*नगर निगम में 23 लाख रूपए के ट्री-गार्ड कहां गए भई?* *▶तीन-चार साल पहले निर्वाचित और मनोनीत *नगर निगम में 23 लाख रूपए के ट्री-गार्ड कहां गए भई?* *▶तीन-चार साल पहले निर्वाचित और मनोनीत पार्षदों को हर वार्ड में लगाने के लिए 50-50 ट्री-गार्ड दिए गए थे, जिनका भौतिक सत्यापन आज तक नहीं हुआ* *▶क्या निगम प्रशासन हिसाब-किताब खंगालेगा या उचंती में मामला निपटाकर भूल-भुलैया में डाल दिया जाएगा?* *✍प्रेम आनन्दकर, अजमेर।* 📲8302612247 *👉नगर निकाय चुनाव-2026 में वार्ड पार्षद के लिए उम्मीदवारी जताने और नामांकन पत्र भरने वालों को अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी देने के लिए अजमेर नगर निगम ने व्यवस्था की है। लेकिन सवाल यह है कि एनओसी किस आधार पर दी जाएगी? जिन दावेदारों, आवेदकों या उम्मीदवारों का पहले कभी निगम से कोई वास्ता नहीं रहा है और पहली बार चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं, उनकी बात तो फिर भी ठीक है, लेकिन उन पूर्व पार्षदों को एनओसी किस आधार पर दी जाएगी, जिनके नाम खाते में लैपटॉप और आईपैड के अलावा 50-50 ट्री-गार्ड भी मंढ़े हुए हैं। लैपटॉप और आईपैड का जिक्र मेरे साथी वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र चतुर्वेदी ने सोमवार को लिखे अपने ब्लॉग में कर दिया है। अब आपको ट्री-गार्ड की कहानी भी बता देते हैं। करीब तीन-चार साल पहले कमोबेश सभी वार्डों में लगाने के लिए निर्वाचित और मनोनीत पार्षदों को 50-50 ट्री-गार्ड दिए गए थे। इसके साथ ही उन्हें ट्री-गार्ड लगाकर उनके चारों ओर सीसी की एक-एक, डेढ़-डेढ़ फीट दीवार बनवाने के लिए कहा गया था। यदि सूत्रों की मानें, तो सभी पार्षदों को बाकायदा उनसे प्राप्ति रसीद लेकर लोहे के बने ट्री-गार्ड सौंपे गए थे।* *⏹भौतिक सत्यापन रिपोर्ट कौन लेगा?* *➡यदि सीसी सहित एक-एक ट्री-गार्ड की कीमत पांच-पांच सौ रूपए भी आंकी जाए, तो 80 निर्वाचित और 12 मनोनीत सहित कुल 92 पार्षदों को अंदाजन 23 लाख रूपए के ट्री-गार्ड दिए गए थे। आज तक कोई हिसाब-किताब नहीं है कि आखिर यह ट्री-गार्ड कहां गए? लगे भी या नहीं? लगे तो कौन-कौनसे वार्डों में किन-किन जगहों पर लगे? कितने दिन तक लगे रहे? ट्री-गार्ड के अंदर पौधे लगाए थे या नहीं? पौधों और ट्री-गार्ड की क्या स्थिति है? वर्तमान में यह सभी ट्री-गार्ड कहां हैं? अब जबकि एनओसी दी जा रही है तो जो पूर्व निर्वाचित और मनोनीत पार्षद अब चुनाव लड़ने के लिए एनओसी मांग रहे हैं, उनसे ट्री-गार्ड का भौतिक सत्यापन मांगा जा रहा है या नहीं? यदि ट्री-गार्ड नहीं हैं, तो क्या उनकी कीमत जमा कराई जा रही है या नहीं? यानी जिस तरह लैपटॉप और आईपैड का कोई हिसाब-किताब नहीं है, उसी तरह ट्री-गार्ड के हिसाब-किताब का भी अता-पता नहीं है। मानाकि कुछ ट्री-गार्ड या तो गायब हो गए होंगे, कुछ चोर-उच्चके उठाकर ले गए होंगे, लेकिन एनओसी चाहने वाले पूर्व पार्षदों से भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तो कम से कम ली जानी ही चाहिए।* *⏹तो फिर वसूली कौन करेगा?