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रफीगंज प्रखंड के कासमा पुलिस ने चिरैला गांव से एक वारंटी को किया गिरफ्तार रफीगंज प्रखंड अंतर्गत कासमा थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक गैरजामानती वारंटी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान शशिकांत कुमार (पिता- अभिमन्यु सिंह), ग्राम चिरैला के रूप में हुई है। थानाध्यक्ष अक्षयवर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर टीम ने छापेमारी कर अभियुक्त को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे न्यायालय में पेश कर दिया गया।
Pappu Kumar
रफीगंज प्रखंड के कासमा पुलिस ने चिरैला गांव से एक वारंटी को किया गिरफ्तार रफीगंज प्रखंड अंतर्गत कासमा थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक गैरजामानती वारंटी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान शशिकांत कुमार (पिता- अभिमन्यु सिंह), ग्राम चिरैला के रूप में हुई है। थानाध्यक्ष अक्षयवर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर टीम ने छापेमारी कर अभियुक्त को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे न्यायालय में पेश कर दिया गया।
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- मगध क्षेत्र एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक पहचान और भाषा को लेकर चर्चा में है। “मगध चेतना मंच” के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि मगध के समग्र विकास के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएं और प्राचीन भाषा ‘मगही’ को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा विषय है। इतिहास के पन्नों में मगध का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित मौर्य साम्राज्य ने प्रशासन और राजनीति का एक नया आदर्श प्रस्तुत किया, जबकि सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के जरिए भारत की शांति और संस्कृति का संदेश विश्वभर में फैलाया। यह भूमि प्राचीन काल से ही ज्ञान, शासन और संस्कृति का केंद्र रही है। इसी विरासत को ध्यान में रखते हुए मंच का कहना है कि ‘मगही’ भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक धरोहर है। वर्तमान में यह भाषा सीमित क्षेत्र तक सिमट गई है, जिसके संरक्षण और संवर्धन की सख्त जरूरत है। अनिल कुमार सिंह के अनुसार, यदि इस भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलती है, तो शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक विकास के नए रास्ते खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने से उसके अध्ययन, अनुसंधान और प्रचार-प्रसार को मजबूती मिलती है। ऐसे में ‘मगही’ को मान्यता देना न केवल भाषाई न्याय होगा, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को भी सशक्त बनाएगा और मगध को उसका खोया हुआ गौरव दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।1
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