उत्तर प्रदेश के असवारी ग्राम सभा में एक सामूहिक गेट के रख-रखाव और सुंदरता की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। यह गेट सन् 1998 में शिकायतकर्ता के आदरणीय पिताजी के प्रधानी कार्यकाल के दौरान बनवाया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया है कि उनके निधन के बाद से, इस विशाल रूपी सामूहिक गेट की सुंदरता बनाए रखने के लिए किसी ने भी प्रयास नहीं किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सामूहिक गेट ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, लाभ प्रमुख और क्षेत्र पंचायत सदस्य जैसे कई लोगों की पूर्ण भूमिका के अंतर्गत आता है, जिनकी जिम्मेदारी इसकी सुंदरता बनाए रखना है। हालांकि, इन्हें बार-बार अवगत कराने के बावजूद, इन लोगों ने इस कार्य को विशेष नहीं समझा और आज तक गेट की सुंदरता पर ध्यान नहीं दिया। यहाँ तक कि किसी भी संवैधानिक दिवस पर इस गेट पर एक भी तिरंगा नहीं लगाया गया। इसके चारों ओर इतनी गंदगी है जिसकी कोई सीमा नहीं, और बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई साफ-सफाई नहीं कराई जाती। इस गंभीर उपेक्षा को देखते हुए, शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में तत्काल विचार करने और जल्द से जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया है, ताकि गौरवशाली ग्राम सभा असवारी का नाम रोशन हो सके। विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि कुछ महीने पहले आदरणीय राज्यपाल महोदय आनंदीबेन पटेल ने इसी ग्राम सभा असवारी में प्रवेश किया था। शिकायतकर्ता ने सरकार से पुन: अनुरोध किया है कि इस गेट पर विशेष ध्यान दिया जाए, इसका चूना-पेंट और कलर कराया जाए, सुंदरता के हर एक चीज यहाँ लगाई जाए, इसके चारों तरफ फूलों के गमले लगाए जाएँ, साफ-सफाई की जाए और इस पर गौरवशाली तिरंगा लहराया जाए, जिससे ग्राम सभा असवारी का मान-सम्मान बढ़े।
उत्तर प्रदेश के असवारी ग्राम सभा में एक सामूहिक गेट के रख-रखाव और सुंदरता की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। यह गेट सन् 1998 में शिकायतकर्ता के आदरणीय पिताजी के प्रधानी कार्यकाल के दौरान बनवाया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया है कि उनके निधन के बाद से, इस विशाल रूपी सामूहिक गेट की सुंदरता बनाए रखने के लिए किसी ने भी प्रयास नहीं किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सामूहिक गेट ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, लाभ प्रमुख और क्षेत्र पंचायत सदस्य जैसे कई लोगों की पूर्ण भूमिका के अंतर्गत आता है, जिनकी
जिम्मेदारी इसकी सुंदरता बनाए रखना है। हालांकि, इन्हें बार-बार अवगत कराने के बावजूद, इन लोगों ने इस कार्य को विशेष नहीं समझा और आज तक गेट की सुंदरता पर ध्यान नहीं दिया। यहाँ तक कि किसी भी संवैधानिक दिवस पर इस गेट पर एक भी तिरंगा नहीं लगाया गया। इसके चारों ओर इतनी गंदगी है जिसकी कोई सीमा नहीं, और बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई साफ-सफाई नहीं कराई जाती। इस गंभीर उपेक्षा को देखते हुए, शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में तत्काल विचार करने और जल्द से जल्द कार्रवाई करने का
अनुरोध किया है, ताकि गौरवशाली ग्राम सभा असवारी का नाम रोशन हो सके। विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि कुछ महीने पहले आदरणीय राज्यपाल महोदय आनंदीबेन पटेल ने इसी ग्राम सभा असवारी में प्रवेश किया था। शिकायतकर्ता ने सरकार से पुन: अनुरोध किया है कि इस गेट पर विशेष ध्यान दिया जाए, इसका चूना-पेंट और कलर कराया जाए, सुंदरता के हर एक चीज यहाँ लगाई जाए, इसके चारों तरफ फूलों के गमले लगाए जाएँ, साफ-सफाई की जाए और इस पर गौरवशाली तिरंगा लहराया जाए, जिससे ग्राम सभा असवारी का मान-सम्मान बढ़े।
- वाराणसी में ग्रामीण लो-वोल्टेज और गंभीर बिजली संकट से परेशान होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि उनके क्षेत्र में 63 केवी का एक नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाए ताकि बिजली आपूर्ति की समस्या का समाधान हो सके।1