* *➡जिस तरह लैपटॉप और आईपैड में यह बात सामने आई है कि कई पूर्व पार्षद अपना वार्ड आरक्षण की चपेट में आने के कारण अपने परिवार की किसी महिला को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। ऐसे में आवेदक को तो एनओसी दी ही जाएगी, लेकिन जो सामान, उपकरण आदि पार्षदों को दिए गए थे, उनका क्या होगा? यानी 57 लाख रूपए का सीधा-सा गड़बड़झाला लैपटॉप और आईपैड में हो गया और 23 लाख रूपए की गड़बड़ी ट्री-गार्ड में हो गई। अब सवाल यह उठता है कि जो नगर निगम आमजन से कभी यूजर्स चार्जेज के नाम पर, कभी नगरीय विकास कर के नाम पर, कभी घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर, कभी निर्माणाधीन मकानों के मालिकों से मलबा चार्ज के नाम पर और ना जाने कितने नामों पर आए दिन वसूली करता है, क्या वह इन पूर्व पार्षदों से वसूली कर पाएगा? आखिर वसूली का आधार क्या तय होगा?* *⏹शिकायत का क्या हुआ?* *➡जहां तक जानकारी मिली है, ट्री-गार्ड मामले में पूर्व पार्षद व कांग्रेस नेता अशोक जैन बहुत समय पहले शिकायत और आपत्ति दर्ज करा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। क्या निगम प्रशासन अब कोई कार्रवाई कर पाएगा? क्या इन सभी मामलों में पूर्व पार्षदों की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी? इन सवालों के उत्तर निगम के जिम्मेदार अफसरों को देने चाहिए।* *⏹यह होती है एनओसी* *➡अब लोग सोच रहे हैं कि एनओसी किस आधार पर दी जाती है, एनओसी देते वक्त किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है। तो इस आपको बता देते हैं। नामांकन पत्र के साथ संबंधित नगर निकाय, ग्राम पंचायत आदि से प्राप्त एनओसी लगाई जाती है। एनओसी इस बात की होती है कि आवेदक पर संबंधित निकाय और ग्राम पंचायत की कोई राशि, वसूली या टैक्स बकाया नहीं है। यदि बकाया होता है तो संबंधित आवेदक से पहले वह राशि जमा कराई जाती है और फिर एनओसी दी जाती है। अब यदि कोई आवेदक नया है, तो उसके रिकॉर्ड में यह देखा जाता है कि क्या उस पर नगरीय विकास कर की कोई राशि बकाया है। क्या उसका मकान नगरीय विकास कर के दायरे में आ रहा है। क्या उसने कर जमा करा दिया है। यदि कोई पूर्व पार्षद फिर से नामांकन पत्र भर रहा है, तो उस पर संबंधित निकाय की कोई देनदारी, बकाया राशि या किसी सामग्री की वापसी हुई है या नहीं। यानी तमाम खानापूर्ति के बाद एनओसी दी जाती है।* *⏩(यदि ब्लॉग पर आप अपनी कोई राय या मार्गदर्शन देना चाहते हैं, तो मेरे मोबाइल व वाट्सएप्प नंबर-8302612247 पर संपर्क कर सकते हैं। आप ’’मेरा संवाद’’ यू ट्यूब चैनल, मेरे फेसबुक पेज और ब्लॉग स्पॉट से भी जुड़ सकते हैं।)*
*नगर निगम में 23 लाख रूपए के ट्री-गार्ड कहां गए भई?* *▶तीन-चार साल पहले निर्वाचित और मनोनीत *नगर निगम में 23 लाख रूपए के ट्री-गार्ड कहां गए भई?* *▶तीन-चार साल पहले निर्वाचित और मनोनीत पार्षदों को हर वार्ड में लगाने के लिए 50-50 ट्री-गार्ड दिए गए थे, जिनका भौतिक सत्यापन आज तक नहीं हुआ* *▶क्या निगम प्रशासन हिसाब-किताब खंगालेगा या उचंती में मामला निपटाकर भूल-भुलैया में डाल दिया जाएगा?* *✍प्रेम आनन्दकर, अजमेर।