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बच्ची के पास पहुचे डीएम बच्ची के साथ किया जलभराव का निरीक्षण।
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बच्ची के पास पहुचे डीएम बच्ची के साथ किया जलभराव का निरीक्षण।
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- बच्ची के पास पहुचे डीएम बच्ची के साथ किया जलभराव का निरीक्षण।1
- कक्षा 1 की छात्रा मानवी सिंह वीडियो जारी कर डीएम से लगाई गुहार लखीमपुर खीरी सलेमपुर कोन के राजकीय पालीटेक्निक स्कूल के पास से गये मार्ग मे जलभराव रहता है इसी मार्ग मे सामुदायिक शौचालय, आयुष्मान सेंटर. अम्बेडकर पार्क. पानी की टंकी बनी हुई है यह मार्ग बहुत ही जर्जर है जिसके चलते राहगीरो,स्कूली बच्चो को आने जाने मे काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है।1
- संवाददाता: आकाश सिंह (AIMA लखीमपुर खीरी) लखीमपुर खीरी। विकास खण्ड बांकेगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत ग्रंट डाँटपुर के मजरा भीखमपुर में नहर के ओवरफ्लो से किसानों की फसलें बर्बाद होने का मामला सामने आया है। लगातार नहर में पानी छोड़े जाने से परेशान किसानों ने आज पलिया विधायक रोमी साहनी के प्रतिनिधि वेद प्रकाश शर्मा को गोला स्थित विधायक आवास पर प्रार्थना पत्र सौंपा। किसानों ने बताया कि नहर के ओवरफ्लो के कारण उनकी खड़ी फसलें जलमग्न होकर पूरी तरह खराब हो गई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान विधायक प्रतिनिधि से मिले। इस दौरान विधायक प्रतिनिधि वेद प्रकाश शर्मा ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि नहर विभाग के संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि दोबारा नहर ओवरफ्लो के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हुईं, तो संबंधित विभाग के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि पलिया विधायक का स्पष्ट निर्देश है कि क्षेत्र में किसी भी किसान, नौजवान, मजदूर या गरीब का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर है और शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि पलिया विधानसभा केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि उनका परिवार है और यहां के हर व्यक्ति की समस्या का समाधान उनकी प्राथमिकता है।2
- भैसटा नदी की सफाई न होने से पिहानी पर मंडराया बाढ़ का खतरा, प्रशासनिक निर्देशों के बाद भी काम पिहानी। आगामी बरसात से पहले पिहानी कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का खतरा एक बार फिर गहराने लगा है। इसकी मुख्य वजह भैसटा (सई) नदी की वर्षों से उपेक्षित सफाई और संकरी होती धारा बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते नदी की न तो ठीक से खुदाई हुई और न ही चौड़ीकरण, जिससे पानी का बहाव लगातार बाधित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, जमुही, सरावर, अब्दुल्ला नगर और लीला पुरवा के पास नदी की गहराई घटकर महज 5 से 7 फीट रह गई है। किनारों पर उगी झाड़ियां, सिल्ट और गंदगी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। संकरी धारा बनी सबसे बड़ी वजह विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि भैसटा नदी का चौड़ीकरण न होना बाढ़ की बड़ी वजह है। संकरी धारा में जब बरसाती पानी का दबाव बढ़ता है, तो पानी गांवों की ओर फैलने लगता है। यही कारण है कि हर साल हल्की से मध्यम बारिश में भी बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। पिछले साल का दर्द अब भी ताजा पिछले वर्ष आई बाढ़ में हजारों बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई थी। कई गांवों में पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। इसके बावजूद अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। निर्देश जारी, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस जिलाधिकारी अनुनय झा ने हाल ही में बाढ़ तैयारियों को लेकर बैठक में अधिकारियों को सतर्क रहने और नदी-नालों की सफाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। उपजिलाधिकारी पिहानी ने भी क्षेत्र का निरीक्षण कर लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी है। बावजूद इसके, अब तक जमीनी स्तर पर सफाई कार्य शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों का दर्द छलका जमुही के रामपाल सिंह कहते हैं, “पिछले साल 5 बीघा धान की फसल डूब गई थी, इस बार भी वही स्थिति बन रही है।” सरावर के इकराम अली के मुताबिक, “नदी में इतनी झाड़ियां और गंदगी है कि पानी का बहाव रुक जाता है और गांवों में घुस जाता है।” अब्दुल्ला नगर के शिवकुमार का कहना है, “हर साल फसल बर्बाद होती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं देता।” लीला पुरवा के राजेश यादव ने चेतावनी दी, “अगर समय रहते सफाई नहीं हुई तो इस बार नुकसान और बड़ा होगा।”1
- बरेली | उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहाँ जल जीवन मिशन के तहत बनी एक विशाल पानी की टंकी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हादसे में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है, जिन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भ्रष्टाचार की 'जर्जर' बुनियाद हैरानी की बात यह है कि इस पानी की टंकी का निर्माण महज 4 साल पहले ही किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार: योजना: जल जीवन मिशन लागत: लगभग ₹3.62 करोड़ स्थिति: पूरी तरह ध्वस्त ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय से ही सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया। ₹3.62 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद टंकी का चार साल भी न टिक पाना सीधे तौर पर घटिया निर्माण और कमीशनखोरी की ओर इशारा करता है। मलबे में दबी उम्मीदें चश्मदीदों के मुताबिक, टंकी गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। टंकी के पास मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। मलबे को हटाने का काम जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नीचे कोई और न दबा हो। सवालों के घेरे में प्रशासन इस घटना ने 'नल से जल' योजना के कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं: इतनी बड़ी बजट वाली परियोजना का क्वालिटी चेक किसने किया था? क्या ठेकेदार और संबंधित इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या अन्य गांवों में बनी ऐसी ही टंकियों की सुरक्षा ऑडिट कराई जाएगी? "यह सिर्फ एक ढांचा नहीं गिरा है, बल्कि सरकारी तंत्र की ईमानदारी और आम जनता के भरोसे की दीवार गिरी है। दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।" — स्थानीय निवासी निष्कर्ष: मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद, धरातल पर इस तरह की लापरवाही शासन की छवि को धूमिल कर रही है। अब देखना यह है कि जांच समितियां इस '3.62 करोड़ी मलबे' की जिम्मेदारी किस पर तय करती हैं।1
- Salman ke dwara Shahjahanpur Suraksha pad patrakaar dwara1
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- कक्षा 1 की छात्रा मानवी सिंह वीडियो जारी कर डीएम से लगाई गुहार लखीमपुर खीरी सलेमपुर कोन के राजकीय पालीटेक्निक स्कूल के पास से गये मार्ग मे जलभराव रहता है इसी मार्ग मे सामुदायिक शौचालय, आयुष्मान सेंटर. अम्बेडकर पार्क. पानी की टंकी बनी हुई है यह मार्ग बहुत ही जर्जर है जिसके चलते राहगीरो,स्कूली बच्चो को आने जाने मे काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है1