- चंदौली एसपी के निर्देश पर चहनियां क्षेत्र में सड़क हादसों और अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बलुआ पुलिस ने शुक्रवार को विशेष अभियान चलाया। इस सघन वाहन चेकिंग अभियान का मोर्चा थाना अध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह ने खुद संभाला, जिसके तहत चहनियां, बलुआ, मथेला, कैलावर, मारूफपुर, रैमोली, मोहरगंज और महुआर समेत पूरे इलाके में दोपहिया व चारपहिया वाहनों की गहनता से जांच की गई। इस दौरान बिना हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस (DL), बीमा, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और प्रदूषण सर्टिफिकेट के चल रहे 50 से अधिक बाइकों के चालान काटे गए। इसके अतिरिक्त, बिना कागजात और हेलमेट के फर्राटा भर रहे दर्जनों नवयुवकों को रोककर पुलिस ने कड़ी चेतावनी दी और उन्हें सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेना ही हादसों की सबसे बड़ी वजह है, और ट्रिपलिंग, ओवरस्पीडिंग तथा बिना हेलमेट चलना सीधे मौत को दावत देने जैसा है। उनका मुख्य मकसद चालान काटना नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी बचाना है, और अब नियम तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस अचानक हुई चेकिंग से नियम तोड़ने वाले चालकों में हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा के लिए इस कार्रवाई को आवश्यक बताते हुए पुलिस की सराहना की। बलुआ पुलिस ने साफ किया है कि जनहित में ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।1
- वाराणसी में नगर निगम द्वारा मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति जताते हुए धरना दिया और जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा।1
- वाराणसी में 12 जून 2026 को गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने माँ गंगा की स्वच्छता के प्रति एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। राजेश शुक्ला प्रतिदिन गंगा में तैरकर दूर-दूर तक फैली प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन और अन्य कचरा साफ करते हैं। उनके लिए यह कार्य केवल सफाई नहीं, बल्कि ईश्वर की सेवा है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने गीता के अध्याय 10 श्लोक 31 में स्वयं कहा है ‘स्रोतसामस्मि जाह्नवि’, अर्थात नदियों में मैं गंगा हूँ। राजेश शुक्ला भगवद् स्कन्द पुराण 11.16 का भी हवाला देते हैं, जिसमें कहा गया है ‘तीर्थानाँ स्रोतसाँ गंगा’, यानी तीर्थों में गंगा सबसे श्रेष्ठ है। उनका मानना है कि जब स्वयं भगवान ने गंगा को अपना स्वरूप बताया है, तो उसे मैला करने का अधिकार किसी को नहीं है। उनके अनुसार, गंगा जल अमृत के समान है और इसका संरक्षण हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। राजेश शुक्ला ने सभी लोगों से अपील की है कि वे गंगा में कचरा, प्लास्टिक, पॉलिथीन में लिपटे फूल-माला न डालें और स्नान के बाद साबुन-शैम्पू का झाग भी न छोड़ें। राजेश शुक्ला का दृढ़ विश्वास है कि यदि हर व्यक्ति यह ठान ले, तो माँ गंगा को एक बार फिर से निर्मल बनाया जा सकता है। जहाँ एक ओर नमामि गंगे अभियान के तहत प्रशासन भी घाटों की सफाई करवा रहा है, वहीं राजेश शुक्ला जैसे सेवकों का जुनून समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन रहा है, जो अपने कर्मों से ‘स्रोतसामस्मि जाह्नवी’ गीता के श्लोक को साकार कर रहे हैं।1
- वाराणसी में आज तेज हवाएं चलने की संभावना है, साथ ही गरज-चमक और हल्की बारिश या बूंदाबांदी भी हो सकती है। हालिया मौसम अपडेट के अनुसार, मौसम विभाग ने वाराणसी के लिए तेज हवा और वर्षा का अलर्ट जारी किया है। वर्तमान में शहर में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है, जिसमें तापमान 35-37°C के आसपास है। आमतौर पर हवा की गति 10 किमी/घंटा दर्ज की गई है, लेकिन आंधी-तूफान के दौरान हवा के झोंके काफी तेज हो सकते हैं। इसे देखते हुए, बाहर जाने वाले लोगों को ढीली वस्तुओं को सुरक्षित रखने, पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूर रहने, तथा बारिश और बिजली कड़कने की स्थिति में खुले स्थानों से बचने की सलाह दी गई है।3
- 10 जून 2026 को वाराणसी से अयोध्या जंक्शन तक की यात्रा के दौरान मरुधर एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14853) के S5 बोगी में एक परिवार को भीषण उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उनके पास सीट नंबर 17 और 20 (लोअर बर्थ) के कन्फर्म टिकट थे, लेकिन 6 लोगों के एक समूह ने पहले से ही सीट नंबर 18, 19, 21, 22 पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा था और अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। ट्रेन में चढ़ने पर, इन लोगों ने परिवार को उनकी आरक्षित सीटों पर बैठने नहीं दिया और उन्हें गंवार कहकर, उनके पास टिकट न