* 📲8302612247 *👉नगर निकाय चुनाव-2026 में वार्ड पार्षद के लिए उम्मीदवारी जताने और नामांकन पत्र भरने वालों को अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी देने के लिए अजमेर नगर निगम ने व्यवस्था की है। लेकिन सवाल यह है कि एनओसी किस आधार पर दी जाएगी? जिन दावेदारों, आवेदकों या उम्मीदवारों का पहले कभी निगम से कोई वास्ता नहीं रहा है और पहली बार चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं, उनकी बात तो फिर भी ठीक है, लेकिन उन पूर्व पार्षदों को एनओसी किस आधार पर दी जाएगी, जिनके नाम खाते में लैपटॉप और आईपैड के अलावा 50-50 ट्री-गार्ड भी मंढ़े हुए हैं। लैपटॉप और आईपैड का जिक्र मेरे साथी वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र चतुर्वेदी ने सोमवार को लिखे अपने ब्लॉग में कर दिया है। अब आपको ट्री-गार्ड की कहानी भी बता देते हैं। करीब तीन-चार साल पहले कमोबेश सभी वार्डों में लगाने के लिए निर्वाचित और मनोनीत पार्षदों को 50-50 ट्री-गार्ड दिए गए थे। इसके साथ ही उन्हें ट्री-गार्ड लगाकर उनके चारों ओर सीसी की एक-एक, डेढ़-डेढ़ फीट दीवार बनवाने के लिए कहा गया था। यदि सूत्रों की मानें, तो सभी पार्षदों को बाकायदा उनसे प्राप्ति रसीद लेकर लोहे के बने ट्री-गार्ड सौंपे गए थे।* *⏹भौतिक सत्यापन रिपोर्ट कौन लेगा?* *➡यदि सीसी सहित एक-एक ट्री-गार्ड की कीमत पांच-पांच सौ रूपए भी आंकी जाए, तो 80 निर्वाचित और 12 मनोनीत सहित कुल 92 पार्षदों को अंदाजन 23 लाख रूपए के ट्री-गार्ड दिए गए थे। आज तक कोई हिसाब-किताब नहीं है कि आखिर यह ट्री-गार्ड कहां गए? लगे भी या नहीं? लगे तो कौन-कौनसे वार्डों में किन-किन जगहों पर लगे? कितने दिन तक लगे रहे? ट्री-गार्ड के अंदर पौधे लगाए थे या नहीं? पौधों और ट्री-गार्ड की क्या स्थिति है? वर्तमान में यह सभी ट्री-गार्ड कहां हैं? अब जबकि एनओसी दी जा रही है तो जो पूर्व निर्वाचित और मनोनीत पार्षद अब चुनाव लड़ने के लिए एनओसी मांग रहे हैं, उनसे ट्री-गार्ड का भौतिक सत्यापन मांगा जा रहा है या नहीं? यदि ट्री-गार्ड नहीं हैं, तो क्या उनकी कीमत जमा कराई जा रही है या नहीं? यानी जिस तरह लैपटॉप और आईपैड का कोई हिसाब-किताब नहीं है, उसी तरह ट्री-गार्ड के हिसाब-किताब का भी अता-पता नहीं है। मानाकि कुछ ट्री-गार्ड या तो गायब हो गए होंगे, कुछ चोर-उच्चके उठाकर ले गए होंगे, लेकिन एनओसी चाहने वाले पूर्व पार्षदों से भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तो कम से कम ली जानी ही चाहिए।* *⏹तो फिर वसूली कौन करेगा?* *➡जिस तरह लैपटॉप और आईपैड में यह बात सामने आई है कि कई पूर्व पार्षद अपना वार्ड आरक्षण की चपेट में आने के कारण अपने परिवार की किसी महिला को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। ऐसे में आवेदक को तो एनओसी दी ही जाएगी, लेकिन जो सामान, उपकरण आदि पार्षदों को दिए गए थे, उनका क्या होगा? यानी 57 लाख रूपए का सीधा-सा गड़बड़झाला लैपटॉप और आईपैड में हो गया और 23 लाख रूपए की गड़बड़ी ट्री-गार्ड में हो गई। अब सवाल यह उठता है कि जो नगर निगम आमजन से कभी यूजर्स चार्जेज के नाम पर, कभी नगरीय विकास कर के नाम पर, कभी घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर, कभी निर्माणाधीन मकानों के मालिकों से मलबा चार्ज के नाम पर और ना जाने कितने नामों पर आए दिन वसूली करता है, क्या वह इन पूर्व पार्षदों से वसूली कर पाएगा? आखिर वसूली का आधार क्या तय होगा?