से वैदिक मंत्रों तक: केरलापेंदा राम मंदिर बना नवजागरण का दीप सुकमा-धुर नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायत केरलापेंदा का राम मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था की पुनर्स्थापना और बदलते दौर का जीवंत प्रतीक बन चुका है। जिस परिसर में कभी नक्सली बैठकें होती थीं और जहाँ भय का साया पसरा रहता था, आज वहीं वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, घी की आहुतियों की सुगंध और “जय श्रीराम” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा है। ग्रामीणों की आँखों में वह समय आज भी ताजा है जब वर्ष 1978 में सीमित संसाधनों के बीच इस मंदिर का निर्माण हुआ था। कठिन परिस्थितियों में दूर प्रदेश से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएँ यहाँ स्थापित की गई थीं। वह केवल निर्माण नहीं, बल्कि अटूट आस्था का प्रमाण था। लेकिन समय का पहिया ऐसा भी घूमा कि लगभग 21 वर्षों तक मंदिर के पट बंद रहे। नक्सली प्रतिबंधों के कारण पूजा-अर्चना ठप हो गई। जिन चौखटों पर दीप जलते थे, वहाँ सन्नाटा छा गया। आस्था पर लगे इस विराम ने गाँव की आत्मा को कहीं न कहीं घायल कर दिया था। 21 वर्षों के बाद सीआरपीएफ के सहयोग से खुले मंदिर के पट पिछले वर्ष सीआरपीएफ के सहयोग से मंदिर के द्वार पुनः खोले गए। यह केवल एक ताला खुलना नहीं था, बल्कि वर्षों से बंद पड़ी उम्मीदों का द्वार खुलना था। इसके बाद नियमित पूजा-पाठ प्रारंभ हुआ और अब 21 वर्षों बाद आयोजित एक कुंडीय यज्ञ ने पूरे क्षेत्र को भाव-विभोर कर दिया। हवन कुंड से उठती अग्नि की लपटें मानो यह संदेश दे रही थीं कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक उसे चीर सकता है। सैकड़ों श्रद्धालु—बुजुर्ग, युवा, महिलाएँ और बच्चे—आँखों में श्रद्धा और हृदय में विश्वास लेकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। कई बुजुर्गों की आँखें नम थीं; वे कह रहे थे, “आज हमारे जीवन का अधूरा सपना पूरा हुआ है।” भावुक हुई दीपिका शोरी इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने भावुक शब्दों में कहा, “जहाँ कभी भय और असुरक्षा का वातावरण था, वहाँ आज श्रद्धा और विश्वास का प्रकाश फैल रहा है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण का पावन संकेत है। जब समाज एकजुट होता है, तो कोई भी शक्ति उसकी आस्था को लंबे समय तक बाँधकर नहीं रख सकती।” जिले भर से पहुंचे थे रामभक्त तोंगपाल से लेकर कोंटा तक से आए रामदेव नाग, हेमला मुका मांझी, भीमा पिडमेल के मांझी, हेमला जोगा, नुको देवा पेरमा, मड़कम देवा, मुचाकी पोजा पटेल, आयुषी रवा, जगनाथ, संतोष पुराणिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। विजय प्रकाश की ही होती है। आज केरलापेंदा का राम मंदिर यह संदेश दे रहा है कि कठिन से कठिन समय भी स्थायी नहीं होता। जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, तो आस्था फिर से अंकुरित होती है, संस्कृति पुनः जीवित होती है और परंपरा फिर से मुस्कुराने लगती है। नक्सल बैठकों से वैदिक मंत्रों तक की यह यात्रा केवल एक मंदिर की कहानी नहीं, बल्कि विश्वास की वह गाथा है जो बताती है—अंततः विजय प्रकाश की ही होती है।
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    नक्सल बैठकों से वैदिक मंत्रों तक: केरलापेंदा राम मंदिर बना नवजागरण का दीप
सुकमा-धुर नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायत केरलापेंदा का राम मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था की पुनर्स्थापना और बदलते दौर का जीवंत प्रतीक बन चुका है। जिस परिसर में कभी नक्सली बैठकें होती थीं और जहाँ भय का साया पसरा रहता था, आज वहीं वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, घी की आहुतियों की सुगंध और “जय श्रीराम” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा है।
ग्रामीणों की आँखों में वह समय आज भी ताजा है जब वर्ष 1978 में सीमित संसाधनों के बीच इस मंदिर का निर्माण हुआ था। कठिन परिस्थितियों में दूर प्रदेश से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएँ यहाँ स्थापित की गई थीं। वह केवल निर्माण नहीं, बल्कि अटूट आस्था का प्रमाण था।
लेकिन समय का पहिया ऐसा भी घूमा कि लगभग 21 वर्षों तक मंदिर के पट बंद रहे। नक्सली प्रतिबंधों के कारण पूजा-अर्चना ठप हो गई। जिन चौखटों पर दीप जलते थे, वहाँ सन्नाटा छा गया। आस्था पर लगे इस विराम ने गाँव की आत्मा को कहीं न कहीं घायल कर दिया था।
21 वर्षों के बाद सीआरपीएफ के सहयोग से खुले मंदिर के पट
पिछले वर्ष सीआरपीएफ के सहयोग से मंदिर के द्वार पुनः खोले गए। यह केवल एक ताला खुलना नहीं था, बल्कि वर्षों से बंद पड़ी उम्मीदों का द्वार खुलना था। इसके बाद नियमित पूजा-पाठ प्रारंभ हुआ और अब 21 वर्षों बाद आयोजित एक कुंडीय यज्ञ ने पूरे क्षेत्र को भाव-विभोर कर दिया।
हवन कुंड से उठती अग्नि की लपटें मानो यह संदेश दे रही थीं कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक उसे चीर सकता है। सैकड़ों श्रद्धालु—बुजुर्ग, युवा, महिलाएँ और बच्चे—आँखों में श्रद्धा और हृदय में विश्वास लेकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। कई बुजुर्गों की आँखें नम थीं; वे कह रहे थे, “आज हमारे जीवन का अधूरा सपना पूरा हुआ है।”
भावुक हुई दीपिका शोरी
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने भावुक शब्दों में कहा,
“जहाँ कभी भय और असुरक्षा का वातावरण था, वहाँ आज श्रद्धा और विश्वास का प्रकाश फैल रहा है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण का पावन संकेत है। जब समाज एकजुट होता है, तो कोई भी शक्ति उसकी आस्था को लंबे समय तक बाँधकर नहीं रख सकती।”
जिले भर से पहुंचे थे रामभक्त
तोंगपाल से लेकर कोंटा तक से आए रामदेव नाग, हेमला मुका मांझी, भीमा पिडमेल के मांझी, हेमला जोगा, नुको देवा पेरमा, मड़कम देवा, मुचाकी पोजा पटेल, आयुषी रवा, जगनाथ, संतोष पुराणिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
विजय प्रकाश की ही होती है।
आज केरलापेंदा का राम मंदिर यह संदेश दे रहा है कि कठिन से कठिन समय भी स्थायी नहीं होता। जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, तो आस्था फिर से अंकुरित होती है, संस्कृति पुनः जीवित होती है और परंपरा फिर से मुस्कुराने लगती है।
नक्सल बैठकों से वैदिक मंत्रों तक की यह यात्रा केवल एक मंदिर की कहानी नहीं, बल्कि विश्वास की वह गाथा है जो बताती है—अंततः विजय प्रकाश की ही होती है।
    user_अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriya)
    अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriya)
    Voice of people सुकमा, सुकमा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
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