होने का दावा किया। टिकट दिखाने के बाद भी, उनकी बदतमीजी जारी रही। उन्होंने परिवार के दो बैगों को सीटों के नीचे रखने से भी मना कर दिया, यह कहते हुए कि उनके पास केवल दो सीटें हैं, जबकि उनका अपना सामान ऊपर से नीचे तक भरा हुआ था। इस दौरान, सीट नंबर 20 पर बैठी एक 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला को बार-बार धक्का दिया गया और उन्हें ट्रेन से बाहर फेंकने की धमकी दी गई। यह भी देखा गया कि समूह में से दो लोग नशे में थे, जिससे उनका व्यवहार असामान्य लग रहा था। इस पूरे घटनाक्रम के कारण परिवार को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पीड़ित परिवार ने रेलवे में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन रेलवे पुलिस ने उनसे तब संपर्क किया जब ये उपद्रवी ट्रेन से उतर चुके थे, और कहा कि वे अब कुछ नहीं कर सकते। यात्रियों ने यह भी बताया कि वाराणसी से अयोध्या तक की यात्रा में कोई TTE या रेलवे स्टाफ ट्रेन में मौजूद नहीं था, जिसके कारण इन लोगों को पकड़ा नहीं जा सका। परिवार का मानना है कि सभी छह लोगों के पास टिकट नहीं थे, लेकिन उन्होंने पूरे रास्ते दादागिरी की। इस शिकायत के बावजूद, रेलवे की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। परिवार ने रेलवे से मांग की है कि भले ही उपद्रवी उतर चुके हों, लेकिन बर्थ नंबर 18, 19, 21, 22 के यात्रियों का विवरण रेलवे के पास होना चाहिए, जिसके आधार पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे दुर्व्यवहार को रोका जा सके और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा हो।1
- बीएचयू के बाल रोग विभाग की यूनिट में भर्ती बेड नंबर 24 के मरीज शैलेश के परिजनों ने एक गार्ड पर अभद्र व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि जब मरीज की मां अपने बच्चे को खाना खिला रही थीं, तभी गार्ड ने उन्हें तत्काल वार्ड से बाहर जाने का आदेश दिया। परिजनों के अनुसार, उन्होंने गार्ड से कुछ और समय देने का अनुरोध किया, लेकिन गार्ड ने कथित रूप से उन्हें मरीज को डिस्चार्ज कराने की धमकी दी और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। यह प्रकरण बीएचयू के गार्डों के दुर्व्यवहार और संवेदनहीनता की उन खबरों की कड़ी में एक और उदाहरण है, जो अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।1
- नगर निगम द्वारा जारी एक बयान और फरमान को लेकर आज मुख्यालय पर भारी हंगामा देखा गया। इस आदेश के कारण काफी दिक्कतें पैदा हुई हैं, जिसे लेकर लोगों में आक्रोश है। इसी के विरोध में मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन और विरोध प्रदर्शन किया गया।1
- चंदौली जिले की खंडवारी ग्राम सभा में, बढ़ती गर्मी और तापमान के मद्देनजर, पूर्व प्रधान और वरिष्ठ समाजसेवी भज्जू राम सिंह चौहान ने राहगीरों के लिए निःशुल्क प्याऊ सेवा की एक सराहनीय पहल की है। खंडवारी ग्राम सभा के डीह बाबा मंदिर टेंपो स्टैंड पर स्थापित इस प्याऊ में शुद्ध आरओ पानी की व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन राहगीरों, यात्रियों और स्थानीय लोगों को ठंडा एवं स्वच्छ पेयजल निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इस जनहितकारी प्याऊ का शुभारंभ क्षेत्र के सम्मानित लोगों की उपस्थिति में किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने पहुँचकर इस कार्य की सराहना की। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए राहगीर उत्साहपूर्वक इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं, और लोगों ने इस व्यवस्था को मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। पूर्व प्रधान भज्जू राम सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य जनसेवा है, और जब तक गर्मी का प्रकोप रहेगा, तब तक इस प्याऊ के माध्यम से लगातार निःशुल्क शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि राहगीरों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना न केवल एक पुण्य कार्य है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिसके महत्व के प्रति प्याऊ स्थल पर लगे बैनरों के माध्यम से लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इस पहल से पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है, और हर वर्ग के लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। मानव सेवा की इस अनूठी मिसाल ने समाज के अन्य लोगों को भी जनहित के कार्यों में आगे आने की प्रेरणा दी है।1