* *⏹शिकायत का क्या हुआ?* *➡जहां तक जानकारी मिली है, ट्री-गार्ड मामले में पूर्व पार्षद व कांग्रेस नेता अशोक जैन बहुत समय पहले शिकायत और आपत्ति दर्ज करा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। क्या निगम प्रशासन अब कोई कार्रवाई कर पाएगा? क्या इन सभी मामलों में पूर्व पार्षदों की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी? इन सवालों के उत्तर निगम के जिम्मेदार अफसरों को देने चाहिए।* *⏹यह होती है एनओसी* *➡अब लोग सोच रहे हैं कि एनओसी किस आधार पर दी जाती है, एनओसी देते वक्त किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है। तो इस आपको बता देते हैं। नामांकन पत्र के साथ संबंधित नगर निकाय, ग्राम पंचायत आदि से प्राप्त एनओसी लगाई जाती है। एनओसी इस बात की होती है कि आवेदक पर संबंधित निकाय और ग्राम पंचायत की कोई राशि, वसूली या टैक्स बकाया नहीं है। यदि बकाया होता है तो संबंधित आवेदक से पहले वह राशि जमा कराई जाती है और फिर एनओसी दी जाती है। अब यदि कोई आवेदक नया है, तो उसके रिकॉर्ड में यह देखा जाता है कि क्या उस पर नगरीय विकास कर की कोई राशि बकाया है। क्या उसका मकान नगरीय विकास कर के दायरे में आ रहा है। क्या उसने कर जमा करा दिया है। यदि कोई पूर्व पार्षद फिर से नामांकन पत्र भर रहा है, तो उस पर संबंधित निकाय की कोई देनदारी, बकाया राशि या किसी सामग्री की वापसी हुई है या नहीं। यानी तमाम खानापूर्ति के बाद एनओसी दी जाती है।* *⏩(यदि ब्लॉग पर आप अपनी कोई राय या मार्गदर्शन देना चाहते हैं, तो मेरे मोबाइल व वाट्सएप्प नंबर-8302612247 पर संपर्क कर सकते हैं। आप ’’मेरा संवाद’’ यू ट्यूब चैनल, मेरे फेसबुक पेज और ब्लॉग स्पॉट से भी जुड़ सकते हैं।)*
- पीसांगन में निकाय चुनाव की गहमागहमी के बीच 'पागल श्वान का आतंक,रात साढ़े 9 बजे तक 11 लोगों को काटा सीटीवी वीडियो आया सामने पीसांगन कस्बे में चुनावी प्रचार की गहमागहमी के बीच पागल श्वान ने जमकर उत्पात मचाया। आवारा पागल कुत्ते ने अलग-अलग इलाकों में अब तक 11 राहगीरों व वाहन चालकों को काटकर घायल कर दिया। इससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। इन 11 घायलों में कस्बे के 9 लोग जबकि एक एक भड़सुरी व बुधवाड़ा गांव के निवासी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मामला कस्बे के बस स्टैंड और इंदिरा कॉलोनी के मध्य का है। जहां पर सबसे पहले सड़क से गुजर रहे बाइक सवार को कुत्ते ने चलती बाइक पर काट लिया। जिसका *सीटीवी फुटेज* भी सामने आया है। फुटेज में कुत्ता अचानक पीछे से दौड़कर बाइक सवार को काटते नजर आ रहा है। पागल श्वान ने बस स्टैंड,इंदिरा कॉलोनी क्षेत्र समेत कस्बे में बस स्टैंड के आसपास रात साढ़े 