इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया
इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया इंटरलॉकिंग
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया
- इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया2
- *बलहा विधानसभा 282 से* *जे.पी. राव मैदान में* *आजाद समाज पार्टी* (कांशीराम) ने जे.पी. राव को बलहा विधानसभा क्षेत्र से घोषित किया बहराइच। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम), बहराइच की ओर से बलहा विधानसभा क्षेत्र-282 से जे.पी. राव को प्रत्याशी घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जे.पी. राव वर्तमान में मंडल प्रभारी, भाईचारा कमेटी, देवीपाटन मंडल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी की ओर से बलहा विधानसभा क्षेत्र में उन्हें चुनावी मैदान में उतारे जाने के बाद स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में हलचल बढ़ने की उम्मीद है। जे.पी. राव का परिचय मंडल प्रभारी, भाईचारा कमेटी, देवीपाटन मंडल पार्टी: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) विधानसभा: बलहा-282, जनपद बहराइच भूमिका: विधानसभा प्रत्याशी बलहा विधानसभा क्षेत्र में अब विभिन्न राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता के बीच जे.पी. राव की दावेदारी भी चुनावी समीकरणों का हिस्सा बन गई है। आने वाले समय में क्षेत्र में उनका जनसंपर्क और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। *बलहा विधानसभा 282 से* *जे.पी. राव मैदान में* *आजाद समाज पार्टी* (कांशीराम) ने जे.पी. राव को बलहा विधानसभा क्षेत्र से घोषित किया बहराइच। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम), बहराइच की ओर से बलहा विधानसभा क्षेत्र-282 से जे.पी. राव को प्रत्याशी घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। *बलहा विधानसभा 282 से* *जे.पी. राव मैदान में* *आजाद समाज पार्टी*1
- डीएम बहराइच श्री राजेश पांडे जी ने किया नानपारा तहसील का निरीक्षण साथ मे मौजूद एस डी एम नानपारा श्री प्रकाश सिंह जी व तहसीलदार नानपारा विकास कुमार जी... डीएम बहराइच श्री राजेश पांडे जी ने किया नानपारा तहसील का निरीक्षण साथ मे मौजूद एस डी एम नानपारा श्री प्रकाश सिंह जी व तहसीलदार नानपारा विकास कुमार जी...1
- बारिश से गिरे बिजली के दो खंभे, हुजूरपुर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित बारिश से गिरे बिजली के दो खंभे, हुजूरपुर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित हुजूरपुर। लगातार हो रही बारिश के चलते विकासखंड हुजूरपुर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई है। सिंगपुर चौराहे के पास नहर पटरी के किनारे लगे बिजली के दो खंभे जमीन में अत्यधिक नमी और दलदल होने के कारण गिर गए। खंभे गिरने से आसपास के गांवों और घरों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में पिछले 24 घंटे से अधिक समय से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण जमीन काफी नरम और दलदली हो गई, जिसके चलते बिजली के खंभे अपना संतुलन खो बैठे और धराशायी हो गए। बिजली के खंभे गिरने के बाद घरों तक विद्युत सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण शोभित वर्मा, लोकस यादव, सुजीत रावत और अंकित मौर्य ने बताया कि बिजली बाधित होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से जल्द मौके पर टीम भेजकर गिरे हुए खंभों को दुरुस्त कराने और विद्युत आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। लगातार बारिश के बीच खंभों के गिरने से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द विद्युत व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो परेशानी और बढ़ सकती है।3
- गणेश शोभा विसर्जन यात्रा गांव से निकलकर कस्बों तक गई डीजे के साथ अभबीर ग़ुलाल उड़ाते हुए हजारों लोग शोभायात्रा में शामिल हुए धूमधाम से निकली गणेश विसर्जन यात्रा आबिद गुलाल उड़ाते हुए जयकारों के साथ काशन में गई शोभायात्रा1
- नानपारा में धूमधाम से मनाया गया 11वीं शरीफ का पर्व, निकला जुलूस 📰 HV TV NEWS | नानपारा नानपारा में धूमधाम से निकला 11वीं शरीफ का जुलूस, बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल नगर नानपारा में 11वीं शरीफ के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। पूरे मार्ग पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। जुलूस को लेकर प्रशासन एवं पुलिस की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के इंतजाम किए गए। शांतिपूर्ण माहौल में जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ा। संवाददाता कमलेश कुमार | HV TV NEWS बहराइच खबर वही जो हो सही | निष्पक्ष खबर, निर्भीक विचार #HVTVNEWS #नानपारा #11वींशरीफ #जुलूस #बहराइच #Nanpara #Bahraich #BreakingNews #LatestNews #UPNews1
- जिसमें सबसे पहले राजस्व लिपिक पटल के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कतिपय आख्यायें विगत 02 माह से लम्बित हैं, जिसे तत्काल प्रेषित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। इसी प्रकार तहसीलदार, नानपारा के न्यायालय का निरीक्षण किया गया। न्यायालय पर 01 वर्ष व 03 वर्ष की कोई वाद पत्रावली लम्बित न पाये जाने पर सन्तोष व्यक्त किया गया।तदोपरान्त खतौनी वितरण पटल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान खतौनी प्राप्त करने आये व्यक्तियों से जिलाधिकारी महोदय द्वारा जानकारी प्राप्त की गयी कि खतौनियों की नकल उन्हें कितने रूपये में दी जा रही हैं। इस सम्बन्ध में उपस्थित व्यक्तियों द्वारा बताया गया कि 15 रू. में खतौनी की नकल दी जा रही है। इसके पश्चात् जिसमें सबसे पहले राजस्व लिपिक पटल के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कतिपय आख्यायें विगत 02 माह से लम्बित हैं, जिसे तत्काल प्रेषित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। इसी प्रकार तहसीलदार, नानपारा के न्यायालय का निरीक्षण किया गया। न्यायालय पर 01 वर्ष व 03 वर्ष की कोई वाद पत्रावली लम्बित न पाये जाने पर सन्तोष व्यक्त किया गया।तदोपरान्त खतौनी वितरण पटल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान खतौनी प्राप्त करने आये व्यक्तियों से जिलाधिकारी महोदय द्वारा जानकारी प्राप्त की गयी कि खतौनियों की नकल उन्हें कितने रूपये में दी जा रही हैं। इस सम्बन्ध में उपस्थित व्यक्तियों द्वारा बताया गया कि 15 रू. में खतौनी की नकल दी जा रही है। इसके पश्चात्1
- बहराइच -: जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय गुरुवार को नानपारा पहुंचे। उन्होंने नानपारा के काली कुंडा सौंदर्यीकरण का निरीक्षण किया। अब तक पास बजट और कराए गए विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा अन्य स्थानों का भी निरीक्षण किया। मौके पर विधायक राम निवास वर्मा, एसडीएम श्रीप्रकाश सिंह, तहसीलदार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। बहराइच -: जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय गुरुवार को नानपारा पहुंचे। उन्होंने नानपारा के काली कुंडा सौंदर्यीकरण का निरीक्षण किया। अब तक पास बजट और कराए गए विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा अन्य स्थानों का भी निरीक्षण किया। मौके पर विधायक राम निवास वर्मा, एसडीएम श्रीप्रकाश सिंह, तहसीलदार समेत अन्य लोग मौजूद रहे।1