9 बजे तक 11 लोगों को काट लिया। कुत्ते के द्वारा अचानक पीछे से लोगों को काटने के चलते लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग दुकानों और घरों में घुस गए। *प्रशासन हरकत में, सभी घायलों का इलाज जारी* वही मामले की जानकारी नगरपालिका ईओ राजेंद्र रेवाड़ के संज्ञान में आते ही पागल कुत्ते को पकड़ने के लिए टीम को लगाया गया है। पागल श्वान के काटने से घायल हुए सभी 11 लोगों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां सभी को *सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह लामरोड़* की देखरेख में टांके लगाकर मरहम पट्टी कर एंटी-रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह लामरोड़ के मुताबिक सभी की हालत खतरे से बाहर है। लेकिन कुत्ते के काटने से सबसे अधिक एक घायल को उनके द्वारा 30 टांके लगाए गए हैं। वही अन्य घायलों को भी टांके लगाकर मरहम पट्टी कर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाकर उपचार किया गया है। डॉ. लामरोड़ ने बताया कि "कस्बे में अब तक पागल श्वान के काटने से इतनी बड़ी संख्या में लोग घायल नहीं हुए। सभी को रेबीज से बचाव के लिए टीके की डोज पूरी करवानी होगी। नागरिक सतर्क रहें।" *यह बने श्वान के शिकार* सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह लामरोड़ के मुताबिक पागल श्वान ने कस्बे के 9 लोगो को जबकि भड़सुरी व बुधवाड़ा के एक एक व्यक्ति को काटा हैं। जिनमे पीसांगन निवासी 33 वर्षीय संजय खान,27 वर्षीय इशाक,27 वर्षीय सोनूराम,35 वर्षीय राजेशसिंह रावत,32 वर्षीय अशोक,52 वर्षीय दिनेश कुमावत,31 वर्षीय शिव शंकर,25 वर्षीय जावेद,37 वर्षीय मुकेश के अलावा भड़सुरी निवासी 32 वर्षीय आशुतोष व बुधवाड़ा निवासी 21 वर्षीय तुषार पागल श्वान के शिकार बने हैं।1
- Ajmer ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह फूलों ओर लाइटिंग से जगमगाई Dainik News AJMER1
- *यह वीडियो आजकल के बच्चों के लिए जिनका खान-पान नूडल्स ,बर्गर और पिज़्ज़ा आदि है। कृपया देखें और इससे कुछ संदेश प्राप्त करते हुए अपना खान-पान सुधारें..* *तड़ पोता,उम्र 27 वर्ष ( पांचवीं पीढ़ी ), पड़ पोता उम्र 48 वर्ष ( चौथी पीढ़ी ),* पौता उम्र 67 वर्ष ( तीसरी पीढ़ी ) बेटा उम्र 86 वर्ष और इन सबकी माता जी, सुपर दादीजी उम्र 105 वर्ष, पूरी तरहा से स्वस्थ्य,तंदुरुस्त,कड़क हाज़िर जवाब,इस उम्र में भी ,बेखौफ,निडर होकर तालाब के गहरे पानी में तैराकी करती है,अपनी उम्र के राज को खाद्य सामग्री सत्तू से बने व्यंजन *बताती हैं , देखिए 105 साल की दादी का कारनामा*1
- likes comments shares follow subscribe to my channel khawaja garib nawaz sharif Ajmer video1
- नसीराबाद में अन्नपूर्णा रसोई पर दबंग सवाल—गरीबों का खाना बंद तो टोकन किसके लिए? नसीराबाद में अन्नपूर्णा रसोई पर दबंग सवाल—गरीबों का खाना बंद तो टोकन किसके लिए?1
- लोहरवाड़ा में कोटा रोड की बदहाली, शिकायत पर गड्ढों में गिट्टी डालकर खानापूर्ति, अब धूल के गुबार से ग्रामीण परेशान लोहरवाड़ा। कोटा रोड की बदहाली को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा सड़क के गड्ढों में गिट्टी डालकर महज खानापूर्ति कर दी गई। स्थायी मरम्मत के बजाय गड्ढों में डाली गई यही गिट्टी अब ग्रामीणों और दुकानदारों के लिए नई परेशानी बन गई है। सड़क से वाहनों के गुजरते ही दिनभर धूल के गुबार उड़ रहे हैं, जिससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों और दुकानदारों का जीना दुश्वार हो गया है। धूल से राहत पाने के लिए ग्रामीणों द्वारा गिट्टी पर पानी का छिड़काव करवाया जा रहा है, लेकिन पानी सूखते ही कुछ देर बाद फिर से सड़क पर धूल का गुबार उठने लगता है। सरपंच प्रतिनिधि नंदकिशोर माली ने ग्रामीणों की परेशानी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सड़क की समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद गड्ढों में गिट्टी तो डाली गई, लेकिन इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब वाहनों के आवागमन के दौरान गिट्टी से धूल उड़ने के कारण ग्रामीणों और दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सड़क के गड्ढों के कारण वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे थे, लेकिन अब गड्ढों में डाली गई गिट्टी और उससे उड़ने वाली धूल भी हादसों का कारण बन रही है। धूल के कारण वाहन चालकों को सड़क साफ दिखाई नहीं देने से दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। गड्ढों में गिट्टी डालकर की गई खानापूर्ति के बाद अब वही गिट्टी धूल का गुबार बनकर ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खानापूर्ति के बजाय सड़क की स्थायी रूप से मरम्मत करवाई जाए और नियमित पानी का छिड़काव कराकर धूल की समस्या से निजात दिलाई जाए।1
- जेठाना में आयोजित 13 विशाल भंडारे में सुबह शाम विशाल आरती के साथ भजन संध्या का होता है आयोजन, जेठाना भंडारे से प्रसाद लेकर निकलने वाले पैदल यात्री की बाबा रामदेव करते हैं मन्नत पूरी, भंडारे में यात्रियों के लिए 24 घंटा सुविधा उपलब्ध जेठाना में आयोजित 13 विशाल भंडारे में सुबह शाम विशाल आरती के साथ भजन संध्या का होता है आयोजन, जेठाना भंडारे से प्रसाद लेकर निकलने वाले पैदल यात्री की बाबा रामदेव करते हैं मन्नत पूरी, भंडारे में यात्रियों के लिए 24 घंटा सुविधा उपलब्ध1
- चुनाव आयोग के निर्देशानुसार शतप्रतिशत मतदान निष्पक्ष बिना लोभ लालच के युवा मतदाताओं की मतदान में सहभागिता हेतु उपखंड अधिकारी गजेंद्र शर्मा की उपस्थिति में मिस्री लाल दुबे शिक्षण संस्थान में सभी प्रशिक्षार्थियों को मतदान हेतु प्रेरित किया लोकतंत्र वृक्ष लगाया , मतदान शपथ , वोटर हेल्पलाइन ऐप, दिव्यांग मतदाता हेतु सुविधाओं पर प्रकाश डाला और युवाओ की चुनाव मतदान में सेवा, जागृति, मतदान और निष्पक्षता चौमुखी उत्तरदायित्व पर प्रकाश डाला कार्यक्रम में 176 महिला प्रशिक्षार्थी, तहसीलदार दिनेश चंद्र दिवाकर सत्यनारायण लुहार तहसीलदार केकड़ी, संस्थान निदेशक चंद्र प्रकाश दुबे, प्रिंसिपल रामलाल संस्थान स्टाफ , स्वीप टीम से जयकांत शर्मा , जितेश माली ,रमेश माली, सत्यनारायण शर्मा मौजूद रहे1